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त्योहारों से पहले टूथपेस्ट से लेकर पेंट तक महंगे होंगे:HUL और एशियन पेंट्स समेत 8 कंपनियां जरूरत के सामानों की कीमतें बढ़ाएंगी

त्योहारों से पहले टूथपेस्ट से लेकर पेंट तक महंगे होंगे:HUL और एशियन पेंट्स समेत 8 कंपनियां जरूरत के सामानों की कीमतें बढ़ाएंगी

देश की सबसे बड़ी FMCG और कंज्यूमर कंपनियां फेस्टिव सीजन से ठीक पहले और लगातार दूसरी तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। टूथपेस्ट से लेकर टायर और पेंट जैसे सामान महंगे होने वाले हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कमोडिटी लागत बढ़ रही है, जिससे देश में महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहने की आशंका है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) आने वाली तिमाही में डिटर्जेंट और डिशवॉशिंग बार जैसी कैटेगरी में कीमतें बढ़ाएगा। HUL के अलावा डोडला डेयरी और एशियन पेंट्स समेत कम से कम 7 अन्य कंपनियां भी दाम बढ़ाने का प्लान बना चुकी हैं। HUL के CFO बोले- होम केयर सेगमेंट में बढ़ा रहे कीमतें भारत की सबसे बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर निरंजन गुप्ता ने एनालिस्ट्स को बताया कि बाहरी उतार-चढ़ाव के कारण क्रूड ऑयल से जुड़े डेरिवेटिव्स में महंगाई देखने को मिल रही है। इसी वजह से कंपनी होम केयर सेगमेंट में सोच-समझकर कीमतें बढ़ा रही है। हैवेल्स ने 8% और टाटा साल्ट ने 7% तक बढ़ाए दाम ईरान युद्ध की वजह से एनर्जी की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे तुरंत कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर से भड़कने के कारण कंपनियां होम एप्लायंसेज से लेकर किचन के जरूरी सामानों पर दूसरी बार कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। अगस्त से नवंबर के बीच फेस्टिव सीजन, तिहाई बिक्री इसी दौरान कीमतों में यह ताजा इजाफा आने वाले फेस्टिव सीजन के साथ हो रहा है। देश में त्योहारों का यह सीजन आमतौर पर अगस्त से नवंबर तक चलता है। इस दौरान खासकर दिवाली के समय कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम लोगों की खरीदारी में काफी उछाल आता है। कई कंपनियों के लिए साल भर की कुल बिक्री का एक-तिहाई (33%) हिस्सा इसी सीजन से आता है। मजबूत मांग के कारण कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर आसानी से डाल पाएंगी। जून में 3.21% से ऊपर निकली महंगाई, RBI का FY27 अनुमान 5.1% जून के महीने में खाने-पीने और ईंधन की लागत बढ़ने से कंज्यूमर प्राइस यानी रिटेल महंगाई दर लगभग एक साल में पहली बार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर निकल गई। हालांकि यह आंकड़ा RBI के 2% से 6% के सहनीय दायरे यानी टॉलरेंस बैंड के भीतर ही है। आने वाले महीनों में कंपनियों द्वारा दाम बढ़ाए जाने और कमजोर मानसून के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। RBI का अनुमान है कि मार्च 2027 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 5.1% रह सकती है। RBI की MPC मीटिंग 3-5 अगस्त को, ब्याज दरें स्थिर रहने के आसार नोमुरा और एक्सपर्ट्स बोले- लागत बढ़ने से दाम बढ़ाना मजबूरी नोमुरा होल्डिंग्स की एशिया (जापान को छोड़कर) मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना है कि इनपुट कॉस्ट और कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहे भारी दबाव को देखते हुए ग्राहकों पर बढ़ी कीमतों का बोझ डालना अपरिहार्य (अनिवार्य) है। वहीं, देवयानी इंटरनेशनल (KFC और Pizza Hut चलाने वाली) के चेयरमैन रविकांत जयपुरिया ने कहा कि हालांकि मांग अब तक स्थिर रही है, लेकिन सामान्य से कम मानसून का अनुमान और ‘अल नीनो’ का जोखिम यह याद दिलाता है कि भारत में कंजम्पशन रिकवरी कभी भी सीधी रेखा में नहीं चलती। ग्रामीण और शहरी इलाकों में मांग मजबूत, जून में रिटेल बिक्री 6% बढ़ी कंपनियों के कॉमेंट्स के मुताबिक, अब तक ग्रामीण और शहरी दोनों ही भारत में मांग स्थिर बनी हुई है। क्या होता है ‘अल नीनो’ और ‘इनपुट कॉस्ट’? अल नीनो: यह प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक भौगोलिक घटना है। इसके कारण भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे सूखा पड़ने या कम बारिश होने का खतरा रहता है। बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घटता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने या बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी के कुल खर्च को इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब यह लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए अंतिम प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं।

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