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लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एजेंट भेजकर हत्या कराई

लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया, कहा- इसके पीछे भारतीय एजेंट

इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में उनके संगठन के 30 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उसके मुताबिक ये हमले पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने किए। उसने आरोप लगाया कि ये हमलावर भारतीय एजेंट थे। इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। इसमें हनीफ कहता है, हमारे लोगों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आजाद कश्मीर में अमन और चेन से नहीं रहने दिया। अपने एजेंट्स के जरिए उन्होंने हमारे लोगो को शहीद किया। 40 साल पहले हुआ लश्कर ए तैयबा का गठन लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। यह संगठन सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से निकला था। ओसामा बिन लादेन के मेंटर माने जाने वाले अब्दुल्ला अज्जाम और उसके दो साथियों ने मिलकर मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नाम के धार्मिक संगठन की स्थापना की। मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद संगठन का सशस्त्र (मिलिटेंट) विंग बाद में लश्कर-ए-तैयबा कहलाया। अरबी में इसका अर्थ है पवित्र लोगों की सेना। शुरुआती दौर में संगठन के लड़ाके अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजे जाते थे। 1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का फोकस जम्मू-कश्मीर पर आ गया। इसी साल पेशावर में एक बम धमाके में अब्दुल्लाह अज्जाम की मौत हो गई। इसके बाद हाफिज सईद ने इस संगठन की कमान संभाल ली। भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को लंबे समय तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन मिलता रहा। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इन आरोपों से इनकार करता है।

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