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RBI New FD Rules for Small Finance Banks

RBI New FD Rules for Small Finance Banks

नई दिल्ली1 घंटे पहले

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ग्राहकों को ब्याज दर की पूरी जानकारी पहले मिलेगी।

ये बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्टंस-2026 के तहत किए गए हैं। यह नए नियम और रेगुलेशंस 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं।

RBI के इस कदम का मकसद देशभर के स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD में निवेश करने वाले डिपॉजिटर्स के लिए सिस्टम में ज्यादा स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है।

RBI के नए FD नियम: जानिए 5 बड़े बदलाव

1. डिपॉजिट ऑफर करने से पहले ब्याज दरों का खुलासा जरूरी

नए फ्रेमवर्क के तहत अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों को अपना डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट शेड्यूल पहले से पब्लिश करना होगी। रेगुलर और बल्क डिपॉजिट पर दिया जाने वाला ब्याज बैंक की वेबसाइट पर दिखाई गई दरों के अनुसार ही होना चाहिए। इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की FD दरों की तुलना करने में आसानी होगी।

2. बल्क डिपॉजिट रेट्स अपडेट करने का समय तय

बल्क डिपॉजिट के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों को हर बिजनेस डे यानी कामकाजी दिन में सुबह 10:00 बजे अपनी वेबसाइट पर लागू ब्याज दरें जारी करनी होंगी। इसमें 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया जाएगा, यानी बैंक सुबह 10:10 बजे तक अपनी दरें अपडेट कर सकेंगे।

शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल रुपए टर्म डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट माना जाता है।

3. सभी ब्रांच पर एक समान ब्याज दरें मिलेंगी

RBI ने साफ तौर पर कहा है कि डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट्स बैंक की सभी ब्रांच और सभी ग्राहकों के लिए एक समान होनी चाहिए।

बैंक एक ही तारीख को स्वीकार किए गए समान राशि के डिपॉजिट्स पर अलग-अलग दरें ऑफर नहीं कर सकते।

इससे ग्राहकों के साथ किसी भी ब्रांच या प्रोफाइल के आधार पर भेदभाव नहीं होगा और सभी को समान अधिकार मिलेगा।

4. बल्क डिपॉजिट के लिए अलग दरों की इजाजत

यूनिफॉर्मिटी यानी समानता का नियम सामान्य या रेगुलर डिपॉजिट पर लागू रहेगा। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक बल्क डिपॉजिट्स पर अलग-अलग ब्याज दरों की पेशकश कर सकते हैं। इन नियमों को बैंक को पहले से स्पष्ट करना होगा।

दरों में यह अंतर RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत डिपॉजिट की स्थिरता और लिक्विडिटी आवश्यकताओं जैसे फैक्टर्स पर आधारित हो सकता है। यह छूट नॉन-रेजिडेंट ग्राहकों से मिलने वाले बल्क डिपॉजिट पर भी लागू होगी।

5. FD निवेशकों पर क्या होगा इसका असर

एडवांस डिस्क्लोजर, एक समान प्राइसिंग और बल्क डिपॉजिट के लिए रेगुलेटेड छूट को लागू करके यह नया फ्रेमवर्क एक तरफ जहां डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करेगा। वहीं दूसरी तरफ बैंकों को अपने फंड्स का बेहतर मैनेजमेंट करने में मदद देगा।

कस्टमर्स के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • एडवांस जानकारी: निवेशक अब अपनी FD बुक करने से पहले लागू होने वाली सटीक ब्याज दरों को जान सकेंगे।
  • फिक्स्ड टाइमिंग: बैंकों को बल्क डिपॉजिट की दरें रोजाना एक तय समय (सुबह 10:00 से 10:10 बजे) पर पब्लिश करनी होंगी।
  • समानता: एक समान डिपॉजिट के लिए किसी भी ब्रांच में जाने पर ग्राहक को एक जैसी ही ब्याज दर मिलेगी।
  • फ्लेक्सिबिलिटी: बैंक डिपॉजिट फैक्टर्स के आधार पर बल्क एफडी पर अलग-अलग दरें तय कर सकेंगे।

क्या होता है बल्क डिपॉजिट?

बैंकिंग नियमों के तहत शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल टर्म डिपॉजिट (FD) को ‘बल्क डिपॉजिट’ माना जाता है।

बड़ी संस्थाएं, कॉरपोरेट्स या हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) आमतौर पर इतनी बड़ी रकम की एफडी कराते हैं।

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ये बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्टंस-2026 के तहत किए गए हैं। यह नए नियम और रेगुलेशंस 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं।

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1. डिपॉजिट ऑफर करने से पहले ब्याज दरों का खुलासा जरूरी

नए फ्रेमवर्क के तहत अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों को अपना डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट शेड्यूल पहले से पब्लिश करना होगी। रेगुलर और बल्क डिपॉजिट पर दिया जाने वाला ब्याज बैंक की वेबसाइट पर दिखाई गई दरों के अनुसार ही होना चाहिए। इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की FD दरों की तुलना करने में आसानी होगी।

2. बल्क डिपॉजिट रेट्स अपडेट करने का समय तय

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4. बल्क डिपॉजिट के लिए अलग दरों की इजाजत

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दरों में यह अंतर RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत डिपॉजिट की स्थिरता और लिक्विडिटी आवश्यकताओं जैसे फैक्टर्स पर आधारित हो सकता है। यह छूट नॉन-रेजिडेंट ग्राहकों से मिलने वाले बल्क डिपॉजिट पर भी लागू होगी।

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एडवांस डिस्क्लोजर, एक समान प्राइसिंग और बल्क डिपॉजिट के लिए रेगुलेटेड छूट को लागू करके यह नया फ्रेमवर्क एक तरफ जहां डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करेगा। वहीं दूसरी तरफ बैंकों को अपने फंड्स का बेहतर मैनेजमेंट करने में मदद देगा।

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  • एडवांस जानकारी: निवेशक अब अपनी FD बुक करने से पहले लागू होने वाली सटीक ब्याज दरों को जान सकेंगे।
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बड़ी संस्थाएं, कॉरपोरेट्स या हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) आमतौर पर इतनी बड़ी रकम की एफडी कराते हैं।

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