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Vishvesh Negi New India Ambassador Iran

Vishvesh Negi New India Ambassador Iran
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17 मिनट पहले

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आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-

नेशनल (NATIONAL)

1. विश्वेश नेगी ईरान में भारत के नए राजदूत होंगे

  • 3 अगस्त को विश्वेश नेगी ईरान में भारत के अगले राजदूत अपॉइंट हुए।
  • विश्वेश 2002 बैच के इंडियन फॉरेंन ऑफिसर हैं और वे वर्तमान राजदूत डॉ. मोहम्मद फतह अली की जगह लेंगे
  • वर्तमान में विश्वेश विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर काम कर रहे हैं।
  • विश्वेश 2002-2022 तक विदेश मंत्रालय में द्विपक्षीय कूटनीतिक दायित्व निभाए और भारत के विदेश मिशनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
  • सितंबर 2022 में विश्वेश भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) जॉइंट सेक्रेटरी अपॉइंट हुए।
  • भारत-ईरान संबंध ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह, रीजनल कनेक्टिविटी, व्यापार और पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण हैं।

2023 में विश्वेश नेगी रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यभार संभाला और रक्षा कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मामलों को देखा।

2023 में विश्वेश नेगी रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यभार संभाला और रक्षा कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मामलों को देखा।

2. FSSAI ने डाबर के ‘100% शुद्ध’ दावों पर प्रतिबंध लगाया

  • 4 अगस्त को फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने डाबर इंडिया के प्रोडक्ट्स पर 100% शुद्धता के दावे पर रोक लगाई।
  • अब डाबर शहद, घी और खाद्य तेलों जैसे उत्पादों पर 100% शुद्धता जैसा दावा नहीं लिख सकेगा।
  • FSSAI के मुताबिक ये लेबल भ्रामक होते हैं और उपभोक्ताओं को गलत जानकारी दे सकते हैं।
  • इस मामले में FSSAI ने डाबर से 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है और इस दावे को FSS विनियम 2018 का उल्लंघन करता है, जो इसके मानदंड बनाता है।
  • इससे पहले 2024 में FSSAI ने सभी कंपनियों को फलों के जूस पर ‘100% फ्रूट जूस’ जैसे दावे हटाने का निर्देश दिया था।
  • FSSAI के मुताबिक, ये दावे अस्पष्ट, असत्यापित और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं।
  • डाबर इण्डिया लिमिटेड भारत में हेल्थ, पर्सनल ग्रूमिंग और फूड प्रोडक्ट कंपनी है।
  • डाबर शहद, च्यवनप्राश और हाजमोला सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।

FSSAI

  • फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) भारत की खाद्य सुरक्षा और मानक तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
  • FSSAI तय करता है कि देश में बिकने वाले खाद्य पदार्थ सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।
  • FSSAI की इसकी स्थापना 5 सितंबर 2008 को हुई थी। इसका हेडक्वाटर्र नई दिल्ली में है।

इंटरनेशनल (INTERNATIONAL)

3. डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को विक्रम साराभाई मेडल मिला

  • 4 अगस्त को भारतीय खगोल वैज्ञानिक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को COSPAR विक्रम साराभाई मेडल 2026 से सम्मानित किया गया।
  • डॉ. अन्नपूर्णी ये मेडल पाने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं। अब तक कुल 4 भारतीयों को ये मेडल मिला है।
  • डॉ.अन्नपूर्णी को स्पेस रिसर्च में उनके योगदान के लिए इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 46वीं COSPAR साइंटिफिक असेंबली के दौरान ये मेडल दिया गया।
  • डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA), बेंगलुरु की डायरेक्टर हैं।
  • इसके साथ ही डॉ.अन्नपूर्णी सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) की एडिशनल डायरेक्टर भी हैं।
  • डॉ. अन्नपूर्णी तारों (स्टार्स), तारागुच्छों (स्टार क्लस्टर्स) और निकटवर्ती आकाशगंगाओं (गैलेक्सी) पर अपनी रिसर्च के लिए जानी जाती हैं।
  • डॉ.अन्नपूर्णी ने भारत के पहले अंतरिक्ष आधारित वेधशाला मिशन ‘AstroSat’ में लगे अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) के लिए कैलिब्रेशन वैज्ञानिक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

COSPAR विक्रम साराभाई मेडल

  • ‘COSPAR विक्रम साराभाई मेडल’ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विकासशील देशों के वैज्ञानिकों को उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है।
  • ये पुरस्कार ‘कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च’ (COSPAR) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संयुक्त रूप से दिया जाता है।
  • इस मेडल की स्थापना वर्ष 1990 में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में की गई थी।
डॉ. अन्नपूर्णी अंतरिक्ष और जमीनी दूरबीनों से जुड़े वैज्ञानिक उपकरणों के डेवलपमेंट और यूज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

डॉ. अन्नपूर्णी अंतरिक्ष और जमीनी दूरबीनों से जुड़े वैज्ञानिक उपकरणों के डेवलपमेंट और यूज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

4. AIR चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की वियतमान यात्रा

  • 5 अगस्त को एयर स्टाफ के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह वियतनाम की तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर पूरी की।
  • इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करना और सैन्य सहयोग को बढ़ाना है।
  • एयर स्टाफ प्रमुख सिंह ने हनोई पहुंचकर भारत के राजदूत शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा से मुलाकात की।
  • सिंह ने इस यात्रा के दौरान एयर डिफेंस-एयर फोर्स सर्विस के कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल वू होंग सोन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
  • ये यात्रा भारत और वियतनाम की उस साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसके तहत वे अपनी बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना चाहते हैं।
  • डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार के मुताबिक, भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सौदा भी किया है।
दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और सहयोग बढ़ाने के नए तरीकों पर भी बात की।

दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और सहयोग बढ़ाने के नए तरीकों पर भी बात की।

5. ग्लाव झील भारत की 101वीं रामसर साइट बनीं

  • 4 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील रामसर साइट घोषित हुई। ये भारत की 101वीं साइट है।
  • इसके साथ ही ये यह अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट भी बन गई है।
  • इसकी घोषणा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
  • ग्लॉ झील कामलांग टाइगर रिजर्व और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में मौजूद, ग्लॉ झील पूर्वी हिमालय में मीठे पानी की झील है और ये बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट है।
  • इस झील में पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी जलधाराओं से पानी आता है और यह घनी हरियाली से घिरी हुई है।
  • ग्लॉ झील वेटलैंड और इसके कैचमेंट एरिया में 150 से ज्यादा तरह के पेड़ और 49 तरह के ऑर्किड पाए गए हैं।
  • यह आर्द्रभूमि जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

रामसर साइट

  • रामसर साइट ऐसी इंटरनेशनल महत्व की आर्द्रभूमि होती है, जिसे 1971 के रामसर कन्वेंशन (ईरान) के तहत संरक्षण के लिए मान्यता दी जाती है।
  • भारत 1 फरवरी 1982 से इस कन्वेंशन का सदस्य है। रामसर नाम ईरान के रामसर शहर से आया है, यहीं ये संधि हुई थी।
  • इसमें शामिल होने वाले देश वेटलैंड्स को नॉमिनेट कर सकते हैं, जिन्हें रामसर साइटों के रूप में जाना जाता है।
  • ऐसे क्षेत्र जो जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों, दुर्लभ प्रजातियों और हाइड्रोलॉजिकल एनवायरमेंट के लिए जरूरी होते हैं।
  • रामसन के तहत ये साइटें इंटरनेशनल लेवल पर दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए काम करते हैं।
  • 100वीं रामसर साइट जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य, उत्तर प्रदेश है।
ग्लॉ झील इकोलॉजिकल महत्व और आसपास के इलाके की खासियत के लिए जानी जाती है।

ग्लॉ झील इकोलॉजिकल महत्व और आसपास के इलाके की खासियत के लिए जानी जाती है।

निधन (DEATH)

6. पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन

  • 4 अगस्त को पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन हो गया। वे 90 साल के थे।
  • डॉ. पाटिल 1967 से 1978 तक महाराष्ट्र विधानसभा के मेंबर रहे।
  • डॉ. पाटिल ने 1983 में मुंबई में रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RAIT) की स्थापना की, जिससे डी. वाई. पाटिल शैक्षणिक समूह की नींव पड़ी।
  • डॉ. पाटिल ने पाटिल ग्रुप की शुरुआत की थी और देशभर में 182 से ज्यादा कॉलेज शुरू किये।
  • डॉ. पाटिल को शिक्षा में योगदान के लिए 1991 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
  • डॉ. पाटिल 2009-2013 तक त्रिपुरा के राज्यपाल रहे। 2013 में बिहार के राज्यपाल बने और 2014 में पश्चिम बंगाल के कार्यवाहक राज्यपाल रहे।
पाटिल ग्रुप कॉलेज के साथ-साथ 7 डीम्ड यूनिवर्सिटी और कई अस्पताल भी चला रहे हैं।

पाटिल ग्रुप कॉलेज के साथ-साथ 7 डीम्ड यूनिवर्सिटी और कई अस्पताल भी चला रहे हैं।

7. बाबरी विध्वंस जांच में शामिल जस्टिस मनमोहन सिंह का निधन

  • 3 अगस्त को बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन सिंह (एम. एस.) लिब्रहान का निधन हुआ।
  • वे 87 साल के थे। वे भारत की न्यायपालिका के वरिष्ठ न्यायविदों में गिने जाते थे और बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच से जुड़े सबसे चर्चित चेहरों में से एक थे।
  • लिब्रहान आयोग का गठन 16 दिसंबर 1992 में हुआ था। 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की परिस्थितियों की जांच करने के लिए ये आयोग बनाया गया था।
  • आयोग ने 2009 में लगभग 17 सालों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, इसे भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले जांच आयोगों में माना जाता है।

न्यायिक करियर

  • साल 1987 में सिंह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने। फिर मद्रास हाई कोर्ट और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे।
  • रिटायरमेंट के बाद भी 2009 तक लिब्रहान आयोग के अध्यक्ष के तौर पर काम किया।
जस्टिस मनमोहन सिंह ने 1964 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू की थी।

जस्टिस मनमोहन सिंह ने 1964 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू की थी।

8. वर्षा अगवाले GSI की नई महानिदेशक बनीं

  • 3 अगस्त को वर्षा अगवाले जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की महानिदेशक बनीं। वे 176 साल के इतिहास में पहली महानिदेशक हैं।
  • वर्षा ने 54वें GSI महानिदेशक का पदभार संभाला और उन्होंने पूर्व महानिदेशक असित साहा की जगह ली है।
  • वर्तमान में वे कोलकाता स्थित GSI के पूर्वी क्षेत्र की अतिरिक्त महानिदेशक और विभागाध्यक्ष थीं।
  • वर्षा अगलावे पैलिनोलॉजी की विशेषज्ञ हैं, पैलिनोलॉजी वह विज्ञान है जिसमें परागकण, बीजाणु और सूक्ष्म जैविक अवशेषों का अध्ययन किया जाता है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया

  • इसकी स्थापना 1851 में हुई थी। यह भारत की सबसे पुरानी वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। यह खान मंत्रालय के अधीन काम करती है।
  • GSI का हेड ऑफिस कोलकाता में स्थित है। GSI की स्थापना मूल रूप से भारत में कोयले के भंडारों की खोज के लिए की गई थी।
वर्षा 1992 में GSI में शामिल हुईं थीं, उनके पास भूविज्ञान में 30 से ज्यादा सालों का अनुभव हैं।

वर्षा 1992 में GSI में शामिल हुईं थीं, उनके पास भूविज्ञान में 30 से ज्यादा सालों का अनुभव हैं।

आज का इतिहास

  • 1914 में अमेरिका के क्लीवलैंड शहर में पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट लगाई गई।
  • 2019 में भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35A को खत्म किया था।
  • 2020 में अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमि-पूजन किया गया।

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आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-

नेशनल (NATIONAL)

1. विश्वेश नेगी ईरान में भारत के नए राजदूत होंगे

  • 3 अगस्त को विश्वेश नेगी ईरान में भारत के अगले राजदूत अपॉइंट हुए।
  • विश्वेश 2002 बैच के इंडियन फॉरेंन ऑफिसर हैं और वे वर्तमान राजदूत डॉ. मोहम्मद फतह अली की जगह लेंगे
  • वर्तमान में विश्वेश विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर काम कर रहे हैं।
  • विश्वेश 2002-2022 तक विदेश मंत्रालय में द्विपक्षीय कूटनीतिक दायित्व निभाए और भारत के विदेश मिशनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
  • सितंबर 2022 में विश्वेश भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) जॉइंट सेक्रेटरी अपॉइंट हुए।
  • भारत-ईरान संबंध ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह, रीजनल कनेक्टिविटी, व्यापार और पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण हैं।

2023 में विश्वेश नेगी रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यभार संभाला और रक्षा कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मामलों को देखा।

2023 में विश्वेश नेगी रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यभार संभाला और रक्षा कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मामलों को देखा।

2. FSSAI ने डाबर के ‘100% शुद्ध’ दावों पर प्रतिबंध लगाया

  • 4 अगस्त को फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने डाबर इंडिया के प्रोडक्ट्स पर 100% शुद्धता के दावे पर रोक लगाई।
  • अब डाबर शहद, घी और खाद्य तेलों जैसे उत्पादों पर 100% शुद्धता जैसा दावा नहीं लिख सकेगा।
  • FSSAI के मुताबिक ये लेबल भ्रामक होते हैं और उपभोक्ताओं को गलत जानकारी दे सकते हैं।
  • इस मामले में FSSAI ने डाबर से 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है और इस दावे को FSS विनियम 2018 का उल्लंघन करता है, जो इसके मानदंड बनाता है।
  • इससे पहले 2024 में FSSAI ने सभी कंपनियों को फलों के जूस पर ‘100% फ्रूट जूस’ जैसे दावे हटाने का निर्देश दिया था।
  • FSSAI के मुताबिक, ये दावे अस्पष्ट, असत्यापित और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं।
  • डाबर इण्डिया लिमिटेड भारत में हेल्थ, पर्सनल ग्रूमिंग और फूड प्रोडक्ट कंपनी है।
  • डाबर शहद, च्यवनप्राश और हाजमोला सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।

FSSAI

  • फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) भारत की खाद्य सुरक्षा और मानक तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
  • FSSAI तय करता है कि देश में बिकने वाले खाद्य पदार्थ सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।
  • FSSAI की इसकी स्थापना 5 सितंबर 2008 को हुई थी। इसका हेडक्वाटर्र नई दिल्ली में है।

इंटरनेशनल (INTERNATIONAL)

3. डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को विक्रम साराभाई मेडल मिला

  • 4 अगस्त को भारतीय खगोल वैज्ञानिक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को COSPAR विक्रम साराभाई मेडल 2026 से सम्मानित किया गया।
  • डॉ. अन्नपूर्णी ये मेडल पाने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं। अब तक कुल 4 भारतीयों को ये मेडल मिला है।
  • डॉ.अन्नपूर्णी को स्पेस रिसर्च में उनके योगदान के लिए इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 46वीं COSPAR साइंटिफिक असेंबली के दौरान ये मेडल दिया गया।
  • डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA), बेंगलुरु की डायरेक्टर हैं।
  • इसके साथ ही डॉ.अन्नपूर्णी सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) की एडिशनल डायरेक्टर भी हैं।
  • डॉ. अन्नपूर्णी तारों (स्टार्स), तारागुच्छों (स्टार क्लस्टर्स) और निकटवर्ती आकाशगंगाओं (गैलेक्सी) पर अपनी रिसर्च के लिए जानी जाती हैं।
  • डॉ.अन्नपूर्णी ने भारत के पहले अंतरिक्ष आधारित वेधशाला मिशन ‘AstroSat’ में लगे अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) के लिए कैलिब्रेशन वैज्ञानिक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

COSPAR विक्रम साराभाई मेडल

  • ‘COSPAR विक्रम साराभाई मेडल’ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विकासशील देशों के वैज्ञानिकों को उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है।
  • ये पुरस्कार ‘कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च’ (COSPAR) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संयुक्त रूप से दिया जाता है।
  • इस मेडल की स्थापना वर्ष 1990 में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में की गई थी।
डॉ. अन्नपूर्णी अंतरिक्ष और जमीनी दूरबीनों से जुड़े वैज्ञानिक उपकरणों के डेवलपमेंट और यूज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

डॉ. अन्नपूर्णी अंतरिक्ष और जमीनी दूरबीनों से जुड़े वैज्ञानिक उपकरणों के डेवलपमेंट और यूज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

4. AIR चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की वियतमान यात्रा

  • 5 अगस्त को एयर स्टाफ के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह वियतनाम की तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर पूरी की।
  • इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करना और सैन्य सहयोग को बढ़ाना है।
  • एयर स्टाफ प्रमुख सिंह ने हनोई पहुंचकर भारत के राजदूत शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा से मुलाकात की।
  • सिंह ने इस यात्रा के दौरान एयर डिफेंस-एयर फोर्स सर्विस के कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल वू होंग सोन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
  • ये यात्रा भारत और वियतनाम की उस साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसके तहत वे अपनी बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना चाहते हैं।
  • डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार के मुताबिक, भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सौदा भी किया है।
दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और सहयोग बढ़ाने के नए तरीकों पर भी बात की।

दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और सहयोग बढ़ाने के नए तरीकों पर भी बात की।

5. ग्लाव झील भारत की 101वीं रामसर साइट बनीं

  • 4 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील रामसर साइट घोषित हुई। ये भारत की 101वीं साइट है।
  • इसके साथ ही ये यह अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट भी बन गई है।
  • इसकी घोषणा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
  • ग्लॉ झील कामलांग टाइगर रिजर्व और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में मौजूद, ग्लॉ झील पूर्वी हिमालय में मीठे पानी की झील है और ये बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट है।
  • इस झील में पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी जलधाराओं से पानी आता है और यह घनी हरियाली से घिरी हुई है।
  • ग्लॉ झील वेटलैंड और इसके कैचमेंट एरिया में 150 से ज्यादा तरह के पेड़ और 49 तरह के ऑर्किड पाए गए हैं।
  • यह आर्द्रभूमि जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

रामसर साइट

  • रामसर साइट ऐसी इंटरनेशनल महत्व की आर्द्रभूमि होती है, जिसे 1971 के रामसर कन्वेंशन (ईरान) के तहत संरक्षण के लिए मान्यता दी जाती है।
  • भारत 1 फरवरी 1982 से इस कन्वेंशन का सदस्य है। रामसर नाम ईरान के रामसर शहर से आया है, यहीं ये संधि हुई थी।
  • इसमें शामिल होने वाले देश वेटलैंड्स को नॉमिनेट कर सकते हैं, जिन्हें रामसर साइटों के रूप में जाना जाता है।
  • ऐसे क्षेत्र जो जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों, दुर्लभ प्रजातियों और हाइड्रोलॉजिकल एनवायरमेंट के लिए जरूरी होते हैं।
  • रामसन के तहत ये साइटें इंटरनेशनल लेवल पर दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए काम करते हैं।
  • 100वीं रामसर साइट जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य, उत्तर प्रदेश है।
ग्लॉ झील इकोलॉजिकल महत्व और आसपास के इलाके की खासियत के लिए जानी जाती है।

ग्लॉ झील इकोलॉजिकल महत्व और आसपास के इलाके की खासियत के लिए जानी जाती है।

निधन (DEATH)

6. पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन

  • 4 अगस्त को पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन हो गया। वे 90 साल के थे।
  • डॉ. पाटिल 1967 से 1978 तक महाराष्ट्र विधानसभा के मेंबर रहे।
  • डॉ. पाटिल ने 1983 में मुंबई में रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RAIT) की स्थापना की, जिससे डी. वाई. पाटिल शैक्षणिक समूह की नींव पड़ी।
  • डॉ. पाटिल ने पाटिल ग्रुप की शुरुआत की थी और देशभर में 182 से ज्यादा कॉलेज शुरू किये।
  • डॉ. पाटिल को शिक्षा में योगदान के लिए 1991 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
  • डॉ. पाटिल 2009-2013 तक त्रिपुरा के राज्यपाल रहे। 2013 में बिहार के राज्यपाल बने और 2014 में पश्चिम बंगाल के कार्यवाहक राज्यपाल रहे।
पाटिल ग्रुप कॉलेज के साथ-साथ 7 डीम्ड यूनिवर्सिटी और कई अस्पताल भी चला रहे हैं।

पाटिल ग्रुप कॉलेज के साथ-साथ 7 डीम्ड यूनिवर्सिटी और कई अस्पताल भी चला रहे हैं।

7. बाबरी विध्वंस जांच में शामिल जस्टिस मनमोहन सिंह का निधन

  • 3 अगस्त को बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन सिंह (एम. एस.) लिब्रहान का निधन हुआ।
  • वे 87 साल के थे। वे भारत की न्यायपालिका के वरिष्ठ न्यायविदों में गिने जाते थे और बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच से जुड़े सबसे चर्चित चेहरों में से एक थे।
  • लिब्रहान आयोग का गठन 16 दिसंबर 1992 में हुआ था। 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की परिस्थितियों की जांच करने के लिए ये आयोग बनाया गया था।
  • आयोग ने 2009 में लगभग 17 सालों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, इसे भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले जांच आयोगों में माना जाता है।

न्यायिक करियर

  • साल 1987 में सिंह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने। फिर मद्रास हाई कोर्ट और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे।
  • रिटायरमेंट के बाद भी 2009 तक लिब्रहान आयोग के अध्यक्ष के तौर पर काम किया।
जस्टिस मनमोहन सिंह ने 1964 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू की थी।

जस्टिस मनमोहन सिंह ने 1964 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू की थी।

8. वर्षा अगवाले GSI की नई महानिदेशक बनीं

  • 3 अगस्त को वर्षा अगवाले जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की महानिदेशक बनीं। वे 176 साल के इतिहास में पहली महानिदेशक हैं।
  • वर्षा ने 54वें GSI महानिदेशक का पदभार संभाला और उन्होंने पूर्व महानिदेशक असित साहा की जगह ली है।
  • वर्तमान में वे कोलकाता स्थित GSI के पूर्वी क्षेत्र की अतिरिक्त महानिदेशक और विभागाध्यक्ष थीं।
  • वर्षा अगलावे पैलिनोलॉजी की विशेषज्ञ हैं, पैलिनोलॉजी वह विज्ञान है जिसमें परागकण, बीजाणु और सूक्ष्म जैविक अवशेषों का अध्ययन किया जाता है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया

  • इसकी स्थापना 1851 में हुई थी। यह भारत की सबसे पुरानी वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। यह खान मंत्रालय के अधीन काम करती है।
  • GSI का हेड ऑफिस कोलकाता में स्थित है। GSI की स्थापना मूल रूप से भारत में कोयले के भंडारों की खोज के लिए की गई थी।
वर्षा 1992 में GSI में शामिल हुईं थीं, उनके पास भूविज्ञान में 30 से ज्यादा सालों का अनुभव हैं।

वर्षा 1992 में GSI में शामिल हुईं थीं, उनके पास भूविज्ञान में 30 से ज्यादा सालों का अनुभव हैं।

आज का इतिहास

  • 1914 में अमेरिका के क्लीवलैंड शहर में पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट लगाई गई।
  • 2019 में भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35A को खत्म किया था।
  • 2020 में अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमि-पूजन किया गया।

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