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संसदीय समिति बोली- जुकरबर्ग 3 दिन में माफी मांगे:मेटा ने पीएम मोदी का पोस्ट ब्लॉक किया था; IT मंत्रालय के साथ मेटा की मीटिंग भी

संसदीय समिति बोली- जुकरबर्ग 3 दिन में माफी मांगे:मेटा ने पीएम मोदी का पोस्ट ब्लॉक किया था; IT मंत्रालय के साथ मेटा की मीटिंग भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पोस्ट को ब्लॉक करने के मामले में संसदीय समिति ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। यदि वे तय समय सीमा में माफी नहीं मांगते हैं, तो मेटा को मिलने वाली सुरक्षा और कानूनी छूट वापस ली जा सकती है। इसी मामले में आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच दो दिन की बैठक भी हो रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली समन किया था। आज 5 अगस्त को इस मीटिंग का पहला दिन था। इस पूरे विवाद को सरल भाषा में समझने के लिए पढ़ें यह QA रिपोर्ट सवाल 1. संसदीय समिति ने मार्क जुकरबर्ग और मेटा को लेकर क्या निर्देश दिया है? जवाब: मेटा के प्रतिनिधि आईटी मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश हुए थे। समिति के सदस्यों ने मेटा से प्लेटफॉर्म में मौजूद एल्गोरिद्म के पक्षपात और कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया पर सवाल किए। सांसदों का आरोप था कि प्लेटफॉर्म पर अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री आसानी से उपलब्ध रहती है, जबकि सही कंटेंट हटा दिया जाता है। समिति ने मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग से इस पूरे घटनाक्रम पर 3 दिनों के भीतर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि वे तय समय सीमा में माफी नहीं मांगते हैं, तो आईटी अधिनियम (IT Act) की धारा 79(3) के तहत मेटा को मिलने वाली सुरक्षा और कानूनी छूट वापस ली जा सकती है। इसके बाद कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी। सवाल 2. IT मंत्रालय ने मेटा के अधिकारियों को क्यों तलब किया है? जवाब: IT मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने बताया कि बैठक में मंत्रालय यह जांचेगा कि मेटा भारतीय कानूनों का कितना पालन कर रही हैे। वीआईपी अकाउंट की सुरक्षा के लिए बनाए गए उसके ‘सेफगार्ड्स’ क्यों फेल हुए। इसके अलावा वॉट्सऐप की यूजरनेम पॉलिसी और इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल (CSAM) की मौजूदगी को लेकर भी सवाल पूछे जाएंगे। सवाल 3. इस विवाद की मुख्य वजह क्या है? पीएम मोदी की पोस्ट के साथ क्या हुआ था? जवाब: पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर देश के युवाओं के नाम एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक के मामलों में कड़े एक्शन का वादा किया था। मेटा के सिस्टम ने इस पोस्ट को अचानक हटा दिया। कुछ समय बाद पोस्ट को बहाल कर दिया गया। मेटा ने इसे एक “तकनीकी खराबी” बताते हुए गलती से पोस्ट हटने का दावा किया और माफी मांगी। हालांकि, IT मंत्रालय ने मेटा की इस सफाई को पूरी तरह “अपर्याप्त और असंतोषजनक” करार दिया। सवाल 4 आईटी सचिव एस कृष्णन ने इस मामले पर क्या कहा? जवाब: आईटी सचिव एस कृष्णन ने 4 अगस्त को कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक होने के नाते मेटा के पास ऐसी तकनीकी क्षमताएं होनी चाहिए कि उसके सुरक्षा मानक ठीक से काम करें। सरकार यह स्पष्टता चाहती है कि मेटा भारतीय कानूनों को किस हद तक समझती है और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए उसके पास क्या ठोस सिस्टम है। सवाल 5. क्या मेटा के अधिकारियों पर कोई आपराधिक केस भी दर्ज हुआ है? जवाब: हां, इस मामले में कानूनी शिकंजा भी कस गया है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर बनाए गए मॉर्फ्ड और AI-जनरेटेड पोस्ट के मामले में मेटा इंडिया के हेड अरुण श्रीनिवास और कुछ फेसबुक व इंस्टाग्राम अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सवाल 6. क्या इस मीटिंग में केवल पीएम मोदी के पोस्ट का ही मुद्दा होगा? जवाब: 5 और 6 अगस्त की मीटिंग में केवल पीएम मोदी की पोस्ट का मुद्दा ही नहीं उठाय जा रहा है। मंत्रालय मेटा से वॉट्सऐप की नई यूजरनेम पॉलिसी और इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण (CSAM) वाले कंटेंट की मौजूदगी पर जारी किए गए पुराने नोटिसों का भी ब्योरा और जवाब मांगेगा। सवाल 7. इस कार्रवाई का मेटा और भारतीय यूजर्स पर आगे क्या असर पड़ सकता है? जवाब: यदि मेटा आईटी मंत्रालय और संसदीय समिति को संतुष्ट करने में विफल रहती है, तो भारत सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कंटेंट मॉडरेशन और एआई मॉर्फिंग से जुड़े नियमों को और सख्त कर सकती है। इससे बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही तय होगी और वीआईपी खातों के साथ-साथ आम यूजर्स के डेटा व कंटेंट सेफ्टी को मजबूत किया जाएगा।

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