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हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

स्पेसएक्स इसी महीने इतिहास रचने की तैयारी में है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो कंपनी अगस्त खत्म होने से पहले अपने स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी। इस टेस्ट में स्पेसएक्स की टीम लॉन्च टावर के जरिए स्टारशिप के ऊपरी हिस्से ‘शिप’ को हवा में कैच करने की कोशिश करेगी। सेप्सएक्स दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। केवल स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा 171 फीट का है। ‘शिप’ को टावर के ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स से पकड़ेंगे साउथ टेक्सास के स्टारबेस साइट पर 2 लॉन्च टावर हैं, जिनमें बड़े ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स लगे हैं। यह स्टारशिप को पैड पर असेंबल करते हैं। इन्हीं टावर्स पर स्टारशिप को कैच करने की तैयारी है। इससे पहले स्पेसएक्स 3 टेस्ट फ्लाइट में स्टारशिप के निचले हिस्से बूस्टर को कैच करने का कारनामा कर चुकी है, लेकिन शिप को कैच करने की यह पहली कोशिश होगी। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे फ्लाइट 14 के जरिए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स का एक बैच भेजा जाएगा। यह मौजूदा सैटेलाइट्स से बड़े और ज्यादा सक्षम हैं। 24 जुलाई को हुई फ्लाइट 13 में 20 स्टारलिंक V3 भेजे गए थे, जो सब-ऑर्बिट में थे। फ्लाइट 14 में इन्हें ऑपरेशनल ऑर्बिट में रखा जाएगा। फ्लाइट 13 की सफलता ने बढ़ाया कंपनी का भरोसा 24 जुलाई को स्टारशिप की फ्लाइट 13 लॉन्च हुई थी। यह एक सब-ऑर्बिट उड़ान थी। इसकी हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई थी। मस्क ने बताया कि फ्लाइट 13 के दौरान वायुमंडल में वापस आते समय शिप की ‘हीट शील्ड’ पूरी तरह सुरक्षित रही। पूरा रॉकेट आज भी सुरक्षित है। हीट शील्ड की सफलता ने ही कंपनी को फ्लाइट 14 में टावर कैच का जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। हीट शील्ड की समस्या सुलझ चुकी है, जल्द रोजाना 1 फ्लाइट होगी स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान इलॉन मस्क ने स्टारशिप के भविष्य और इसकी रफ्तार को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “मैं किसी भी तरह की नजर नहीं लगाना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि इस मोड़ पर हीट शील्ड की समस्या पूरी तरह से सुलझ चुकी है।” उन्होंने कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि उड़ानों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ेगी। संभवतः आज से एक साल बाद हम रोजाना कम से कम एक फ्लाइट करेंगे, या शायद उससे भी ज्यादा।” नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘हीट शील्ड’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण? जब कोई स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ‘हीट शील्ड’ स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से पर लगाई जाने वाली एक सुरक्षात्मक परत है। यह इंसुलेटिंग मटीरियल से बनी होती है, जो इस गर्मी को झेलकर रॉकेट के अंदरूनी हिस्सों को जलने से बचाती है। स्टारशिप को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए हीट शील्ड का सुरक्षित रहना सबसे जरूरी शर्त है।

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स्पेसएक्स इसी महीने इतिहास रचने की तैयारी में है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो कंपनी अगस्त खत्म होने से पहले अपने स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी। इस टेस्ट में स्पेसएक्स की टीम लॉन्च टावर के जरिए स्टारशिप के ऊपरी हिस्से ‘शिप’ को हवा में कैच करने की कोशिश करेगी। सेप्सएक्स दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। केवल स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा 171 फीट का है। ‘शिप’ को टावर के ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स से पकड़ेंगे साउथ टेक्सास के स्टारबेस साइट पर 2 लॉन्च टावर हैं, जिनमें बड़े ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स लगे हैं। यह स्टारशिप को पैड पर असेंबल करते हैं। इन्हीं टावर्स पर स्टारशिप को कैच करने की तैयारी है। इससे पहले स्पेसएक्स 3 टेस्ट फ्लाइट में स्टारशिप के निचले हिस्से बूस्टर को कैच करने का कारनामा कर चुकी है, लेकिन शिप को कैच करने की यह पहली कोशिश होगी। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे फ्लाइट 14 के जरिए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स का एक बैच भेजा जाएगा। यह मौजूदा सैटेलाइट्स से बड़े और ज्यादा सक्षम हैं। 24 जुलाई को हुई फ्लाइट 13 में 20 स्टारलिंक V3 भेजे गए थे, जो सब-ऑर्बिट में थे। फ्लाइट 14 में इन्हें ऑपरेशनल ऑर्बिट में रखा जाएगा। फ्लाइट 13 की सफलता ने बढ़ाया कंपनी का भरोसा 24 जुलाई को स्टारशिप की फ्लाइट 13 लॉन्च हुई थी। यह एक सब-ऑर्बिट उड़ान थी। इसकी हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई थी। मस्क ने बताया कि फ्लाइट 13 के दौरान वायुमंडल में वापस आते समय शिप की ‘हीट शील्ड’ पूरी तरह सुरक्षित रही। पूरा रॉकेट आज भी सुरक्षित है। हीट शील्ड की सफलता ने ही कंपनी को फ्लाइट 14 में टावर कैच का जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। हीट शील्ड की समस्या सुलझ चुकी है, जल्द रोजाना 1 फ्लाइट होगी स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान इलॉन मस्क ने स्टारशिप के भविष्य और इसकी रफ्तार को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “मैं किसी भी तरह की नजर नहीं लगाना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि इस मोड़ पर हीट शील्ड की समस्या पूरी तरह से सुलझ चुकी है।” उन्होंने कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि उड़ानों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ेगी। संभवतः आज से एक साल बाद हम रोजाना कम से कम एक फ्लाइट करेंगे, या शायद उससे भी ज्यादा।” नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘हीट शील्ड’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण? जब कोई स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ‘हीट शील्ड’ स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से पर लगाई जाने वाली एक सुरक्षात्मक परत है। यह इंसुलेटिंग मटीरियल से बनी होती है, जो इस गर्मी को झेलकर रॉकेट के अंदरूनी हिस्सों को जलने से बचाती है। स्टारशिप को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए हीट शील्ड का सुरक्षित रहना सबसे जरूरी शर्त है।

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