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टाटा-ग्रुप के मुख्य ट्रस्ट SRTT से विजय सिंह का इस्तीफा:14 अगस्त को खत्म हो रहा कार्यकाल; सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे

टाटा-ग्रुप के मुख्य ट्रस्ट SRTT से विजय सिंह का इस्तीफा:14 अगस्त को खत्म हो रहा कार्यकाल; सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर कंट्रोल रखने वाले दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त हो रहा है और उन्होंने अगला कार्यकाल न लेने का फैसला किया है। हालांकि, वे टाटा ग्रुप के दूसरे मुख्य ट्रस्ट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में ट्रस्टी के पद पर बने रहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स- SRTT और SDTT के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। विजय सिंह का यह फैसला टाटा ट्रस्ट्स के भीतर जारी अंदरूनी मतभेदों और रेगुलेटरी कार्यवाही के बीच आया है। रेगुलेटरी पाबंदियों के कारण SRTT फिलहाल ट्रस्टियों की बैठक आयोजित नहीं कर पा रहा है। चैरिटी कमिश्नर की रोक से ₹400 करोड़ के दान और AGM पर संकट महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में एक एकतरफा आदेश जारी कर SRTT को 16 मई की प्रस्तावित बैठक टालने का निर्देश दिया था। यह आदेश उन शिकायतों के बाद आया था जिनमें सवाल उठाया गया था कि क्या SRTT बोर्ड का गठन महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के उस बदलाव के हिसाब से है, जो बोर्ड में स्थायी या लाइफ ट्रस्टियों की संख्या 25% तक सीमित करता है। SRTT ने इस रोक से राहत पाने के लिए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से गुहार लगाई है। ट्रस्ट ने चेतावनी दी है कि इस पाबंदी के जारी रहने से लगभग ₹400 करोड़ की फिलैंथरोपिक यानी परोपकारी ग्रांट्स प्रभावित हो सकती हैं। साथ ही 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में ट्रस्ट की भागीदारी में भी बाधा आ सकती है। टाटा संस AGM में चंद्रशेखरन के रि-अपॉइंटमेंट पर होना है फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की AGM में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को फिर से डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर विचार होना है। चंद्रशेखरन का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन पद पर बने रहना इस बात पर निर्भर करता है कि वे कंपनी के बोर्ड में शामिल रहते हैं या नहीं। SRTT मई में लगे बैन के बाद से कोई बैठक नहीं कर पाया है। इससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि टाटा संस की AGM में वोट कैसे दिया जाएगा और प्रतिनिधि की नियुक्ति कैसे होगी। ट्रस्ट का कहना है कि इस रोक की वजह से टाटा संस से मिलने वाले डिविडेंड की मंजूरी भी अटक सकती है, जिससे इसके चैरिटेबल प्रोग्राम्स चलते हैं। महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट में संशोधन और SRTT का तर्क कानूनी विवाद का मुख्य बिंदु महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट का संशोधन है, जो 1 सितंबर 2025 से लागू हुआ है। यह संशोधन किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफ ट्रस्टियों की संख्या को अधिकतम 25% तक सीमित करता है। SRTT का तर्क है कि यह नियम भविष्य से लागू होता है, इसलिए कानून लागू होने से पहले हुई स्थायी नियुक्तियों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। बाद में चैरिटी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यह पाबंदी सिर्फ SRTT पर लागू है, अन्य टाटा ट्रस्टों पर नहीं। रतन टाटा के निधन के बाद सामने आए आंतरिक मतभेद रेगुलेटरी जांच और विवादों का यह दौर अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट्स के भीतर उपजे अंदरूनी मतभेदों के बीच देखने को मिल रहा है। अक्टूबर 2025 में जब ट्रस्टियों ने रतन टाटा के करीबी सहयोगी मेहली मिस्त्री का कार्यकाल आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, तब यह तनाव सार्वजनिक हो गया। इसके बाद मिस्त्री ने SRTT, SDTT और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन से इस्तीफा दे दिया था। मिस्त्री ने अपने हटाने के फैसले को चुनौती दी और गवर्नेंस व कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट से जुड़े आरोप लगाए, जिन्हें टाटा ट्रस्ट्स ने खारिज कर दिया। अन्य ट्रस्टों से भी जुड़े रहे हैं विवाद मेहली मिस्त्री ने ‘बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन’ में विजय सिंह और सह-वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन की पात्रता पर भी सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि ट्रस्ट की शर्तों के अनुसार ट्रस्टी का पारसी जोरोस्ट्रियन होना और मुंबई का स्थायी निवासी होना जरूरी है। इसके बाद श्रीनिवासन ने अप्रैल में अन्य कारोबारी व्यस्तताओं का हवाला देकर उस ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया, जबकि सिंह पद पर बने रहे। इसके अलावा, मई में विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन ‘टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट’ के ट्रस्टी भी नहीं रहे, क्योंकि उनके पुनर्गठन प्रस्ताव को ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक सर्वसम्मति नहीं मिल सकी। इस पूरे घटनाक्रम और इस्तीफे पर टिप्पणी के लिए टाटा ट्रस्ट्स और विजय सिंह को भेजे गए ईमेल का प्रकाशन तक कोई जवाब नहीं मिला। क्या है ‘महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट’ का 25% नियम? महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट में 1 सितंबर 2025 से लागू संशोधन के तहत किसी भी पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के गवर्निंग बोर्ड में ‘लाइफ’ या ‘परपेचुअल’ (आजीवन) ट्रस्टियों की संख्या कुल सदस्यों के 25% से अधिक नहीं हो सकती। इस नियम का मकसद ट्रस्टों में पारदर्शिता बढ़ाना और समय-समय पर नई लीडरशिप को मौका देना है। SRTT का तर्क है कि पुराने परपेचुअल अपॉइंटमेंट्स पर यह नया नियम लागू नहीं होता।

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