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दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजारों में पहुंचाया जा रहा है। यह दावा व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज, स्कोप एंड कॉस्ट्स’ में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान या पार्ट्स को पहले भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में भेजा जाता है। वहां उन्हें प्रोसेस, असेंबल या किसी दूसरे प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद तैयार सामान को अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इससे चीन पर लगाए गए टैरिफ से बचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में इसके लिए दुनिया भर में ट्रेड रूट्स का नेटवर्क बनने की बात कही गई है। भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई को चीन से आने वाले सामान के एक अहम रास्ते के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट में यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पंप और कंप्रेसर में चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल होने की संभावना का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में रूट नेटवर्क को ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजने के लिए इस्तेमाल हो रहे रूट नेटवर्क को रिपोर्ट में ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया है। इसका मतलब शहरों की सुंदरता या बदसूरती से नहीं है। यह शब्द अलग-अलग देशों के ऐसे औद्योगिक शहरों के लिए इस्तेमाल किया गया है, जहां एक जैसे प्रोडक्ट बनते हैं और वे अमेरिकी बाजार में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। भारत के मामले में रिपोर्ट ने पुणे, गुजरात और चेन्नई की तुलना अमेरिका के ओहायो राज्य के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस से की है। इन अमेरिकी शहरों में भी पंप, कंप्रेसर और दूसरे औद्योगिक सामान का उत्पादन और कारोबार होता है। रिपोर्ट का तर्क है कि अगर तीसरे देशों के जरिए कम टैरिफ पर सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां के स्थानीय निर्माताओं को नुकसान हो सकता है। अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत वाले आयात से मुकाबला करना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन, ऑर्डर और नौकरियों पर भी पड़ सकता है। मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड का भी जिक्र व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में सिर्फ भारत का जिक्र नहीं है। इसमें मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड के उन इलाकों का भी जिक्र है, जहां बड़े पैमाने पर सामान बनाया और दूसरे देशों को भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे रास्तों से हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है, जिसमें चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया हो। क्या ये टैरिफ से बचने की कोशिश को साबित करता है? किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट का इस्तेमाल होना और चीन का सामान सिर्फ भारत के रास्ते अमेरिका भेजना, दोनों अलग बातें हैं। अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की असली मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उस पर काफी काम हो रहा है, तो उसे सिर्फ चीन का सामान घुमाकर अमेरिका भेजना नहीं माना जा सकता। इसलिए यह देखा जाता है कि प्रोडक्ट बनाने में असल काम और प्रोडक्ट की कीमत में कितना हिस्सा किस देश में तैयार हुआ है। सिर्फ किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट लगा होने से यह साबित नहीं होता कि टैरिफ से बचने की कोशिश हुई है। आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रोडक्ट के अलग-अलग पार्ट कई देशों में बनते हैं और उसकी आखिरी असेंबली किसी दूसरे देश में हो सकती है। अमेरिका अब AI और डेटा से संदिग्ध शिपमेंट पकड़ेगा रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस ने सीमा पर आने वाले सामान की जांच में टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिसिस के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही है। रिपोर्ट में ऐसे AI सिस्टम का भी जिक्र है, जो अमेरिकी कस्टम अधिकारियों को संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसका मकसद पूरी सप्लाई चेन को ट्रैक करना है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं: भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। पूरी खबर पढ़ें…

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