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कंगना रनोट के 2 साल में सिर्फ 16 काम पूरे:वर्क कंप्लीशन रेट सबसे कम; अनुराग ठाकुर समेत हिमाचल के चारों सांसदों का रिपोर्ट कार्ड जानिए

कंगना रनोट के 2 साल में सिर्फ 16 काम पूरे:वर्क कंप्लीशन रेट सबसे कम; अनुराग ठाकुर समेत हिमाचल के चारों सांसदों का रिपोर्ट कार्ड जानिए

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट की जनता ने बेहतर विकास की उम्मीद में कांग्रेस सरकार के PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह को हराकर सेलिब्रिटी कंगना रनोट को संसद भेजा। मगर, कंगना का 2 साल से अधिक का ‘रिपोर्ट कार्ड’ हिमाचल के चारों सांसदों में सबसे निराशाजनक रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) के अनुसार, कंगना के चुनाव क्षेत्र में कुल 314 काम चल रहे हैं। दो साल बीतने पर भी महज 16 काम ही पूरे हुए हैं। कंगना की वर्क कम्पलीशन रेट चारों सांसदों में सबसे कम 5.1% है। कंगना को अब तक सांसद निधि के ₹14.7 करोड़ मिले हैं। इसमें से कंगना 11 अगस्त तक मात्र ₹4.1 करोड़ खर्च कर पाई हैं। कंगना की फंड यूटिलाइजेशन दर 27.6% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 32.9% है। अनुराग ठाकुर भी कंगना से बेहतर नहीं हमीरपुर के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कंगना से बेहतर नहीं है। अनुराग ₹15 करोड़ में से दो साल में मात्र ₹1.7 करोड़ खर्च कर पाए हैं, जबकि ₹13.2 करोड़ अनस्पेंट है। अनुराग का चारों सांसदों में सबसे ज्यादा अनस्पेंट बजट है। फंड यूटिलाइजेशन में शिमला के सांसद सुरेश कश्यप और वर्क कम्पलीशन में कांगड़ा के सांसद राजीव भारद्वाज आगे जरूर हैं, लेकिन राष्ट्रीय औसत से दोनों पीछे हैं। कंगना समेत चारों सांसदों का रिपोर्ट कार्ड… सांसदों को MPLADS में कितना पैसा मिलता है?
हर सांसद को सालाना ₹5 करोड़ का MPLADS फंड मिलता है। यह पैसा सांसद के खाते में सीधे नहीं आता। सांसद अपने क्षेत्र में विकास कार्यों की सिफारिश करते हैं, जबकि राशि जिला प्राधिकरण को जारी होती है और संबंधित सरकारी एजेंसी काम करवाती है। फंड खर्च करने में फिसड्डी क्यों?
बेशक, MPLADS का पैसा सांसद खुद खर्च नहीं करते। फिर भी सांसदों की जिम्मेदारी बनती है कि उनके क्षेत्र में विकास कार्य समय पर पूरे हो सकें। वे जरूरी कामों की पहचान, उनकी प्राथमिकता तय करने और उनकी प्रगति की निगरानी कर सकते हैं। खासकर जब बड़ी संख्या में काम स्वीकृत या अनुशंसित हों, तो सांसद कार्यालय की ओर से जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित फॉलोअप महत्वपूर्ण हो जाता है।

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