Tuesday, 06 Oct 2026 | 03:43 PM

Trending :

EXCLUSIVE

ट्रम्प का ईरान से बातचीत की डेडलाइन बढ़ाने से इनकार:बोले- तेहरान जरूरी शर्तों वाला समझौता नहीं करना चाहता; 60 दिन की मोहलत खत्म

ट्रम्प का ईरान से बातचीत की डेडलाइन बढ़ाने से इनकार:बोले- तेहरान जरूरी शर्तों वाला समझौता नहीं करना चाहता; 60 दिन की मोहलत खत्म

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए तय 60 दिन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सोमवार को यह डेडलाइन खत्म हो गई। ट्रम्प ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वह उस तरह की डील के लिए तैयार नहीं है, जिसे अमेरिका जरूरी मानता है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन वे उस तरह का समझौता नहीं करने जा रहे, जिसे मैं जरूरी मानता हूं।” अमेरिका की प्रमुख मांग ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। वहीं, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ऊर्जा के लिए जारी रखने की बात कहता रहा है। यही दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। 60 दिन पहले क्या हुआ था? अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को एक समझौता ज्ञापन (MOU) हुआ था। इसके तहत दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था। इस अवधि में कई अहम मुद्दों पर समाधान निकालने की कोशिश की जानी थी। लेकिन 60 दिन पूरे होने के बाद भी प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। होर्मुज स्ट्रेट खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और स्थायी शांति समझौते को लेकर दोनों देशों की स्थिति अलग बनी हुई है। MOU में बातचीत की अवधि बढ़ाने का विकल्प था, लेकिन कई हफ्तों से वार्ता आगे नहीं बढ़ी थी। ईरान ने कहा- 60 दिन की डेडलाइन का कोई मतलब नहीं ईरान ने भी बातचीत की समयसीमा बढ़ाने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच वास्तव में कोई बातचीत शुरू ही नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, “हमने कोई बातचीत शुरू ही नहीं की थी और अमेरिका ने शुरुआत से ही समझ को तोड़ दिया। इसलिए 60 दिन का मुद्दा प्रासंगिक नहीं है।” ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समझ के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं। इसी वजह से तेहरान 60 दिन की अवधि को बातचीत की वास्तविक समयसीमा नहीं मानता। अमेरिका का सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव बढ़ाने पर फोकस जुलाई के अंत के बाद से अमेरिका ने ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है। अब ट्रम्प प्रशासन ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगले हफ्ते ईरान के खिलाफ नए आर्थिक कदमों का ऐलान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कि ये कदम अब तक किसी देश पर लगाए गए सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में शामिल हो सकते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो अमेरिका फिलहाल ईरान पर बम गिराने के बजाय उसकी कमाई और कारोबार पर चोट करके अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट भी बना बड़ा मुद्दा अमेरिका-ईरान विवाद में होर्मुज स्ट्रेट भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ट्रम्प ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका स्ट्रेट पर नाकाबंदी के जरिए नियंत्रण बनाए हुए है। उन्होंने इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने के विचार का भी समर्थन किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, जुलाई के मध्य से अमेरिकी नाकाबंदी के दौरान 64 कॉमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया है। समुद्री निगरानी एजेंसियों के मुताबिक, स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हुई है। ट्रम्प ने होर्मुज को लेकर ओमान को भी चेतावनी दी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप ने अमेरिका के सहयोगी ओमान को भी कड़ी चेतावनी दी है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर ओमान इस मामले में अमेरिका के रास्ते में आया तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। ओमान ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और इसके नियंत्रण को दोनों देशों के पास रखने की योजना पर काम कर रहा है। वह पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। आगे क्या होगा? 60 दिन की समयसीमा खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता और मुश्किल होता दिख रहा है। ट्रम्प प्रशासन जहां आर्थिक दबाव बढ़ाने के संकेत दे रहा है, वहीं ईरान परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आर्थिक और सैन्य दबाव ईरान को नई बातचीत के लिए तैयार करेगा या दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा। होर्मुज स्ट्रेट पर जारी गतिरोध इस स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़े…. ईरान-अमेरिका के बीच 60 दिन की डेडलाइन खत्म:फिर ट्रम्प ने हमले का आदेश क्यों नहीं दिया; दुश्मन को 3 तरफ से घेरने की स्ट्रैटजी अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। पूरी खबर यहां पढ़े…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
अमित जानी बोले- 'काला हिरण' सलमान की बायोपिक नहीं है:फिल्म बिश्नोई समाज पर आधारित, कहा- नोटिस भेजकर हम पर दबाव बनाया जा रहा है

June 3, 2026/
11:05 am

फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की लीगल टीम...

मासूम शर्मा की नई फिल्म कॉन्ट्रोवर्सी में घिरी:दावा- बैन सॉन्ग 'खटोला' जैसे लिरिक्स-ट्यून इस्तेमाल किए, टीजर में पिस्टल थामे नजर आए सिंगर

March 31, 2026/
5:00 am

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा फिर एक नई कॉन्ट्रोवर्सी में घिर गए हैं। दावा किया जा रहा है कि उनकी न्यू...

इमरान की नौ महीने बाद बहन नूरीन की मुलाकात:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM को हॉस्पिटल शिफ्ट किए जाएंगे

August 19, 2026/
8:48 am

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी ने मंगलवार को अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। करीब...

मल्हारगंज में होटल के गोदाम में लगी आग:, फायर ब्रिगेड मौके पर रहवासी इलाके की, बिजली सप्लाई बंद

March 30, 2026/
10:38 pm

शहर के मल्हारगंज थाना क्षेत्र की गली नंबर 3 में स्थित होटल वर्ल्ड किचन के गोदाम में सोमवार रात अचानक...

अवैध खनन का काला कारोबार‎:बिना रॉयल्टी लाखों का खेल - जेसीबी से रोज निकाल रहे 70 ट्रॉली से ज्यादा मिट्टी

April 27, 2026/
5:48 am

जिले की पंचायतों में जल संवर्धन एवं मप्र गौण खनिज नियम 1996 की आड़ में अवैध खनन बिना रोक-टोक तेजी...

जैकलीन फर्नांडिस के सरकारी गवाह बनने पर ED की आपत्ति:एजेंसी बोली- एक्ट्रेस पीड़ित नहीं, सुकेश के जुर्म पता होने के बाद भी लिए करोड़ों के गिफ्ट

May 11, 2026/
5:30 pm

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सोमवार को प्रवर्तन...

रणवीर सिंह कर सकते हैं चंद्रगुप्त मौर्य पर फिल्म:धुरंधर डायरेक्टर के साथ फिर बन सकती है जोड़ी, प्रोजेक्ट पर चर्चा जारी

April 4, 2026/
1:49 pm

धुरंधर फ्रैंचाइजी की सफलता के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि डायरेक्टर आदित्य धर का अगला...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

ट्रम्प का ईरान से बातचीत की डेडलाइन बढ़ाने से इनकार:बोले- तेहरान जरूरी शर्तों वाला समझौता नहीं करना चाहता; 60 दिन की मोहलत खत्म

ट्रम्प का ईरान से बातचीत की डेडलाइन बढ़ाने से इनकार:बोले- तेहरान जरूरी शर्तों वाला समझौता नहीं करना चाहता; 60 दिन की मोहलत खत्म

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए तय 60 दिन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सोमवार को यह डेडलाइन खत्म हो गई। ट्रम्प ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वह उस तरह की डील के लिए तैयार नहीं है, जिसे अमेरिका जरूरी मानता है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन वे उस तरह का समझौता नहीं करने जा रहे, जिसे मैं जरूरी मानता हूं।” अमेरिका की प्रमुख मांग ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। वहीं, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ऊर्जा के लिए जारी रखने की बात कहता रहा है। यही दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। 60 दिन पहले क्या हुआ था? अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को एक समझौता ज्ञापन (MOU) हुआ था। इसके तहत दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था। इस अवधि में कई अहम मुद्दों पर समाधान निकालने की कोशिश की जानी थी। लेकिन 60 दिन पूरे होने के बाद भी प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। होर्मुज स्ट्रेट खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और स्थायी शांति समझौते को लेकर दोनों देशों की स्थिति अलग बनी हुई है। MOU में बातचीत की अवधि बढ़ाने का विकल्प था, लेकिन कई हफ्तों से वार्ता आगे नहीं बढ़ी थी। ईरान ने कहा- 60 दिन की डेडलाइन का कोई मतलब नहीं ईरान ने भी बातचीत की समयसीमा बढ़ाने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच वास्तव में कोई बातचीत शुरू ही नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, “हमने कोई बातचीत शुरू ही नहीं की थी और अमेरिका ने शुरुआत से ही समझ को तोड़ दिया। इसलिए 60 दिन का मुद्दा प्रासंगिक नहीं है।” ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समझ के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं। इसी वजह से तेहरान 60 दिन की अवधि को बातचीत की वास्तविक समयसीमा नहीं मानता। अमेरिका का सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव बढ़ाने पर फोकस जुलाई के अंत के बाद से अमेरिका ने ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है। अब ट्रम्प प्रशासन ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगले हफ्ते ईरान के खिलाफ नए आर्थिक कदमों का ऐलान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कि ये कदम अब तक किसी देश पर लगाए गए सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में शामिल हो सकते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो अमेरिका फिलहाल ईरान पर बम गिराने के बजाय उसकी कमाई और कारोबार पर चोट करके अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट भी बना बड़ा मुद्दा अमेरिका-ईरान विवाद में होर्मुज स्ट्रेट भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ट्रम्प ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका स्ट्रेट पर नाकाबंदी के जरिए नियंत्रण बनाए हुए है। उन्होंने इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने के विचार का भी समर्थन किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, जुलाई के मध्य से अमेरिकी नाकाबंदी के दौरान 64 कॉमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया है। समुद्री निगरानी एजेंसियों के मुताबिक, स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हुई है। ट्रम्प ने होर्मुज को लेकर ओमान को भी चेतावनी दी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप ने अमेरिका के सहयोगी ओमान को भी कड़ी चेतावनी दी है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर ओमान इस मामले में अमेरिका के रास्ते में आया तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। ओमान ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और इसके नियंत्रण को दोनों देशों के पास रखने की योजना पर काम कर रहा है। वह पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। आगे क्या होगा? 60 दिन की समयसीमा खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता और मुश्किल होता दिख रहा है। ट्रम्प प्रशासन जहां आर्थिक दबाव बढ़ाने के संकेत दे रहा है, वहीं ईरान परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आर्थिक और सैन्य दबाव ईरान को नई बातचीत के लिए तैयार करेगा या दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा। होर्मुज स्ट्रेट पर जारी गतिरोध इस स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ————————- ये खबर भी पढ़े…. ईरान-अमेरिका के बीच 60 दिन की डेडलाइन खत्म:फिर ट्रम्प ने हमले का आदेश क्यों नहीं दिया; दुश्मन को 3 तरफ से घेरने की स्ट्रैटजी अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। पूरी खबर यहां पढ़े…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.