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IIT Delhi Student Suicide Controversy

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3 मिनट पहले

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बेगूसराय के ऋषिकेश कुमार ने 22 अगस्त को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के कैंपस में सुसाइड कर लिया। उसने IIT दिल्ली के लेक्चरर हाल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। सुसाइड के 4 दिन बाद दिल्ली से ऋषिकेश का शव गांव मक्खाचक लाया गया। जहां अंतिम संस्कार हुआ। ऋषिकेश IIT दिल्ली में MSc फिजिक्स का छात्र था।

पुलिस के अनुसार 22 अगस्त को वह करीब सुबह 8 बजे मेन गेट से कैंपस में आया। 8:33 बजे घटना की PCR कॉल मिली। उसे IIT अस्पताल ले जाया गया, जहां मृत घोषित किया गया। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उसका मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है।

ऋषिकेश सुसाइड केस को लेकर 24 अगस्त को IIT दिल्ली के छात्रों ने लेक्चरर हाल कॉम्प्लेक्स के बाहर प्रदर्शन और धरना शुरू किया। बड़ी संख्या में छात्र जुटे और कक्षाओं का बहिष्कार किया।

हॉस्टल में कमरा न मिलने से परेशान था

ऋषिकेश हॉस्टल में कमरा न मिलने से परेशान था। कई कोशिशों के बाद भी जब उसे हॉस्टल में कमरा नहीं मिला तो वह अपनी मां के साथ कॉलेज के बाहर रूम लेकर रहने लगा। इतना ही नहीं उसके प्रोजेक्ट रुक गए। प्रशासन के फैसलों ने ऋषिकेश को मानसिक रूप से तोड़ दिया। छात्रों का तर्क है कि इससे वे अपने क्लासमेट और कैंपस सपोर्ट नेटवर्क से और अलग हो गया।

छात्रों की मांग है कि स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस के डीन, एसोसिएट डीन और फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड तुरंत इस्तीफा दें। छात्रों की मांग में ऋषिकेश के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना भी शामिल है।

ऋषिकेश की मानसिक स्थिति पिता की मौत के बाद बिगड़ी

प्रदर्शन के बाद IIT दिल्ली ने 5 सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित की है। समिति छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों से बात करेगी। साथ ही संस्थान की प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल्स की समीक्षा करेगी। उसे करीब दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है।

छात्रों की बैठक हुई और ऋषिकेश की परिस्थितियों को लेकर कई प्रशासनिक सवाल सामने आए। छात्रों के अनुसार ऋषिकेश की मानसिक स्थिति पिता की मौत के बाद बिगड़ी थी।

दोस्त ने बताया ऋषिकेश का हाल

ऋषिकेश की मौत के बाद उसके दोस्त ने 17 मिनट का एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उसने बताया कि उसे हॉस्टल नहीं दिया गया। लिस्ट से उसका नाम हटा दिया। 10-12 दिन से उसके मन में सुसाइड का ख्याल आ रहा था।

ऋषिकेश की मां ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक की मां आशा पोद्दार ने IIT दिल्ली के हॉस्टल प्रशासन और डीन पर आरोप लगाए हैं। मां का कहना है कि हॉस्टल अलॉटमेंट में लगातार टालमटोल और डीन के अपमान से आहत होकर बेटे ने जान दी। घटना के बाद हमने दिल्ली पुलिस के किशनगढ़ थाना (दक्षिण-पश्चिम दिल्ली) में लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। 20 जुलाई को ऋषिकेश यहां आया था और 22 अगस्त को आत्महत्या कर ली।

IIT कैंपस में यह इस साल सुसाइड की दूसरी घटना

इससे पहले इसी साल मार्च में 19 वर्षीय फर्स्ट-ईयर बीटेक छात्र ने IIT दिल्ली कैंपस के एक अपार्टमेंट में सुसाइड कर लिया था। छात्र को कमरे में पंखे से लटका पाया गया। अस्पताल में मेडिकल जांच के बाद उसे मृत घोषित किया गया। ऋषिकेश का सुसाइड कर लेना IIT दिल्ली कैंपस में सुसाइड की दूसरी घटना है।

JNU ने भी किया विरोध प्रदर्शन

IIT दिल्ली के अलावा 23 अगस्त को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) ने IIT दिल्ली के गेट नंबर 5 के बाहर प्रदर्शन किया। छात्र की मौत की जवाबदेही तय करने की मांग की।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इसे IIT दिल्ली की उदासीनता का मामला बताते हुए कहा कि इस साल IIT दिल्ली में यह दूसरी छात्र मौत है। छात्रों ने संस्थान से छात्र मौतों के लंबे सिलसिले को गंभीरता से लेने की मांग की। इसके कारणों पर जवाब देने को भी अपनी मांग में शामिल किया। JNUSU महासचिव सुनील यादव ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि संस्थानों को छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

JNUSU ने इस मुद्दे को छात्रों के साथ भेदभाव और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों की समस्याओं से भी जोड़ा तथा Rohith Act की मांग का उल्लेख किया।

Rohith Act क्या है

रोहित एक्ट या रोहित वेमुला एक्ट एक प्रस्तावित कानून है। इसका उद्देश्य कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न को रोकना है। इसका नाम हैदराबाद विश्वविद्यालय के PhD रिसर्चर रोहित वेमुला के नाम पर रखा गया है। इसकी 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या के बाद देशभर के कैंपस में जातिगत भेदभाव को लेकर आंदोलन हुए थे।

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छात्रों की मांग है कि स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस के डीन, एसोसिएट डीन और फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड तुरंत इस्तीफा दें। छात्रों की मांग में ऋषिकेश के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना भी शामिल है।

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प्रदर्शन के बाद IIT दिल्ली ने 5 सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित की है। समिति छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों से बात करेगी। साथ ही संस्थान की प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल्स की समीक्षा करेगी। उसे करीब दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है।

छात्रों की बैठक हुई और ऋषिकेश की परिस्थितियों को लेकर कई प्रशासनिक सवाल सामने आए। छात्रों के अनुसार ऋषिकेश की मानसिक स्थिति पिता की मौत के बाद बिगड़ी थी।

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JNU ने भी किया विरोध प्रदर्शन

IIT दिल्ली के अलावा 23 अगस्त को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) ने IIT दिल्ली के गेट नंबर 5 के बाहर प्रदर्शन किया। छात्र की मौत की जवाबदेही तय करने की मांग की।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इसे IIT दिल्ली की उदासीनता का मामला बताते हुए कहा कि इस साल IIT दिल्ली में यह दूसरी छात्र मौत है। छात्रों ने संस्थान से छात्र मौतों के लंबे सिलसिले को गंभीरता से लेने की मांग की। इसके कारणों पर जवाब देने को भी अपनी मांग में शामिल किया। JNUSU महासचिव सुनील यादव ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि संस्थानों को छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

JNUSU ने इस मुद्दे को छात्रों के साथ भेदभाव और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों की समस्याओं से भी जोड़ा तथा Rohith Act की मांग का उल्लेख किया।

Rohith Act क्या है

रोहित एक्ट या रोहित वेमुला एक्ट एक प्रस्तावित कानून है। इसका उद्देश्य कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न को रोकना है। इसका नाम हैदराबाद विश्वविद्यालय के PhD रिसर्चर रोहित वेमुला के नाम पर रखा गया है। इसकी 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या के बाद देशभर के कैंपस में जातिगत भेदभाव को लेकर आंदोलन हुए थे।

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