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ट्रम्प को रेयर-अर्थ मिनरल नहीं भेज पा रहा पाकिस्तान:बलूच हमलों से अमेरिकी कंपनी का काम बंद; मुनीर ने वॉशिंगटन में दिखाए थे सैंपल

ट्रम्प को रेयर-अर्थ मिनरल नहीं भेज पा रहा पाकिस्तान:बलूच हमलों से अमेरिकी कंपनी का काम बंद; मुनीर ने वॉशिंगटन में दिखाए थे सैंपल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ड्रीम प्रोजेक्ट अटक गया है। पाकिस्तान से रेअर अर्थ मिनरल (दुर्लभ खनिज) की अगस्त में प्रस्तावित खेप अमेरिका रवाना नहीं हो सकी। इसके बाद कराची और इस्लामाबाद में अमेरिकी कंपनी यूएस स्ट्रेटेजिक मेटल्स (USSM) के दफ्तरों में काम बंद हो गया है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रेअर अर्थ मिनरल की खदानों वाले इलाकों में विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमलों से अमेरिकी कंपनी के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। बलूच विद्रोहियों ने चागई जिले में रेको दिक खदान तक जाने वाली सड़कों को जाम कर दिया है। आर्मी चीफ मुनीर ने वाइट हाउस में किया था ‘स्टोन शो’ आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने सितंबर 2025 में वाइट हाउस में ‘स्टोन शो’ किया था। उन्होंने लकड़ी का एक बॉक्स ट्रम्प को दिखाया था, जिसमें रंग-बिरंगे पत्थर (मिनरल स्पेसिमेन) रखे थे। इन्हें देखकर ट्रम्प बेहद खुश हुए थे। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका भेजी गई पहली खेप में एंटीमनी, कॉपर कॉन्सन्ट्रेट, नियोडिमियम और प्रेजोडिमियम जैसे खनिज शामिल थे। इस प्रोजेक्ट के तहत 2025-26 में मिनरल्स का निर्यात, 2027-28 में पाकिस्तान में मिनरल प्रोसेसिंग और 2029 में बड़े पैमाने पर खनन शुरू करने की योजना थी। इलेक्ट्रॉनिक्स से IT तक में रेयर अर्थ मटेरियल का इस्तेमाल रेयर अर्थ मटेरियल 17 रासायनिक तत्वों का समूह है। इनका इस्तेमाल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर मिलिट्री उपकरणों तक में होता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और कई आधुनिक तकनीकों में इनकी अहम भूमिका है। इनका इस्तेमाल IT, केमिकल और ऑयल रिफाइनिंग जैसी इंडस्ट्रीज में भी होता है। आधुनिक तकनीक और हाई-टेक उपकरणों में इनकी मांग लगातार बनी हुई है। कनाडा की कंपनी बैरिक गोल्ड भी काम छोड़ सकती है रेको दिक में कनाडा की कंपनी बैरिक गोल्ड भी खनन का काम कर रही है। हालांकि, बलूच विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण कंपनी के लिए यहां काम जारी रखना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उसके भी काम बंद करने और निवेश से पीछे हटने की आशंका है। बलूचिस्तान के खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा बलूचिस्तान को पाकिस्तान का खनिज भंडार कहा जाता है। यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का दबदबा है। चीन ने CPEC के तहत ग्वादर और आसपास के इलाकों में करीब 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीनी फिशिंग बोट्स की मौजूदगी भी बढ़ी है। स्थानीय बलूच मछुआरों का आरोप है कि बड़ी और ज्यादा ताकतवर चीनी बोट्स उनकी छोटी नावों को पीछे हटने पर मजबूर करती हैं। ज्यादातर स्थानीय मछुआरे अब भी पाल वाली छोटी नावों से मछली पकड़ते हैं। इससे उनके रोजगार पर असर पड़ रहा है। बलूचिस्तान के रेअर अर्थ मिनरल पर अमेरिका की नजर है। मुनीर ट्रम्प के सामने इन खनिजों के सैंपल तक दिखा चुके हैं। PAK के हाथ से बलूचिस्तान का 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… PoK में सेना की घेराबंदी, राशन तक की चेकिंग:स्कूल-हॉस्पिटल बंद, लोग बोले- सरकार ने बात की, फिर इंडिया का एजेंट बता दिया हम इंडिया के एजेंट नहीं हैं, हम तो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।’ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर, यानी POK से ये आवाजें ऐसे वक्त में आ रही है, जब वहां इंटरनेट बंद है। स्कूल नहीं खुल रहे, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा, कामकाज ठप है। लोग राशन और दवाइयों तक के लिए परेशान हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ड्रीम प्रोजेक्ट अटक गया है। पाकिस्तान से रेअर अर्थ मिनरल (दुर्लभ खनिज) की अगस्त में प्रस्तावित खेप अमेरिका रवाना नहीं हो सकी। इसके बाद कराची और इस्लामाबाद में अमेरिकी कंपनी यूएस स्ट्रेटेजिक मेटल्स (USSM) के दफ्तरों में काम बंद हो गया है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रेअर अर्थ मिनरल की खदानों वाले इलाकों में विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमलों से अमेरिकी कंपनी के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। बलूच विद्रोहियों ने चागई जिले में रेको दिक खदान तक जाने वाली सड़कों को जाम कर दिया है। आर्मी चीफ मुनीर ने वाइट हाउस में किया था ‘स्टोन शो’ आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने सितंबर 2025 में वाइट हाउस में ‘स्टोन शो’ किया था। उन्होंने लकड़ी का एक बॉक्स ट्रम्प को दिखाया था, जिसमें रंग-बिरंगे पत्थर (मिनरल स्पेसिमेन) रखे थे। इन्हें देखकर ट्रम्प बेहद खुश हुए थे। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका भेजी गई पहली खेप में एंटीमनी, कॉपर कॉन्सन्ट्रेट, नियोडिमियम और प्रेजोडिमियम जैसे खनिज शामिल थे। इस प्रोजेक्ट के तहत 2025-26 में मिनरल्स का निर्यात, 2027-28 में पाकिस्तान में मिनरल प्रोसेसिंग और 2029 में बड़े पैमाने पर खनन शुरू करने की योजना थी। इलेक्ट्रॉनिक्स से IT तक में रेयर अर्थ मटेरियल का इस्तेमाल रेयर अर्थ मटेरियल 17 रासायनिक तत्वों का समूह है। इनका इस्तेमाल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर मिलिट्री उपकरणों तक में होता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और कई आधुनिक तकनीकों में इनकी अहम भूमिका है। इनका इस्तेमाल IT, केमिकल और ऑयल रिफाइनिंग जैसी इंडस्ट्रीज में भी होता है। आधुनिक तकनीक और हाई-टेक उपकरणों में इनकी मांग लगातार बनी हुई है। कनाडा की कंपनी बैरिक गोल्ड भी काम छोड़ सकती है रेको दिक में कनाडा की कंपनी बैरिक गोल्ड भी खनन का काम कर रही है। हालांकि, बलूच विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण कंपनी के लिए यहां काम जारी रखना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उसके भी काम बंद करने और निवेश से पीछे हटने की आशंका है। बलूचिस्तान के खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा बलूचिस्तान को पाकिस्तान का खनिज भंडार कहा जाता है। यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का दबदबा है। चीन ने CPEC के तहत ग्वादर और आसपास के इलाकों में करीब 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीनी फिशिंग बोट्स की मौजूदगी भी बढ़ी है। स्थानीय बलूच मछुआरों का आरोप है कि बड़ी और ज्यादा ताकतवर चीनी बोट्स उनकी छोटी नावों को पीछे हटने पर मजबूर करती हैं। ज्यादातर स्थानीय मछुआरे अब भी पाल वाली छोटी नावों से मछली पकड़ते हैं। इससे उनके रोजगार पर असर पड़ रहा है। बलूचिस्तान के रेअर अर्थ मिनरल पर अमेरिका की नजर है। मुनीर ट्रम्प के सामने इन खनिजों के सैंपल तक दिखा चुके हैं। PAK के हाथ से बलूचिस्तान का 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… PoK में सेना की घेराबंदी, राशन तक की चेकिंग:स्कूल-हॉस्पिटल बंद, लोग बोले- सरकार ने बात की, फिर इंडिया का एजेंट बता दिया हम इंडिया के एजेंट नहीं हैं, हम तो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।’ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर, यानी POK से ये आवाजें ऐसे वक्त में आ रही है, जब वहां इंटरनेट बंद है। स्कूल नहीं खुल रहे, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा, कामकाज ठप है। लोग राशन और दवाइयों तक के लिए परेशान हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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