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JNU में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर-जूते फेंके:UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहा था छात्रसंघ; यूनिवर्सिटी ने कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन बताया

JNU में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर-जूते फेंके:UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहा था छात्रसंघ; यूनिवर्सिटी ने कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन बताया

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(JNU) में स्टूडेंट यूनियन के प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर पत्थर फेंके, पुलिसवालों को काटा और जूते फेंके। पुलिस ने कहा कि इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन(JNUSU) UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग को लेकर मार्च निकाल रहा था। ये मार्च शिक्षा मंत्रालय तक निकाला जाना था लेकिन पुलिस ने इसे बीच में ही रोक दिया। पुलिस का आरोप है कि मार्च रोकने के बाद कुछ प्रोटेस्टर्स ने उनपर हमला कर दिया। इसके बीच यूनिवर्सिटी का भी बयान आया। JNU ने कहा कि यह मांग माननीय सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है जिसने रेगुलेशन पर स्टे जारी किया था। JNU के वाइस चांसलर या रजिस्ट्रार के पास रेगुलेशन पर कोई अधिकार नहीं है। पुलिस पर हमले की 3 तस्वीरेंं… JNU ने कहा- हमारी सरकार को जवाबदेही JNU ने सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में कहा कि JNU एक पब्लिक यूनिवर्सिटी है इसलिए सरकार, पार्लियामेंट और भारतीय टैक्सपेयर्स के प्रति जवाबदेह है। यह बहुत बुरा है कि एक महिला OBC वाइस चांसलर पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया जा रहा है, सिर्फ पब्लिक प्रॉपर्टी की हिंसा और तोड़-फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए। पहले इस पूरे मामले को समझें UGC के नए कानून का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे। नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया। ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। इनसे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। 30 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगाई सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान की याचिकाओं पर की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल 2012 के UGC नियम देशभर में लागू रहेंगे। ———— ये खबर भी पढ़ें… ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ वाली NCERT किताब पर SC का बैन:कहा- हार्ड कॉपी वापस लें, डिजिटल कॉपी हटाएं सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर वाली NCERT के 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब बैन कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जो किताबें छप चुकी हैं, उसे जब्त कीजिए और डिजिटल कॉपियों को भी हटाइए। पूरी खबर पढ़ें…

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