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Holi Skincare Home Remedies; Synthetic Colour Chemicals Health Risks

Holi Skincare Home Remedies; Synthetic Colour Chemicals Health Risks

14 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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होली के मौके पर रंग खेलने में आनंद तो खूब आता है, लेकिन यह स्किन के लिए किसी ‘केमिकल वॉर’ से कम नहीं है। सिंथेटिक रंगों में मौजूद खतरनाक केमिकल्स हमारी स्किन और हेल्थ पर गंभीर असर डाल सकते हैं।

कुछ केमिकल्स आंखों, फेफड़ों और स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, उन्हें इसका जोखिम ज्यादा होता है। सिंथेटिक रंगों के कारण स्किन पर लाल चकत्ते, दाने और असहनीय खुजली हो सकती है। कुछ लोग रंग खेलने के बाद स्किन को साबुन से रगड़कर साफ करने लगते हैं, जिससे स्किन डैमेज हो सकती है।

इसलिए जरूरत की खबर में आज होली के रंगों से होने वाले नुकसानों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है?
  • किस केमिकल से क्या हेल्थ रिस्क होता है?
  • इससे हुए नुकसान के लिए घरेलू इलाज क्या है?

एक्सपर्ट: डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज

सवाल- होली के सिंथेटिक रंगों में कौन-से खतरनाक केमिकल्स होते हैं?

जवाब- होली के सिंथेटिक रंगों में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइड और एल्युमिनियम ब्रोमाइड जैसे केमिकल्स होते हैं। ग्राफिक में देखिए किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है-

सवाल- इन केमिकल्स के कारण क्या हेल्थ रिस्क हो सकता है?

जवाब- सिंथेटिक रंगों में मौजूद ये केमिकल्स शरीर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ की तरह होते हैं।

  • स्किन बर्न और एलर्जी: लेड और मरकरी से स्किन पर गहरे जख्म, लाल चकत्ते और डर्मेटाइटिस (एक्जिमा) हो सकता है।
  • आंखों को खतरा: कॉपर सल्फेट और सिलिका (केमिकल्स) आंखों की पुतली (कॉर्निया) को डैमेज कर सकते हैं, जिससे अंधापन या गंभीर संक्रमण का रिस्क रहता है।
  • लंग्स डैमेज: सांस के जरिए ये बारीक कण फेफड़ों में पहुंचने से अस्थमा का रिस्क बढ़ता है।
  • लिवर डैमेज: अगर ये रंग स्किन के जरिए एब्जॉर्ब होकर अंदर जाते हैं तो किडनी और लिवर की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं।

सवाल- होली खेलने के बाद कुछ लोगों की स्किन पर रैशेज, दाने क्यों हो जाते हैं?

जवाब- स्किन पर रैशेज और दाने आमतौर पर रंगों में मिले तेज केमिकल्स की वजह से होते हैं। कई सिंथेटिक रंगों में ऐसे तत्व होते हैं, जो स्किन की ऊपरी प्रोटेक्टिव लेयर को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे खुजली, जलन, लाल चकत्ते और छोटे-छोटे दाने निकल सकते हैं।

अगर रंग देर तक स्किन पर लगा रहे या रंगों को रगड़कर धुला जाए, तो समस्या बढ़ सकती है। जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है या जिन्हें पहले से एलर्जी है, उन्हें ज्यादा दिक्कत हो सकती है।

सवाल- किन लोगों को रंगों से एलर्जी या स्किन रिएक्शन का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, जिन्हें एक्जिमा, एलर्जी या ड्राई स्किन की समस्या है। उन्हें रंगों से रिएक्शन का ज्यादा खतरा होता है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनकी स्किन की सेफ्टी लेयर कमजोर होती है और जल्दी प्रभावित हो सकती है। सिंथेटिक रंगो के रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर होली खेलने के बाद स्किन पर दाने या रैशेज हो जाएं तो तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- रंगों से हुई स्किन एलर्जी को नजरअंदाज न करें, तुरंत जरूरी देखभाल करें।

  • सबसे पहले स्किन को ठंडे या नॉर्मल पानी से धीरे-धीरे धोएं।
  • माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें, स्किन को रगड़ने से बचें।
  • प्रभावित जगह पर कैलामाइन लोशन या एलोवेरा जेल लगाएं।
  • खुजली हो तो डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवा लें।
  • स्किन को मॉइश्चराइज रखें, ताकि बैरियर रिपेयर हो सके।
  • धूप और गर्मी से बचें, इससे जलन बढ़ सकती है।
  • लक्षण बढ़े या पस/सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल- क्या दाने या रैशेज होने पर कोई घरेलू इलाज कारगर होता है?

जवाब- हल्के रैशेज में घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन सावधानी जरूरी है।

  • ठंडे पानी से स्किन को साफ करें, जलन कम होती है।
  • एलोवेरा जेल लगाने से सूजन और खुजली में राहत मिलती है।
  • नारियल तेल स्किन की नमी बनाए रखता है और बैरियर (स्किन को प्रोटेक्ट करने वाली लेयर) सुधारता है।
  • ठंडी दूध की पट्टी (कम्प्रेस) लगाने से जलन शांत होती है।
  • ओटमील (जई) का लेप स्किन को राहत देता है।
  • खुजलाने से बचें, इससे इंफेक्शन बढ़ सकता है।

नोट: ये उपाय हल्की-फुल्की समस्याओं के लिए होते हैं। अगर लक्षण गंभीर हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

ग्राफिक में देखिए, किस समस्या में क्या घरेलू उपाय कर सकते हैं-

सवाल- स्किन पर दिख रहे कौन-से लक्षण सामान्य हैं और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

जवाब- होली के बाद स्किन पर हल्के रिएक्शन आम हैं, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। इन्हें पहचानना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज मिल सके। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या बार-बार रंग लगने से स्किन की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है?

जवाब- हां, बार-बार रंग लगाने से स्किन की प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है।

  • सिंथेटिक रंगों के केमिकल्स स्किन की बाहरी परत (लिपिड बैरियर) को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • यह बैरियर कमजोर होने पर स्किन ज्यादा संवेदनशील हो जाती है।
  • इसके कारण खुजली, रैशेज और जलन हो सकती है।
  • स्किन में रूखापन हो सकता है और कटे हुए छोटे निशान बन सकते हैं।
  • संक्रमण या एलर्जी का रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- सिंथेटिक कलर्स के अलावा हमारी किन गलतियों से स्किन डैमेज का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- स्किन डैमेज का रिस्क सिर्फ सिंथेटिक रंगों से नहीं, बल्कि कुछ आदतों और गलतियों से भी बढ़ता है-

  • रंग खेलने के तुरंत बाद साबुन से जोर-जोर से रगड़ना।
  • रंगों से पहले स्किन पर तेल या मॉइश्चराइजर न लगाना।
  • आंख, मुंह या नाक में रंग जाने से।
  • बार-बार गर्म पानी या हार्श केमिकल क्लींजर का इस्तेमाल करना।
  • रंग खेलने के बाद पर्याप्त मॉइश्चराइजर न लगाना।
  • धूप में बिना सनस्क्रीन लगाए निकलना।
  • संवेदनशील स्किन या एलर्जी होने पर भी सावधानी न बरतना।

सवाल- हेल्दी और चमकदार स्किन के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब- सही आदतें और सुरक्षा उपाय अपनाकर स्किन को अंदर और बाहर दोनों तरह से हेल्दी रखा जा सकता है।

  • संतुलित आहार लें- फल, सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स स्किन को पोषण देते हैं।
  • पर्याप्त पानी पिएं- हाइड्रेशन से स्किन नरम और चमकदार रहती है।
  • यूवी किरणों से सुरक्षा- रोज 30+ SPF की सनस्क्रीन लगाएं।
  • नियमित क्लीनिंग- दिन में 2 बार माइल्ड क्लींजर से चेहरा धोएं।
  • मॉइश्चराइजिंग- इससे स्किन में नमी भी रहती है।
  • हल्का एक्सफोलिएशन- डेड स्किन सेल्स हट जाती हैं।
  • पर्याप्त नींद- 7-8 घंटे की नींद में शरीर खुद को रिपेयर करता है।
  • तनाव कम करें- स्ट्रेस हॉर्मोन स्किन को प्रभावित करता है।
  • सिगरेट और शराब न पिएं- इससे स्किन एजिंग की स्पीड कम होती है।

……………………………..

जरूरत की ये खबर भी पढ़ें…

जरूरत की खबर- होली के रंग कैसे छुड़ाएं:पहले से करें ये जरूरी तैयारियां, छुड़ाते हुए बरतें 10 सावधानियां, 6 स्पेशल स्किन फ्रेंडली उबटन

इस साल होली 4 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी। लोग रंग-गुलाल, मिठाई और संगीत के साथ इस पर्व का आनंद लेते हैं। रंग लगाने में तो बहुत मजा आता है, लेकिन जब रंगों को छुड़ाने की बारी आती है तो हालत खराब हो जाती है। पूरी खबर पढ़ें…

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14 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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होली के मौके पर रंग खेलने में आनंद तो खूब आता है, लेकिन यह स्किन के लिए किसी ‘केमिकल वॉर’ से कम नहीं है। सिंथेटिक रंगों में मौजूद खतरनाक केमिकल्स हमारी स्किन और हेल्थ पर गंभीर असर डाल सकते हैं।

कुछ केमिकल्स आंखों, फेफड़ों और स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, उन्हें इसका जोखिम ज्यादा होता है। सिंथेटिक रंगों के कारण स्किन पर लाल चकत्ते, दाने और असहनीय खुजली हो सकती है। कुछ लोग रंग खेलने के बाद स्किन को साबुन से रगड़कर साफ करने लगते हैं, जिससे स्किन डैमेज हो सकती है।

इसलिए जरूरत की खबर में आज होली के रंगों से होने वाले नुकसानों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है?
  • किस केमिकल से क्या हेल्थ रिस्क होता है?
  • इससे हुए नुकसान के लिए घरेलू इलाज क्या है?

एक्सपर्ट: डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज

सवाल- होली के सिंथेटिक रंगों में कौन-से खतरनाक केमिकल्स होते हैं?

जवाब- होली के सिंथेटिक रंगों में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फाइड और एल्युमिनियम ब्रोमाइड जैसे केमिकल्स होते हैं। ग्राफिक में देखिए किस रंग में कौन-सा केमिकल होता है-

सवाल- इन केमिकल्स के कारण क्या हेल्थ रिस्क हो सकता है?

जवाब- सिंथेटिक रंगों में मौजूद ये केमिकल्स शरीर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ की तरह होते हैं।

  • स्किन बर्न और एलर्जी: लेड और मरकरी से स्किन पर गहरे जख्म, लाल चकत्ते और डर्मेटाइटिस (एक्जिमा) हो सकता है।
  • आंखों को खतरा: कॉपर सल्फेट और सिलिका (केमिकल्स) आंखों की पुतली (कॉर्निया) को डैमेज कर सकते हैं, जिससे अंधापन या गंभीर संक्रमण का रिस्क रहता है।
  • लंग्स डैमेज: सांस के जरिए ये बारीक कण फेफड़ों में पहुंचने से अस्थमा का रिस्क बढ़ता है।
  • लिवर डैमेज: अगर ये रंग स्किन के जरिए एब्जॉर्ब होकर अंदर जाते हैं तो किडनी और लिवर की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं।

सवाल- होली खेलने के बाद कुछ लोगों की स्किन पर रैशेज, दाने क्यों हो जाते हैं?

जवाब- स्किन पर रैशेज और दाने आमतौर पर रंगों में मिले तेज केमिकल्स की वजह से होते हैं। कई सिंथेटिक रंगों में ऐसे तत्व होते हैं, जो स्किन की ऊपरी प्रोटेक्टिव लेयर को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे खुजली, जलन, लाल चकत्ते और छोटे-छोटे दाने निकल सकते हैं।

अगर रंग देर तक स्किन पर लगा रहे या रंगों को रगड़कर धुला जाए, तो समस्या बढ़ सकती है। जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है या जिन्हें पहले से एलर्जी है, उन्हें ज्यादा दिक्कत हो सकती है।

सवाल- किन लोगों को रंगों से एलर्जी या स्किन रिएक्शन का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है, जिन्हें एक्जिमा, एलर्जी या ड्राई स्किन की समस्या है। उन्हें रंगों से रिएक्शन का ज्यादा खतरा होता है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनकी स्किन की सेफ्टी लेयर कमजोर होती है और जल्दी प्रभावित हो सकती है। सिंथेटिक रंगो के रिस्क ग्राफिक में देखिए-

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  • सबसे पहले स्किन को ठंडे या नॉर्मल पानी से धीरे-धीरे धोएं।
  • माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें, स्किन को रगड़ने से बचें।
  • प्रभावित जगह पर कैलामाइन लोशन या एलोवेरा जेल लगाएं।
  • खुजली हो तो डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवा लें।
  • स्किन को मॉइश्चराइज रखें, ताकि बैरियर रिपेयर हो सके।
  • धूप और गर्मी से बचें, इससे जलन बढ़ सकती है।
  • लक्षण बढ़े या पस/सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल- क्या दाने या रैशेज होने पर कोई घरेलू इलाज कारगर होता है?

जवाब- हल्के रैशेज में घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन सावधानी जरूरी है।

  • ठंडे पानी से स्किन को साफ करें, जलन कम होती है।
  • एलोवेरा जेल लगाने से सूजन और खुजली में राहत मिलती है।
  • नारियल तेल स्किन की नमी बनाए रखता है और बैरियर (स्किन को प्रोटेक्ट करने वाली लेयर) सुधारता है।
  • ठंडी दूध की पट्टी (कम्प्रेस) लगाने से जलन शांत होती है।
  • ओटमील (जई) का लेप स्किन को राहत देता है।
  • खुजलाने से बचें, इससे इंफेक्शन बढ़ सकता है।

नोट: ये उपाय हल्की-फुल्की समस्याओं के लिए होते हैं। अगर लक्षण गंभीर हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

ग्राफिक में देखिए, किस समस्या में क्या घरेलू उपाय कर सकते हैं-

सवाल- स्किन पर दिख रहे कौन-से लक्षण सामान्य हैं और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

जवाब- होली के बाद स्किन पर हल्के रिएक्शन आम हैं, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। इन्हें पहचानना जरूरी है, ताकि समय पर इलाज मिल सके। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या बार-बार रंग लगने से स्किन की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है?

जवाब- हां, बार-बार रंग लगाने से स्किन की प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है।

  • सिंथेटिक रंगों के केमिकल्स स्किन की बाहरी परत (लिपिड बैरियर) को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • यह बैरियर कमजोर होने पर स्किन ज्यादा संवेदनशील हो जाती है।
  • इसके कारण खुजली, रैशेज और जलन हो सकती है।
  • स्किन में रूखापन हो सकता है और कटे हुए छोटे निशान बन सकते हैं।
  • संक्रमण या एलर्जी का रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- सिंथेटिक कलर्स के अलावा हमारी किन गलतियों से स्किन डैमेज का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- स्किन डैमेज का रिस्क सिर्फ सिंथेटिक रंगों से नहीं, बल्कि कुछ आदतों और गलतियों से भी बढ़ता है-

  • रंग खेलने के तुरंत बाद साबुन से जोर-जोर से रगड़ना।
  • रंगों से पहले स्किन पर तेल या मॉइश्चराइजर न लगाना।
  • आंख, मुंह या नाक में रंग जाने से।
  • बार-बार गर्म पानी या हार्श केमिकल क्लींजर का इस्तेमाल करना।
  • रंग खेलने के बाद पर्याप्त मॉइश्चराइजर न लगाना।
  • धूप में बिना सनस्क्रीन लगाए निकलना।
  • संवेदनशील स्किन या एलर्जी होने पर भी सावधानी न बरतना।

सवाल- हेल्दी और चमकदार स्किन के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब- सही आदतें और सुरक्षा उपाय अपनाकर स्किन को अंदर और बाहर दोनों तरह से हेल्दी रखा जा सकता है।

  • संतुलित आहार लें- फल, सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स स्किन को पोषण देते हैं।
  • पर्याप्त पानी पिएं- हाइड्रेशन से स्किन नरम और चमकदार रहती है।
  • यूवी किरणों से सुरक्षा- रोज 30+ SPF की सनस्क्रीन लगाएं।
  • नियमित क्लीनिंग- दिन में 2 बार माइल्ड क्लींजर से चेहरा धोएं।
  • मॉइश्चराइजिंग- इससे स्किन में नमी भी रहती है।
  • हल्का एक्सफोलिएशन- डेड स्किन सेल्स हट जाती हैं।
  • पर्याप्त नींद- 7-8 घंटे की नींद में शरीर खुद को रिपेयर करता है।
  • तनाव कम करें- स्ट्रेस हॉर्मोन स्किन को प्रभावित करता है।
  • सिगरेट और शराब न पिएं- इससे स्किन एजिंग की स्पीड कम होती है।

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