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हर वक्त ईयरफोन यूज करने से खराब हो जाएंगे कान ! बहरा होने से बचाएगा 60/60 रूल, तुरंत करें फॉलो

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Earphone-Induced Hearing Loss: घंटों ईयरफोन का इस्तेमाल करने से युवाओं में बहरापन बढ़ रहा है. कानों की नाजुक कोशिकाएं तेज आवाज से स्थायी रूप से डैमेज हो सकती हैं. इस जोखिम को कम करने के लिए 60/60 नियम फॉलो करना फायदेमंद है. इस नियम के तहत 60% वॉल्यूम पर 60 मिनट से ज्यादा म्यूजिक नहीं सुनना चाहिए. इससे कान सुरक्षित रहेंगे.

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ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल कानों के लिए खतरनाक होता है.

Doctor Tips To Prevent Hearing Loss: आजकल ईयरफोन, एयरपॉड्स और हेडफोन का ट्रेंड बेहताशा बढ़ गया है. हर जगह लोग कान में इस तरह की डिवाइस लगाए नजर आते हैं. म्यूजिक सुनना सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन हर वक्त इन डिवाइस का इस्तेमाल कानों के लिए खतरनाक हो सकता है. सुकून और मनोरंजन के चक्कर में अधिकतर लोग कई घंटे तक ईयरफोन, हेडफोन या एयरपॉड्स लगाए रहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ईयरफोन का हद से ज्यादा इस्तेमाल करने से लोगों के कान खराब हो रहे हैं और उनके सुनने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो रही है. अब तक कई रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुकी है. ऐसे में सवाल है कि कानों को बचाने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कैसे किया जाए?

दिल्ली के सीके बिड़ला हॉस्पिटल में ENT विभाग की लीड कंसल्टेंट डॉ. दीप्ति सिन्हा ने HT को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि ईयरफोन का अत्यधिक उपयोग कानों को परमानेंट डैमेज पहुंचा सकता है. आजकल इस वजह से युवाओं में बहरेपन की समस्या बढ़ रही है. एक जमाने में बुजुर्गों में यह परेशानी होती थी, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. ईयरफोन से होने वाले नुकसान के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं. शोर के कारण होने वाला बहरापन (Noise-induced hearing loss) बहुत धीमी गति से और बिना किसी दर्द के होता है. जब तक व्यक्ति को यह एहसास होता है कि उसे कम सुनाई दे रहा है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है और नुकसान स्थायी हो चुका होता है. आज के युवा घंटों तेज आवाज में गाने सुनते हैं, जो उनके आंतरिक कान की नाजुक कोशिकाओं पर दबाव डालता है, जिससे भविष्य में गंभीर सुनने की समस्याएं पैदा हो रही हैं.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर्स की मानें तो हमारे कान के अंदर बेहद सेंसिटिव हेयर सेल्स होते हैं, जो साउंड वेव्स को ब्रेन तक पहुंचाते हैं. जब हम 85 डेसिबल से अधिक की आवाज पर म्यूजिक सुनते हैं, तो ये कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं. ये कोशिकाएं शरीर के अन्य अंगों की तरह दोबारा रीजेनरेट नहीं होती हैं. एक बार अगर ये कोशिकाएं डैमेज हो गईं, तो आपकी सुनने की क्षमता हमेशा के लिए चली जाती है. तेज आवाज इन कोशिकाओं के लिए किसी शारीरिक चोट की तरह होती है, जो धीरे-धीरे उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देती है. ऐसे में लोगों को बहरेपन से बचने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कम करना चाहिए.

डॉक्टर ने बताया कि ईयरफोन का इस्तेमाल करते वक्त 60/60 रूल फॉलो करना चाहिए. इस नियम के अनुसार आपको अपने ईयरफोन का वॉल्यूम 60% से ऊपर नहीं ले रखना चाहिए और एक बार में 60 मिनट से ज्यादा समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. भले ही आप धीमी आवाज में सुन रहे हों, फिर भी कान के पर्दे और ऑडिटरी सिस्टम को आराम की जरूरत होती है. इसलिए हर एक घंटे के उपयोग के बाद कम से कम 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें, ताकि आपके कान रिकवर कर सकें. अगर आप लगातार ईयरफोन यूज करेंगे, तो कानों को ज्यादा नुकसान होगा.

अक्सर लोग बस, ट्रेन या भीड़भाड़ वाली जगहों पर बाहर का शोर कम करने के लिए ईयरफोन की आवाज बहुत तेज कर देते हैं, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है. इसके विकल्प के रूप में नॉयस-कैंसलिंग ईयरफोन इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. ये ईयरफोन बाहर के शोर को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे आपको आवाज तेज करने की जरूरत नहीं पड़ती और आप धीमी आवाज में भी स्पष्ट सुन पाते हैं. यह एक छोटा सा कदम आपके कानों को बहरेपन से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. अगर आपको कानों में लगातार घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देती है, आवाजें दबी-दबी लगती हैं या भीड़ में लोगों की बातें समझने में कठिनाई होती है, तो इन्हें नजरअंदाज न करें. ये शुरुआती संकेत हैं कि आपके कान खतरे में हैं. इसके अलावा जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, उन्हें साल में एक बार ईएनटी विशेषज्ञ से चेकअप जरूर कराना चाहिए.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल कानों के लिए खतरनाक होता है.

Doctor Tips To Prevent Hearing Loss: आजकल ईयरफोन, एयरपॉड्स और हेडफोन का ट्रेंड बेहताशा बढ़ गया है. हर जगह लोग कान में इस तरह की डिवाइस लगाए नजर आते हैं. म्यूजिक सुनना सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन हर वक्त इन डिवाइस का इस्तेमाल कानों के लिए खतरनाक हो सकता है. सुकून और मनोरंजन के चक्कर में अधिकतर लोग कई घंटे तक ईयरफोन, हेडफोन या एयरपॉड्स लगाए रहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ईयरफोन का हद से ज्यादा इस्तेमाल करने से लोगों के कान खराब हो रहे हैं और उनके सुनने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो रही है. अब तक कई रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुकी है. ऐसे में सवाल है कि कानों को बचाने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कैसे किया जाए?

दिल्ली के सीके बिड़ला हॉस्पिटल में ENT विभाग की लीड कंसल्टेंट डॉ. दीप्ति सिन्हा ने HT को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि ईयरफोन का अत्यधिक उपयोग कानों को परमानेंट डैमेज पहुंचा सकता है. आजकल इस वजह से युवाओं में बहरेपन की समस्या बढ़ रही है. एक जमाने में बुजुर्गों में यह परेशानी होती थी, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. ईयरफोन से होने वाले नुकसान के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं. शोर के कारण होने वाला बहरापन (Noise-induced hearing loss) बहुत धीमी गति से और बिना किसी दर्द के होता है. जब तक व्यक्ति को यह एहसास होता है कि उसे कम सुनाई दे रहा है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है और नुकसान स्थायी हो चुका होता है. आज के युवा घंटों तेज आवाज में गाने सुनते हैं, जो उनके आंतरिक कान की नाजुक कोशिकाओं पर दबाव डालता है, जिससे भविष्य में गंभीर सुनने की समस्याएं पैदा हो रही हैं.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर्स की मानें तो हमारे कान के अंदर बेहद सेंसिटिव हेयर सेल्स होते हैं, जो साउंड वेव्स को ब्रेन तक पहुंचाते हैं. जब हम 85 डेसिबल से अधिक की आवाज पर म्यूजिक सुनते हैं, तो ये कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं. ये कोशिकाएं शरीर के अन्य अंगों की तरह दोबारा रीजेनरेट नहीं होती हैं. एक बार अगर ये कोशिकाएं डैमेज हो गईं, तो आपकी सुनने की क्षमता हमेशा के लिए चली जाती है. तेज आवाज इन कोशिकाओं के लिए किसी शारीरिक चोट की तरह होती है, जो धीरे-धीरे उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देती है. ऐसे में लोगों को बहरेपन से बचने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कम करना चाहिए.

डॉक्टर ने बताया कि ईयरफोन का इस्तेमाल करते वक्त 60/60 रूल फॉलो करना चाहिए. इस नियम के अनुसार आपको अपने ईयरफोन का वॉल्यूम 60% से ऊपर नहीं ले रखना चाहिए और एक बार में 60 मिनट से ज्यादा समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. भले ही आप धीमी आवाज में सुन रहे हों, फिर भी कान के पर्दे और ऑडिटरी सिस्टम को आराम की जरूरत होती है. इसलिए हर एक घंटे के उपयोग के बाद कम से कम 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें, ताकि आपके कान रिकवर कर सकें. अगर आप लगातार ईयरफोन यूज करेंगे, तो कानों को ज्यादा नुकसान होगा.

अक्सर लोग बस, ट्रेन या भीड़भाड़ वाली जगहों पर बाहर का शोर कम करने के लिए ईयरफोन की आवाज बहुत तेज कर देते हैं, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है. इसके विकल्प के रूप में नॉयस-कैंसलिंग ईयरफोन इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. ये ईयरफोन बाहर के शोर को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे आपको आवाज तेज करने की जरूरत नहीं पड़ती और आप धीमी आवाज में भी स्पष्ट सुन पाते हैं. यह एक छोटा सा कदम आपके कानों को बहरेपन से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. अगर आपको कानों में लगातार घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देती है, आवाजें दबी-दबी लगती हैं या भीड़ में लोगों की बातें समझने में कठिनाई होती है, तो इन्हें नजरअंदाज न करें. ये शुरुआती संकेत हैं कि आपके कान खतरे में हैं. इसके अलावा जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, उन्हें साल में एक बार ईएनटी विशेषज्ञ से चेकअप जरूर कराना चाहिए.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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