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होर्मुज से 24 घंटे में सिर्फ 2 जहाज निकले:दुनिया की 20% तेल सप्लाई रुकी; रक्षा मंत्री बोले- भारत की तेल-गैस सप्लाई पर सीधा असर

होर्मुज से 24 घंटे में सिर्फ 2 जहाज निकले:दुनिया की 20% तेल सप्लाई रुकी; रक्षा मंत्री बोले- भारत की तेल-गैस सप्लाई पर सीधा असर

मिडल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) की 6 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से सिर्फ दो कॉमर्शियल जहाज गुजरे। ये दोनों ही मालवाहक जहाज थे। कोई तेल टैंकर इस दौरान वहां से नहीं गुजरा। आमतौर पर इस रास्ते से हर दिन दर्जनों विशाल तेल टैंकर गुजरते हैं। यह स्थिति भारत सहित ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है क्योंकि दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से सप्लाई होता है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से ऑपरेटरों ने जहाज रोके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रैफिक कम होने की सबसे बड़ी वजह इस इलाके में कॉमर्शियल जहाजों पर लगातार हो रहे हमले हैं। इसके चलते शिप ऑपरेटर्स ने सावधानी बरतते हुए अपने जहाजों को रोक दिया है। JMIC ने इस पूरे क्षेत्र के लिए ‘क्रिटिकल’ सिक्योरिटी अलर्ट जारी कर रखा है। इजराइल-ईरान जंग से कच्चा तेल 83 डॉलर के पार पहुंचा ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के कारण ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें आज 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। एक्सपर्ट अनुमान लगा रहे हैं कि अगर ये जंग लंबी चली और होर्मुज बंद रहा तो क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से होती है। वर्तमान में कई जहाज फारस की खाड़ी में ही खड़े हैं या फिर लंबे रास्तों की तलाश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री बोले- ‘न्यू नॉर्मल’ बनना खतरनाक खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि होर्मुज या पूरा फारस की खाड़ी वाला इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जब इस क्षेत्र में कोई बाधा या रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है। राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी कि ये अनिश्चितताएं सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती हैं। मौजूदा स्थिति काफी जटिल हो गई है और भविष्य में यह और भी ज्यादा अस्थिर हो जाएगी। जिस तरह से अलग-अलग देश जमीन, हवा, समुद्र और अब अंतरिक्ष में भी मुकाबला कर रहे हैं, वह चिंता का विषय है। यह असामान्यता अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है। अब होर्मुज स्ट्रेट को जानें… होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत के कुल ‘नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट’ का 10% से ज्यादा हिस्सा इसी रास्ते से सप्लाई होता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग का सामान शामिल है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है।

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होर्मुज से 24 घंटे में सिर्फ 2 जहाज निकले:दुनिया की 20% तेल सप्लाई रुकी; रक्षा मंत्री बोले- भारत की तेल-गैस सप्लाई पर सीधा असर

होर्मुज से 24 घंटे में सिर्फ 2 जहाज निकले:दुनिया की 20% तेल सप्लाई रुकी; रक्षा मंत्री बोले- भारत की तेल-गैस सप्लाई पर सीधा असर

मिडल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) की 6 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से सिर्फ दो कॉमर्शियल जहाज गुजरे। ये दोनों ही मालवाहक जहाज थे। कोई तेल टैंकर इस दौरान वहां से नहीं गुजरा। आमतौर पर इस रास्ते से हर दिन दर्जनों विशाल तेल टैंकर गुजरते हैं। यह स्थिति भारत सहित ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है क्योंकि दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से सप्लाई होता है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के डर से ऑपरेटरों ने जहाज रोके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रैफिक कम होने की सबसे बड़ी वजह इस इलाके में कॉमर्शियल जहाजों पर लगातार हो रहे हमले हैं। इसके चलते शिप ऑपरेटर्स ने सावधानी बरतते हुए अपने जहाजों को रोक दिया है। JMIC ने इस पूरे क्षेत्र के लिए ‘क्रिटिकल’ सिक्योरिटी अलर्ट जारी कर रखा है। इजराइल-ईरान जंग से कच्चा तेल 83 डॉलर के पार पहुंचा ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के कारण ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें आज 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। एक्सपर्ट अनुमान लगा रहे हैं कि अगर ये जंग लंबी चली और होर्मुज बंद रहा तो क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से होती है। वर्तमान में कई जहाज फारस की खाड़ी में ही खड़े हैं या फिर लंबे रास्तों की तलाश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री बोले- ‘न्यू नॉर्मल’ बनना खतरनाक खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि होर्मुज या पूरा फारस की खाड़ी वाला इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जब इस क्षेत्र में कोई बाधा या रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है। राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी कि ये अनिश्चितताएं सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती हैं। मौजूदा स्थिति काफी जटिल हो गई है और भविष्य में यह और भी ज्यादा अस्थिर हो जाएगी। जिस तरह से अलग-अलग देश जमीन, हवा, समुद्र और अब अंतरिक्ष में भी मुकाबला कर रहे हैं, वह चिंता का विषय है। यह असामान्यता अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है। अब होर्मुज स्ट्रेट को जानें… होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत के कुल ‘नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट’ का 10% से ज्यादा हिस्सा इसी रास्ते से सप्लाई होता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग का सामान शामिल है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है।

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