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Nepal Election 2026 Analysis; Next Prime Minister Name

Nepal Election 2026 Analysis; Next Prime Minister Name

‘गफ धेरै भयो, अब काम चाहिन्छ, नेपालको मुहार फेर्ने, बालेन चाहिन्छ। पुरानोलाई बिदाइ, नयांलाई अवसर, सबैको एउटै नारा- ‘अबकी बार, बालेन सरकार’।

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एक महीने पहले तक ये एक गाना था। अब नेपाल की हकीकत है। नेपाल में बालेन सरकार आनी तय है। बालेन शाह राजनीति में आने से पहले रैपर रहे हैं। नेपाल चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी नेता के लिए पॉप कल्चर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।

165 सीटों पर हुए चुनाव में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 7 मार्च की रात 8 बजे तक 64 सीटें जीत चुकी है और 58 पर आगे है। यानी पार्टी को कुल 122 सीटों पर बढ़त मिली है। नेपाल में सरकार बनाने के लिए 138 सीटों की जरूरत है।

इसे ऊपर दिए गीत के हिंदी में मतलब से समझिए- ‘बातें बहुत हो गईं, अब काम चाहिए, नेपाल की सूरत बदलने के लिए बालेन चाहिए।’ ‘पुरानों को विदाई और नए को अवसर, सबका एक ही नारा है- अबकी बार, बालेन सरकार।’

बालेन शाह छापा-5 सीट से 49,614 वोट से जीत गए हैं। उनकी पार्टी जीत रही है, लेकिन ये भारत के लिए बुरी खबर हो सकती है। छोटे से पॉलिटिकल करियर में बालेन शाह भारत के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करते रहे हैं। नेपाल सरकार और कोर्ट को भारत का गुलाम बता चुके हैं। बालेन ने नवंबर 2025 में सोशल मीडिया पर भारत, चीन और अमेरिका के लिए गाली लिख दी थी।

बालेन शाह के सत्ता में आने पर क्या नेपाल-भारत के रिश्ते बिगड़ेंगे, नेपाल के लोग भारत के साथ कैसे रिश्ते चाहते हैं? इस पर हमने काठमांडू में आम लोगों, Gen Z लीडर्स, बालेन की पार्टी के नेताओं और एक्सपर्ट से बात की।

राजनीति में आते ही बालेन का भारत विरोध शुरू नेपाल में 5 मार्च को वोटिंग हुई थी। चुनाव के अभी सिर्फ रुझान आए हैं, पूरे नतीजे 20 मार्च तक आएंगे। शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी एकतरफा जीत रही है। मई, 2022 में बालेन शाह काठमांडू के मेयर बने थे। इसके बाद से ही भारत विरोधी रुख के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने अपनी छवि राष्ट्रवादी नेता के तौर पर बनाई है। 2022 में मेयर रहते हुए फिल्म ‘आदिपुरुष’ से नाराज होकर काठमांडू में भारतीय फिल्में बैन कर दी थीं।

उनका आरोप था कि आदिपुरुष में सीता को भारत की बेटी बताया गया है, जो नेपाल का अपमान है। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद बैन हट गया। बालेन शाह का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर नेपाल सरकार और कोर्ट का भारत का गुलाम बता दिया।

भारत के साथ चीन के भी विरोधी 2023 में भारतीय संसद में अखंड भारत का नक्शा दिखाए जाने के जवाब में बालेन शाह ने अपने ऑफिस में ग्रेटर नेपाल का मैप लगा लिया। इसमें भारत की कई जगहों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

सबसे ज्यादा विवाद नवंबर 2025 में फेसबुक पर की उनकी पोस्ट के बाद हुआ। बालेन शाह ने भारत, चीन समेत कुछ और देशों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट किया। बाद में इसे डिलीट भी कर दिया। हालांकि, तब तक ये पोस्ट वायरल हो चुकी थी।

लोग बोले- राजनीति के लिए भारत से दोस्ती न टूटे बालेन शाह का रुख भले ही भारत विरोधी रहा हो, लेकिन नेपाल के लोग भारत से अच्छे रिश्ते चाहते है। काठमांडू यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 23 साल के समीर मानते हैं कि भारत, नेपाल और चीन को मिलकर रहना चाहिए। बालेन शाह के भारत और चीन विरोधी बयानों को समीर राजनीति बताते हैं।

वे कहते हैं, ‘नेपाल के लोगों में भारत के खिलाफ कोई भावना नहीं है। हम भारत से प्यार करते हैं। हमारा रोटी-बेटी का रिश्ता है। कई बार नेता अपने फायदे और वोट के लिए अलग-अलग बातें करते हैं।’

‘भारत भी बालेन शाह पर भरोसा दिखाए’ 55 साल के कृष्णा विश्वकर्मा नई सरकार से भारत के साथ दोस्ताना बर्ताव की उम्मीद जताते हैं। वे कहते हैं कि हमारे बीच भाईचारा होना चाहिए। चीन पड़ोसी देश है, इसलिए उसे भी साथ लेकर चलना चाहिए। कृष्णा मानते हैं कि भारत और नेपाल के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्ते बहुत गहरे हैं। वे कहते हैं कि अभी लोगों में बालेन शाह के नेतृत्व को लेकर उम्मीद और भरोसा दिख रहा है।

40 साल के मिलन मानते हैं कि नेपाल को भारत और चीन का छोड़कर अपने बारे में सोचना चाहिए। बालेन शाह को भारत विरोधी बयानों पर मिलन कहते हैं, ‘भारत और नेपाल के रिश्तों के खिलाफ बोलना सही नहीं है। कुछ नेता या लोग अपने-अपने तरीके से बातें करते हैं, लेकिन आम लोगों की सोच ऐसी नहीं है। हमें आपसी रिश्तों को खराब करने की बजाय बेहतर बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।’

Gen Z लीडर बोले- बांटने वाली राजनीति से बचें बालेन नेपाल में सितंबर में Gen Z प्रोटेस्ट हुआ था। इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उस वक्त भी बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की खबरें थी। वे युवाओं में पॉपुलर भी हैं। हमने Gen Z प्रोटेस्ट को लीड करने वाले नेताओं से भी बात की। 25 साल की तनुजा पांडे प्रोटेस्ट के बड़े चेहरों में से एक हैं। वे बालेन शाह की राजनीति को पॉपुलिस्ट और बांटने वाली मानती हैं।

तनुजा कहती हैं कि बालेन युवा नेता हैं और लोगों को उनसे उम्मीदें हैं, लेकिन काठमांडू का मेयर रहते हुए उन्होंने काम नहीं किए। उनके ‘हम बनाम वे’ की राजनीति और उकसाने वाले बयान सुनकर फिक्र होती है। हम प्रोटेस्ट के समय इसी तरह की राजनीति से छुटकारा चाहते थे।

तनुजा आगे कहती हैं कि नेपाल अपनी लोकेशन की वजह से अहम देश है। इसमें भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों की दिलचस्पी स्वाभाविक है। हमारी लीडरशिप पर निर्भर करता है कि वह इसे मौके में कैसे बदले।

Gen Z प्रोटेस्ट के लीडर टंका धामी भी बालेन शाह से नाराज हैं। वे कहते हैं-

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हमें बालेन शाह के एजेंडे और डेवलपमेंट के रोडमैप पर शक है। हमें साफ दिखना चाहिए कि वे देश को आगे कैसे ले जाना चाहते हैं।

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टंका कहते हैं, ‘हम चाहते हैं कि भारत नेपाल की तरक्की में मदद करे। कुछ लोग एंटी-इंडिया प्रचार करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम भारत के लिए गलत भावना नहीं रखते। हम दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते चाहते हैं।’

एक्सपर्ट बोले- राजनीति से अलग भारत से अच्छे रिश्ते मजबूरी बालेन शाह ने दिसंबर 2025 में ही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जॉइन की थी। ये पार्टी नेपाल के मशहूर होस्ट रहे रवि लामिछाने ने बनाई थी। रवि चितवन-2 सीट से आगे चल रहे हैं। बालेन और रवि दोनों ही फायरब्रांड और भारत विरोधी नेता माने जाते हैं। दोनों की राजनीति समझने के लिए हमने नेपाल के पत्रकारों से बात की।

नेपाल की हिंदी साप्ताहिक पत्रिका हिमालिनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सच्चिदानंद मिश्र मानते हैं, ‘आने वाली सरकार को भारत से अच्छे संबंध रखने ही होंगे। वे कहते हैं, ‘बालेन शाह और रवि दोनों भारत विरोध के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस चुनाव में दोनों पूरी तरह शांत रहे। वे जानते हैं कि तराई का वोट भारत से जुड़े रिश्तों से प्रभावित होता है।’

‘चीन भी इस बार खुलकर दखल करता नहीं दिख रहा। वह चुपचाप सब देख रहा है। उसकी चिंता दलाई लामा समर्थकों को लेकर ज्यादा है। खुलकर कोई भी पार्टी दलाई लामा के समर्थन में सामने नहीं आएगी, लेकिन हर पार्टी में कुछ न कुछ समर्थक मौजूद हैं।’

सीनियर पत्रकार कृष्णा डुंगाना भी मानते हैं नई सरकार को भारत और चीन दोनों से संबंध बनाए रखने होंगे। यही नेपाल की विदेश नीति रही है। वे कहते हैं, ‘उम्मीद है कि भारत सहित सभी देश चुनाव परिणाम को मानेंगे।’

सीनियर जर्नलिस्ट युबराज घिमिरे बताते हैं कि 2006 के बाद से भारत की छवि नेपाल में कमजोर हुई है। 2015 की अघोषित नाकाबंदी अब भी लोगों को याद है। दूसरी ओर, चीन ने निवेश के साथ अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। नेपाल में लोग बाहरी दखल से सावधान हैं। युबराज बालेन की सरकार बनने की स्थिति में Gen Z आंदोलन के वादे पूरे करने को चुनौती मानते हैं।

बालेन की पार्टी बोली- भारत से अच्छे रिश्ते बनाए रखेंगे हमने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सीनियर लीडर कुमार आनंद मिश्र से बात की। वे पार्टी को बहुमत मिलने की उम्मीद जताते हैं। साथ ही दावा करते हैं कि अगर अपने घोषणा-पत्र के वादे पूरे नहीं किए, तो अगली बार वोट मांगने नहीं आएंगे। भारत और नेपाल के रिश्तों पर कुमार आनंद कहते हैं कि हमारी नीति संतुलित और व्यवहारिक रहेगी। आप अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते। नेपाल खुशनसीब है कि उसके दोनों ओर बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं।

बालेन शाह के भारत विरोधी बयानों पर कुमार आनंद कहते हैं कि वे राष्ट्रीय नेता हैं। चुनाव अभियान में उनका फोकस विकास और सुशासन पर है। पार्टी की नीतियां सामूहिक निर्णय से चलती हैं। किसी भी देश के साथ रिश्ते बिगाड़ने का कोई इरादा नहीं है। हमारा मानना है कि नेपाल अपने दोनों पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखेगा।

नेपाल से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. सेक्स वर्क के लिए बदनाम थामेल की नाइट लाइफ ठप

नेपाल की राजधानी काठमांडू का थामेल एरिया विदेशी टूरिस्ट्स की पहली पसंद है। सबसे मशहूर बार-पब यहीं हैं। नेपाल में 5 मार्च को चुनाव हैं। थामेल में भी इसका असर साफ दिखता है। यहां स्पा सेंटर के नाम पर जिस्मफरोशी का धंधा चलता है। चुनाव में सख्ती और पुलिस की गश्ती की वजह से बीते 10-12 दिन से सब बंद है। पुलिस की सख्ती की वजह से एजेंट भी रिस्क नहीं लेना चाहते। पढ़ें पूरी खबर…

2. चुनाव में कहां गायब हैं सरकार गिराने वाले Gen Z लीडर

नेपाल में हुए Gen Z प्रोटेस्ट के बड़े चेहरों में से एक टंका धामी आने वाले चुनाव को लेकर उत्साहित हैं। वे मानते हैं कि प्रोटेस्ट ने चुनाव में पॉलिटिकल पार्टियों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। हालांकि एक और Gen Z लीडर तनुजा पांडे की राय इससे अलग है। वे कहती हैं, ‘सियासी दलों ने हमारे आंदोलन का जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया और फिर नजरअंदाज कर दिया।‘ पढ़ें पूरी खबर…

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‘गफ धेरै भयो, अब काम चाहिन्छ, नेपालको मुहार फेर्ने, बालेन चाहिन्छ। पुरानोलाई बिदाइ, नयांलाई अवसर, सबैको एउटै नारा- ‘अबकी बार, बालेन सरकार’।

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एक महीने पहले तक ये एक गाना था। अब नेपाल की हकीकत है। नेपाल में बालेन सरकार आनी तय है। बालेन शाह राजनीति में आने से पहले रैपर रहे हैं। नेपाल चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी नेता के लिए पॉप कल्चर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।

165 सीटों पर हुए चुनाव में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 7 मार्च की रात 8 बजे तक 64 सीटें जीत चुकी है और 58 पर आगे है। यानी पार्टी को कुल 122 सीटों पर बढ़त मिली है। नेपाल में सरकार बनाने के लिए 138 सीटों की जरूरत है।

इसे ऊपर दिए गीत के हिंदी में मतलब से समझिए- ‘बातें बहुत हो गईं, अब काम चाहिए, नेपाल की सूरत बदलने के लिए बालेन चाहिए।’ ‘पुरानों को विदाई और नए को अवसर, सबका एक ही नारा है- अबकी बार, बालेन सरकार।’

बालेन शाह छापा-5 सीट से 49,614 वोट से जीत गए हैं। उनकी पार्टी जीत रही है, लेकिन ये भारत के लिए बुरी खबर हो सकती है। छोटे से पॉलिटिकल करियर में बालेन शाह भारत के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करते रहे हैं। नेपाल सरकार और कोर्ट को भारत का गुलाम बता चुके हैं। बालेन ने नवंबर 2025 में सोशल मीडिया पर भारत, चीन और अमेरिका के लिए गाली लिख दी थी।

बालेन शाह के सत्ता में आने पर क्या नेपाल-भारत के रिश्ते बिगड़ेंगे, नेपाल के लोग भारत के साथ कैसे रिश्ते चाहते हैं? इस पर हमने काठमांडू में आम लोगों, Gen Z लीडर्स, बालेन की पार्टी के नेताओं और एक्सपर्ट से बात की।

राजनीति में आते ही बालेन का भारत विरोध शुरू नेपाल में 5 मार्च को वोटिंग हुई थी। चुनाव के अभी सिर्फ रुझान आए हैं, पूरे नतीजे 20 मार्च तक आएंगे। शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी एकतरफा जीत रही है। मई, 2022 में बालेन शाह काठमांडू के मेयर बने थे। इसके बाद से ही भारत विरोधी रुख के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने अपनी छवि राष्ट्रवादी नेता के तौर पर बनाई है। 2022 में मेयर रहते हुए फिल्म ‘आदिपुरुष’ से नाराज होकर काठमांडू में भारतीय फिल्में बैन कर दी थीं।

उनका आरोप था कि आदिपुरुष में सीता को भारत की बेटी बताया गया है, जो नेपाल का अपमान है। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद बैन हट गया। बालेन शाह का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर नेपाल सरकार और कोर्ट का भारत का गुलाम बता दिया।

भारत के साथ चीन के भी विरोधी 2023 में भारतीय संसद में अखंड भारत का नक्शा दिखाए जाने के जवाब में बालेन शाह ने अपने ऑफिस में ग्रेटर नेपाल का मैप लगा लिया। इसमें भारत की कई जगहों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

सबसे ज्यादा विवाद नवंबर 2025 में फेसबुक पर की उनकी पोस्ट के बाद हुआ। बालेन शाह ने भारत, चीन समेत कुछ और देशों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट किया। बाद में इसे डिलीट भी कर दिया। हालांकि, तब तक ये पोस्ट वायरल हो चुकी थी।

लोग बोले- राजनीति के लिए भारत से दोस्ती न टूटे बालेन शाह का रुख भले ही भारत विरोधी रहा हो, लेकिन नेपाल के लोग भारत से अच्छे रिश्ते चाहते है। काठमांडू यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 23 साल के समीर मानते हैं कि भारत, नेपाल और चीन को मिलकर रहना चाहिए। बालेन शाह के भारत और चीन विरोधी बयानों को समीर राजनीति बताते हैं।

वे कहते हैं, ‘नेपाल के लोगों में भारत के खिलाफ कोई भावना नहीं है। हम भारत से प्यार करते हैं। हमारा रोटी-बेटी का रिश्ता है। कई बार नेता अपने फायदे और वोट के लिए अलग-अलग बातें करते हैं।’

‘भारत भी बालेन शाह पर भरोसा दिखाए’ 55 साल के कृष्णा विश्वकर्मा नई सरकार से भारत के साथ दोस्ताना बर्ताव की उम्मीद जताते हैं। वे कहते हैं कि हमारे बीच भाईचारा होना चाहिए। चीन पड़ोसी देश है, इसलिए उसे भी साथ लेकर चलना चाहिए। कृष्णा मानते हैं कि भारत और नेपाल के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्ते बहुत गहरे हैं। वे कहते हैं कि अभी लोगों में बालेन शाह के नेतृत्व को लेकर उम्मीद और भरोसा दिख रहा है।

40 साल के मिलन मानते हैं कि नेपाल को भारत और चीन का छोड़कर अपने बारे में सोचना चाहिए। बालेन शाह को भारत विरोधी बयानों पर मिलन कहते हैं, ‘भारत और नेपाल के रिश्तों के खिलाफ बोलना सही नहीं है। कुछ नेता या लोग अपने-अपने तरीके से बातें करते हैं, लेकिन आम लोगों की सोच ऐसी नहीं है। हमें आपसी रिश्तों को खराब करने की बजाय बेहतर बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।’

Gen Z लीडर बोले- बांटने वाली राजनीति से बचें बालेन नेपाल में सितंबर में Gen Z प्रोटेस्ट हुआ था। इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उस वक्त भी बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की खबरें थी। वे युवाओं में पॉपुलर भी हैं। हमने Gen Z प्रोटेस्ट को लीड करने वाले नेताओं से भी बात की। 25 साल की तनुजा पांडे प्रोटेस्ट के बड़े चेहरों में से एक हैं। वे बालेन शाह की राजनीति को पॉपुलिस्ट और बांटने वाली मानती हैं।

तनुजा कहती हैं कि बालेन युवा नेता हैं और लोगों को उनसे उम्मीदें हैं, लेकिन काठमांडू का मेयर रहते हुए उन्होंने काम नहीं किए। उनके ‘हम बनाम वे’ की राजनीति और उकसाने वाले बयान सुनकर फिक्र होती है। हम प्रोटेस्ट के समय इसी तरह की राजनीति से छुटकारा चाहते थे।

तनुजा आगे कहती हैं कि नेपाल अपनी लोकेशन की वजह से अहम देश है। इसमें भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों की दिलचस्पी स्वाभाविक है। हमारी लीडरशिप पर निर्भर करता है कि वह इसे मौके में कैसे बदले।

Gen Z प्रोटेस्ट के लीडर टंका धामी भी बालेन शाह से नाराज हैं। वे कहते हैं-

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हमें बालेन शाह के एजेंडे और डेवलपमेंट के रोडमैप पर शक है। हमें साफ दिखना चाहिए कि वे देश को आगे कैसे ले जाना चाहते हैं।

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टंका कहते हैं, ‘हम चाहते हैं कि भारत नेपाल की तरक्की में मदद करे। कुछ लोग एंटी-इंडिया प्रचार करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम भारत के लिए गलत भावना नहीं रखते। हम दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते चाहते हैं।’

एक्सपर्ट बोले- राजनीति से अलग भारत से अच्छे रिश्ते मजबूरी बालेन शाह ने दिसंबर 2025 में ही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी जॉइन की थी। ये पार्टी नेपाल के मशहूर होस्ट रहे रवि लामिछाने ने बनाई थी। रवि चितवन-2 सीट से आगे चल रहे हैं। बालेन और रवि दोनों ही फायरब्रांड और भारत विरोधी नेता माने जाते हैं। दोनों की राजनीति समझने के लिए हमने नेपाल के पत्रकारों से बात की।

नेपाल की हिंदी साप्ताहिक पत्रिका हिमालिनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सच्चिदानंद मिश्र मानते हैं, ‘आने वाली सरकार को भारत से अच्छे संबंध रखने ही होंगे। वे कहते हैं, ‘बालेन शाह और रवि दोनों भारत विरोध के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस चुनाव में दोनों पूरी तरह शांत रहे। वे जानते हैं कि तराई का वोट भारत से जुड़े रिश्तों से प्रभावित होता है।’

‘चीन भी इस बार खुलकर दखल करता नहीं दिख रहा। वह चुपचाप सब देख रहा है। उसकी चिंता दलाई लामा समर्थकों को लेकर ज्यादा है। खुलकर कोई भी पार्टी दलाई लामा के समर्थन में सामने नहीं आएगी, लेकिन हर पार्टी में कुछ न कुछ समर्थक मौजूद हैं।’

सीनियर पत्रकार कृष्णा डुंगाना भी मानते हैं नई सरकार को भारत और चीन दोनों से संबंध बनाए रखने होंगे। यही नेपाल की विदेश नीति रही है। वे कहते हैं, ‘उम्मीद है कि भारत सहित सभी देश चुनाव परिणाम को मानेंगे।’

सीनियर जर्नलिस्ट युबराज घिमिरे बताते हैं कि 2006 के बाद से भारत की छवि नेपाल में कमजोर हुई है। 2015 की अघोषित नाकाबंदी अब भी लोगों को याद है। दूसरी ओर, चीन ने निवेश के साथ अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। नेपाल में लोग बाहरी दखल से सावधान हैं। युबराज बालेन की सरकार बनने की स्थिति में Gen Z आंदोलन के वादे पूरे करने को चुनौती मानते हैं।

बालेन की पार्टी बोली- भारत से अच्छे रिश्ते बनाए रखेंगे हमने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सीनियर लीडर कुमार आनंद मिश्र से बात की। वे पार्टी को बहुमत मिलने की उम्मीद जताते हैं। साथ ही दावा करते हैं कि अगर अपने घोषणा-पत्र के वादे पूरे नहीं किए, तो अगली बार वोट मांगने नहीं आएंगे। भारत और नेपाल के रिश्तों पर कुमार आनंद कहते हैं कि हमारी नीति संतुलित और व्यवहारिक रहेगी। आप अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते। नेपाल खुशनसीब है कि उसके दोनों ओर बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं।

बालेन शाह के भारत विरोधी बयानों पर कुमार आनंद कहते हैं कि वे राष्ट्रीय नेता हैं। चुनाव अभियान में उनका फोकस विकास और सुशासन पर है। पार्टी की नीतियां सामूहिक निर्णय से चलती हैं। किसी भी देश के साथ रिश्ते बिगाड़ने का कोई इरादा नहीं है। हमारा मानना है कि नेपाल अपने दोनों पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखेगा।

नेपाल से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. सेक्स वर्क के लिए बदनाम थामेल की नाइट लाइफ ठप

नेपाल की राजधानी काठमांडू का थामेल एरिया विदेशी टूरिस्ट्स की पहली पसंद है। सबसे मशहूर बार-पब यहीं हैं। नेपाल में 5 मार्च को चुनाव हैं। थामेल में भी इसका असर साफ दिखता है। यहां स्पा सेंटर के नाम पर जिस्मफरोशी का धंधा चलता है। चुनाव में सख्ती और पुलिस की गश्ती की वजह से बीते 10-12 दिन से सब बंद है। पुलिस की सख्ती की वजह से एजेंट भी रिस्क नहीं लेना चाहते। पढ़ें पूरी खबर…

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