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सुप्रीम कोर्ट में लुधियाना के याचिकाकर्ता को फटकार:CJI ने कहा- जाओ लुधियाना 2-3 और स्वेटर बेचो, याचिका लिखने वाले नुकसान कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट में लुधियाना के याचिकाकर्ता को फटकार:CJI ने कहा- जाओ लुधियाना 2-3 और स्वेटर बेचो, याचिका लिखने वाले नुकसान कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक नाटकीय घटनाक्रम हुआ। इस घटनाक्रम के केंद्र में लुधियाना का एक होजरी कारोबारी रहा। लुधियाना के कारोबारी ने भारी भरकम कानूनी शब्दों वाली एक जनहित याचिका दायर की। याचिका पीएम केयर्स फंड के बारे में लगाई गई थी। सीजेआई व दो अन्य जजों की पीठ को याचिका पर शक हुआ तो सीजेआई ने कह दिया कि याचिकाकर्ता इसमें किसी और का मुखौटा बनकर काम कर रहा है। सीजेआई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और उन्हें पास लुधियाना जाकर स्वेटर बेचने को कहा। पीएम केयर्स फड से संबंधित केस की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ कर रही थी। याचिका में कुछ ऐसे शब्द लिखे थे जिसका मतलब याचिकाकर्ता रजनीश सिद्धू खुद नहीं जानते थे। याचिका देख सीजेआई ने पूछी क्वालिफिकेशन सीजेआई ने जब याचिकाकर्ता की याचिका पढ़ी तो तुरंत उससे उसकी क्वालिफिकेशन पूछ ली। जिस पर उसने कहा कि वह 12 वीं पास है और होजरी का कारोबार करता है। जब CJI ने उनके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि पिछले साल उन्होंने लगभग 5.25 लाख रुपए टैक्स भरा था। याचिकाकर्ता ने जब कहा कि उसने पहले कभी किसी हाईकोर्ट में कोई याचिका दायर नहीं की है और यह उनका सीधे सुप्रीम कोर्ट में पहला मामला है। जिस पर सीजेआई ने कहा कि बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधा लुधियाना से चलके आ गए। याचिका के मसौदे पर संदेह और ‘परीक्षा’ की चुनौती याचिका के मसौदे पर सीजेआई को शक हुआ तो उन्होंने याचिकाकर्ता को कहा कि मैं आपका एग्जाम करवाऊंगा, अगर आपके उसमें 30 प्रतिशत अंक भी आ गए तो मैं मान लूंगा कि पिटीशन आपने बनाई है। सीजेआई ने पूछा इमानदारी से बताएं याचिका किसने तैयार की CJI ने याचिकाकर्ता को इमानदारी से बताने को कहा कि याचिका किसने तैयार की है, अन्यथा उनके ITR विवरण साथ जोड़ने होंगे। याचिकाकर्ता अपने स्टैंड पर अड़े रहे और कहा, “सर, आप मेरा फोन चेक कर सकते हैं।” याचिकाकर्ता ने बताया कि शुरू में उन्होंने सितंबर में ‘मिस्टर दास’ नाम के एक टाइपिस्ट से इसका मसौदा तैयार करवाया था। विजिलेंस की जांच की धमकी दी तो बदला बयान जब कोर्ट ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से जांच कराने की चेतावनी दी, तो याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि उन्होंने किसी वकील से सलाह नहीं ली है। उसने कहा कि मुझे किसी वकील पर भरोसा नहीं है, हालांकि मेरे कुछ अच्छे दोस्त वकील हैं। “फिडुशरी रिस्क” का अर्थ नहीं बता पाए याचिकाकर्ता CJI ने याचिका में इस्तेमाल किए गए शब्दों फिडुशरी रिस्क ऑफ कारपोरेट डोनर्स का अर्थ पूछा तो याचिकाकर्ता इसका उत्तर नहीं दे सके। जब उन्होंने अन्य दलीलें देना शुरू किया, तो CJI ने बीच में टोकते हुए कहा कि सिद्धू साहब, यह तो आपने कागज पर लिख रखा है, किसी वकील ने आपको लिख कर दिया है। अंतिम चेतावनी पर, याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने 3-4 एआई टूल की मदद से खुद ही याचिका तैयार की है, क्योंकि उनके पास वकील करने के पैसे नहीं थे। उन्होंने बताया कि जो टाइपिस्ट है, उनको 4 जैकेट गिफ्ट करी थी, बहुत अच्छे हैं वह, 1 घंटे का 1000 मांग रहे थे। कोर्ट का फैसला और चेतावनी पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसी तुच्छ याचिकाएं दायर न करने की चेतावनी दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा “याचिकाकर्ता ने बिना किसी जिम्मेदारी के यह याचिका दायर की है और अस्पष्ट, बेबुनियाद और अपमानजनक आरोप लगाए हैं। पूछताछ में हमने पाया कि याचिकाकर्ता लुधियाना के एक स्कूल से 10+2 पास एक छोटा व्यापारी है। याचिका की भाषा, शब्दावली और ‘संवैधानिक सिद्धांत’ याचिकाकर्ता की अपनी सोच के नहीं हो सकते।” याचिका खारिज करते हुए CJI ने अंत में कहा “जाओ लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो। जिन लोगों का काम ऐसी याचिकाएं फाइल करवाना है, वे आप पर जुर्माना (costs) लगवाकर आपका और नुकसान करवा देंगे।” सीजेआई और याचिकाकर्ता के बीच हुई बातचीत, पढ़िए… मुख्य न्यायाधीश : क्या आपने याचिका का मसौदा तैयार किया है? याचिकाकर्ता: जी, मैंने खुद तैयार किया है। मैं अपना फोन यहां जमा करा सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: आपकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है? याचिकाकर्ता: 12वीं पास। मुख्य न्यायाधीश: किस स्कूल से? याचिकाकर्ता: सनातन धर्म स्कूल, लुधियाना। मुख्य न्यायाधीश: मैं यहीं अदालत में आपके लिए अंग्रेजी की परीक्षा आयोजित करवा दूंगा। अगर आप 30 अंक ले आते हैं, तब मैं इस पर विचार करूंगा। याचिकाकर्ता: जी हां, मैं दे सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: या तो आप सच बताइए, नहीं तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे और जांच का आदेश देंगे। याचिकाकर्ता: आप मेरा फोन देख सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश: आपने याचिका में लिखा है- “कॉरपोरेट दानदाताओं के लिए फिड्यूशियरी रिस्क”। इसका क्या मतलब है? वकील: मैं याचिका का हवाला दे सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: मैं आखिरी बार पूछ रहा हूं कि यह याचिका किस वकील ने तैयार की है। आपने यह खुद नहीं बनाई है। वकील: मैंने एआई टूल्स पर खोज की थी। मैंने एक टाइपिस्ट को चार जैकेट भी गिफ्ट की थीं और उसने टाइपिंग के लिए 1000 रुपए प्रति घंटे लिए थे। दास सर। मुख्य न्यायाधीश: सुप्रीम कोर्ट के टाइपिस्ट ने यह याचिका तैयार की है। टाइपिस्ट को यहां बुलाइए।

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सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक नाटकीय घटनाक्रम हुआ। इस घटनाक्रम के केंद्र में लुधियाना का एक होजरी कारोबारी रहा। लुधियाना के कारोबारी ने भारी भरकम कानूनी शब्दों वाली एक जनहित याचिका दायर की। याचिका पीएम केयर्स फंड के बारे में लगाई गई थी। सीजेआई व दो अन्य जजों की पीठ को याचिका पर शक हुआ तो सीजेआई ने कह दिया कि याचिकाकर्ता इसमें किसी और का मुखौटा बनकर काम कर रहा है। सीजेआई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और उन्हें पास लुधियाना जाकर स्वेटर बेचने को कहा। पीएम केयर्स फड से संबंधित केस की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ कर रही थी। याचिका में कुछ ऐसे शब्द लिखे थे जिसका मतलब याचिकाकर्ता रजनीश सिद्धू खुद नहीं जानते थे। याचिका देख सीजेआई ने पूछी क्वालिफिकेशन सीजेआई ने जब याचिकाकर्ता की याचिका पढ़ी तो तुरंत उससे उसकी क्वालिफिकेशन पूछ ली। जिस पर उसने कहा कि वह 12 वीं पास है और होजरी का कारोबार करता है। जब CJI ने उनके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि पिछले साल उन्होंने लगभग 5.25 लाख रुपए टैक्स भरा था। याचिकाकर्ता ने जब कहा कि उसने पहले कभी किसी हाईकोर्ट में कोई याचिका दायर नहीं की है और यह उनका सीधे सुप्रीम कोर्ट में पहला मामला है। जिस पर सीजेआई ने कहा कि बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधा लुधियाना से चलके आ गए। याचिका के मसौदे पर संदेह और ‘परीक्षा’ की चुनौती याचिका के मसौदे पर सीजेआई को शक हुआ तो उन्होंने याचिकाकर्ता को कहा कि मैं आपका एग्जाम करवाऊंगा, अगर आपके उसमें 30 प्रतिशत अंक भी आ गए तो मैं मान लूंगा कि पिटीशन आपने बनाई है। सीजेआई ने पूछा इमानदारी से बताएं याचिका किसने तैयार की CJI ने याचिकाकर्ता को इमानदारी से बताने को कहा कि याचिका किसने तैयार की है, अन्यथा उनके ITR विवरण साथ जोड़ने होंगे। याचिकाकर्ता अपने स्टैंड पर अड़े रहे और कहा, “सर, आप मेरा फोन चेक कर सकते हैं।” याचिकाकर्ता ने बताया कि शुरू में उन्होंने सितंबर में ‘मिस्टर दास’ नाम के एक टाइपिस्ट से इसका मसौदा तैयार करवाया था। विजिलेंस की जांच की धमकी दी तो बदला बयान जब कोर्ट ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से जांच कराने की चेतावनी दी, तो याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि उन्होंने किसी वकील से सलाह नहीं ली है। उसने कहा कि मुझे किसी वकील पर भरोसा नहीं है, हालांकि मेरे कुछ अच्छे दोस्त वकील हैं। “फिडुशरी रिस्क” का अर्थ नहीं बता पाए याचिकाकर्ता CJI ने याचिका में इस्तेमाल किए गए शब्दों फिडुशरी रिस्क ऑफ कारपोरेट डोनर्स का अर्थ पूछा तो याचिकाकर्ता इसका उत्तर नहीं दे सके। जब उन्होंने अन्य दलीलें देना शुरू किया, तो CJI ने बीच में टोकते हुए कहा कि सिद्धू साहब, यह तो आपने कागज पर लिख रखा है, किसी वकील ने आपको लिख कर दिया है। अंतिम चेतावनी पर, याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने 3-4 एआई टूल की मदद से खुद ही याचिका तैयार की है, क्योंकि उनके पास वकील करने के पैसे नहीं थे। उन्होंने बताया कि जो टाइपिस्ट है, उनको 4 जैकेट गिफ्ट करी थी, बहुत अच्छे हैं वह, 1 घंटे का 1000 मांग रहे थे। कोर्ट का फैसला और चेतावनी पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसी तुच्छ याचिकाएं दायर न करने की चेतावनी दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा “याचिकाकर्ता ने बिना किसी जिम्मेदारी के यह याचिका दायर की है और अस्पष्ट, बेबुनियाद और अपमानजनक आरोप लगाए हैं। पूछताछ में हमने पाया कि याचिकाकर्ता लुधियाना के एक स्कूल से 10+2 पास एक छोटा व्यापारी है। याचिका की भाषा, शब्दावली और ‘संवैधानिक सिद्धांत’ याचिकाकर्ता की अपनी सोच के नहीं हो सकते।” याचिका खारिज करते हुए CJI ने अंत में कहा “जाओ लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो। जिन लोगों का काम ऐसी याचिकाएं फाइल करवाना है, वे आप पर जुर्माना (costs) लगवाकर आपका और नुकसान करवा देंगे।” सीजेआई और याचिकाकर्ता के बीच हुई बातचीत, पढ़िए… मुख्य न्यायाधीश : क्या आपने याचिका का मसौदा तैयार किया है? याचिकाकर्ता: जी, मैंने खुद तैयार किया है। मैं अपना फोन यहां जमा करा सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: आपकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है? याचिकाकर्ता: 12वीं पास। मुख्य न्यायाधीश: किस स्कूल से? याचिकाकर्ता: सनातन धर्म स्कूल, लुधियाना। मुख्य न्यायाधीश: मैं यहीं अदालत में आपके लिए अंग्रेजी की परीक्षा आयोजित करवा दूंगा। अगर आप 30 अंक ले आते हैं, तब मैं इस पर विचार करूंगा। याचिकाकर्ता: जी हां, मैं दे सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: या तो आप सच बताइए, नहीं तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे और जांच का आदेश देंगे। याचिकाकर्ता: आप मेरा फोन देख सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश: आपने याचिका में लिखा है- “कॉरपोरेट दानदाताओं के लिए फिड्यूशियरी रिस्क”। इसका क्या मतलब है? वकील: मैं याचिका का हवाला दे सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: मैं आखिरी बार पूछ रहा हूं कि यह याचिका किस वकील ने तैयार की है। आपने यह खुद नहीं बनाई है। वकील: मैंने एआई टूल्स पर खोज की थी। मैंने एक टाइपिस्ट को चार जैकेट भी गिफ्ट की थीं और उसने टाइपिंग के लिए 1000 रुपए प्रति घंटे लिए थे। दास सर। मुख्य न्यायाधीश: सुप्रीम कोर्ट के टाइपिस्ट ने यह याचिका तैयार की है। टाइपिस्ट को यहां बुलाइए।

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