Wednesday, 29 Jul 2026 | 09:43 AM

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Sambhal DM-SP Get High Court Warning Over Masjid Namaz

Sambhal DM-SP Get High Court Warning Over Masjid Namaz

सनी गुप्ता | संभल11 घंटे पहले

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संभल डीएम राजेंद्र पेंसिया (काले कोट में) और एसपी केके विश्नोई ने हाल ही में एक साथ शहर में फ्लैग मार्च किया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर संभल DM और SP को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता। अगर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। या फिर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा-

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यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके। अगर वह निजी संपत्ति है, तो राज्य से किसी इजाजत की जरूरत नहीं। कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का दखल सिर्फ वहीं जरूरी है, जहां प्रार्थना या धार्मिक काम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों।

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याचिकाकर्ता मुनाजिर खान के मुताबिक, पिछले साल फरवरी महीने में हयातनगर थाने से पुलिसवाले आए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं। एक बार में 5-6 लोग ही नमाज अदा करें।

इसके बाद मुनाजिर ने 18 जनवरी, 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई। आज (शनिवार) आदेश हाईकोर्ट की साइट पर अपलोड हुआ। अब 16 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

यह याचिकाकर्ता मुनाजिर खान हैं, जिनका कहना है कि मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा।

यह याचिकाकर्ता मुनाजिर खान हैं, जिनका कहना है कि मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा।

सरकारी वकील बोले- कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए प्रशासन ने रोका याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया- रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा। रमजान चल रहा है। ऐसे में परिसर के भीतर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं।

वहीं, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के वकील के तर्क को खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- आपने अब तक मस्जिद या नमाज की जगह की कोई तस्वीर कोर्ट में दाखिल नहीं की है। इस पर याचिकाकर्ता ने समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें नमाज की जगह की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने के लिए अनुमति दे दी। अब वह इसे 16 मार्च से पहले सब्मिट करेंगे।

450 वर्गफीट में मस्जिद, मालिकाना हक दूसरे के नाम पर हयातनगर गांव में 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं। यहां 450 वर्गफीट में घोसिया नाम की मस्जिद है। प्रशासन के मुताबिक, जमीन का गाटा नंबर- 291 है। डॉक्यूमेंट्स में यह जमीन मोहन सिंह और भूराज सिंह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि रमजान में बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद में आते हैं। ऐसे में नमाजियों का संख्या सीमित करने का फैसला ठीक नहीं है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि रमजान में बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद में आते हैं। ऐसे में नमाजियों का संख्या सीमित करने का फैसला ठीक नहीं है।

अब संभल डीएम और एसपी के बारे में जानिए

बरेली के डीएम-एसएसपी हाईकोर्ट में तलब किए गए थे

  • इससे पहले हाईकोर्ट ने घर में नमाज अदा करने से रोकने के मामले में बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को 23 मार्च को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया था कि अगर वे हाजिर नहीं होते तो गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने याची को 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा प्रदान करने का भी निर्देश दिया।
  • यह आदेश भी जस्टिस अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने दिया था। कोर्ट ने मामले में पिछली सुनवाई पर बरेली के डीएम और एसएसपी को एक पुराने आदेश की अवहेलना करने के आरोप में अवमानना नोटिस जारी किया था।
  • बरेली निवासी तारिक खान ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि गत 16 जनवरी को स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें उनके घर के अंदर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी थी। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के उस पूर्व आदेश का उल्लंघन है, जिसमें साफ किया गया था कि निजी परिसर में प्रार्थना के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी नहीं है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर संभल DM और SP को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता। अगर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। या फिर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा-

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यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके। अगर वह निजी संपत्ति है, तो राज्य से किसी इजाजत की जरूरत नहीं। कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का दखल सिर्फ वहीं जरूरी है, जहां प्रार्थना या धार्मिक काम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों।

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याचिकाकर्ता मुनाजिर खान के मुताबिक, पिछले साल फरवरी महीने में हयातनगर थाने से पुलिसवाले आए। उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं। एक बार में 5-6 लोग ही नमाज अदा करें।

इसके बाद मुनाजिर ने 18 जनवरी, 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई। आज (शनिवार) आदेश हाईकोर्ट की साइट पर अपलोड हुआ। अब 16 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

यह याचिकाकर्ता मुनाजिर खान हैं, जिनका कहना है कि मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा।

यह याचिकाकर्ता मुनाजिर खान हैं, जिनका कहना है कि मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा।

सरकारी वकील बोले- कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए प्रशासन ने रोका याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया- रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा। रमजान चल रहा है। ऐसे में परिसर के भीतर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं।

वहीं, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के वकील के तर्क को खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- आपने अब तक मस्जिद या नमाज की जगह की कोई तस्वीर कोर्ट में दाखिल नहीं की है। इस पर याचिकाकर्ता ने समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें नमाज की जगह की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने के लिए अनुमति दे दी। अब वह इसे 16 मार्च से पहले सब्मिट करेंगे।

450 वर्गफीट में मस्जिद, मालिकाना हक दूसरे के नाम पर हयातनगर गांव में 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं। यहां 450 वर्गफीट में घोसिया नाम की मस्जिद है। प्रशासन के मुताबिक, जमीन का गाटा नंबर- 291 है। डॉक्यूमेंट्स में यह जमीन मोहन सिंह और भूराज सिंह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि रमजान में बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद में आते हैं। ऐसे में नमाजियों का संख्या सीमित करने का फैसला ठीक नहीं है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि रमजान में बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद में आते हैं। ऐसे में नमाजियों का संख्या सीमित करने का फैसला ठीक नहीं है।

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  • यह आदेश भी जस्टिस अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने दिया था। कोर्ट ने मामले में पिछली सुनवाई पर बरेली के डीएम और एसएसपी को एक पुराने आदेश की अवहेलना करने के आरोप में अवमानना नोटिस जारी किया था।
  • बरेली निवासी तारिक खान ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि गत 16 जनवरी को स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें उनके घर के अंदर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी थी। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के उस पूर्व आदेश का उल्लंघन है, जिसमें साफ किया गया था कि निजी परिसर में प्रार्थना के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी नहीं है।

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