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Iron Deficiency Symptoms; NFHS-5 Survey

Iron Deficiency Symptoms; NFHS-5 Survey
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  • Iron Deficiency Symptoms; NFHS 5 Survey | Women Anemia Signs, Red Leafy Greens Diet Advice

8 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 (NFHS-5) के मुताबिक, भारत में 15-49 साल की लगभग 57-59% महिलाओं को एनीमिया यानी खून की कमी है। एनीमिया की मुख्य वजह है- आयरन की कमी। आयरन शरीर के लिए क्रिटिकल (बेहद जरूरी) मिनरल है।

आयरन की कमी से शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है। लोग इसके शुरुआती संकेतों को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

कुछ ऐसे फूड्स हैं, जो एनीमिया के खतरे से बचा सकते हैं। रेड लीफी ग्रीन्स (लाल पत्तेदार साग) भी इन्हीं में से एक है। इनमें भरपूर मात्रा में आयरन होता है।

इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि-

  • रेड लीफी ग्रीन्स क्या हैं और इनमें कौन-से पोषक तत्व होते हैं?
  • आयरन डेफिशिएंसी होने पर कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद कुमार अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- आयरन क्या है और ये शरीर में क्या काम करता है?

जवाब- आयरन एक जरूरी मिनरल है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है। शरीर का लगभग 70% आयरन ब्लड में हीमोग्लोबिन के रूप में स्टोर रखता है।

हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स (RBCs) में मौजूद प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर उसे पूरे शरीर में पहुंचाता है। ब्लड में आयरन की कमी होने पर ऑक्सीजन सप्लाई घट जाती है। इससे थकान, कमजोरी और एनीमिया हो सकता है। आयरन शरीर में कौन से जरूरी काम करता है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- प्लांट-बेस्ड आयरन और एनिमल-बेस्ड आयरन में क्या अंतर है?

जवाब- प्लांट-बेस्ड आयरन को ‘नॉन-हीम आयरन’ कहा जाता है, यानी जो हरी सब्जियों, दालों और अनाज में पाया जाता है। शरीर इसे धीरे-धीरे अवशोषित करता है। आयरन के अच्छे अवशोषण के लिए विटामिन C से भरपूर फूड्स लेना जरूरी होता है।

हालांकि, एनिमल-बेस्ड आयरन (हीम आयरन) यानी मांस, मछली और अंडे से मिलने वाला आयरन आसानी से अवशोषित हो जाता है।

सवाल- महिलाओं में आयरन डेफिशिएंसी ज्यादा क्यों होती है?

जवाब- इसकी वजह ये है कि महिलाओं के जीवन के अलग-अलग चरणों (जैसे पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग) में उनकी बॉडी को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक आयरन की जरूरत होती है। पॉइंटर्स से मुख्य कारणों को समझिए-

  • पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग।
  • प्रेग्नेंसी, डिलीवरी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बढ़ी जरूरत।
  • असंतुलित खानपान।

सवाल- किन महिलाओं को आयरन डेफिशिएंसी का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ महिलाओं को आयरन की जरूरत ज्यादा हो सकती है। जैसेकि-

  • जो महिलाएं प्रेग्नेंट हैं।
  • जो ब्रेस्टफीड करा रही हैं।
  • जो शाकाहारी डाइट लेती हैं।
  • जो अक्सर उपवास रखती हैं।
  • जिन्हें क्रॉनिक डिजीज है।
  • जिन्हें आंतों से जुड़ी समस्याएं हैं।

सवाल- आयरन डेफिशिएंसी के क्या संकेत हैं?

जवाब- आयरन की कमी धीरे-धीरे शरीर पर असर डालती है। शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो एनीमिया की स्थिति बन सकती है। सभी लक्षण नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

सवाल- आयरन डेफिशिएंसी के हेल्थ रिस्क क्या हैं?

जवाब- लंबे समय तक आयरन की कमी शरीर के कुछ जरूरी अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स क्या हैं और इनमें कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?

जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स यानी लाल पत्तेदार साग ऐसी सब्जियां हैं, जिनकी पत्तियां लाल या बैंगनी रंग की होती हैं। इनमें नेचुरल पिगमेंट (एंथोसायनिन) के साथ कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसमें चौलाई के पत्ते (अमरनाथ), लाल पालक और चुकंदर के पत्ते शामिल हैं। ये खासतौर पर आयरन सपोर्ट के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए-

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स से हमें डेली जरूरत का कितना प्रतिशत आयरन मिल सकता है?

जवाब- 300 ग्राम रेड लीफी ग्रीन्स में करीब 3.71 mg आयरन होता है। इससे डेली जरूरत का लगभग 20% से 45% हिस्सा पूरा हो सकता है।

‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, आयरन की डेली की जरूरत उम्र और जेंडर के अनुसार बदलती है। जैसेकि-

  • पुरुष (19+ वर्ष): 8-10 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • महिलाएं (19-50 वर्ष): 15-18 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • गर्भवती महिलाएं: 25-27 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • 51+ वर्ष: 8-10 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • बच्चे: 9-11 मिलीग्राम प्रतिदिन

सवाल- क्या रेड लीफी ग्रीन्स रोज खा सकते हैं?

जवाब- हां, रेड लीफी ग्रीन्स रोज खाई जा सकती हैं, बशर्ते इन्हें संतुलित मात्रा में और अच्छी तरह धोकर व पकाकर खाया जाए। रोजाना सेवन से आयरन, फोलेट और फाइबर मिलता है। हालांकि, जिन लोगों को किडनी स्टोन या ऑक्सलेट की समस्या है, उन्हें पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं?

जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इसके नियमित सेवन के कई फायदे हैं। सभी बेनिफिट्स ग्राफिक में देखिए-

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स को रोजमर्रा की डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं?

जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स को कई तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं-

  • साग या भुजिया बनाकर।
  • दाल में मिलाकर।
  • पराठा या थेपला में मिलाकर।
  • स्मूदी में फलों के साथ।
  • सलाद के साथ।
  • सूप के साथ।

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स के अलावा और कौन से फूड्स आयरन रिच होते हैं?

जवाब- कई वेज और नॉनवेज फूड्स आयरन के अच्छे सोर्स हैं।

वेजिटेरियन लोगों के लिए आयरन के सोर्स

  • हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी)
  • सभी तरह की दालें
  • राजमा और छोले
  • सोयाबीन और टोफू
  • तिल और कद्दू के बीज
  • सूखे मेवे (किशमिश, खजूर)

नॉन-वेजिटेरियन लोगों के लिए

  • रेड मीट
  • चिकन
  • मछली
  • अंडा

सवाल- क्या सिर्फ डाइट से आयरन की कमी पूरी हो सकती है?

जवाब- आमतौर पर आयरन की कमी संतुलित और आयरन-रिच डाइट से पूरी हो सकती है। लेकिन एनीमिया जैसी गंभीर स्थिति में केवल खानपान पर्याप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में सप्लीमेंट की जरूरत हो सकती है।

सवाल- किन स्थितियों में आयरन सप्लीमेंट लेने की जरूरत पड़ती है?

जवाब- आयरन सप्लीमेंट की जरूरत तब पड़ती है, जब केवल खानपान से कमी पूरी न हो। डॉक्टर कुछ स्थितियों में ब्लड टेस्ट के आधार पर सप्लीमेंट लिख सकते हैं-

  • एनीमिया होने पर।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान।
  • ब्रेस्टफीडिंग के दौरान।
  • सर्जरी के बाद।
  • क्रॉनिक ब्लीडिंग या आंतों की समस्या में।

सवाल- आयरन डेफिशिएंसी का पता कैसे चलता है?

जवाब- आयरन की कमी का पता आमतौर पर इसके लक्षणों और ब्लड टेस्ट से चलता है। डॉक्टर आमतौर पर इन टेस्ट्स की सलाह देते हैं-

  • हीमोग्लोबिन (Hb) टेस्ट
  • सीरम फेरिटिन टेस्ट (शरीर में आयरन स्टोर की जांच)
  • सीरम आयरन और TIBC (टोटल आयरन बाइंडिंग कैपसिटी) टेस्ट
  • कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट

सवाल- आयरन डेफिशिएंसी होने पर कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

जवाब- कुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है-

  • बहुत थकान होने पर।
  • अत्यधिक कमजोरी होने पर।
  • आंखों में धुंधलापन या अक्सर चक्कर आने पर।
  • सांस फूलने पर।
  • हार्ट रेट तेज होने पर।

…………………

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जरूरत की खबर- बीन्स खाने से लंबी होती है उम्र: सॉल्यूबल फाइबर कोलेस्ट्रॉल कम करे, हार्ट को रखे हेल्दी, जानें किसे नहीं खाना चाहिए

साल 2023 में ‘एडवांस इन न्यूट्रिशन’ जर्नल में पब्लिश एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, रोज 50 ग्राम बीन्स खाने से समय से पहले मौत का जोखिम लगभग 6% तक कम हो जाता है। पूरी खबर पढ़िए…

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8 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 (NFHS-5) के मुताबिक, भारत में 15-49 साल की लगभग 57-59% महिलाओं को एनीमिया यानी खून की कमी है। एनीमिया की मुख्य वजह है- आयरन की कमी। आयरन शरीर के लिए क्रिटिकल (बेहद जरूरी) मिनरल है।

आयरन की कमी से शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है। लोग इसके शुरुआती संकेतों को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

कुछ ऐसे फूड्स हैं, जो एनीमिया के खतरे से बचा सकते हैं। रेड लीफी ग्रीन्स (लाल पत्तेदार साग) भी इन्हीं में से एक है। इनमें भरपूर मात्रा में आयरन होता है।

इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि-

  • रेड लीफी ग्रीन्स क्या हैं और इनमें कौन-से पोषक तत्व होते हैं?
  • आयरन डेफिशिएंसी होने पर कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद कुमार अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- आयरन क्या है और ये शरीर में क्या काम करता है?

जवाब- आयरन एक जरूरी मिनरल है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है। शरीर का लगभग 70% आयरन ब्लड में हीमोग्लोबिन के रूप में स्टोर रखता है।

हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स (RBCs) में मौजूद प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर उसे पूरे शरीर में पहुंचाता है। ब्लड में आयरन की कमी होने पर ऑक्सीजन सप्लाई घट जाती है। इससे थकान, कमजोरी और एनीमिया हो सकता है। आयरन शरीर में कौन से जरूरी काम करता है, ग्राफिक में देखिए-

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हालांकि, एनिमल-बेस्ड आयरन (हीम आयरन) यानी मांस, मछली और अंडे से मिलने वाला आयरन आसानी से अवशोषित हो जाता है।

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जवाब- इसकी वजह ये है कि महिलाओं के जीवन के अलग-अलग चरणों (जैसे पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग) में उनकी बॉडी को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक आयरन की जरूरत होती है। पॉइंटर्स से मुख्य कारणों को समझिए-

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  • असंतुलित खानपान।

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  • जो शाकाहारी डाइट लेती हैं।
  • जो अक्सर उपवास रखती हैं।
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  • जिन्हें आंतों से जुड़ी समस्याएं हैं।

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जवाब- आयरन की कमी धीरे-धीरे शरीर पर असर डालती है। शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो एनीमिया की स्थिति बन सकती है। सभी लक्षण नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

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जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स यानी लाल पत्तेदार साग ऐसी सब्जियां हैं, जिनकी पत्तियां लाल या बैंगनी रंग की होती हैं। इनमें नेचुरल पिगमेंट (एंथोसायनिन) के साथ कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसमें चौलाई के पत्ते (अमरनाथ), लाल पालक और चुकंदर के पत्ते शामिल हैं। ये खासतौर पर आयरन सपोर्ट के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए-

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स से हमें डेली जरूरत का कितना प्रतिशत आयरन मिल सकता है?

जवाब- 300 ग्राम रेड लीफी ग्रीन्स में करीब 3.71 mg आयरन होता है। इससे डेली जरूरत का लगभग 20% से 45% हिस्सा पूरा हो सकता है।

‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, आयरन की डेली की जरूरत उम्र और जेंडर के अनुसार बदलती है। जैसेकि-

  • पुरुष (19+ वर्ष): 8-10 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • महिलाएं (19-50 वर्ष): 15-18 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • गर्भवती महिलाएं: 25-27 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • 51+ वर्ष: 8-10 मिलीग्राम प्रतिदिन
  • बच्चे: 9-11 मिलीग्राम प्रतिदिन

सवाल- क्या रेड लीफी ग्रीन्स रोज खा सकते हैं?

जवाब- हां, रेड लीफी ग्रीन्स रोज खाई जा सकती हैं, बशर्ते इन्हें संतुलित मात्रा में और अच्छी तरह धोकर व पकाकर खाया जाए। रोजाना सेवन से आयरन, फोलेट और फाइबर मिलता है। हालांकि, जिन लोगों को किडनी स्टोन या ऑक्सलेट की समस्या है, उन्हें पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं?

जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इसके नियमित सेवन के कई फायदे हैं। सभी बेनिफिट्स ग्राफिक में देखिए-

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स को रोजमर्रा की डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं?

जवाब- रेड लीफी ग्रीन्स को कई तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं-

  • साग या भुजिया बनाकर।
  • दाल में मिलाकर।
  • पराठा या थेपला में मिलाकर।
  • स्मूदी में फलों के साथ।
  • सलाद के साथ।
  • सूप के साथ।

सवाल- रेड लीफी ग्रीन्स के अलावा और कौन से फूड्स आयरन रिच होते हैं?

जवाब- कई वेज और नॉनवेज फूड्स आयरन के अच्छे सोर्स हैं।

वेजिटेरियन लोगों के लिए आयरन के सोर्स

  • हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी)
  • सभी तरह की दालें
  • राजमा और छोले
  • सोयाबीन और टोफू
  • तिल और कद्दू के बीज
  • सूखे मेवे (किशमिश, खजूर)

नॉन-वेजिटेरियन लोगों के लिए

  • रेड मीट
  • चिकन
  • मछली
  • अंडा

सवाल- क्या सिर्फ डाइट से आयरन की कमी पूरी हो सकती है?

जवाब- आमतौर पर आयरन की कमी संतुलित और आयरन-रिच डाइट से पूरी हो सकती है। लेकिन एनीमिया जैसी गंभीर स्थिति में केवल खानपान पर्याप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में सप्लीमेंट की जरूरत हो सकती है।

सवाल- किन स्थितियों में आयरन सप्लीमेंट लेने की जरूरत पड़ती है?

जवाब- आयरन सप्लीमेंट की जरूरत तब पड़ती है, जब केवल खानपान से कमी पूरी न हो। डॉक्टर कुछ स्थितियों में ब्लड टेस्ट के आधार पर सप्लीमेंट लिख सकते हैं-

  • एनीमिया होने पर।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान।
  • ब्रेस्टफीडिंग के दौरान।
  • सर्जरी के बाद।
  • क्रॉनिक ब्लीडिंग या आंतों की समस्या में।

सवाल- आयरन डेफिशिएंसी का पता कैसे चलता है?

जवाब- आयरन की कमी का पता आमतौर पर इसके लक्षणों और ब्लड टेस्ट से चलता है। डॉक्टर आमतौर पर इन टेस्ट्स की सलाह देते हैं-

  • हीमोग्लोबिन (Hb) टेस्ट
  • सीरम फेरिटिन टेस्ट (शरीर में आयरन स्टोर की जांच)
  • सीरम आयरन और TIBC (टोटल आयरन बाइंडिंग कैपसिटी) टेस्ट
  • कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट

सवाल- आयरन डेफिशिएंसी होने पर कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

जवाब- कुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है-

  • बहुत थकान होने पर।
  • अत्यधिक कमजोरी होने पर।
  • आंखों में धुंधलापन या अक्सर चक्कर आने पर।
  • सांस फूलने पर।
  • हार्ट रेट तेज होने पर।

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