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नंगे पैर खेलने से ‘गोल ऑफ द टूर्नामेंट’ तक:एशियन कप फुटबॉल में 30 गज से गोल दागकर चर्चा में आईं पंजाब की मनीषा कल्याण

नंगे पैर खेलने से ‘गोल ऑफ द टूर्नामेंट’ तक:एशियन कप फुटबॉल में 30 गज से गोल दागकर चर्चा में आईं पंजाब की मनीषा कल्याण

2026 विमंस एशियन कप के मैच में भारतीय टीम चीनी ताइपे से 1-0 से पीछे थी। 39वें मिनट में भारत को गोल से 30 गज की दूरी पर फ्री-किक मिली। सामने सफेद जर्सी में चार डिफेंडर दीवार बनकर खड़ी थीं। ऐसे में 24 वर्षीय मनीषा कल्याण एक पल के लिए रुकीं और अपने बाएं पैर से एक ऐसा करारा शॉट दागा कि गेंद क्रॉसबार के निचले हिस्से से टकराकर सीधे गोल लाइन के पार चली गई। वीएआर ने गोल की पुष्टि की और कमेंटेटर ने इसे देखते ही ‘गोल ऑफ द टूर्नामेंट’ करार दिया। भले ही भारतीय टीम यह मैच 1-3 से हारकर ग्रुप में सबसे नीचे रही, लेकिन पंजाब के होशियारपुर की इस बेटी ने दुनिया को भारतीय फुटबॉल की एक उजली तस्वीर जरूर दिखा दी। यह सिर्फ एक गोल की नहीं, बल्कि उस लड़की की कहानी है जिसके नसीब में कभी खेल के जूते नहीं थे। आठ साल पहले पंजाब के मुग्गोवाल गांव के एक सरकारी स्कूल में पीटी टीचर ब्रह्मजीत सिंह ने एक लड़की को लड़कों के साथ नंगे पैर खेलते देखा। वह बेखौफ गोल दाग रही थी। मनीषा के पिता नरेंद्रपाल सिंह की गांव में एक छोटी सी कॉस्मेटिक की दुकान थी। वह अपनी चार बेटियों को सिर्फ पढ़ाना चाहते थे; उनके पास स्पोर्ट्स शूज और ट्रेनिंग के पैसे नहीं थे। कोच ब्रह्मजीत ने पिता को एक महीने तक मनाया और भरोसा दिलाया कि पैसा कभी रुकावट नहीं बनेगा। जब पिता राजी हुए, तो पड़ोसियों ने ताने कसे कि लड़की शॉर्ट्स पहनकर लड़कों के साथ खेलती है, आगे चलकर इसका कुछ नहीं होगा। लेकिन माता-पिता ने इन तानों को अनसुना कर दिया। गांव में लड़कियों की कोई टीम नहीं थी, इसलिए मनीषा खेलने के लिए अक्सर 15 किलोमीटर पैदल चलती या दौड़ती थीं। उनके शानदार खेल और खास हेयरस्टाइल के कारण दोस्तों ने उन्हें ब्राजीलियाई दिग्गज रोनाल्डिन्हो के नाम पर प्यार से ‘डिनो’ बुलाना शुरू कर दिया। नवंबर 2021 में एक बड़ा बदलाव आया। भारत ने ब्राजील के खिलाफ मैच 6-1 से गंवाया, लेकिन इकलौता गोल मनीषा ने किया। वह सीनियर फुटबॉल में ब्राजील के खिलाफ गोल दागने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इस गोल ने उनके लिए दुनिया के दरवाजे खोल दिए। साइप्रस के क्लब ‘अपोलोन लेडीज’ ने उन्हें साइन किया। शुरुआत में अंग्रेजी न आने के कारण उन्हें मैदान पर पास नहीं मिलते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और भाषा सीखी। अगस्त 2022 में वह यूईएफए विमंस चैम्पियंस लीग खेलने और गोल करने वाली पहली भारतीय बनीं। ग्रीस के क्लब ‘पाओक’ के लिए 23 मैचों में 8 गोल दागने के बाद, अब वह पेरू के चैम्पियन क्लब ‘एलियांजा लीमा’ में शामिल हैं। सिडनी गई 26 सदस्यीय भारतीय महिला फुटबॉल टीम में मनीषा अकेली खिलाड़ी थीं जो विदेश में इतने ऊंचे स्तर पर खेल रही हैं। यही वजह है कि मनीषा के बेसिक्स, पासिंग और तकनीक बाकी खिलाड़ियों से कहीं ऊंचे स्तर के हैं।

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