
Naseeruddin Shah Controversy | Puneet Issar Slams Statement; Paresh Rawal
8 मिनट पहले कॉपी लिंक सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह के सरकार विरोधी बयान के बाद एक्टर पुनीत इस्सर उन पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सरकार पसंद नहीं है, तो चुनाव लड़कर उसे हराएं। मंगलवार को शाह ने फेसबुक पर खुद को गर्व से ‘दिमागी नक्सल’ बताया था। उन्होंने BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। टीवी शो ‘महाभारत’ में पुनीत इस्सर ने दुर्योधन की भूमिका निभाई थी। बुधवार को IANS से बातचीत में इस्सर ने कहा, पहली बात तो यह है कि नसीरुद्दीन शाह जी हमारे सीनियर हैं, हमारे टीचर रह चुके हैं, आदरणीय हैं और बहुत ही बेहतरीन कलाकार हैं। लेकिन मेरा सिर्फ यह कहना है कि जब आप कोई बात करते हैं, तो सिलेक्टिव बात नहीं करनी चाहिए। आप दुनिया और हिंदुस्तान के कितने मुद्दों पर मूकदर्शक बने रहते हैं। आप गूंगे बनकर बैठ जाते हैं, तब तो आप बात नहीं करते। आप हर चीज का जवाब एकतरफा देते हैं। आप लेफ्टिस्ट सोच और नक्सली विचारधारा वाले वामपंथियों की सोच के हिसाब से जवाब देते हैं। इस्सर ने शाह पर चुनिंदा मुद्दों पर बोलने का आरोप लगाया इस्सर ने ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग और JNU से जुड़े लोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “इन ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग और JNU के लोगों को देखिए। जब हमारे देश में दोषी ठहराए गए अपराधियों और इस समय जेल में बंद आतंकियों की बात आती है, तो वे उनकी रिहाई की मांग करते हैं और उनके पक्ष में बोलते हैं। अगर आप ऐसे लोगों का समर्थन करते हैं, तो इसका मतलब भारतीय होने से क्या है?” ‘सरकार पसंद नहीं, तो चुनाव लड़ें’ हालांकि, इस्सर ने कहा कि शाह को अपनी राय रखने और सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, “लेकिन अगर आपको सत्ता में आई सरकार पसंद नहीं है, तो राजनीतिक मैदान में उतरिए। चुनाव लड़िए, जीतिए और इस सरकार को हराइए। यह सरकार मनमाने तरीके से सत्ता में नहीं आई है। देश की जनता ने इसे चुना और निर्वाचित किया है।” राजनीतिक मतभेद के बावजूद परेश रावल ने कहा था कि शाह के लिए उनके मन में गहरा सम्मान है। वे एक बहुत अच्छे इंसान भी हैं। नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी को लेकर परेश रावल ने कहा, “नसीर भाई की अपनी राय है। मैं उसके बारे में कुछ नहीं बोल सकता। सबको हक है कि जो फील करते हैं, वो बोलें।” जामिया और SRFTI के छात्रों के समर्थन में बोले थे शाह नसीरुद्दीन शाह ने मंगलवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वो कहते हैं, “मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब (उपनाम) दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।” उन्होंने आगे कहा, “टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे? तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?” उन्होंने यह भी कहा कि पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), फिर सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और अब जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों पर जो जुल्म किया जा रहा है, वो याद रखा जाएगा। सब याद रखा जाएगा। शाह बोले- युवाओं का हौसला कभी नहीं टूटेगा नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो में मीडिया और बीजेपी आईटी सेल के लिए अपशब्दों का भी प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद देश के युवाओं का हौसला नहीं टूटेगा, शिक्षा संस्थान बर्बाद नहीं होंगे और लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ेगा। वीडियो के आखिर में उन्होंने देश के युवाओं को सलाम किया और कहा कि उनकी दुआएं उनके साथ हैं। बीजेपी के लिए अपशब्द कहे थे; झूठी पार्टी बताया था इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने शनिवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो शेयर किया था। अभिनेता ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद बीजेपी उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्रों का मुद्दा भी उठाया। शाह ने वीडियो में कहा था कि संस्थान के छात्र प्रशासन से जवाब मांग रहे थे। इसके बदले उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए गए, निगरानी में रखा गया और धमकियां दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया है। अभिनेता ने बीजेपी पर आरोप लगाया था कि वह अपने पक्ष में प्रचार को बढ़ावा दे रही है और असहमत लोगों को डराने या उनकी सोच बदलने की कोशिश कर रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔






































