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सूजन से लेकर वेट लॉस तक…कच्ची हल्दी सेहत का सोना, इम्युनिटी बूस्टर के लिए वरदान – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:56 IST भारतीय रसोई में आसानी से मिलने वाली कच्ची हल्दी इन दिनों सेहत की दुनिया में फिर सुर्खियां बटोर रही है. आयुर्वेद में इसे संजीवनी समान कहा गया है. इसमें करक्यूमिन और शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं. यह कई रोगों से निजात दिला सकती है. कच्ची हल्दी को इम्यूनिटी बूस्टर कहा गया है. इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव में सहायक होते हैं. इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे मौसमी बीमारियों के खतरे की संभावना कम रहती हैं. कच्ची हल्दी जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान लोगों के लिए भी फायदेमंद होती है. इसकी सूजनरोधी क्षमता गठिया जैसी समस्याओं में राहत दे सकती है. कच्ची हल्दी के करक्यूमिन तत्व सूजन को कम करने में मदद करते है, जिससे जोड़ों की जकड़न और दर्द में आराम मिलता हैं. कच्ची हल्दी का पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. यह गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी दिक्कतों को कम करने में लाभकारी सिद्ध हो सकती है. इसके नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और पेट हल्का महसूस होता है, जिससे दिनभर शरीर ऊर्जावान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, कच्ची हल्दी की भूमिका शरीर को डिटॉक्स करने में खास मानी जाती है. यह लिवर की कार्यक्षमता को समर्थन दे सकती है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकती है. खून को साफ करने में भी इसके गुण उपयोगी होते हैं, जिससे त्वचा पर भी सकारात्मक असर दिखता है. कच्ची हल्दी का गुनगुना दूध या काढ़ा सर्दी-खांसी या गले में खराश को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसकी तासीर गर्म होती है, जो गले को आराम देने में सहायक हो सकती है. कई घरों में बदलते मौसम में इसे रोगों से बचाव के उपाय के तौर पर प्रयोग किया जाता है. कच्ची हल्दी एक शानदार औषधि है. वजन को कंट्रोल करने में भी कच्ची हल्दी लाभकारी है. यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है, जिससे कैलोरी बर्न की प्रक्रिया शानदार होती है. यही नहीं, कच्ची हल्दी सूजन कम करने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं. कच्ची हल्दी को कद्दूकस कर दूध में उबालकर, चाय में मिलाकर या सुबह गुनगुने पानी के साथ सेवन जा सकता है. हालांकि, यदि किसी को पित्त की पथरी, मधुमेह या खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हों, तो सेवन से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह जरूरी ले. क्योंकि किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकती हैं. First Published : February 20, 2026, 23:56 IST

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हड्डियों के दर्द का काल है ये पत्ता! सीने में दर्द हो या सूखी खांसी, खाज-खुजली, त्वचा रोग में भी कारगर – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:33 IST सफेद चंपा एक ऐसा पेड़ है, जो धरती पर आसानी से पाया जाने वाला अद्भुत औषधीय गुणों से भरपूर है. इसके न केवल पत्ते, बल्कि सभी अंग संजीवनी के समान माने जाते हैं. यह पेड़ अल्सर, कुष्ठ रोग, सूजन, गठिया, अस्थमा, बुखार, और कब्ज़ जैसी कई बीमारियों में बेहद लाभकारी साबित होता है. इसके फूलों का उपयोग नारियल के तेल को सुगंधित करने के लिए भी किया जाता है, और इसकी पत्तियां पुराने घावों को भरने में सक्षम मानी जाती हैं. सफेद चंपा की छाल को पीसकर लेप बनाने की परंपरा पुरानी है. इससे पुराने घाव, खुजली और कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है. इसके प्राकृतिक तत्व त्वचा को शांत करने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मददगार होते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सावधान से प्रयोग करना चाहिए. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, चंपा की छाल का लेप प्रभावित हिस्से पर लगाने से सूजन में कमी और आराम मिल सकता है. यह रक्त संचार को बेहतर करने में सहायक होता है. हालांकि, गंभीर गठिया या अन्य रोगों में चिकित्सकीय जांच आवश्यक है. चंपा की जड़ का उपयोग पेट संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. इसे पेट के अल्सर के लिए लाभकारी माना गया है. जड़ से तैयार काढ़ा पाचन तंत्र को संतुलित करने में सहायक बताया जाता है. हालांकि, अल्सर जैसी गंभीर स्थिति में स्वयं उपचार के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूरी है, ताकि स्थिति खराब न हो सके. Add News18 as Preferred Source on Google पारंपरिक उपचार पद्धतियों में चंपा की जड़ का काढ़ा बहुत ही उपयोगी माना गया है. यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है. हालांकि, बहुत तेज बुखार या लंबे समय तक रहने वाले बुखार में चिकित्सकीय जांच अनिवार्य है. प्राकृतिक उपाय केवल सहायक रूप में ही अपनाना उचित होता है. सफेद चंपा के फूलों की सुगंध मन को शांति देने के लिए जानी जाती है. इसकी खुशबू सिरदर्द में राहत पहुंचा सकती है और तनाव कम करने में सहायक मानी जाती है. फूलों से बने तेल का उपयोग आरामदायक नींद के लिए किया जाता है. अरोमाथेरेपी में भी इसकी सुगंध को सकारात्मक प्रभाव वाला माना गया है. चंपा के फूलों का लेप छाती के दर्द और पुरानी खांसी में राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके लाभकारी तत्व सूजन कम करने और श्वसन मार्ग को आराम देने में सहायक हो सकते हैं. लेकिन हमेशा ध्यान रखें कि, दमा या गंभीर फेफड़ों की बीमारी में यह केवल पूरक उपाय है, मुख्य उपचार का विकल्प नहीं है. चंपा का रस पथरी और मूत्र संबंधी समस्याओं में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसे मूत्र मार्ग को साफ रखने और जलन कम करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. पथरी जैसी स्थिति में आयुर्वेद एक्सपर्ट की राय बेहद जरूरी है. प्राकृतिक उपचारों को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करना हमेशा सुरक्षित और समझदारी भरा कदम साबित होता रहा है. First Published : February 20, 2026, 23:33 IST

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बीमारियों का काल है ये हरा पत्ता, रोजाना चबाइए 5 पत्ते, फैटी लिवर से लेकर कैंसर तक में लाभकारी – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:17 IST नीम को आयुर्वेद में सर्वरोग निवारणी कहा गया है. यानी एक ऐसी जड़ी-बूटी जो कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है. डॉक्टर के मुताबिक नीम सिर्फ दातुन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी पूरी बॉडी को अंदर से मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है. डॉक्टर का कहना है कि आज भी नीम की एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी का कोई तोड़ नहीं है. इसलिए इसे रोजमर्रा की लाइफ में जरूर शामिल करना चाहिए. रायबरेलीः मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे समय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद जरूरी हो जाता है. आयुर्वेद में नीम को प्राकृतिक औषधि का दर्जा दिया गया है. सुबह खाली पेट नीम की कोमल पत्तियों का सीमित मात्रा में सेवन करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते है. दरअसल, रायबरेली जिले के आयुष विशेषज्ञ गौरव कुमार लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग बदलते मौसम में नीम की पत्तियां चबाने की परंपरा निभाते है. इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक: गौरव कुमार के मुताबिक नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं. नियमित और सीमित सेवन से वायरल संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. खून की सफाई और त्वचा के लिए लाभकारी: नीम को रक्त शुद्ध करने वाला माना जाता है. सुबह खाली पेट 4-5 कोमल पत्तियां चबाने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है।.इसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है और मुंहासे या फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त: नीम की पत्तियां पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती हैं. यह गैस, अपच और पेट के कीड़ों की समस्या में लाभ पहुंचा सकती हैं. ध्यान रखें ये सावधानियां: हालांकि नीम प्राकृतिक औषधि है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है.गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. कड़वाहट के कारण इसे अधिक मात्रा में लेने से उल्टी या पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है. Location : Rae Bareli,Uttar Pradesh First Published : February 20, 2026, 23:16 IST

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पानी में उगने वाले इस फूल का तना है बेहद पौष्टिक, सेवन से मिलेंगे ये जबरदस्त फायदे, खून की कमी है तो जरूर खाएं – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:09 IST आप अक्सर हरी और ताजी सब्जियां खाते होंगे. कुछ सब्जियां देखने में बिल्कुल सब्जी नहीं लगती है, लेकिन उनमें पौष्टिक तत्व ग्रीन वेजिटेबल्स से भी अधिक होते हैं. ऐसी ही एक सब्जी है कमल ककड़ी. जिसे इंग्लिश में लोटस स्टेम कहते हैं. कमल ककड़ी में पोषक तत्वों का खजाना होता है. ये देखने में बेशक आपको सूखी लकड़ी लगे, लेकिन स्वाद जबरदस्त होता है. इससे कई तरह की चीजें बनाई जाती हैं जैसे ग्रेवी वाली सब्जी, कोफ्ता, अचार. आपको बता दें कि यह कमल के फूल की जड़ से आता है और इसका स्वाद हल्का और मीठा होता है. सेहतमंद रहने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है.सर्दियों के मौसम में बाजार में मिलने वाली कमल ककड़ी पोषण से भरपूर सब्जी मानी जाती है. कमल के तने से मिलने वाली यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेद में इसे शरीर को ताकत देने और कई रोगों से बचाव करने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में देखा जाता है. दरअसल रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सक गौरव कुमार (बीएएमएस लखनऊ विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि कमल ककड़ी फाइबर, आयरन, पोटैशियम और विटामिन-सी का अच्छा स्रोत है.इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद फाइबर आंतों की सफाई में मदद करता है, जिससे शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते है. कमल ककड़ी खून की कमी दूर करने में भी सहायक होती है.इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और कमजोरी दूर होती है.जिन लोगों को थकान या एनीमिया की समस्या रहती है, उनके लिए यह सब्जी फायदेमंद मानी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google गौरव कुमार के मुताबिक कमल ककड़ी दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी है.इसमें पाया जाने वाला पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है.यह शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित कर हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है.विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट तत्व इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, जिससे शरीर मौसमी बीमारियों से बचा रहता है. कमल ककड़ी का सेवन सब्जी, अचार या सूप के रूप में किया जा सकता है.हालांकि इसे अच्छी तरह साफ कर और पकाकर ही खाना चाहिए.जिन लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, वे इसे नियमित आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. वह बताते हैं कि कमल ककड़ी एक पौष्टिक और गुणकारी सब्जी है, जो पाचन सुधारने, खून बढ़ाने, दिल को स्वस्थ रखने और शरीर को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. First Published : February 20, 2026, 23:09 IST

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Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy

Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy

Hindi News Lifestyle Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy | Mental Health 18 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल– मेरी उम्र 32 साल है। मैं एक आईटी प्रोफेशनल हूं। मेरी प्रॉब्लम बहुत पर्सनल है। मुझे पोर्न की लत है। इसके बिना मैं रात में सो नहीं पाता। शुरू में तो ये कोई प्रॉब्लम नहीं लगती थी, लेकिन अब लगता है कि इस आदत का असर मेरी रिलेशनशिप्स पर पड़ रहा है। मैं जिस भी लड़की को डेट करता हूं, वो मुझे छोड़कर चली जाती है। उसका कहना है कि मैं रिश्ते में प्रेजेंट नहीं हूं। मैं भी ये बात जानता हूं कि मुझे किसी लड़की की कंपनी से ज्यादा अपनी कंपनी अच्छी लगती है। सच तो ये है कि सेक्शुअल प्लेजर के लिए भी मैं गर्लफ्रेंड की जरूरत बहुत ज्यादा नहीं महसूस करता। मेरे एक करीबी दोस्त का कहना है कि ये नॉर्मल नहीं है और मुझे थेरेपिस्ट के पास जाना चाहिए। आप प्लीज मुझे गाइड करिए कि मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। इस डिजिटल युग में पोर्नोग्राफी बहुत आसानी से उपलब्ध है। बहुत व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल भी होता है। इसलिए बहुत से इंडीविजुअल और कपल इसे लेकर थोड़ा चिंतित होते हैं कि कहीं ये मेंटल हेल्थ, इंटिमेसी और रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर न डाले। पोर्न अपने आप में समस्या नहीं है ‘पोर्न एडिक्शन’ या ‘पोर्न की लत’ जैसे शब्दों का अक्सर प्रयोग किया जाता है। लेकिन एडिक्शन शब्द का इस्तेमाल कई बार एक ज्यादा कॉम्प्लेक्स रियलिटी को सरलीकृत कर सकता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिसर्च इस पर रोशनी डालती है, जिसके मुताबिक पोर्न देखना कुछ लोगों के लिए समस्या बन सकता है, लेकिन यह शायद ही कभी अपने आप में मूल समस्या या मुख्य समस्या होती है। इसके पीछे हमेशा कोई छिपा हुआ इमोशनल, रिलेशनल कारण या कोई इंटरनल कॉन्फ्लिक्ट होता है। पोर्न कब हो सकता है प्रॉब्लमैटिक इंटरनेशनल स्टडीज बताती हैं कि पूरी दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होता। समस्या तब पैदा होती है, जब पोर्न की लत लग जाए, जब यह एक कंपल्सिव और सीक्रेटिव बिहेवियर हो जाए और जब वास्तविक जिंदगी के रिश्तों पर इसका नेगेटिव असर पड़ने लगे। साथ ही यह सेक्शुअल खुशी, संतोष और इमोशनल हेल्थ को नकारात्मक ढंग से प्रभावित करने लगे। इसके अलावा इन संकेतों से पता चलता है कि पोर्न देखने की आदत समस्या बन रही है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– पोर्न का ब्रेन पर प्रभाव हमारे ब्रेन में रिवॉर्ड सिस्टम इनबिल्ट होते हैं, जो हैप्पी हॉर्मोन्स रिलीज करते हैं। जब कोई बहुत ज्यादा समय तक और बहुत ज्यादा मात्रा में पोर्न देखता है तो इससे ब्रेन का रिवॉर्ड सिस्टम प्रभावित होता है। इसका नतीजा ये होता है कि वास्तविक जीवन में इंटिमेसी से मिलने वाली खुशी और संतुष्टि कम हो जाती है। साथ ही सेक्स को लेकर अवास्तविक किस्म की अपेक्षाएं पैदा होती हैं। इसलिए आगे बढ़ने से पहले मैं यही कहना चाहूंगा कि शर्मिंदगी या अपराध-बोध महसूस करने की बजाय आप समस्या को समझने और उसकी तह तक जाने की कोशिश करिए। कुछ सेल्फ असेसमेंट टूल्स और सेल्फ हेल्प टूल्स के जरिए मैं आपकी मदद करने की कोशिश करूंगा। क्या आपको पोर्न एडिक्शन है? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 7 सवाल हैं। आप इन सवालों को ध्यान से पढ़ें और हां या ना में इसका जवाब देें। अंत में अपने जवाब की एनालिसिस करें। स्कोर का इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया हुआ है। जैसेेकि अगर दो या उससे कम सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो इसका मतलब है कि आपको पोर्न का एडिक्शन नहीं है। अगर तीन या चार सवालों का जवाब ‘हां’ है तो भी यह एडिक्शन नहीं है, सिर्फ पोर्न देखने को आप कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन अगर पांच से ज्यादा सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो यह पोर्न एडिक्शन है। ऐसे में प्रोफेशनल हेल्प की सलाह दी जाती है। आप पोर्न क्यों देखते हैं? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट एडिक्शन से जुड़े सेल्फ असेसमेंट के बाद आपको एक और असेसमेंट करने की जरूरत है। अपने पोर्न देखने के वास्तविक कारणों को आइडेंटिफाई करना। ये बहुत साधारण सा असेसमेंट टेस्ट है। नीचे ग्राफिक में कुल 12 सवाल हैं, जिनमें 12 कारण बताए गए हैं। इन सवालों को आपको 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। अगर आपका जवाब 0 है तो इसका मतलब है कि वो कारण नहीं है। अगर जवाब 3 है तो वह एक बड़ा कारण है। इन सवालों से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके पोर्न देखने की मुख्य वजहें क्या हैं। पोर्न और रिश्ते: असली नुकसान क्या है? रिसर्च से पता चलता है कि पोर्नोग्राफी अपने आप में हानिकारक नहीं है। बहुत से कपल साथ में पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उनके रिश्ते को कोई नुकसान नहीं होता है। समस्या तब पैदा होती है, जब- सीक्रेसी- व्यक्ति अपनी पोर्न देखने की इच्छा और आदत को दूसरे पार्टनर से छिपाए। उसे लेकर डर, शर्मिंदगी महसूस करे। यौन इच्छा का मैच न होना- असमान यौन इच्छाओं के बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले। सेक्शुल इंटरेस्ट के बारे में बात न होना- अपने सेक्शुअल इंटरेस्ट को लेकर गिल्ट या शर्मिंदगी हो। इस बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले। इन कारणों से पोर्न का रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– लोग पोर्न क्यों देखते हैं? पोर्न देखने के पीछे अकेलेपन से लेकर, स्ट्रेस और बोरडम तक कई कारण हो सकते हैं। पोर्न इन सारी समस्याओं से डील करने का एक कोपिंग मैकेनिज्म हो सकता है। यह अपने आप में कोई समस्या नहीं है। ये समस्या तब बन जाती है, जब पोर्न ही एकमात्र कोपिंग मैकेनिज्म बन जाए। इसके अलावा अपने मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को एड्रेस करने का कोई और टूल हमारे पास न हो। पोर्न एडिक्शन का इलाज क्या है? इस समस्या की अंडरस्टैंडिंग और

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Housework Health Benefits; Light Physical Activity List & Tips

Housework Health Benefits; Light Physical Activity List & Tips

Hindi News Lifestyle Housework Health Benefits; Light Physical Activity List & Tips | Joint Muscles 21 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक बचपन में जब मां या दादी कहती थीं “घर के काम किया करो, सेहत अपने-आप ठीक रहेगी,” तो वह बात उस समय सिर्फ नसीहत लगती थी। समय बदला तो फिटनेस की परिभाषा भी बदल गई। अब जिम और हार्ड वर्कआउट को ही फिटनेस का असली पैमाना मान लिया गया है। इस बदलाव में घर के रोजमर्रा के कामों की अहमियत पीछे छूट गई। लेकिन क्या आपको पता है कि घर के काम भी दरअसल एक तरह की एक्सरसाइज ही हैं। इतना ही नहीं, कुछ मेटाबॉलिक बीमारियों की स्थिति में घर के काम मौत का जोखिम 14 से 20% तक कम कर सकते हैं। है न मजे की बात। जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में पब्लिश हालिया स्टडी के मुताबिक, लाइट फिजिकल एक्टिविटी जैसे घर के काम, दिनभर थोड़ा-बहुत मूवमेंट करते रहने से मौत का जोखिम कम हो सकता है। स्टडी में शामिल जो लोग कार्डियोवस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम की एडवांस स्टेज से पीड़ित थे, उनमें इसका असर ज्यादा देखा गया। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि घरेलू काम करना कितना फायदेमंद है। साथ ही जानेंगे कि- लाइट फिजिकल एक्टिविटी में कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल हैं? सिर्फ घर के छोटे-मोटे काम करके किन बीमारियों से बच सकते हैं? एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- क्या घर के कामों को लाइट फिजिकल एक्टिविटी माना जा सकता है? इसमें कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल होती हैं? जवाब- हां, ये सब लाइट फिजिकल एक्टिविटीज ही हैं क्योंकि इनमें बॉडी मूवमेंट की जरूरत होती है। घरेलू काम करते रहने से हार्ट रेट नॉर्मल रहती है। अगर रेगुलर ये काम करते हैं तो कैलोरी बर्न होती है। लाइट फिजिकल एक्टिविटी जॉइंट मूवमेंट और मसल एक्टिवेशन में भी मदद करती है। ग्राफिक से समझते हैं कि इसमें कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल होती हैं- सवाल- लाइट फिजिकल एक्टिविटी और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच संबंध को लेकर नई रिसर्च क्या कहती है? जवाब- हाल ही में जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसमें पता चला कि जिन लोगों को कार्डियोवस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम है, अगर वे घर पर सिर्फ हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग करें या सिर्फ चलें-फिरें, घर के रेगुलर काम करें तो उनमें मौत का जोखिम 14 से 20% तक कम हो जाता है। कुल-मिलाकर रिसर्च में साफ हुआ है कि स्वस्थ रहने के लिए रोज जिम जाकर हैवी वर्कआउट करना जरूरी नहीं है। इसके लिए घर की क्लीनिंग और डस्टिंग करना भी काफी है। यह सब करते हुए भी हमारी एक्सरसाइज हो जाती है। सवाल- लाइट फिजिकल एक्टिविटी दिल और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में कैसे मदद करती है? जवाब- हल्की लेकिन नियमित फिजिकल एक्टिविटी शरीर को कई स्तरों पर फायदा पहुंचाती है। इसे पॉइंटर्स से समझते हैं- लाइट फिजिकल एक्टिविटी हार्ट और ब्लड वेसल्स की फंक्शनिंग में मदद करती है। यह लिपिड प्रोफाइल (लिपिड प्रोफाइल एक ब्लड टेस्ट है, जिससे पता चलता है कि आपके खून में फैट की मात्रा कितनी है और किस तरह का फैट है) को संतुलित रखने में मदद करती है। गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को सपोर्ट करती है। लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन को कम करती है, जो हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स माने जाते हैं। सवाल- मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोगों के लिए लाइट फिजिकल एक्टिविटी क्यों खास तौर पर फायदेमंद मानी जाती है? लाइट फिजिकल एक्टिविटी मेटाबॉलिज्म को धीरे-धीरे एक्टिव करती है। इससे बॉडी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है। इससे ग्लूकोज बर्न होता है और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। सवाल- मेटाबॉलिक सिंड्रोम के अलावा लाइट फिजिकल एक्टिविटी और किन बीमारियों के जोखिम को कम कर सकती है? जवाब- लाइट फिजिकल एक्टिविटी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में मदद करती है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- क्या लाइट फिजिकल एक्टिविटी जिम या हार्ड एक्सरसाइज जितनी असरदार होती है? जवाब- लाइट फिजिकल एक्टिविटी जिम या हार्ड एक्सरसाइज की जगह नहीं ले सकती, लेकिन सेहत के लिहाज से इसे कम असरदार भी नहीं माना जा सकता है। लंबे समय तक बैठने से मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है। फिजिकल एक्टिविटी उसे एक्टिव रखने में मदद करती है। जिम या हैवी वर्कआउट से फिटनेस और मसल स्ट्रेंथ बढ़ती है, लेकिन लाइट फिजिकल एक्टिविटी रोजाना मूवमेंट बनाए रखकर हार्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करती है। इसलिए दोनों की भूमिका अलग है। सवाल- लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए बीच-बीच में हल्का मूवमेंट क्यों जरूरी माना जाता है? जवाब- लगातार बैठे रहने से मांसपेशियों की एक्टिविटी कम हो जाती है। ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त होने लगता है। उठकर थोड़ा चलना, स्ट्रेच करना या पोजिशन बदलना मसल्स को दोबारा एक्टिव करता है, जिससे ग्लूकोज का इस्तेमाल बेहतर होता है और ब्लड फ्लो सुधरता है। साथ ही यह पीठ, गर्दन और जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है। सवाल- रोजमर्रा की जिंदगी में लाइट फिजिकल एक्टिविटी को कैसे बढ़ा सकते हैं? जवाब- फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने के लिए जिम या हार्ड एक्सरसाइज ही जरूरी नहीं होती। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में थोड़ा बदलाव करके भी शरीर को एक्टिव रखा जा सकता है। ग्राफिक से समझते हैं- दिनभर के छोटे-छोटे मूवमेंट को नजरअंदाज न करें। थोड़ी देर चलना या उठकर खड़े होना भी मायने रखता है। आखिरकार, सेहत सिर्फ एक घंटे की एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि पूरे दिन की एक्टिव लाइफस्टाइल से बनती है। …………………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- कुर्सी पर बैठे-बैठे करें ये एक्सरसाइज:एक जगह बैठे रहना 10 सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक, बॉडी मूवमेंट है जरूरी मेहनत करना किसे पसंद है। एक जगह पसरकर बैठे रहो। आराम से काम करना आमतौर पर हर किसी को पसंद आता है। खासकर जब आराम से कुर्सी पर बैठकर AC की हवा ले रहे हों। सही मायने में यही ‘व्हाइट कॉलर’ जॉब है क्योंकि इसमें फिजिकल वर्क की जगह AC में कम्प्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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