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CCPA Fines Storia, English Oven ₹1 Lakh Each for 100% Pure Claims

CCPA Fines Storia, English Oven ₹1 Lakh Each for 100% Pure Claims

नई दिल्ली33 मिनट पहले

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CCPA यानी सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने खाने-पीने के सामानों पर ‘100%’ शुद्धता का भ्रामक दावा करने वाली दो कंपनियों पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है। ये स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड और इंग्लिश ओवन ब्रेड बनाने वाली कंपनी मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड है।

अथॉरिटी ने जांच में पाया कि इन कंपनियों ने अपने विज्ञापनों और पैकेट पर 100% शब्द का इस्तेमाल इस तरह किया जो उनके प्रोडक्ट्स की असली सामग्री (कंपोजीशन) से बिल्कुल अलग था।

चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अगुवाई वाली अथॉरिटी ने दोनों कंपनियों को अपने प्रोडक्ट पैकेजिंग, वेबसाइट और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से इन भ्रामक दावों को हटाने का निर्देश दिया है।

स्टोरिया: 100% कोकोनट वाटर नेचुरल का दावा, निकला 9.6% कंसंट्रेट

CCPA ने स्टोरिया फूड्स के ‘100% टेंडर कोकोनट वाटर’ और अनार, मैंगो, मिक्स्ड फ्रूट और अमरूद जैसे जूस के विज्ञापनों पर खुद संज्ञान लिया था। ये प्रोडक्ट्स कंपनी की वेबसाइट के अलावा अमेजन, फ्लिपकार्ट, बिगबास्केट, ब्लिंकिट, जियोमार्ट और जेप्टो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे थे।

जांचकर्ताओं ने जब इसके मुख्य प्रोडक्ट की सामग्री (इन्ग्रेडिएंट्स) की जांच की तो कहानी कुछ और ही निकली:

  • यह ड्रिंक पानी और सिर्फ 9.6% कोकोनट वाटर कंसंट्रेट को मिलाकर तैयार की गई थी, जिसे 100% नारियल पानी के ‘बराबर’ दिखाने के लिए रिकॉन्स्टिट्यूट (पुनर्गठित) किया गया था।
  • कंपनी ने ‘रिकॉन्स्टिट्यूटेड’ शब्द को पैकेट के पीछे बेहद बारीक अक्षरों में लिखा था, जबकि सामने बड़े अक्षरों में ‘100%’ का दावा किया था।
  • इसके अलावा, प्रोडक्ट में क्लास II प्रिजर्वेटिव (INS 202) मिलाया गया था, जिसके बाद कंपनी का इसे ‘100% नेचुरल’ कहना पूरी तरह से गलत साबित हुआ।

इंग्लिश ओवन ब्रेड: दावा 100% अट्टा ब्रेड का, निकला 87%

मिसेज बेक्टर्स कंपनी ने अपने ‘इंग्लिश ओवन’ ब्रांड के तहत अखबारों, वेबसाइट, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर बड़े-बड़े विज्ञापन दिए थे। इनमें “100% अट्टा ब्रेड”, “100% होल व्हीट ब्रेड” और “जीरो मैदा” जैसे दावे किए गए थे। इन विज्ञापनों वाले वीडियो को अप्रैल 2026 तक 50 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके थे।

सुनवाई के दौरान जब कड़ाई से पूछताछ हुई, तो कंपनी ने खुद स्वीकार किया कि उसकी ब्रेड में सिर्फ 87% होल व्हीट फ्लॉर (गेहूं का आटा) है। CCPA ने कहा कि जब आटे की मात्रा सिर्फ 87% है, तो पैकेट पर 100% लिखना किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। इसके अलावा पैकेट पर एक साथ ‘100% होल व्हीट ब्रेड’ और ‘जीरो मैदा’ लिखना ग्राहकों के मन में यह झूठा प्रभाव डालता है कि प्रोडक्ट पूरी तरह से सिर्फ गेहूं के आटे से बना है।

CCPA ने कहा- विज्ञापन ग्राहकों के नजरिए से होना चाहिए

सुनवाई के दौरान मिसेज बेक्टर्स कंपनी ने दलील दी कि “100% अट्टा” लिखने का उनका मतलब सिर्फ यह था कि ब्रेड में अनाज के तौर पर केवल गेहूं के स्रोत का इस्तेमाल हुआ है, न कि यह उनके पूरे कंपोजीशन का दावा था।

CCPA ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अथॉरिटी ने कहा कि किसी भी विज्ञापन को एक सामान्य और समझदार उपभोक्ता के नजरिए से देखा जाना चाहिए। विज्ञापनदाता बाद में कोई तकनीकी सफाई देकर ग्राहकों पर पड़े भ्रामक असर को सही नहीं ठहरा सकते। अगर कोई विज्ञापन उपभोक्ता को गुमराह करने की क्षमता रखता है, तो विज्ञापनदाता की मंशा क्या थी, यह मायने नहीं रखता।

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नई दिल्ली33 मिनट पहले

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CCPA यानी सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने खाने-पीने के सामानों पर ‘100%’ शुद्धता का भ्रामक दावा करने वाली दो कंपनियों पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है। ये स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड और इंग्लिश ओवन ब्रेड बनाने वाली कंपनी मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड है।

अथॉरिटी ने जांच में पाया कि इन कंपनियों ने अपने विज्ञापनों और पैकेट पर 100% शब्द का इस्तेमाल इस तरह किया जो उनके प्रोडक्ट्स की असली सामग्री (कंपोजीशन) से बिल्कुल अलग था।

चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अगुवाई वाली अथॉरिटी ने दोनों कंपनियों को अपने प्रोडक्ट पैकेजिंग, वेबसाइट और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से इन भ्रामक दावों को हटाने का निर्देश दिया है।

स्टोरिया: 100% कोकोनट वाटर नेचुरल का दावा, निकला 9.6% कंसंट्रेट

CCPA ने स्टोरिया फूड्स के ‘100% टेंडर कोकोनट वाटर’ और अनार, मैंगो, मिक्स्ड फ्रूट और अमरूद जैसे जूस के विज्ञापनों पर खुद संज्ञान लिया था। ये प्रोडक्ट्स कंपनी की वेबसाइट के अलावा अमेजन, फ्लिपकार्ट, बिगबास्केट, ब्लिंकिट, जियोमार्ट और जेप्टो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे थे।

जांचकर्ताओं ने जब इसके मुख्य प्रोडक्ट की सामग्री (इन्ग्रेडिएंट्स) की जांच की तो कहानी कुछ और ही निकली:

  • यह ड्रिंक पानी और सिर्फ 9.6% कोकोनट वाटर कंसंट्रेट को मिलाकर तैयार की गई थी, जिसे 100% नारियल पानी के ‘बराबर’ दिखाने के लिए रिकॉन्स्टिट्यूट (पुनर्गठित) किया गया था।
  • कंपनी ने ‘रिकॉन्स्टिट्यूटेड’ शब्द को पैकेट के पीछे बेहद बारीक अक्षरों में लिखा था, जबकि सामने बड़े अक्षरों में ‘100%’ का दावा किया था।
  • इसके अलावा, प्रोडक्ट में क्लास II प्रिजर्वेटिव (INS 202) मिलाया गया था, जिसके बाद कंपनी का इसे ‘100% नेचुरल’ कहना पूरी तरह से गलत साबित हुआ।

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सुनवाई के दौरान जब कड़ाई से पूछताछ हुई, तो कंपनी ने खुद स्वीकार किया कि उसकी ब्रेड में सिर्फ 87% होल व्हीट फ्लॉर (गेहूं का आटा) है। CCPA ने कहा कि जब आटे की मात्रा सिर्फ 87% है, तो पैकेट पर 100% लिखना किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। इसके अलावा पैकेट पर एक साथ ‘100% होल व्हीट ब्रेड’ और ‘जीरो मैदा’ लिखना ग्राहकों के मन में यह झूठा प्रभाव डालता है कि प्रोडक्ट पूरी तरह से सिर्फ गेहूं के आटे से बना है।

CCPA ने कहा- विज्ञापन ग्राहकों के नजरिए से होना चाहिए

सुनवाई के दौरान मिसेज बेक्टर्स कंपनी ने दलील दी कि “100% अट्टा” लिखने का उनका मतलब सिर्फ यह था कि ब्रेड में अनाज के तौर पर केवल गेहूं के स्रोत का इस्तेमाल हुआ है, न कि यह उनके पूरे कंपोजीशन का दावा था।

CCPA ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अथॉरिटी ने कहा कि किसी भी विज्ञापन को एक सामान्य और समझदार उपभोक्ता के नजरिए से देखा जाना चाहिए। विज्ञापनदाता बाद में कोई तकनीकी सफाई देकर ग्राहकों पर पड़े भ्रामक असर को सही नहीं ठहरा सकते। अगर कोई विज्ञापन उपभोक्ता को गुमराह करने की क्षमता रखता है, तो विज्ञापनदाता की मंशा क्या थी, यह मायने नहीं रखता।

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