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Dehydration Blood Pressure Effect; Water Deficiency Heart Risk

Dehydration Blood Pressure Effect; Water Deficiency Heart Risk
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  • Dehydration Blood Pressure Effect; Water Deficiency Heart Risk | Common Symptoms

2 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने पर शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है। यह कॉमन है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पानी ब्लड सर्कुलेशन और दिल की धड़कनों को भी कंट्रोल करता है? जब शरीर में फ्लूइड कम होता है तो खून गाढ़ा होने लगता है। साथ ही हॉर्मोनल सिस्टम में गड़बड़ी होने लगती है। इससे ब्लड प्रेशर (BP) अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।

ऐसे में अगर कोई पहले से हाई बीपी या दिल की बीमारी से जूझ रहा है तो डिहाइड्रेशन एक ‘साइलेंट थ्रेट’ साबित हो सकता है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज डिहाइड्रेशन से बीपी पर होने वाले असर की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • आखिर पानी की कमी से ब्लड वेसल्स क्यों सिकुड़ने लगती हैं?
  • क्यों प्यास न लगना भी खतरे की घंटी हो सकता है?
  • हार्ट पेशेंट्स को गर्मियों में किन गलतियों से बचना चाहिए?

सवाल- डिहाइड्रेशन क्या होता है और यह कब होता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन वह कंडीशन है, जब शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम-पोटेशियम) की कमी हो जाती है।

यह आमतौर पर ज्यादा पसीना आने, उल्टी-दस्त होने, बुखार या पर्याप्त पानी न पीने से होता है। गर्म मौसम, हैवी फिजिकल एक्टिविटी और लंबे समय तक धूप में रहने से जोखिम बढ़ जाता है।

सवाल- डिहाइड्रेशन का ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन होने पर शरीर में फ्लूइड की मात्रा कम हो जाती है।

  • इससे शरीर में ब्लड का वॉल्यूम घट जाता है, जिससे कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर कम हो जाता है।
  • शरीर इसकी भरपाई के लिए एक हॉर्मोनल सिस्टम एक्टिव करता है।
  • इससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
  • यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा दिखता है, जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट की समस्या होती है।

सवाल- डिहाइड्रेशन के दौरान शरीर में ऐसा क्या होता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन होने पर शरीर पानी की कमी को संतुलित करने की कोशिश करता है।

  • शरीर खतरे को भांपकर किडनी और हॉर्मोनल सिस्टम को एक्टिव कर देता है। इस प्रक्रिया को ‘रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन सिस्टम’ कहते हैं।
  • यह सिस्टम ब्लड वेसल्स को संकुचित कर देता है।
  • शरीर इस स्थिति में सोडियम और पानी को रोकने की कोशिश करने लगता है।
  • इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। अगर किसी को पहले से ही हाई बीपी की समस्या है तो यह खतरनाक हो सकता है।

सवाल- डिहाइड्रेशन का हार्ट और ब्लड सर्कुलेशन पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन होने पर खून का वॉल्यूम कम होने लगता है।

  • इससे दिल को शरीर के सभी अंगों तक खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • इस प्रोसेस को स्मूद करने के लिए हार्ट तेजी से पंप करने लगता है।

ब्लड सर्कुलेशन

  • डिहाइड्रेशन से ब्लड गाढ़ा होने लगता है, जिससे सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है।
  • गंभीर कंडीशन में चक्कर, कमजोरी और बेहोशी का खतरा हो सकता है।
  • जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज है, उनमें हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

सवाल- किन लोगों के लिए डिहाइड्रेशन ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन सबके लिए खतरनाक है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह गंभीर स्थितियां पैदा कर सकता है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर किसी को हाई बीपी है या हार्ट से जुड़ी समस्या है तो उसे गर्मी के मौसम में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- सबसे पहले तो नियमित रूप से ब्लड प्रेशर मॉनिटर करते रहें।

  • दिनभर में पर्याप्त पानी और फ्लूइड लेते रहें।
  • तेज धूप और गर्मी में लंबे समय तक न रहें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार बीपी और हार्ट की दवाएं नियमित रूप से लें।
  • नमक और कैफीन का सेवन सीमित करें।
  • हल्का और संतुलित भोजन करें, ताकि शरीर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
  • चक्कर, कमजोरी या हार्ट बीट तेज होने पर तुरंत आराम करें।
  • जरूरत महसूस हो तो डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।

सवाल- अगर किसी को हार्ट स्ट्रोक, अटैक हो चुका है या हार्ट की कोई सर्जरी हुई है तो उसे गर्मी के मौसम में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- इन लोगों के लिए गर्मियाें का मौसम अधिक संवेदनशील साबित हो सकता है-

  • शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें।
  • बहुत गर्म और उमस भरे वातावरण में जाने से बचें।
  • गर्मी में हैवी फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज सीमित करें।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और डाइट प्लान का पालन करें।
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।
  • अचानक थकान, सांस फूलना या सीने में दर्द हो तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

सवाल- गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

जवाब- गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा पसीना निकलता है।

  • पसीने के साथ पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स भी शरीर से बाहर निकलते हैं।
  • अगर उतनी मात्रा में पानी न पिया जाए तो शरीर में इसकी कमी हो जाती है।
  • तेज धूप और ज्यादा तापमान शरीर से वाटर लॉस ज्यादा होता है।
  • बाहर काम करने वाले लोगों और खिलाड़ियों में जोखिम ज्यादा होता है।
  • इसलिए गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

सवाल- डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत क्या हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

जवाब- इन संकेतों को नजरअंदाज करने पर कंडीशन ज्यादा गंभीर हो सकती है-

सवाल- किन लोगों को डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन का जोखिम हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता। कुछ खास फिजिकल कंडीशंस और उम्र में यह खतरा गंभीर हो जाता है-

  • शिशु और बच्चे- बच्चों के शरीर का वजन कम होता है और मेटाबॉलिज्म तेज, जिससे उनमें पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का टर्नओवर बहुत जल्दी होता है। वे अपनी प्यास ठीक से बता भी नहीं पाते हैं।
  • बुजुर्ग- उम्र बढ़ने के साथ ब्रेन की ‘प्यास का सिग्ननल’ देने की क्षमता कम हो जाती है। साथ ही बुजुर्गों के शरीर में वाटर रिटेंशन कम होता है।
  • क्रॉनिक डिजीज पेशेंट्स: अनियंत्रित डायबिटीज और किडनी की बीमारी वाले लोगों को खतरा अधिक होता है।
  • जो मेडिकेशन पर हैं- जो लोग हाई बीपी के लिए डाइयूरेटिक दवाएं लेते हैं, उनका शरीर तेजी से फ्लूइड बाहर निकालता है।

सवाल- अगर डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- लक्षण दिखने पर स्थिति को बिगड़ने से रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए। ये कदम उठाएं-

  • व्यक्ति को तुरंत ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं। पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर लेटा दें ताकि ब्रेन तक ब्लड फ्लो बेहतर हो।
  • एक साथ बहुत पानी पीने के बजाय ओआरएस (ORS) या नमक-चीनी का घोल छोटे घूंट में पिएं।
  • अगर शरीर का टेम्परेचर बढ़ रहा हो तो सिर और गर्दन पर ठंडी गीली पट्टियां रखें।
  • अगर व्यक्ति बेहोश हो या वह कुछ भी पी पाने की स्थिति में न हो तो तुरंत अस्पताल ले जाएं, क्योंकि उसे ड्रिप (IV फ्लूइड) की जरूरत हो सकती है। ग्राफिक में दी गई बातों का खास ख्याल रखें-

सवाल- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए दिन भर में कितना पानी पीना चाहिए?

जवाब- पानी की सटीक मात्रा व्यक्ति के वजन, फिजिकल एक्टिविटी और उस जगह के एनवार्नमेंट पर निर्भर करती है, लेकिन वैज्ञानिक मानक इस प्रकार हैं-

  • एक स्वस्थ वयस्क पुरुष को प्रतिदिन लगभग 3.7 लीटर और महिला को 2.7 लीटर कुल फ्लूइड (भोजन के पानी सहित) की जरूरत होती है। इसका मतलब पूरे दिन में 8-10 गिलास पानी पीना ठीक है।
  • गर्मियों में या फिजिकल एक्टिविटी (जिम/आउटडोर काम) के दौरान इस मात्रा को 1-2 लीटर तक बढ़ाना चाहिए, क्योंकि पसीने के कारण भारी नुकसान होता है।
  • हाइड्रेशन कंडीशन चेक करने का सबसे वैज्ञानिक तरीका पेशाब का रंग है। अगर यह ‘गहरा पीला’ है, तो इसका मतलब है कि पानी कम पी रहे हैं। यह ‘पानी जैसा साफ’ या हल्का पीले कलर का होना चाहिए।

सवाल- पानी के अलावा कौन-से ड्रिंक्स, फूड्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं?

जवाब- केवल सादा पानी ही हाइड्रेशन का सोर्स नहीं है, इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर ड्रिंक्स और ताजे फल ज्यादा प्रभावी होते हैं-

फ्लूइड: नारियल पानी (पोटेशियम का बेस्ट सोर्स), छाछ, नींबू पानी और बिना चीनी के ताजे फलों का जूस बेहतरीन हाइड्रेटिंग एजेंट हैं।

हाइड्रेटिंग फ्रूट्स: तरबूज (92% पानी), खरबूजा, संतरा, अंगूर और स्ट्रॉबेरी का सेवन करें। ये विटामिन और मिनरल्स भी प्रदान करते हैं।

सब्जियां: खीरा, ककड़ी, टमाटर और लौकी जैसी सब्जियां न केवल पानी की कमी पूरी करती हैं, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा भी रखती हैं।

चाय-कॉफी पीने से बचें, क्योंकि ये ‘डिहाइड्रेटिंग’ होते हैं और शरीर से पानी बाहर निकालते हैं।

………………………..

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2 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने पर शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है। यह कॉमन है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पानी ब्लड सर्कुलेशन और दिल की धड़कनों को भी कंट्रोल करता है? जब शरीर में फ्लूइड कम होता है तो खून गाढ़ा होने लगता है। साथ ही हॉर्मोनल सिस्टम में गड़बड़ी होने लगती है। इससे ब्लड प्रेशर (BP) अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।

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  • क्यों प्यास न लगना भी खतरे की घंटी हो सकता है?
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सवाल- डिहाइड्रेशन का ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन होने पर शरीर में फ्लूइड की मात्रा कम हो जाती है।

  • इससे शरीर में ब्लड का वॉल्यूम घट जाता है, जिससे कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर कम हो जाता है।
  • शरीर इसकी भरपाई के लिए एक हॉर्मोनल सिस्टम एक्टिव करता है।
  • इससे ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
  • यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा दिखता है, जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट की समस्या होती है।

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  • शरीर खतरे को भांपकर किडनी और हॉर्मोनल सिस्टम को एक्टिव कर देता है। इस प्रक्रिया को ‘रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन सिस्टम’ कहते हैं।
  • यह सिस्टम ब्लड वेसल्स को संकुचित कर देता है।
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ब्लड सर्कुलेशन

  • डिहाइड्रेशन से ब्लड गाढ़ा होने लगता है, जिससे सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है।
  • गंभीर कंडीशन में चक्कर, कमजोरी और बेहोशी का खतरा हो सकता है।
  • जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज है, उनमें हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

सवाल- किन लोगों के लिए डिहाइड्रेशन ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

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जवाब- सबसे पहले तो नियमित रूप से ब्लड प्रेशर मॉनिटर करते रहें।

  • दिनभर में पर्याप्त पानी और फ्लूइड लेते रहें।
  • तेज धूप और गर्मी में लंबे समय तक न रहें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार बीपी और हार्ट की दवाएं नियमित रूप से लें।
  • नमक और कैफीन का सेवन सीमित करें।
  • हल्का और संतुलित भोजन करें, ताकि शरीर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
  • चक्कर, कमजोरी या हार्ट बीट तेज होने पर तुरंत आराम करें।
  • जरूरत महसूस हो तो डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।

सवाल- अगर किसी को हार्ट स्ट्रोक, अटैक हो चुका है या हार्ट की कोई सर्जरी हुई है तो उसे गर्मी के मौसम में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- इन लोगों के लिए गर्मियाें का मौसम अधिक संवेदनशील साबित हो सकता है-

  • शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें।
  • बहुत गर्म और उमस भरे वातावरण में जाने से बचें।
  • गर्मी में हैवी फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज सीमित करें।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और डाइट प्लान का पालन करें।
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।
  • अचानक थकान, सांस फूलना या सीने में दर्द हो तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

सवाल- गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

जवाब- गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा पसीना निकलता है।

  • पसीने के साथ पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स भी शरीर से बाहर निकलते हैं।
  • अगर उतनी मात्रा में पानी न पिया जाए तो शरीर में इसकी कमी हो जाती है।
  • तेज धूप और ज्यादा तापमान शरीर से वाटर लॉस ज्यादा होता है।
  • बाहर काम करने वाले लोगों और खिलाड़ियों में जोखिम ज्यादा होता है।
  • इसलिए गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

सवाल- डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत क्या हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

जवाब- इन संकेतों को नजरअंदाज करने पर कंडीशन ज्यादा गंभीर हो सकती है-

सवाल- किन लोगों को डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन का जोखिम हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता। कुछ खास फिजिकल कंडीशंस और उम्र में यह खतरा गंभीर हो जाता है-

  • शिशु और बच्चे- बच्चों के शरीर का वजन कम होता है और मेटाबॉलिज्म तेज, जिससे उनमें पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का टर्नओवर बहुत जल्दी होता है। वे अपनी प्यास ठीक से बता भी नहीं पाते हैं।
  • बुजुर्ग- उम्र बढ़ने के साथ ब्रेन की ‘प्यास का सिग्ननल’ देने की क्षमता कम हो जाती है। साथ ही बुजुर्गों के शरीर में वाटर रिटेंशन कम होता है।
  • क्रॉनिक डिजीज पेशेंट्स: अनियंत्रित डायबिटीज और किडनी की बीमारी वाले लोगों को खतरा अधिक होता है।
  • जो मेडिकेशन पर हैं- जो लोग हाई बीपी के लिए डाइयूरेटिक दवाएं लेते हैं, उनका शरीर तेजी से फ्लूइड बाहर निकालता है।

सवाल- अगर डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- लक्षण दिखने पर स्थिति को बिगड़ने से रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए। ये कदम उठाएं-

  • व्यक्ति को तुरंत ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं। पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर लेटा दें ताकि ब्रेन तक ब्लड फ्लो बेहतर हो।
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  • अगर व्यक्ति बेहोश हो या वह कुछ भी पी पाने की स्थिति में न हो तो तुरंत अस्पताल ले जाएं, क्योंकि उसे ड्रिप (IV फ्लूइड) की जरूरत हो सकती है। ग्राफिक में दी गई बातों का खास ख्याल रखें-

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जवाब- पानी की सटीक मात्रा व्यक्ति के वजन, फिजिकल एक्टिविटी और उस जगह के एनवार्नमेंट पर निर्भर करती है, लेकिन वैज्ञानिक मानक इस प्रकार हैं-

  • एक स्वस्थ वयस्क पुरुष को प्रतिदिन लगभग 3.7 लीटर और महिला को 2.7 लीटर कुल फ्लूइड (भोजन के पानी सहित) की जरूरत होती है। इसका मतलब पूरे दिन में 8-10 गिलास पानी पीना ठीक है।
  • गर्मियों में या फिजिकल एक्टिविटी (जिम/आउटडोर काम) के दौरान इस मात्रा को 1-2 लीटर तक बढ़ाना चाहिए, क्योंकि पसीने के कारण भारी नुकसान होता है।
  • हाइड्रेशन कंडीशन चेक करने का सबसे वैज्ञानिक तरीका पेशाब का रंग है। अगर यह ‘गहरा पीला’ है, तो इसका मतलब है कि पानी कम पी रहे हैं। यह ‘पानी जैसा साफ’ या हल्का पीले कलर का होना चाहिए।

सवाल- पानी के अलावा कौन-से ड्रिंक्स, फूड्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं?

जवाब- केवल सादा पानी ही हाइड्रेशन का सोर्स नहीं है, इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर ड्रिंक्स और ताजे फल ज्यादा प्रभावी होते हैं-

फ्लूइड: नारियल पानी (पोटेशियम का बेस्ट सोर्स), छाछ, नींबू पानी और बिना चीनी के ताजे फलों का जूस बेहतरीन हाइड्रेटिंग एजेंट हैं।

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सब्जियां: खीरा, ककड़ी, टमाटर और लौकी जैसी सब्जियां न केवल पानी की कमी पूरी करती हैं, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा भी रखती हैं।

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