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Due to the Iran-Israel-America war, 2.5 billion worth of goods from Sojat’s henna factories got stuck, April 4, 2026

Due to the Iran-Israel-America war, 2.5 billion worth of goods from Sojat's henna factories got stuck, April 4, 2026

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण सोजत (पाली) में मेहंदी का उत्पादन घटकर 20% तक आ गया है।

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की आग में मारवाड़ की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उद्योग भी झुलस रहा है। राजस्थान के सोजत (पाली) में 150 से ज्यादा फैक्ट्रियों में मशीनों के पहिए थम गए हैं। 2200 से ज्यादा मजदूरों को घर भेजा जा चुका है। सोजत के नि

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युद्ध की वजह से सोजत की एक मेहंदी फैक्ट्री में काम बंद पड़ा है।

प्रोडक्शन 80% गिरा, फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर व्यापारियों के अनुसार, पिछले एक महीने से एक्सपोर्ट पूरी तरह ठप है। सोजत में करीब 35 ऐसी बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जो खास तौर पर मिडिल ईस्ट के लिए नेचुरल मेहंदी और हेयर डाई बनाती हैं। मांग न होने के कारण उत्पादन 20% तक सिमट गया है। व्यापारी नितेश अग्रवाल का कहना है कि कोरोना काल के बाद पहली बार ऐसे हालात बने हैं।

पलायन बनी मजबूरी मेहंदी व्यापारी अनिल हिरानी ने बताया कि काम बंद होने के कारण अब तक करीब 2200 मजदूरों को घर भेजा जा चुका है। इनमें से 80% श्रमिक यूपी, बिहार और कोटपूतली (राजस्थान) के हैं। काम न मिलने के कारण श्रमिक पलायन को मजबूर हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और मंडी सप्लायर्स पर भी बुरा असर पड़ा है।

माल भाड़ा हुआ डबल, पेमेंट भी फंसा निर्यातक विनोद लोढ़ा के अनुसार, मुंबई पोर्ट और दिल्ली एयर कार्गो में करीब 150 करोड़ का माल अटका हुआ है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाजों का जोखिम बढ़ गया है, जिससे शिपिंग कंपनियों ने माल भाड़ा दोगुना कर दिया है। पुराने भेजे गए माल का पेमेंट भी समय पर नहीं मिल पा रहा है।

सोजत में केवल लोकल में सप्लाई होने वाले मेहंदी कोन ही तैयार किए जा रहे हैं। यहां मजूदरों की संख्या को भी कम कर दिया है।

सोजत में केवल लोकल में सप्लाई होने वाले मेहंदी कोन ही तैयार किए जा रहे हैं। यहां मजूदरों की संख्या को भी कम कर दिया है।

रमजान के बाद आए ऑर्डर ठप, 100 करोड़ का माल गोदामों में कैद सोजत के मैन्युफैक्चरर और एक्सपोर्टर विनोद लोढ़ा ने बताया- रमजान से पहले के ऑर्डर तो समय पर चले गए थे, लेकिन उसके बाद आए सभी ऑर्डर युद्ध के कारण रुक गए हैं। वर्तमान में करीब 100 करोड़ रुपए की मेहंदी अकेले सोजत के गोदामों में तैयार पड़ी है, जिसे दुबई भेजा जाना था। लेकिन न तो नए ऑर्डर मिल रहे हैं और न ही पुराने ऑर्डर्स की डिस्पैचिंग हो पा रही है।

गुजरात से आने वाला कच्चा माल हुआ महंगा मेहंदी व्यापारी सुरेन हिरानी ने बताया कि मेहंदी के कोन और पाउडर बनाने के लिए जरूरी रॉ-मटेरियल मुख्य रूप से गुजरात से आता है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से वहां के सप्लायर्स ने रेट बढ़ा दिए हैं। 10 ग्राम से लेकर 1 किलो तक की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला मटेरियल, जो पहले 250 रुपए किलो मिलता था, वह अब 350 रुपए तक पहुंच गया है।

खाड़ी देशों से ऑर्डर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मशीनों को बंद करना पड़ा है। कच्चा माल होने के बाद भी यहां काम नहीं हो पा रहा है।

खाड़ी देशों से ऑर्डर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मशीनों को बंद करना पड़ा है। कच्चा माल होने के बाद भी यहां काम नहीं हो पा रहा है।

एक्सपोट्‌र्स बोले- न दाम बढ़ा सकते, न माल बेच सकते हैं एक्सपोट‌्‌र्स की सबसे बड़ी दुविधा यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी और डिमांड की कमी के चलते वे अपनी फिनिश्ड गुड्स (तैयार माल) की कॉस्ट नहीं बढ़ा पा रहे हैं। लागत में 40% तक की बढ़ोतरी होने के बावजूद पुरानी रेट पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। घरेलू बाजार में भी माल भेजना अब महंगा हो गया है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ चुकी है।

130 देशों का ‘ग्लोबल मार्केट’ अब अधर में सोजत की मेहंदी का रसूख इतना बड़ा है कि यह केवल भारत या खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। यह फ्रांस, पेरिस, आयरलैंड, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों तक अपनी पहुंच बना चुकी है।

व्यापारियों के अनुसार, सोजत से निकलने वाली प्रीमियम मेहंदी और नेचुरल हेयर डाई की मांग यूरोपीय देशों में साल भर रहती है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने शिपिंग रूट्स को इतना असुरक्षित बना दिया है कि 130 देशों का यह विशाल नेटवर्क ठप होने की कगार पर है। जो मेहंदी स्पेन, यूनान और माल्टा जैसे देशों के बाजारों की शोभा बढ़ाती थी, वह अब ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण सोजत के गोदामों से बाहर नहीं निकल पा रही है।

क्वालिटी का डर- 1 महीने में खराब हो जाता है मेहंदी कोन व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता क्वालिटी को लेकर है। मेहंदी कोन की लाइफ महज एक महीना होती है, जिसके बाद वह खराब होने लगता है। हेयर डाई की क्वालिटी भी 6 महीने बाद गिरने लगती है। अगर युद्ध लंबा चला, तो व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

4 से 5 हजार रुपए का सालाना टर्नओवर सोजत का मेहंदी कारोबार का सालाना टर्नओवर 4 से 5 हजार रुपए सालाना है। व्यापारियों ने दावा किया- यदि युद्ध आज भी रुक जाए, तो स्थिति को सामान्य होने में कम से कम 4 से 6 महीने का समय लगेगा।

व्यापारी बोले- समझ नहीं आ रहा उद्योग कैसे बचाएं मेहंदी व्यापारी सुरेन हिरानी कहते हैं- सोजत की मेहंदी का सीधा कनेक्शन मिडिल ईस्ट से है। वहां युद्ध शुरू होते ही हमारी सप्लाई लाइन कट गई। अब गुजरात से आने वाला कच्चा माल महंगा हो गया और ट्रांसपोर्ट के दाम बढ़ गए। समझ नहीं आ रहा कि उद्योग को कैसे बचाएं।

पिछले एक महीने से फैक्ट्रियों में मेहंदी के कट्टे पैक पड़े हुए हैं। ऑर्डर नहीं मिलने से व्यापारी परेशान हैं।

पिछले एक महीने से फैक्ट्रियों में मेहंदी के कट्टे पैक पड़े हुए हैं। ऑर्डर नहीं मिलने से व्यापारी परेशान हैं।

80% श्रमिक बाहरी राज्यों के, रोजी-रोटी का संकट सोजत के मेहंदी उद्योग में उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के कोटपूतली (राजस्थान) क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रमिक आते हैं। कुल निकाले गए मजदूरों में 80 फीसदी प्रवासी हैं, जबकि 20 फीसदी स्थानीय लोग हैं। इन मजदूरों के लिए मेहंदी सीजन ही साल भर की कमाई का मुख्य जरिया होता है, लेकिन युद्ध ने उनके इस भरोसे को तोड़ दिया है।

केवल मजदूर नहीं, पूरी ‘सप्लाई चेन’ प्रभावित

काम बंद होने का असर केवल फैक्ट्री के भीतर तक सीमित नहीं है। इसका ‘चेन रिएक्शन’ पूरे सिस्टम पर दिख रहा है।

किसान: मेहंदी की फसल बेचने वाले किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे।

मंडी: सोजत मंडी में व्यापारिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं।

सप्लायर: पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और कच्चा माल सप्लाई करने वालों का काम भी रुक गया है।

खाड़ी देशों की पहली पसंद है ‘सोजत मेहंदी’ सोजत की मेहंदी अपनी ए-ग्रेड क्वालिटी के लिए जानी जाती है। यहां मेहंदी में केमिकल के बजाय लौंग, नीलगिरी और टी-3 नेचुरल ऑयल का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसकी डिमांड मिडिल ईस्ट के अलावा दुनिया के 130 देशों में है। लेकिन वर्तमान युद्ध की स्थिति ने इस चमक को फिलहाल धुंधला कर दिया है।

लातविया से लेकर पुर्तगाल तक… हर जगह सोजत का डंका सोजत की मेहंदी की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह एस्टोनिया, लिथुआनिया, बुल्गारिया, स्लोवाकिया, और क्रोएशिया जैसे देशों में भी निर्यात की जाती है।

यूरोप का बाजार- यहां नेचुरल कॉस्मेटिक्स की भारी डिमांड है, जिसे सोजत पूरा करता है।

एशियाई बाजार- नेपाल और मलेशिया जैसे देशों में सोजत की मेहंदी एक अनिवार्य ब्रांड बन चुकी है।

पेरिस के फैशन से रूस के बाजार तक सोजत की मेहंदी की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘केमिकल फ्री’ होना है। इसी कारण पेरिस (फ्रांस) जैसे फैशन हब और रूस व बेलारूस जैसे ठंडे देशों में भी इसे स्किन-फ्रेंडली हेयर डाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल इन सभी देशों से आने वाले नए ऑर्डर्स पर युद्ध की अनिश्चितता के कारण ‘ब्रेक’ लग गया है।

38 हजार हेक्टेयर में फैला है ‘मेहंदी का साम्राज्य’ पाली जिले का सोजत और उसके पड़ोसी क्षेत्र रायपुर व जैतारण मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा मेहंदी उत्पादक हब बनाते हैं। कुल 38 हजार हेक्टेयर भूमि पर होने वाली यह खेती यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यहां की मिट्टी और जलवायु मेहंदी के लिए इतनी अनुकूल है कि यहां पैदा होने वाली मेहंदी में लॉसोने (रंग देने वाला तत्व) की मात्रा दुनिया में सर्वाधिक पाई जाती है।

प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल का उत्पादन, पर बाजार में सन्नाटा

इस क्षेत्र में औसतन 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मेहंदी का उत्पादन होता है। इस साल भी पैदावार बंपर होने की उम्मीद है, लेकिन युद्ध के कारण सोजत की मंडी और फैक्ट्रियों में रौनक गायब है।

बंपर स्टॉक: खेतों से मंडी तक माल पहुंच रहा है, लेकिन निर्यात रुकने से स्टॉक जमा होता जा रहा है।

भाव का डर: मांग कम होने से किसानों को डर है कि उन्हें अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा।

क्यों खास है सोजत की मेहंदी? सोजत की मेहंदी को इसकी शुद्धता और गहरे रंग के लिए GI टैग (Geographical Indication) भी मिल चुका है। यहां की मेहंदी में किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल के बजाय प्राकृतिक तेलों का उपयोग किया जाता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारता है।

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अमेरिका-ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट की यह खबर भी पढ़िए…

राजस्थान में सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद, हजारों लोग बेरोजगार, डिमांड लगातार कम हो रही, घाटा करोड़ों में

अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण राजस्थान का मिनरल उद्योग प्रभावित हुआ है। गुजरात के मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्रीज में डिमांड घटने से करीब 2300 से ज्यादा मिनरल्स-ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो गई हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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Due to the Iran-Israel-America war, 2.5 billion worth of goods from Sojat’s henna factories got stuck, April 4, 2026

Due to the Iran-Israel-America war, 2.5 billion worth of goods from Sojat's henna factories got stuck, April 4, 2026

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण सोजत (पाली) में मेहंदी का उत्पादन घटकर 20% तक आ गया है।

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युद्ध की वजह से सोजत की एक मेहंदी फैक्ट्री में काम बंद पड़ा है।

प्रोडक्शन 80% गिरा, फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर व्यापारियों के अनुसार, पिछले एक महीने से एक्सपोर्ट पूरी तरह ठप है। सोजत में करीब 35 ऐसी बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जो खास तौर पर मिडिल ईस्ट के लिए नेचुरल मेहंदी और हेयर डाई बनाती हैं। मांग न होने के कारण उत्पादन 20% तक सिमट गया है। व्यापारी नितेश अग्रवाल का कहना है कि कोरोना काल के बाद पहली बार ऐसे हालात बने हैं।

पलायन बनी मजबूरी मेहंदी व्यापारी अनिल हिरानी ने बताया कि काम बंद होने के कारण अब तक करीब 2200 मजदूरों को घर भेजा जा चुका है। इनमें से 80% श्रमिक यूपी, बिहार और कोटपूतली (राजस्थान) के हैं। काम न मिलने के कारण श्रमिक पलायन को मजबूर हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और मंडी सप्लायर्स पर भी बुरा असर पड़ा है।

माल भाड़ा हुआ डबल, पेमेंट भी फंसा निर्यातक विनोद लोढ़ा के अनुसार, मुंबई पोर्ट और दिल्ली एयर कार्गो में करीब 150 करोड़ का माल अटका हुआ है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाजों का जोखिम बढ़ गया है, जिससे शिपिंग कंपनियों ने माल भाड़ा दोगुना कर दिया है। पुराने भेजे गए माल का पेमेंट भी समय पर नहीं मिल पा रहा है।

सोजत में केवल लोकल में सप्लाई होने वाले मेहंदी कोन ही तैयार किए जा रहे हैं। यहां मजूदरों की संख्या को भी कम कर दिया है।

सोजत में केवल लोकल में सप्लाई होने वाले मेहंदी कोन ही तैयार किए जा रहे हैं। यहां मजूदरों की संख्या को भी कम कर दिया है।

रमजान के बाद आए ऑर्डर ठप, 100 करोड़ का माल गोदामों में कैद सोजत के मैन्युफैक्चरर और एक्सपोर्टर विनोद लोढ़ा ने बताया- रमजान से पहले के ऑर्डर तो समय पर चले गए थे, लेकिन उसके बाद आए सभी ऑर्डर युद्ध के कारण रुक गए हैं। वर्तमान में करीब 100 करोड़ रुपए की मेहंदी अकेले सोजत के गोदामों में तैयार पड़ी है, जिसे दुबई भेजा जाना था। लेकिन न तो नए ऑर्डर मिल रहे हैं और न ही पुराने ऑर्डर्स की डिस्पैचिंग हो पा रही है।

गुजरात से आने वाला कच्चा माल हुआ महंगा मेहंदी व्यापारी सुरेन हिरानी ने बताया कि मेहंदी के कोन और पाउडर बनाने के लिए जरूरी रॉ-मटेरियल मुख्य रूप से गुजरात से आता है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से वहां के सप्लायर्स ने रेट बढ़ा दिए हैं। 10 ग्राम से लेकर 1 किलो तक की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला मटेरियल, जो पहले 250 रुपए किलो मिलता था, वह अब 350 रुपए तक पहुंच गया है।

खाड़ी देशों से ऑर्डर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मशीनों को बंद करना पड़ा है। कच्चा माल होने के बाद भी यहां काम नहीं हो पा रहा है।

खाड़ी देशों से ऑर्डर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में मशीनों को बंद करना पड़ा है। कच्चा माल होने के बाद भी यहां काम नहीं हो पा रहा है।

एक्सपोट्‌र्स बोले- न दाम बढ़ा सकते, न माल बेच सकते हैं एक्सपोट‌्‌र्स की सबसे बड़ी दुविधा यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी और डिमांड की कमी के चलते वे अपनी फिनिश्ड गुड्स (तैयार माल) की कॉस्ट नहीं बढ़ा पा रहे हैं। लागत में 40% तक की बढ़ोतरी होने के बावजूद पुरानी रेट पर भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। घरेलू बाजार में भी माल भेजना अब महंगा हो गया है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ चुकी है।

130 देशों का ‘ग्लोबल मार्केट’ अब अधर में सोजत की मेहंदी का रसूख इतना बड़ा है कि यह केवल भारत या खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। यह फ्रांस, पेरिस, आयरलैंड, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों तक अपनी पहुंच बना चुकी है।

व्यापारियों के अनुसार, सोजत से निकलने वाली प्रीमियम मेहंदी और नेचुरल हेयर डाई की मांग यूरोपीय देशों में साल भर रहती है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने शिपिंग रूट्स को इतना असुरक्षित बना दिया है कि 130 देशों का यह विशाल नेटवर्क ठप होने की कगार पर है। जो मेहंदी स्पेन, यूनान और माल्टा जैसे देशों के बाजारों की शोभा बढ़ाती थी, वह अब ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण सोजत के गोदामों से बाहर नहीं निकल पा रही है।

क्वालिटी का डर- 1 महीने में खराब हो जाता है मेहंदी कोन व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता क्वालिटी को लेकर है। मेहंदी कोन की लाइफ महज एक महीना होती है, जिसके बाद वह खराब होने लगता है। हेयर डाई की क्वालिटी भी 6 महीने बाद गिरने लगती है। अगर युद्ध लंबा चला, तो व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

4 से 5 हजार रुपए का सालाना टर्नओवर सोजत का मेहंदी कारोबार का सालाना टर्नओवर 4 से 5 हजार रुपए सालाना है। व्यापारियों ने दावा किया- यदि युद्ध आज भी रुक जाए, तो स्थिति को सामान्य होने में कम से कम 4 से 6 महीने का समय लगेगा।

व्यापारी बोले- समझ नहीं आ रहा उद्योग कैसे बचाएं मेहंदी व्यापारी सुरेन हिरानी कहते हैं- सोजत की मेहंदी का सीधा कनेक्शन मिडिल ईस्ट से है। वहां युद्ध शुरू होते ही हमारी सप्लाई लाइन कट गई। अब गुजरात से आने वाला कच्चा माल महंगा हो गया और ट्रांसपोर्ट के दाम बढ़ गए। समझ नहीं आ रहा कि उद्योग को कैसे बचाएं।

पिछले एक महीने से फैक्ट्रियों में मेहंदी के कट्टे पैक पड़े हुए हैं। ऑर्डर नहीं मिलने से व्यापारी परेशान हैं।

पिछले एक महीने से फैक्ट्रियों में मेहंदी के कट्टे पैक पड़े हुए हैं। ऑर्डर नहीं मिलने से व्यापारी परेशान हैं।

80% श्रमिक बाहरी राज्यों के, रोजी-रोटी का संकट सोजत के मेहंदी उद्योग में उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के कोटपूतली (राजस्थान) क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रमिक आते हैं। कुल निकाले गए मजदूरों में 80 फीसदी प्रवासी हैं, जबकि 20 फीसदी स्थानीय लोग हैं। इन मजदूरों के लिए मेहंदी सीजन ही साल भर की कमाई का मुख्य जरिया होता है, लेकिन युद्ध ने उनके इस भरोसे को तोड़ दिया है।

केवल मजदूर नहीं, पूरी ‘सप्लाई चेन’ प्रभावित

काम बंद होने का असर केवल फैक्ट्री के भीतर तक सीमित नहीं है। इसका ‘चेन रिएक्शन’ पूरे सिस्टम पर दिख रहा है।

किसान: मेहंदी की फसल बेचने वाले किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे।

मंडी: सोजत मंडी में व्यापारिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं।

सप्लायर: पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और कच्चा माल सप्लाई करने वालों का काम भी रुक गया है।

खाड़ी देशों की पहली पसंद है ‘सोजत मेहंदी’ सोजत की मेहंदी अपनी ए-ग्रेड क्वालिटी के लिए जानी जाती है। यहां मेहंदी में केमिकल के बजाय लौंग, नीलगिरी और टी-3 नेचुरल ऑयल का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसकी डिमांड मिडिल ईस्ट के अलावा दुनिया के 130 देशों में है। लेकिन वर्तमान युद्ध की स्थिति ने इस चमक को फिलहाल धुंधला कर दिया है।

लातविया से लेकर पुर्तगाल तक… हर जगह सोजत का डंका सोजत की मेहंदी की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह एस्टोनिया, लिथुआनिया, बुल्गारिया, स्लोवाकिया, और क्रोएशिया जैसे देशों में भी निर्यात की जाती है।

यूरोप का बाजार- यहां नेचुरल कॉस्मेटिक्स की भारी डिमांड है, जिसे सोजत पूरा करता है।

एशियाई बाजार- नेपाल और मलेशिया जैसे देशों में सोजत की मेहंदी एक अनिवार्य ब्रांड बन चुकी है।

पेरिस के फैशन से रूस के बाजार तक सोजत की मेहंदी की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘केमिकल फ्री’ होना है। इसी कारण पेरिस (फ्रांस) जैसे फैशन हब और रूस व बेलारूस जैसे ठंडे देशों में भी इसे स्किन-फ्रेंडली हेयर डाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल इन सभी देशों से आने वाले नए ऑर्डर्स पर युद्ध की अनिश्चितता के कारण ‘ब्रेक’ लग गया है।

38 हजार हेक्टेयर में फैला है ‘मेहंदी का साम्राज्य’ पाली जिले का सोजत और उसके पड़ोसी क्षेत्र रायपुर व जैतारण मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा मेहंदी उत्पादक हब बनाते हैं। कुल 38 हजार हेक्टेयर भूमि पर होने वाली यह खेती यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यहां की मिट्टी और जलवायु मेहंदी के लिए इतनी अनुकूल है कि यहां पैदा होने वाली मेहंदी में लॉसोने (रंग देने वाला तत्व) की मात्रा दुनिया में सर्वाधिक पाई जाती है।

प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल का उत्पादन, पर बाजार में सन्नाटा

इस क्षेत्र में औसतन 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मेहंदी का उत्पादन होता है। इस साल भी पैदावार बंपर होने की उम्मीद है, लेकिन युद्ध के कारण सोजत की मंडी और फैक्ट्रियों में रौनक गायब है।

बंपर स्टॉक: खेतों से मंडी तक माल पहुंच रहा है, लेकिन निर्यात रुकने से स्टॉक जमा होता जा रहा है।

भाव का डर: मांग कम होने से किसानों को डर है कि उन्हें अपनी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा।

क्यों खास है सोजत की मेहंदी? सोजत की मेहंदी को इसकी शुद्धता और गहरे रंग के लिए GI टैग (Geographical Indication) भी मिल चुका है। यहां की मेहंदी में किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल के बजाय प्राकृतिक तेलों का उपयोग किया जाता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारता है।

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