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Ex-Army Chief Naravane Now Focused on Fiction Writing

Ex-Army Chief Naravane Now Focused on Fiction Writing

पुणे2 मिनट पहले

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पुणे में नरवणे ने उपन्यास ‘द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी’ के साइन किए।

पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि वह अब सिर्फ फिक्शन लिखने पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा- मैं पहले भी आर्मी रिपोर्ट्स और अकादमिक जर्नल्स के लिए लिखता रहा हूं, अब मैं सिर्फ फिक्शन लिख रहा हूं।

पुणे में अपने उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ के बुक-साइनिंग इवेंट के दौरान शुक्रवार को नरवणे ने ANI से बात की थी। उन्होंने कहा कि मेरी एक शॉर्ट स्टोरी मैगजीन फेमिना में भी छप चुकी है।

उन्होंने कहा कि मेरा पहला उपन्यास पेंग्विन हाउस इंडिया ने पब्लिश किया है। इसकी कहानी एनडीए से निकले दो युवा अफसरों के इर्द-गिर्द घूमती है। नरवणे ने अपने अनपब्लिशड मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।

दरअसल, बजट सत्र पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मेमोयर के आर्टिकल को कोट किया था। जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ था।

पुणे में बुक स्टॉल पर रखीं उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ की कॉपियां।

पुणे में बुक स्टॉल पर रखीं उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ की कॉपियां।

नवरणे बोले- मेमोयर लिखने का कोई इरादा नहीं था

नरवणे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका मेमोयर लिखने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने बताया कि बिपिन रावत पर एक किताब के लॉन्च में पब्लिशर से मजाक में बात हुई, जिसके बाद उन्हें किताब लिखने का ऑफर मिला और यहीं से यह सफर शुरू हुआ।

नरवणे के मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर सियासी घमासान

लोकसभा में 2-3 फरवरी को राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे आर्टिकल को पढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें नरवणे की बुक के अंश हैं। स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी।

इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया था, जिससे कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। हंगामा करने वाले आठ सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था।

राहुल का दावा था कि आर्टिकल नरवणे के मेमोयर फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny) का है। इसमें 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद में सरकार की नीति पर सवाल उठाए गए हैं।

राहुल ने आरोप लगाया था कि सरकार की प्रतिक्रिया में देरी हुई और बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने फैसले का जिम्मा नरवणे पर छोड़ दिया था। हालांकि ये मेमोयर अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है और 2023 से सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही है।

रक्षा मंत्री ने कहा था अनपब्लिश्ड किताब कोट नहीं हो सकती

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल के बयान पर आपत्ति जताई थी। कहा था कि जो किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसे सदन में कोट नहीं किया जा सकता क्योंकि वह ‘ऑथेंटिकेटेड’ नहीं है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान यह मुद्दा गरमाया था। स्पीकर द्वारा राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के विरोध में विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था, लेकिन यह ध्वनिमत से गिर गया था।

कांग्रेस ने किताब के पन्ने शेयर किए, चीनी टैंक घुसपैठ के वक्त का घटनाक्रम

कांग्रेस ने एक मैगजीन में पब्लिश आर्टिकल के पेज सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किए थे। इसमें पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश बुक Four Stars of Destiny के अंश हैं। इसमें 31 अगस्त 2020 को लद्दाख सीमा पर भारत-चीन के बीच बने हालात का जिक्र है। बताया जब चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में बढ़ रहे थे तब क्या हुआ?

तारीख: 31 अगस्त, 2020

रात 8.15 बजे: भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को फोन पर जानकारी मिली कि चीन की पैदल सेना के समर्थन के साथ चार चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर जाती एक खड़ी पहाड़ी पगडंडी पर आगे बढ़ रहे हैं।

रात 8.15–8.30 बजे के बीच: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को जानकारी दी। चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। इसके बाद भारतीय सैनिकों ने चेतावनी के तौर पर एक रोशनी वाला गोला दागा, लेकिन इसका चीनी टैंकों पर कोई असर नहीं हुआ और वे आगे बढ़ते रहे।

रात 8.30 बजे के बाद: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संपर्क कर स्पष्ट निर्देश मांगे।

रात 9.10 बजे: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने फिर फोन किया। बताया गया कि चीनी टैंक अब दर्रे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर रह गए हैं।

रात 9.25 बजे: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दोबारा फोन कर “स्पष्ट निर्देश” मांगे, लेकिन कोई फैसला नहीं मिला। इसी दौरान PLA कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन का संदेश आया, जिसमें तनाव कम करने का प्रस्ताव दिया गया—दोनों पक्ष आगे की गतिविधियां रोकें और अगले दिन सुबह 9.30 बजे स्थानीय कमांडरों की बैठक हो।

रात 10.00 बजे: नरवणे ने चीनी कमांडर का प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए अजित डोभाल तक पहुंचाया।

रात 10.10 बजे: नॉर्दर्न कमांड से फिर सूचना मिली कि चीनी टैंक नहीं रुके हैं और अब चोटी से सिर्फ 500 मीटर दूर हैं। जोशी ने बताया कि उन्हें रोकने का एकमात्र तरीका मीडियम आर्टिलरी से फायर खोलना है।

रात 10.10 बजे –10.30 बजे के बीच: सेना मुख्यालय में विकल्पों पर चर्चा होती रही। पूरा नॉर्दर्न फ्रंट हाई अलर्ट पर रखा गया।

रात 10.30 बजे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वापस फोन किया और बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। प्रधानमंत्री का निर्देश सिर्फ एक वाक्य में था- जो उचित समझो, वो करो।नरवणे ने कहा, ‘यह पूरी तरह से एक सैन्य फैसला होने वाला था। मोदी से सलाह ली गई थी। उन्हें ब्रीफ किया गया था, लेकिन उन्होंने फैसला लेने से मना कर दिया था। अब पूरी जिम्मेदारी मुझ पर थी।’

नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे

नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे हैं। उन्होंने पिछले साल कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह लिस्टरेचर फेस्टिवल में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंगुइन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है।

अब यह पब्लिशर्स और सरकार के बीच का मामला है। किताब रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई है। एक साल से ज्यादा हो चुका है, लेकिन इसे पब्लिश करने की मंजूरी नहीं मिली है।

……………………………

यह खबर भी पढ़ें…

दावा-अफसर रिटायर होकर 20 साल बुक पब्लिश नहीं करा सकेंगे: सरकार आदेश जारी कर सकती है; पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब पर विवाद

सरकार रिटायरमेंट के बाद सीनियर पोस्ट पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रही है। इस दौरान अफसर अपनी सर्विस से जुड़ी किताब प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। हाल ही में पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब विवादों में है। पूरी खबर पढ़ें

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पुणे में नरवणे ने उपन्यास ‘द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी’ के साइन किए।

पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि वह अब सिर्फ फिक्शन लिखने पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा- मैं पहले भी आर्मी रिपोर्ट्स और अकादमिक जर्नल्स के लिए लिखता रहा हूं, अब मैं सिर्फ फिक्शन लिख रहा हूं।

पुणे में अपने उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ के बुक-साइनिंग इवेंट के दौरान शुक्रवार को नरवणे ने ANI से बात की थी। उन्होंने कहा कि मेरी एक शॉर्ट स्टोरी मैगजीन फेमिना में भी छप चुकी है।

उन्होंने कहा कि मेरा पहला उपन्यास पेंग्विन हाउस इंडिया ने पब्लिश किया है। इसकी कहानी एनडीए से निकले दो युवा अफसरों के इर्द-गिर्द घूमती है। नरवणे ने अपने अनपब्लिशड मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।

दरअसल, बजट सत्र पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मेमोयर के आर्टिकल को कोट किया था। जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ था।

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नरवणे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका मेमोयर लिखने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने बताया कि बिपिन रावत पर एक किताब के लॉन्च में पब्लिशर से मजाक में बात हुई, जिसके बाद उन्हें किताब लिखने का ऑफर मिला और यहीं से यह सफर शुरू हुआ।

नरवणे के मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर सियासी घमासान

लोकसभा में 2-3 फरवरी को राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे आर्टिकल को पढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें नरवणे की बुक के अंश हैं। स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी।

इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया था, जिससे कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। हंगामा करने वाले आठ सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था।

राहुल का दावा था कि आर्टिकल नरवणे के मेमोयर फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny) का है। इसमें 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद में सरकार की नीति पर सवाल उठाए गए हैं।

राहुल ने आरोप लगाया था कि सरकार की प्रतिक्रिया में देरी हुई और बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने फैसले का जिम्मा नरवणे पर छोड़ दिया था। हालांकि ये मेमोयर अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है और 2023 से सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही है।

रक्षा मंत्री ने कहा था अनपब्लिश्ड किताब कोट नहीं हो सकती

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल के बयान पर आपत्ति जताई थी। कहा था कि जो किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसे सदन में कोट नहीं किया जा सकता क्योंकि वह ‘ऑथेंटिकेटेड’ नहीं है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान यह मुद्दा गरमाया था। स्पीकर द्वारा राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के विरोध में विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था, लेकिन यह ध्वनिमत से गिर गया था।

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तारीख: 31 अगस्त, 2020

रात 8.15 बजे: भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को फोन पर जानकारी मिली कि चीन की पैदल सेना के समर्थन के साथ चार चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर जाती एक खड़ी पहाड़ी पगडंडी पर आगे बढ़ रहे हैं।

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रात 8.30 बजे के बाद: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संपर्क कर स्पष्ट निर्देश मांगे।

रात 9.10 बजे: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने फिर फोन किया। बताया गया कि चीनी टैंक अब दर्रे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर रह गए हैं।

रात 9.25 बजे: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दोबारा फोन कर “स्पष्ट निर्देश” मांगे, लेकिन कोई फैसला नहीं मिला। इसी दौरान PLA कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन का संदेश आया, जिसमें तनाव कम करने का प्रस्ताव दिया गया—दोनों पक्ष आगे की गतिविधियां रोकें और अगले दिन सुबह 9.30 बजे स्थानीय कमांडरों की बैठक हो।

रात 10.00 बजे: नरवणे ने चीनी कमांडर का प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए अजित डोभाल तक पहुंचाया।

रात 10.10 बजे: नॉर्दर्न कमांड से फिर सूचना मिली कि चीनी टैंक नहीं रुके हैं और अब चोटी से सिर्फ 500 मीटर दूर हैं। जोशी ने बताया कि उन्हें रोकने का एकमात्र तरीका मीडियम आर्टिलरी से फायर खोलना है।

रात 10.10 बजे –10.30 बजे के बीच: सेना मुख्यालय में विकल्पों पर चर्चा होती रही। पूरा नॉर्दर्न फ्रंट हाई अलर्ट पर रखा गया।

रात 10.30 बजे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वापस फोन किया और बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। प्रधानमंत्री का निर्देश सिर्फ एक वाक्य में था- जो उचित समझो, वो करो।नरवणे ने कहा, ‘यह पूरी तरह से एक सैन्य फैसला होने वाला था। मोदी से सलाह ली गई थी। उन्हें ब्रीफ किया गया था, लेकिन उन्होंने फैसला लेने से मना कर दिया था। अब पूरी जिम्मेदारी मुझ पर थी।’

नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे

नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे हैं। उन्होंने पिछले साल कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह लिस्टरेचर फेस्टिवल में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंगुइन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है।

अब यह पब्लिशर्स और सरकार के बीच का मामला है। किताब रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई है। एक साल से ज्यादा हो चुका है, लेकिन इसे पब्लिश करने की मंजूरी नहीं मिली है।

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दावा-अफसर रिटायर होकर 20 साल बुक पब्लिश नहीं करा सकेंगे: सरकार आदेश जारी कर सकती है; पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब पर विवाद

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