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India Rupee Hits Record Low 93.24 Amid Oil Price Surge

India Rupee Hits Record Low 93.24 Amid Oil Price Surge
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मुंबई11 मिनट पहले

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भारतीय रुपया आज यानी 20 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर 93.24 पर पहुंच गया। तेल के बढ़ते इम्पोर्ट बिल और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण रुपए में यह गिरावट आई है।

रुपए की गिरावट के असर को 10 सवाल-जवाब में समझें:

सवाल 1: रुपए की ताजा स्थिति क्या है और इसने क्या नया रिकॉर्ड बनाया है?

जवाब: आज रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 93 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह 93.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था, हालांकि अभी यह थोड़ा संभलकर 93.12 पर आ गया है। इस महीने की शुरुआत में रुपया 92 के स्तर पर था।

सवाल 2: रुपए में इस ऐतिहासिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?

जवाब: इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई थी। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया।

सवाल 3: विदेशी निवेशकों (FIIs) का इसमें क्या रोल है?

जवाब: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग 8 अरब डॉलर (करीब 83 हजार करोड़ रुपए) निकाल लिए हैं। ग्लोबल अनिश्चितता और युद्ध के डर से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों जैसे अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा रहे हैं। इतनी भारी बिकवाली से रुपए पर दबाव बहुत बढ़ गया है।

सवाल 4: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के तनाव का रुपए से क्या लेना-देना है?

जवाब: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का 20% और भारत का लगभग आधा तेल गुजरता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रूट पर सप्लाई बाधित होने का डर है। मार्केट के जानकारों का कहना है कि जब तक इस समुद्री रास्ते पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक रुपए में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

सवाल 5: क्या रिजर्व बैंक इस गिरावट को रोकने के लिए कुछ कर रहा है?

जवाब: हां, आरबीआई लगातार विदेशी मुद्रा बाजार में दखल दे रहा है। बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर रुपए की गिरावट को थामने की कोशिश करता है।

सवाल 6: रुपया कमजोर होने से आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब: रुपया कमजोर होने से भारत के लिए आयात महंगा हो जाएगा। क्रूड ऑयल जैसी चीजों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। इसके अलावा विदेश से इंपोर्ट किए जाने वाले मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे होंगे। विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाएगी।

सवाल 7: क्या इससे देश की जीडीपी ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा?

जवाब: बिल्कुल। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि एनर्जी की ऊंची कीमतें भारत की विकास दर को कम कर सकती हैं। एनर्जी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी महंगाई को बढ़ाएगी और भारत की ग्रोथ को नुकसान पहुंचाएगी। ब्याज दरों में कटौती करना भी मुश्किल हो जाएगा।

सवाल 8: क्या रुपए की गिरावट से किसी को फायदा भी होता है?

जवाब: जी हां, रुपया कमजोर होने से निर्यातकों को फायदा होता है। आईटी सेक्टर, फार्मा और कपड़ा उद्योग की कंपनियों को अपनी सेवाओं या उत्पादों के बदले डॉलर में भुगतान मिलता है। जब वे उन डॉलर्स को रुपए में बदलते हैं, तो उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा रुपए मिलते हैं।

सवाल 9. आने वाले दिनों में रुपए की चाल कैसी रह सकती है?

जवाब: मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें 110-115 डॉलर के ऊपर बनी रहेंगी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहेगी, रुपया कमजोर बना रहेगा। यदि ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार नहीं हुआ, तो रुपया 94 के स्तर को भी छू सकता है।

सवाल 10: करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?

जवाब: किसी भी देश की करेंसी की कीमत मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में उसकी ‘डिमांड और सप्लाई’ के आधार पर तय होती है। अगर भारत को विदेशों से ज्यादा सामान जैसे कच्चा तेल मंगाना है, तो भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी। डॉलर की मांग बढ़ते ही वह महंगा हो जाएगा और रुपया गिर जाएगा।

इसके अलावा, देश की महंगाई दर, ब्याज दरें और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी करेंसी की वैल्यू तय करते हैं। अगर भारत में ब्याज दरें अच्छी हैं और अर्थव्यवस्था स्थिर है, तो विदेशी निवेशक यहां डॉलर लेकर आएंगे, जिससे डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपया मजबूत होगा। सरल शब्दों में, जिस करेंसी की दुनिया में मांग ज्यादा और उपलब्धता कम होगी, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होगी।

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भारतीय रुपया आज यानी 20 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर 93.24 पर पहुंच गया। तेल के बढ़ते इम्पोर्ट बिल और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण रुपए में यह गिरावट आई है।

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सवाल 1: रुपए की ताजा स्थिति क्या है और इसने क्या नया रिकॉर्ड बनाया है?

जवाब: आज रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 93 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह 93.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था, हालांकि अभी यह थोड़ा संभलकर 93.12 पर आ गया है। इस महीने की शुरुआत में रुपया 92 के स्तर पर था।

सवाल 2: रुपए में इस ऐतिहासिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?

जवाब: इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई थी। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया।

सवाल 3: विदेशी निवेशकों (FIIs) का इसमें क्या रोल है?

जवाब: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग 8 अरब डॉलर (करीब 83 हजार करोड़ रुपए) निकाल लिए हैं। ग्लोबल अनिश्चितता और युद्ध के डर से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों जैसे अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा रहे हैं। इतनी भारी बिकवाली से रुपए पर दबाव बहुत बढ़ गया है।

सवाल 4: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के तनाव का रुपए से क्या लेना-देना है?

जवाब: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का 20% और भारत का लगभग आधा तेल गुजरता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रूट पर सप्लाई बाधित होने का डर है। मार्केट के जानकारों का कहना है कि जब तक इस समुद्री रास्ते पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक रुपए में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

सवाल 5: क्या रिजर्व बैंक इस गिरावट को रोकने के लिए कुछ कर रहा है?

जवाब: हां, आरबीआई लगातार विदेशी मुद्रा बाजार में दखल दे रहा है। बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर रुपए की गिरावट को थामने की कोशिश करता है।

सवाल 6: रुपया कमजोर होने से आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब: रुपया कमजोर होने से भारत के लिए आयात महंगा हो जाएगा। क्रूड ऑयल जैसी चीजों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। इसके अलावा विदेश से इंपोर्ट किए जाने वाले मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे होंगे। विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाएगी।

सवाल 7: क्या इससे देश की जीडीपी ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा?

जवाब: बिल्कुल। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि एनर्जी की ऊंची कीमतें भारत की विकास दर को कम कर सकती हैं। एनर्जी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी महंगाई को बढ़ाएगी और भारत की ग्रोथ को नुकसान पहुंचाएगी। ब्याज दरों में कटौती करना भी मुश्किल हो जाएगा।

सवाल 8: क्या रुपए की गिरावट से किसी को फायदा भी होता है?

जवाब: जी हां, रुपया कमजोर होने से निर्यातकों को फायदा होता है। आईटी सेक्टर, फार्मा और कपड़ा उद्योग की कंपनियों को अपनी सेवाओं या उत्पादों के बदले डॉलर में भुगतान मिलता है। जब वे उन डॉलर्स को रुपए में बदलते हैं, तो उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा रुपए मिलते हैं।

सवाल 9. आने वाले दिनों में रुपए की चाल कैसी रह सकती है?

जवाब: मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें 110-115 डॉलर के ऊपर बनी रहेंगी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहेगी, रुपया कमजोर बना रहेगा। यदि ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार नहीं हुआ, तो रुपया 94 के स्तर को भी छू सकता है।

सवाल 10: करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?

जवाब: किसी भी देश की करेंसी की कीमत मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में उसकी ‘डिमांड और सप्लाई’ के आधार पर तय होती है। अगर भारत को विदेशों से ज्यादा सामान जैसे कच्चा तेल मंगाना है, तो भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी। डॉलर की मांग बढ़ते ही वह महंगा हो जाएगा और रुपया गिर जाएगा।

इसके अलावा, देश की महंगाई दर, ब्याज दरें और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी करेंसी की वैल्यू तय करते हैं। अगर भारत में ब्याज दरें अच्छी हैं और अर्थव्यवस्था स्थिर है, तो विदेशी निवेशक यहां डॉलर लेकर आएंगे, जिससे डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपया मजबूत होगा। सरल शब्दों में, जिस करेंसी की दुनिया में मांग ज्यादा और उपलब्धता कम होगी, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होगी।

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