Thursday, 09 Jul 2026 | 02:52 PM

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Madhya Pradesh Gang Rape | Victim Thrown in Drain After Brutal Assault

Madhya Pradesh Gang Rape | Victim Thrown in Drain After Brutal Assault

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि हबीबगंज जैसे भोपाल के सबसे व्यस्त इलाके में हुई एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे शहर को झकझोर दिया था।

.

31 अक्टूबर 2017 की रात करीब साढ़े दस बजे, आरपीएफ थाने में तैनात पुलिसकर्मियों के सामने एक युवती बदहवास हालत में पहुंची। उसके कपड़े कीचड़ से सने और फटे हुए थे, चेहरा खौफ से भरा था, और वह ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी।

थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर चार आरोपियों ने उसके साथ गैंगरेप किया था।अगली सुबह जब परिवार एफआईआर दर्ज कराने पहुंचा, तो पुलिस सिस्टम की गंभीर लापरवाही सामने आई। इलाके की सीमा को लेकर एमपी नगर, हबीबगंज और जीआरपी थानों के बीच जिम्मेदारी टाली जाती रही।

अब सबसे बड़े सवाल खड़े थे कि आखिर भीड़भाड़ वाले इलाके में इतनी बड़ी वारदात कैसे हुई? आरोपी कौन थे? और पुलिस उन तक आखिर कैसे पहुंची? इन सवालों के जवाब पार्ट 2 में पढ़िए…

31 अक्टूबर की रात रिया के साथ रेलवे के आउटर में गैंगरेप हुआ। उसके हालात भी साफ बयां कर रहे थे, लेकिन रिपोर्ट लिखने में पुलिस को 24 घंटे लग गए। अगले दिन दिनभर एक से दूसरे थाने भटकने के बाद आखिरकार शाम आठ बजे जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।

पुलिस ने लड़की के बयान दर्ज करना शुरू किया। जब रिया ने घटना के बारे में विस्तार से बताया, तो पुलिस भी सिहर उठी।

करीब सात बजे रिया जोन-2 स्थित कोचिंग से हबीबगंज रेलवे स्टेशन की ओर आउटर से जा रही थी। जैसे ही वह सुनसान रेलवे ट्रैक के पास पहुंची, अचानक एक युवक उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

सुनसान पटरी के नीचे नाले के पास ले गए

लड़की ने हिम्मत दिखाते हुए एक आरोपी को लात मारी, जिससे उसका संतुलन बिगड़ गया। हालांकि इससे पहले कि वह संभल पाती, दूसरा युवक गोलू वहां आ पहुंचा। उसने पीछे से उसका हाथ पकड़कर खींचा और दोनों उसे जबरदस्ती पटरी के नीचे की तरफ घसीट ले गए।

नीचे गटर का गंदा नाला था, कीचड़ और बदबू से भरा हुआ। दोनों आरोपियों ने उसके साथ झूमा-झटकी शुरू कर दी। रिया खुद को बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन वे उसे घसीटते हुए उसी नाले में ले गए, जहां वह गिर पड़ी। कीचड़ में सनी हुई, डरी हुई रिया लगातार छूटने की कोशिश करती रही, लेकिन दोनों ने उसे मजबूती से पकड़ रखा था।

पत्थर से पीठ पर वार, फिर दरिंदगी

रिया ने हिम्मत नहीं हारी। उसने पास पड़ा पत्थर उठाकर अमर को मारा। इससे गुस्से में आकर अमर ने उसके दोनों हाथ पीछे की तरफ कसकर पकड़ लिए। इसके बाद दोनों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की।

पत्थर से उसकी पीठ पर वार किए, जिससे वह दर्द से कराह उठी। इसके बाद अमर ने उसके कपड़े फाड़ दिए और बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया।

पहचान छिपाने की कोशिश

आरोपियों ने उससे उसके माता-पिता के बारे में पूछा। खुद को बचाने के लिए रिया ने सही जानकारी छिपाते हुए बताया कि उसके पिता कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं और उसकी मां टेलर हैं। इस दौरान आरोपियों ने उसकी टाइटन की घड़ी और मोबाइल भी छीन लिया।

अमर ने कहा कि उसे रात दो-ढाई बजे तक छोड़ेंगे और उसके हाथ-पैर बांध दिए। इसी बीच गोलू कपड़े लेकर आया। इसके बाद दोनों उसे टनल पार कर प्लेटफॉर्म नंबर-6 की तरफ ले गए, जहां उनके दो अन्य साथी रमेश और राजेश भी आ पहुंचे।

लूटपाट, मारपीट के बाद हत्या की साजिश

राजेश ने उसे थप्पड़ मारे और उसके कान की बाली भी छीन ली। लगातार मारपीट से वह बुरी तरह कमजोर हो चुकी थी, लेकिन आरोपियों का अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा था।

इसके बाद चारों आरोपी आपस में चर्चा करने लगे कि उसे मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए। गोलू और अमर का कहना था कि पिछली बार भी एक लड़की को छोड़ चुके हैं, इसे भी छोड़ देते हैं। रमेश ने कहा कि ऐसे छोड़ने पर शक हो जाएगा।

इसी दौरान रमेश और गोलू ने उसका गला दबा दिया और उसे बेरहमी से पीटा। उन्हें लगा कि वह मर जाएगी। उसके हाथ-पैर बंधे थे। वह बाहर नहीं निकल पाएगी। यह सोचकर आरोपी उसे पुल के नीचे अधमरी हालत में छोड़कर वहां से फरार हो गए।

होश आया तो हिम्मत जुटाकर थाने पहुंची

करीब 5-10 मिनट बाद टनल के ऊपर से ट्रेन गुजरी, जिसकी आवाज से रिया को हल्का होश आया। उसे एहसास हुआ कि वह खुद को छुड़ा सकती है। रात लगभग साढ़े दस बजे उसने बंधे हुए हाथों की रस्सी किसी तरह खोल ली, फिर अपने पैर भी छुड़ाए और कपड़े पहनकर बाहर निकल आई।

शहर में मचा हड़कंप, एक आरोपी की शिनाख्त

घटना की जानकारी मिलते ही मामला आग की तरह पूरे शहर में फैल गया। शहर के बीचों-बीच यूपीएससी की तैयारी कर रही एक पुलिसकर्मी की बेटी के साथ हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

मामला दर्ज होने और बयान लेने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। रिया आरोपियों को पहले से नहीं जानती थी। पुलिस को शक था कि आरोपी रेलवे ट्रैक पर काम करने वाले, ट्रेन में सामान बेचने वाले वेंडर या आसपास की झुग्गियों में रहने वाले हो सकते हैं। घटनास्थल से लौटते समय रिया ने एक आरोपी गोलू को पहचान लिया था।

पहले गोलू की गिरफ्तारी, फिर बाकी तीनों को पकड़ा

पुलिस ने सबसे पहले गोलू को गिरफ्तार किया। इसके बाद अमर भी ट्रैक के पास ही घूमता हुआ मिल गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने अन्य दो आरोपी राजेश और रमेश को भी गिरफ्तार कर लिया। चारों आरोपियों की उम्र 25 से 30 साल के बीच थी। रिया ने सभी की पहचान कर दी।

लापरवाही पर बड़ा एक्शन, पुलिसकर्मी सस्पेंड

रिपोर्ट दर्ज करने में देरी को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए। 5 नवंबर को हबीबगंज, एमपी नगर और जीआरपी थाने के टीआई समेत दो एसआई को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं एमपी नगर के सीएसपी को भी हटाकर पीएचक्यू अटैच कर दिया गया।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट सहित 44 अहम साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए।

200 पेज की चार्जशीट, देर रात तक कोर्ट ने सुनवाई की

17 नवंबर को एसआईटी ने करीब 200 पेज की चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 21 नवंबर से गवाही शुरू हुई, जो लगातार 15 दिन तक चली। कई बार देर रात तक कोर्ट में सुनवाई होती रही।

23 दिसंबर 2017 को अपर सत्र न्यायाधीश सविता दुबे ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस केस में सिर्फ 53 दिनों के भीतर फैसला आया।

क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें…

कोचिंग से लौट रही UPSC छात्रा से हुआ था गैंगरेप

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल में इस बार बात ऐसे सनसनीखेज केस की जिसने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की परतें उधेड़ दी थीं। शहर के सबसे व्यस्त इलाके हबीबगंज में, थाने से चंद कदमों की दूरी पर, भीड़ के बीच एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया गया, जिसने पुलिस और रेलवे सुरक्षा तंत्र दोनों को झकझोर कर रख दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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31 अक्टूबर 2017 की रात करीब साढ़े दस बजे, आरपीएफ थाने में तैनात पुलिसकर्मियों के सामने एक युवती बदहवास हालत में पहुंची। उसके कपड़े कीचड़ से सने और फटे हुए थे, चेहरा खौफ से भरा था, और वह ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी।

थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर चार आरोपियों ने उसके साथ गैंगरेप किया था।अगली सुबह जब परिवार एफआईआर दर्ज कराने पहुंचा, तो पुलिस सिस्टम की गंभीर लापरवाही सामने आई। इलाके की सीमा को लेकर एमपी नगर, हबीबगंज और जीआरपी थानों के बीच जिम्मेदारी टाली जाती रही।

अब सबसे बड़े सवाल खड़े थे कि आखिर भीड़भाड़ वाले इलाके में इतनी बड़ी वारदात कैसे हुई? आरोपी कौन थे? और पुलिस उन तक आखिर कैसे पहुंची? इन सवालों के जवाब पार्ट 2 में पढ़िए…

31 अक्टूबर की रात रिया के साथ रेलवे के आउटर में गैंगरेप हुआ। उसके हालात भी साफ बयां कर रहे थे, लेकिन रिपोर्ट लिखने में पुलिस को 24 घंटे लग गए। अगले दिन दिनभर एक से दूसरे थाने भटकने के बाद आखिरकार शाम आठ बजे जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।

पुलिस ने लड़की के बयान दर्ज करना शुरू किया। जब रिया ने घटना के बारे में विस्तार से बताया, तो पुलिस भी सिहर उठी।

करीब सात बजे रिया जोन-2 स्थित कोचिंग से हबीबगंज रेलवे स्टेशन की ओर आउटर से जा रही थी। जैसे ही वह सुनसान रेलवे ट्रैक के पास पहुंची, अचानक एक युवक उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

सुनसान पटरी के नीचे नाले के पास ले गए

लड़की ने हिम्मत दिखाते हुए एक आरोपी को लात मारी, जिससे उसका संतुलन बिगड़ गया। हालांकि इससे पहले कि वह संभल पाती, दूसरा युवक गोलू वहां आ पहुंचा। उसने पीछे से उसका हाथ पकड़कर खींचा और दोनों उसे जबरदस्ती पटरी के नीचे की तरफ घसीट ले गए।

नीचे गटर का गंदा नाला था, कीचड़ और बदबू से भरा हुआ। दोनों आरोपियों ने उसके साथ झूमा-झटकी शुरू कर दी। रिया खुद को बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन वे उसे घसीटते हुए उसी नाले में ले गए, जहां वह गिर पड़ी। कीचड़ में सनी हुई, डरी हुई रिया लगातार छूटने की कोशिश करती रही, लेकिन दोनों ने उसे मजबूती से पकड़ रखा था।

पत्थर से पीठ पर वार, फिर दरिंदगी

रिया ने हिम्मत नहीं हारी। उसने पास पड़ा पत्थर उठाकर अमर को मारा। इससे गुस्से में आकर अमर ने उसके दोनों हाथ पीछे की तरफ कसकर पकड़ लिए। इसके बाद दोनों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की।

पत्थर से उसकी पीठ पर वार किए, जिससे वह दर्द से कराह उठी। इसके बाद अमर ने उसके कपड़े फाड़ दिए और बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया।

पहचान छिपाने की कोशिश

आरोपियों ने उससे उसके माता-पिता के बारे में पूछा। खुद को बचाने के लिए रिया ने सही जानकारी छिपाते हुए बताया कि उसके पिता कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं और उसकी मां टेलर हैं। इस दौरान आरोपियों ने उसकी टाइटन की घड़ी और मोबाइल भी छीन लिया।

अमर ने कहा कि उसे रात दो-ढाई बजे तक छोड़ेंगे और उसके हाथ-पैर बांध दिए। इसी बीच गोलू कपड़े लेकर आया। इसके बाद दोनों उसे टनल पार कर प्लेटफॉर्म नंबर-6 की तरफ ले गए, जहां उनके दो अन्य साथी रमेश और राजेश भी आ पहुंचे।

लूटपाट, मारपीट के बाद हत्या की साजिश

राजेश ने उसे थप्पड़ मारे और उसके कान की बाली भी छीन ली। लगातार मारपीट से वह बुरी तरह कमजोर हो चुकी थी, लेकिन आरोपियों का अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा था।

इसके बाद चारों आरोपी आपस में चर्चा करने लगे कि उसे मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए। गोलू और अमर का कहना था कि पिछली बार भी एक लड़की को छोड़ चुके हैं, इसे भी छोड़ देते हैं। रमेश ने कहा कि ऐसे छोड़ने पर शक हो जाएगा।

इसी दौरान रमेश और गोलू ने उसका गला दबा दिया और उसे बेरहमी से पीटा। उन्हें लगा कि वह मर जाएगी। उसके हाथ-पैर बंधे थे। वह बाहर नहीं निकल पाएगी। यह सोचकर आरोपी उसे पुल के नीचे अधमरी हालत में छोड़कर वहां से फरार हो गए।

होश आया तो हिम्मत जुटाकर थाने पहुंची

करीब 5-10 मिनट बाद टनल के ऊपर से ट्रेन गुजरी, जिसकी आवाज से रिया को हल्का होश आया। उसे एहसास हुआ कि वह खुद को छुड़ा सकती है। रात लगभग साढ़े दस बजे उसने बंधे हुए हाथों की रस्सी किसी तरह खोल ली, फिर अपने पैर भी छुड़ाए और कपड़े पहनकर बाहर निकल आई।

शहर में मचा हड़कंप, एक आरोपी की शिनाख्त

घटना की जानकारी मिलते ही मामला आग की तरह पूरे शहर में फैल गया। शहर के बीचों-बीच यूपीएससी की तैयारी कर रही एक पुलिसकर्मी की बेटी के साथ हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

मामला दर्ज होने और बयान लेने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। रिया आरोपियों को पहले से नहीं जानती थी। पुलिस को शक था कि आरोपी रेलवे ट्रैक पर काम करने वाले, ट्रेन में सामान बेचने वाले वेंडर या आसपास की झुग्गियों में रहने वाले हो सकते हैं। घटनास्थल से लौटते समय रिया ने एक आरोपी गोलू को पहचान लिया था।

पहले गोलू की गिरफ्तारी, फिर बाकी तीनों को पकड़ा

पुलिस ने सबसे पहले गोलू को गिरफ्तार किया। इसके बाद अमर भी ट्रैक के पास ही घूमता हुआ मिल गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने अन्य दो आरोपी राजेश और रमेश को भी गिरफ्तार कर लिया। चारों आरोपियों की उम्र 25 से 30 साल के बीच थी। रिया ने सभी की पहचान कर दी।

लापरवाही पर बड़ा एक्शन, पुलिसकर्मी सस्पेंड

रिपोर्ट दर्ज करने में देरी को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए। 5 नवंबर को हबीबगंज, एमपी नगर और जीआरपी थाने के टीआई समेत दो एसआई को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं एमपी नगर के सीएसपी को भी हटाकर पीएचक्यू अटैच कर दिया गया।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट सहित 44 अहम साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए।

200 पेज की चार्जशीट, देर रात तक कोर्ट ने सुनवाई की

17 नवंबर को एसआईटी ने करीब 200 पेज की चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 21 नवंबर से गवाही शुरू हुई, जो लगातार 15 दिन तक चली। कई बार देर रात तक कोर्ट में सुनवाई होती रही।

23 दिसंबर 2017 को अपर सत्र न्यायाधीश सविता दुबे ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस केस में सिर्फ 53 दिनों के भीतर फैसला आया।

क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें…

कोचिंग से लौट रही UPSC छात्रा से हुआ था गैंगरेप

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल में इस बार बात ऐसे सनसनीखेज केस की जिसने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की परतें उधेड़ दी थीं। शहर के सबसे व्यस्त इलाके हबीबगंज में, थाने से चंद कदमों की दूरी पर, भीड़ के बीच एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया गया, जिसने पुलिस और रेलवे सुरक्षा तंत्र दोनों को झकझोर कर रख दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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