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Putin Visit Kuril Islands | Russia Japan Dispute Over Territory Controversy

Putin Visit Kuril Islands | Russia Japan Dispute Over Territory Controversy

मॉस्को/टोक्यो9 मिनट पहले

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को पहली बार जापान के दावे वाले विवादित कुरील द्वीप समूह का दौरा किया। क्रेमलिन ने पुतिन के दौरे का वीडियो जारी किया। उन्होंने कुरील द्वीप पर एक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया।

पुतिन की इस यात्रा के बाद जापान ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि यह इलाका उसका हिस्सा है। रूस और जापान के बीच प्रशांत महासागर में 4 द्वीपों को लेकर 80 साल से विवाद है। जापान इसे नॉर्दर्न टेरिटरीज कहता है जबकि रूस इन्हें कुरील आइलैंड ग्रुप का हिस्सा मानता है।

पुतिन की दौरे से जुड़ी 2 फोटोज

पुतिन ने कैवियार का स्वाद लिया। यह स्टर्जन मछली के अंडों से बनता है और इसे दुनिया के सबसे महंगे खाद्य पदार्थों में गिना जाता है।

पुतिन ने कैवियार का स्वाद लिया। यह स्टर्जन मछली के अंडों से बनता है और इसे दुनिया के सबसे महंगे खाद्य पदार्थों में गिना जाता है।

राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को कुरील आइलैंड के इतुरुप द्वीप पर एक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया।

राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को कुरील आइलैंड के इतुरुप द्वीप पर एक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया।

रूस और जापान में 4 द्वीपों को लेकर विवाद

रूस और जापान के बीच प्रशांत महासागर में स्थित चार द्वीपों को लेकर विवाद है। जापान इन्हें नॉर्दर्न टेरिटरीज (उत्तरी क्षेत्र) कहता है, जबकि रूस इन्हें कुरील द्वीप समूह का हिस्सा मानता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में 1945 में सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद यहां रहने वाले करीब 17 हजार जापानी नागरिकों को वहां से हटा दिया गया।

1945 में इन द्वीपों पर कब्जा करने के बाद सोवियत संघ ने यहां हवाई और नौसैनिक अड्डे बनाए। प्रशांत महासागर में अहम जगह पर होने की वजह से इनका सैन्य महत्व बढ़ता गया। आज भी रूस यहां बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात रखता है।

तब से इन द्वीपों पर रूस का नियंत्रण है और उसने यहां सैन्य ठिकाने भी बना रखे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ज्यादातर देशों ने आपस में शांति समझौते (पीस ट्रीटी) पर हस्ताक्षर कर दिए थे। कुरील द्वीपों के विवाद की वजह से रूस और जापान आज तक ऐसा नहीं कर पाए हैं।

दोनों देशों में नाम लगभग एक जैसे

खास बात यह है कि इन विवादित द्वीपों के नाम दोनों देशों में लगभग एक जैसे हैं। रूस इन्हें कुनाशिर, इतुरुप, शिकोतान और हाबोमाई कहता है, जबकि जापान इन्हें कुनाशिरी, एतोरोफू, शिकोतान और हाबोमाई के नाम से जानता है।

इन चारों द्वीपों पर करीब 20 हजार लोग रहते हैं। यहां बहुत ठंड पड़ती है, लेकिन सोना-चांदी जैसे खनिज और मछलियों के बड़े भंडार होने की वजह से इन द्वीपों की आर्थिक अहमियत काफी ज्यादा है।

रूस 2 द्वीप देने का तैयार हुआ, जापान नहीं माना

1956 में सोवियत संघ और जापान के बीच राजनयिक संबंध बहाल होने के बाद विवाद सुलझाने की कोशिश शुरू हुई। उस समय सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने शांति समझौते के बदले शिकोतान और हाबोमाई द्वीप जापान को लौटाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जापान चार से कम मानने को तैयार नहीं था।

1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद भी रूस और जापान के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 2010 में तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव इन विवादित द्वीपों का दौरा करने वाले पहले रूसी राष्ट्रपति बने।

तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव अगस्त 2019 में जापान के दावे वाले कुरील द्वीप समूह के इतुरुप द्वीप के दौरे पर पहुंचे थे।

तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव अगस्त 2019 में जापान के दावे वाले कुरील द्वीप समूह के इतुरुप द्वीप के दौरे पर पहुंचे थे।

इसके बाद रूस ने यहां अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत की, जबकि जापान लगातार अपना दावा दोहराता रहा। यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए। अब पुतिन का यह दौरा इन विवादित द्वीपों पर रूस के दावे को फिर से मजबूत करने के मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है। —————————

जापान में 200kmph की रफ्तार से आया डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका

जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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पुतिन की इस यात्रा के बाद जापान ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि यह इलाका उसका हिस्सा है। रूस और जापान के बीच प्रशांत महासागर में 4 द्वीपों को लेकर 80 साल से विवाद है। जापान इसे नॉर्दर्न टेरिटरीज कहता है जबकि रूस इन्हें कुरील आइलैंड ग्रुप का हिस्सा मानता है।

पुतिन की दौरे से जुड़ी 2 फोटोज

पुतिन ने कैवियार का स्वाद लिया। यह स्टर्जन मछली के अंडों से बनता है और इसे दुनिया के सबसे महंगे खाद्य पदार्थों में गिना जाता है।

पुतिन ने कैवियार का स्वाद लिया। यह स्टर्जन मछली के अंडों से बनता है और इसे दुनिया के सबसे महंगे खाद्य पदार्थों में गिना जाता है।

राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को कुरील आइलैंड के इतुरुप द्वीप पर एक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया।

राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को कुरील आइलैंड के इतुरुप द्वीप पर एक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया।

रूस और जापान में 4 द्वीपों को लेकर विवाद

रूस और जापान के बीच प्रशांत महासागर में स्थित चार द्वीपों को लेकर विवाद है। जापान इन्हें नॉर्दर्न टेरिटरीज (उत्तरी क्षेत्र) कहता है, जबकि रूस इन्हें कुरील द्वीप समूह का हिस्सा मानता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में 1945 में सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद यहां रहने वाले करीब 17 हजार जापानी नागरिकों को वहां से हटा दिया गया।

1945 में इन द्वीपों पर कब्जा करने के बाद सोवियत संघ ने यहां हवाई और नौसैनिक अड्डे बनाए। प्रशांत महासागर में अहम जगह पर होने की वजह से इनका सैन्य महत्व बढ़ता गया। आज भी रूस यहां बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात रखता है।

तब से इन द्वीपों पर रूस का नियंत्रण है और उसने यहां सैन्य ठिकाने भी बना रखे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ज्यादातर देशों ने आपस में शांति समझौते (पीस ट्रीटी) पर हस्ताक्षर कर दिए थे। कुरील द्वीपों के विवाद की वजह से रूस और जापान आज तक ऐसा नहीं कर पाए हैं।

दोनों देशों में नाम लगभग एक जैसे

खास बात यह है कि इन विवादित द्वीपों के नाम दोनों देशों में लगभग एक जैसे हैं। रूस इन्हें कुनाशिर, इतुरुप, शिकोतान और हाबोमाई कहता है, जबकि जापान इन्हें कुनाशिरी, एतोरोफू, शिकोतान और हाबोमाई के नाम से जानता है।

इन चारों द्वीपों पर करीब 20 हजार लोग रहते हैं। यहां बहुत ठंड पड़ती है, लेकिन सोना-चांदी जैसे खनिज और मछलियों के बड़े भंडार होने की वजह से इन द्वीपों की आर्थिक अहमियत काफी ज्यादा है।

रूस 2 द्वीप देने का तैयार हुआ, जापान नहीं माना

1956 में सोवियत संघ और जापान के बीच राजनयिक संबंध बहाल होने के बाद विवाद सुलझाने की कोशिश शुरू हुई। उस समय सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने शांति समझौते के बदले शिकोतान और हाबोमाई द्वीप जापान को लौटाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जापान चार से कम मानने को तैयार नहीं था।

1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद भी रूस और जापान के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 2010 में तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव इन विवादित द्वीपों का दौरा करने वाले पहले रूसी राष्ट्रपति बने।

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