कटनी जिले के बड़वारा तहसील में शनिवार को शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के विरुद्ध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने तहसीलदार ऋषि गौतम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर नवीन संवर्ग के शिक्षकों की सेवा गणना पुरानी तिथि से करने और पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता की मांग शिक्षकों ने ज्ञापन में मांग की है कि 1 जुलाई 2018 से नियुक्त दिखाए गए अध्यापकों की सेवा अवधि की गणना उनकी वास्तविक ‘प्रथम नियुक्ति दिनांक’ से की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि IFMS पोर्टल पर दर्ज 2018 की तारीख को विलोपित कर पुरानी तिथि दर्ज की जाए, ताकि शिक्षकों को क्रमोन्नति, पदोन्नति, ग्रेच्युटी और पुरानी पेंशन का उचित लाभ मिल सके। पात्रता परीक्षा (TET) के आदेश का विरोध शिक्षकों ने 3 मार्च 2026 को जारी उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य की गई है। शिक्षकों ने इस आदेश को तत्काल निरस्त करने और सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखने का आग्रह किया है। 5 लाख शिक्षक परिवारों पर संकट का दावा प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि परीक्षा की अनिवार्यता के कारण प्रदेश के लगभग 5 लाख शिक्षक परिवार भविष्य को लेकर मानसिक तनाव में हैं। शिक्षकों का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को इस परीक्षा से पूर्णतः छूट दी जानी चाहिए।। उग्र आंदोलन की दी चेतावनी मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी वाजिब मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो प्रदेश भर के शिक्षक उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। शिक्षकों ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई उनके सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए है













































