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नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’

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