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पाकिस्तान के पहले सिख एंकर के दफ्तर पर रेड:बोले- पुलिस ने वर्करों को पीटा, सामान चुराया; इमरान खान की खबर चलाने पर लगा था बैन

पाकिस्तान के पहले सिख एंकर के दफ्तर पर रेड:बोले- पुलिस ने वर्करों को पीटा, सामान चुराया; इमरान खान की खबर चलाने पर लगा था बैन

पाकिस्तान के 79 साल के इतिहास में सिख समुदाय से पहले टेलीविजन एंकर और पत्रकार के तौर पर पहचान बनाने वाले हरमीत सिंह के डिजिटल स्टूडियो पर इस्लामाबाद पुलिस की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हरमीत सिंह ने वीडियो जारी कर बताया, करीब दो दिन पहले पुलिस ने उनके स्टूडियो में रेड कर वहां काम कर रहे कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। पुलिस वाले सामान चुराकर ले गए। हरमीत सिंह ने पाकिस्तान सरकार, पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर आरोप लगाते हुए कहा- टीवी से बैन और नौकरी जाने के बाद उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से डिजिटल स्टूडियो खड़ा किया था, लेकिन अब पत्रकारिता जारी रखने के लिए उनके पास न नौकरी बची है और न जरूरी संसाधन। हालांकि हरमीत सिंह के आरोपों के बाद पुलिस का कोई बयान सामने नहीं आया। हरमीत सिंह सिख परिवार से हैं और 1947 को बंटवारे के समय हरमीत सिंह का परिवार पाकिस्तान में रह गया। इनके कई रिश्तेदार भारतीय पंजाब में रहते हैं। मौजूदा समय में वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चाकेसर (शांगला) शहर के रहने वाले हैं। पाकिस्तान की इस्लामाबाद पुलिस की ओर से की गई बर्बरता को बताते हुए हरमीत सिंह ने क्या कहा, जानिए… टीवी से बैन के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया…6 बड़ी बातें… 1. टीवी स्क्रीन से बैन और नौकरी गई
31 अगस्त को वीडियो जारी कर हरमीत सिंह ने बताया कि वह सिख समुदाय के पहले पत्रकार हैं, जिन्होंने मुख्यधारा के पाकिस्तानी मीडिया में जगह बनाई। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की। लेकिन संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, कानून के शासन और पीड़ित लोगों की आवाज उठाने के कारण सत्ताधारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें टीवी स्क्रीन पर आने से रोक दिया गया और नौकरी भी चली गई। 2. जमा-पूंजी से बनाया डिजिटल स्टूडियो
टीवी में काम के रास्ते बंद होने के बाद हरमीत सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और कुछ फिल्मों से मिले पैसों से दो-तीन दोस्तों के साथ मिलकर छोटा दफ्तर और डिजिटल स्टूडियो शुरू किया। इसका मकसद व्लॉग और पॉडकास्ट के जरिए अपना काम जारी रखना और आजीविका कमाना था। 3. स्टूडियो पर रेड कर सामान जब्त किया
हरमीत सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उनके दफ्तर पर 30 अगस्त को रेड की और वहां रखा सामान अपने साथ चुराकर ले गई। इसमें 5 कंप्यूटर सिस्टम, कैमरे, पॉडकास्ट माइक, स्टैंड, प्रॉम्प्टर और बैटरियां शामिल थीं। उनका आरोप है कि स्टूडियो में काम करने वाले मुल्तान निवासी सैफ और सहयोगी रजी ताहिर को हिरासत में लिया गया और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट व प्रताड़ना की गई। 4. हरमीत ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
हरमीत सिंह ने सवाल उठाया कि अगर उनके सहयोगी रजी ताहिर ने पत्रकार के तौर पर कश्मीर (पीओके) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, तो इसके लिए पूरे स्टूडियो का सामान और अन्य कर्मियों के कंप्यूटर जब्त करने का क्या औचित्य था। 5. परिवार ने देश छोड़ने की सलाह दी
हरमीत ने बताया कि उनकी सिख बिरादरी और परिवार के लोग उन्हें कोई दूसरा कारोबार करने या देश छोड़ने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पत्रकारिता के कारण उनकी जान को खतरा है और परिवार की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा पाकिस्तान में रहकर काम करना पसंद किया। 6. मानवाधिकार संगठनों से मदद की अपील
हरमीत सिंह ने कहा कि अब उनके पास न नौकरी है और न ही काम जारी रखने के लिए जरूरी सामान। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उनके कैमरों और कंप्यूटर सिस्टम का क्या करेगी। उनका आरोप है कि पत्रकारों को आर्थिक रूप से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों से पत्रकारों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और जब्त सामान वापस दिलाने की अपील की। हरमीत की प्रशासन से तनातनी…2 केस केस-1 केस-2

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31 अगस्त को वीडियो जारी कर हरमीत सिंह ने बताया कि वह सिख समुदाय के पहले पत्रकार हैं, जिन्होंने मुख्यधारा के पाकिस्तानी मीडिया में जगह बनाई। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की। लेकिन संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, कानून के शासन और पीड़ित लोगों की आवाज उठाने के कारण सत्ताधारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें टीवी स्क्रीन पर आने से रोक दिया गया और नौकरी भी चली गई। 2. जमा-पूंजी से बनाया डिजिटल स्टूडियो
टीवी में काम के रास्ते बंद होने के बाद हरमीत सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और कुछ फिल्मों से मिले पैसों से दो-तीन दोस्तों के साथ मिलकर छोटा दफ्तर और डिजिटल स्टूडियो शुरू किया। इसका मकसद व्लॉग और पॉडकास्ट के जरिए अपना काम जारी रखना और आजीविका कमाना था। 3. स्टूडियो पर रेड कर सामान जब्त किया
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हरमीत सिंह ने सवाल उठाया कि अगर उनके सहयोगी रजी ताहिर ने पत्रकार के तौर पर कश्मीर (पीओके) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, तो इसके लिए पूरे स्टूडियो का सामान और अन्य कर्मियों के कंप्यूटर जब्त करने का क्या औचित्य था। 5. परिवार ने देश छोड़ने की सलाह दी
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हरमीत सिंह ने कहा कि अब उनके पास न नौकरी है और न ही काम जारी रखने के लिए जरूरी सामान। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उनके कैमरों और कंप्यूटर सिस्टम का क्या करेगी। उनका आरोप है कि पत्रकारों को आर्थिक रूप से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों से पत्रकारों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और जब्त सामान वापस दिलाने की अपील की। हरमीत की प्रशासन से तनातनी…2 केस केस-1 केस-2

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