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अंतरिम जमानत के बाद जेल से बाहर आए राजपाल यादव:कहा- आरोपों के खिलाफ हर जगह जवाब देने के लिए उपलब्ध हूं

अंतरिम जमानत के बाद जेल से बाहर आए राजपाल यादव:कहा- आरोपों के खिलाफ हर जगह जवाब देने के लिए उपलब्ध हूं


नई दिल्ली में बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। मंगलवार को रिहाई की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वह जेल से बाहर आए, जिसके बाद उन्होंने उन्हें मिले लोगों के सपोर्ट का आभार जताया। बता दें कि चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव ने 5 फरवरी को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था। मीडिया से बातचीत में राजपाल यादव ने कानूनी सवालों पर सीधे कमेंट करने से बचते हुए कहा कि पूरी जानकारी के लिए उनके वकील भास्कर उपाध्याय से पूछा जा सकता है। इंडस्ट्री-दर्शकों का भरपूर साथ- प्यार मिला राजपाल यादव ने कहा कि वह पिछले 30 सालों से बॉलीवुड का हिस्सा हैं। इस दौरान उन्हें इंडस्ट्री और दर्शकों का भरपूर साथ और प्यार मिला, जिसकी बदौलत वह करीब 250 फिल्मों में काम कर सके। उन्होंने कहा कि बीते सालों में अदालत के आदेशों का पालन करते हुए वह नियमित रूप से पेश होते रहे हैं और भविष्य में भी जहां आदेश होगा, वहां उपस्थित रहेंगे। समर्थकों का आभार व्यक्त किया राजपाल ने अपने फैंस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर और उसके बाहर भी उन्हें लोगों का समर्थन मिला है। एक्टर ने कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप है, तो वह 100 प्रतिशत हर जगह जवाब देने के लिए उपलब्ध हैं। बातचीत के अंत में उन्होंने हाई कोर्ट का धन्यवाद करते हुए कहा कि अदालत ने उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया। क्यों जेल में बंद थे राजपाल यादव? साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। ये फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। राजपाल समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल ने जो चेक कंपनी को दिए थे वो बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टी के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया। साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर को पूर्व में दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को शाम लगभग 4 बजे आत्मसमर्पण किया।

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नई दिल्ली में बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। मंगलवार को रिहाई की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वह जेल से बाहर आए, जिसके बाद उन्होंने उन्हें मिले लोगों के सपोर्ट का आभार जताया। बता दें कि चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव ने 5 फरवरी को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था। मीडिया से बातचीत में राजपाल यादव ने कानूनी सवालों पर सीधे कमेंट करने से बचते हुए कहा कि पूरी जानकारी के लिए उनके वकील भास्कर उपाध्याय से पूछा जा सकता है। इंडस्ट्री-दर्शकों का भरपूर साथ- प्यार मिला राजपाल यादव ने कहा कि वह पिछले 30 सालों से बॉलीवुड का हिस्सा हैं। इस दौरान उन्हें इंडस्ट्री और दर्शकों का भरपूर साथ और प्यार मिला, जिसकी बदौलत वह करीब 250 फिल्मों में काम कर सके। उन्होंने कहा कि बीते सालों में अदालत के आदेशों का पालन करते हुए वह नियमित रूप से पेश होते रहे हैं और भविष्य में भी जहां आदेश होगा, वहां उपस्थित रहेंगे। समर्थकों का आभार व्यक्त किया राजपाल ने अपने फैंस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर और उसके बाहर भी उन्हें लोगों का समर्थन मिला है। एक्टर ने कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप है, तो वह 100 प्रतिशत हर जगह जवाब देने के लिए उपलब्ध हैं। बातचीत के अंत में उन्होंने हाई कोर्ट का धन्यवाद करते हुए कहा कि अदालत ने उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया। क्यों जेल में बंद थे राजपाल यादव? साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। ये फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। राजपाल समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल ने जो चेक कंपनी को दिए थे वो बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टी के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया। साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर को पूर्व में दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को शाम लगभग 4 बजे आत्मसमर्पण किया।

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