छत्तीसगढ़ से आए चार हाथियों ने अनूपपुर जिले में पिछले 103 दिनों से डेरा डाल रखा है। हाथियों के लगातार उत्पात और वन विभाग की सुस्ती की वजह से ग्रामीणों में भारी गुस्सा और डर का माहौल है। ये हाथी फिलहाल दो हिस्सों में बंटकर आतंक मचा रहे हैं। तीन हाथियों का दल करनपठार के जंगलों में छिपा है, जबकि एक अकेला हाथी (लोन टस्कर) जिला मुख्यालय से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर पोंड़ी और खांड़ा के इलाकों में फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस अकेले हाथी ने बरबसपुर के सरपंच समेत कई किसानों के खेत रौंद दिए और सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ डालीं। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग उन्हें समय पर हाथियों के आने की सूचना (मुनादी) नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ दूर खड़े होकर तमाशा देखते हैं। न तो विभाग पटाखे दे रहा है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम कर रहा है। मजबूर होकर ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मशालों के सहारे हाथियों को खदेड़ रहे हैं। मौत के दो महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा प्रशासन की लापरवाही का एक बड़ा मामला भी सामने आया है। बरबसपुर में 12 फरवरी को हाथी के हमले (दीवार गिरने) से घायल 70 साल के रामविशाल भैना की मौत हो गई थी। इस घटना को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मृतक के परिवार को अब तक सरकारी सहायता राशि नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग न तो जान की परवाह कर रहा है और न ही नुकसान की भरपाई।













































