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आंतरायिक उपवास: आंतरायिक उपवास क्या है? वेट लॉस के चक्कर में हो सकता है नुकसान, ये नहीं करना चाहिए

आंतरायिक उपवास: आंतरायिक उपवास क्या है? वेट लॉस के चक्कर में हो सकता है नुकसान, ये नहीं करना चाहिए

आंतरायिक उपवास: आज के समय में वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग तेजी से बढ़ रही है। लोग फिट और टिकाऊ बने रहने के लिए इस सामग्री को अपना रहे हैं, जिसमें लंबे समय तक उपवास के बाद एक निश्चित समय में खाना खाया जाता है। हालाँकि, इसके फायदों पर चर्चा की गई है, पतंग ही जरूरी है कि यह किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं है। बिना सही जानकारी के इसे अपनाना स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि इंटरमीटेंट फास्टिंग को कैसे अपनाना चाहिए और किसे नहीं।

रुक-रुक कर फास्टिंग का नुकसान

रुक-रुक कर फास्टिंग शुरू होने से शरीर में तरह-तरह के गाने देखने को मिलते हैं। ये बदलाव कुछ लोगों के लिए विनाशकारी साबित होते हैं, तो कुछ लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक खाली पेट रहना और फिर अचानक भारी भोजन करना से पाचन संबंधी विकार जैसे कब्ज, दस्त और पेट फूलना हो सकता है। इसके अलावा शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है। इससे थकान, चक्कर आना, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। कई मामलों में यह ईटिंग डिसऑर्डर को भी बढ़ावा दे सकता है, खासकर उन लोगों में जो पहले इस समस्या से ग्रस्त हैं। महिलाओं में इसका असर हार्मोन पर भी पड़ सकता है, जिससे रेस्तरां बाजार में उतर सकते हैं। वहीं, खाली पेट रहने से नींद पर भी असर पड़ता है और नींद की कमी से थकान की समस्या बढ़ सकती है।

फास्टिंग के दौरान इन बातों पर रखें ध्यान

अगर आप इंटरमीटेंट फास्टिंग अपनाना चाहते हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना काफी जरूरी है। सबसे पहले शरीर को सीलबंद रखना जरूरी है, इसलिए सुपरमार्केट पर्याप्त मात्रा में पानी रखें। ईटिंग लिपि के अंतर्गत दस्तावेज़ और पोषण से भरा हुआ खाना ही सामग्री। जंक फूड्स से डिस्ट्रिब्यूट और प्रोटीन, फूड्स और पैकेट्स को शामिल करें। व्रत की शुरुआत धीरे-धीरे करें। शुरुआत में 12 घंटे की तेज़ गति और फिर धीरे-धीरे-धीरे-धीरे समय की भूमिकाएँ। साथ ही, अपने शरीर के भोज्य पदार्थों को अंतिम रूप न दें। अगर कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो तुरंत करें उपाय।

इंटरमिटेंट फास्टिंग किसे नहीं करनी चाहिए

कुछ लोगों के लिए आंतरायिक फास्टिंग क्षति साबित हो सकती है। गर्भवती या स्तन स्तन वाली महिलाओं को परहेज से बचना चाहिए। सर्दी, दिल की बीमारी या लो ब्लड डिसऑर्डर को भी बिना डॉक्टर की सलाह के अपनाना नहीं चाहिए। इसके अलावा, जिन लोगों का वजन पहले से कम है या जो बच्चे और जवान हैं, उनके लिए भी यह तरीका सही नहीं माना जाता है।

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आंतरायिक उपवास: आंतरायिक उपवास क्या है? वेट लॉस के चक्कर में हो सकता है नुकसान, ये नहीं करना चाहिए

आंतरायिक उपवास: आज के समय में वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग तेजी से बढ़ रही है। लोग फिट और टिकाऊ बने रहने के लिए इस सामग्री को अपना रहे हैं, जिसमें लंबे समय तक उपवास के बाद एक निश्चित समय में खाना खाया जाता है। हालाँकि, इसके फायदों पर चर्चा की गई है, पतंग ही जरूरी है कि यह किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं है। बिना सही जानकारी के इसे अपनाना स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि इंटरमीटेंट फास्टिंग को कैसे अपनाना चाहिए और किसे नहीं।

रुक-रुक कर फास्टिंग का नुकसान

रुक-रुक कर फास्टिंग शुरू होने से शरीर में तरह-तरह के गाने देखने को मिलते हैं। ये बदलाव कुछ लोगों के लिए विनाशकारी साबित होते हैं, तो कुछ लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक खाली पेट रहना और फिर अचानक भारी भोजन करना से पाचन संबंधी विकार जैसे कब्ज, दस्त और पेट फूलना हो सकता है। इसके अलावा शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है। इससे थकान, चक्कर आना, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। कई मामलों में यह ईटिंग डिसऑर्डर को भी बढ़ावा दे सकता है, खासकर उन लोगों में जो पहले इस समस्या से ग्रस्त हैं। महिलाओं में इसका असर हार्मोन पर भी पड़ सकता है, जिससे रेस्तरां बाजार में उतर सकते हैं। वहीं, खाली पेट रहने से नींद पर भी असर पड़ता है और नींद की कमी से थकान की समस्या बढ़ सकती है।

फास्टिंग के दौरान इन बातों पर रखें ध्यान

अगर आप इंटरमीटेंट फास्टिंग अपनाना चाहते हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना काफी जरूरी है। सबसे पहले शरीर को सीलबंद रखना जरूरी है, इसलिए सुपरमार्केट पर्याप्त मात्रा में पानी रखें। ईटिंग लिपि के अंतर्गत दस्तावेज़ और पोषण से भरा हुआ खाना ही सामग्री। जंक फूड्स से डिस्ट्रिब्यूट और प्रोटीन, फूड्स और पैकेट्स को शामिल करें। व्रत की शुरुआत धीरे-धीरे करें। शुरुआत में 12 घंटे की तेज़ गति और फिर धीरे-धीरे-धीरे-धीरे समय की भूमिकाएँ। साथ ही, अपने शरीर के भोज्य पदार्थों को अंतिम रूप न दें। अगर कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो तुरंत करें उपाय।

इंटरमिटेंट फास्टिंग किसे नहीं करनी चाहिए

कुछ लोगों के लिए आंतरायिक फास्टिंग क्षति साबित हो सकती है। गर्भवती या स्तन स्तन वाली महिलाओं को परहेज से बचना चाहिए। सर्दी, दिल की बीमारी या लो ब्लड डिसऑर्डर को भी बिना डॉक्टर की सलाह के अपनाना नहीं चाहिए। इसके अलावा, जिन लोगों का वजन पहले से कम है या जो बच्चे और जवान हैं, उनके लिए भी यह तरीका सही नहीं माना जाता है।

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