Friday, 10 Jul 2026 | 09:27 PM

Trending :

फिल्म प्रोमोशन के लिए देहरादून पहुंचीं हुमा कुरैशी:बोलीं-छोटे बजट की फिल्म 'बेबी डू डाई डू', दर्शकों का प्यार ही फिल्म का प्रचार E20 Petrol Damage? Companies Must Replace Parts Free! कनखजूरा भगाने के उपाय: बारिश शुरू ही किचन-बाथरूम में आ गई कनखजूरा? 2 रुपये के देसी उपाय बिना किसी रुकावट के हवा में प्लेन की खिड़की टूटी,पैसेंजर का सिर-कंधे बाहर निकले:आसपास बैठे पैसेंजर्स ने अंदर खींचा, मैसिडोनिया के आकाश में हादसा फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है स्पेन के जंगल में आग, 12 की मौत, VIDEO:4 लोग कार में जिंदा जले, 19 अब भी लापता; इलेक्ट्रिक वायर से आग की आशंका
EXCLUSIVE

एक ‘किस’ और 3 गुना बढ़ता दिमागी बीमारी का खतरा! आखिर क्या है ये एपस्टीन-बार वायरस, जिससे सतर्क कर रहे डॉक्टर?

authorimg

क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा ‘किस’ (Kiss) आपको उम्र भर के लिए दिमागी बीमारी दे सकता है? सुनने में यह बेकार सी बात लगे, लेकिन हाल ही में आई एक मेडिकल रिसर्च ने ऐसा ही पाया है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ‘किसिंग डिजीज’ (Kissing Disease) के नाम से मशहूर एक मामूली सा दिखने वाला वायरस, दरअसल, भविष्य में आपकी नसों और दिमाग को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. आखिर क्या है ये पूरा मामला और आपको किन लक्षणों से सावधान रहने की जरूरत है, जानते हैं.

क्या है ये ‘किसिंग डिजीज’ और कैसे फैलती है?
टीओटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल भाषा में इसे ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस’ (Infectious Mononucleosis) कहा जाता है. यह बीमारी ‘एपस्टीन-बार वायरस’ (EBV) की वजह से होती है, जो दुनिया के सबसे आम संक्रमणों में से एक है.

दिलचस्प बात यह है कि इसे ‘किसिंग डिजीज’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य रूप से लार (Saliva) के जरिए फैलती है. हालांकि, यह सिर्फ किस करने से ही नहीं, बल्कि झूठा खाने, एक ही गिलास से पानी पीने या रोजमर्रा के करीबी संपर्क से भी फैल सकती है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

MS से जुड़ा है गहरा नाता
अमेरिका में लगभग 19,000 लोगों पर की गई एक स्टडी (Mayo Clinic-led study) में यह पाया गया कि जिन लोगों को कभी ‘मोनो’ यानी किसिंग डिजीज हुई थी, उनमें भविष्य में मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) होने का खतरा उन लोगों के मुकाबले तीन गुना अधिक था जिन्हें यह संक्रमण कभी नहीं हुआ. रिसर्च यह भी बताती है कि संक्रमित लोगों में यह दिमागी बीमारी सामान्य से काफी पहले भी दिखाई देने लगती है.

आखिर क्या है ये मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS)?
MS एक ऐसी क्रोनिक स्थिति है जिसमें हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम ही अपनी नसों की सुरक्षात्मक परत (Myelin Sheath) पर हमला कर देता है. इससे दिमाग और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संकेतों का तालमेल बिगड़ जाता है. इसकी शुरुआत थकान, नजर धुंधली होने, सुन्नपन और शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षणों से होती है, जो वक्त के साथ बढ़ते चले जाते हैं.

एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
अपोलो हॉस्पिटल (हैदराबाद) के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार
का कहना है कि EBV वायरस और MS के बीच लिंक तो मजबूत है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह वायरस ही इकलौता कारण है. उनके अनुसार, “EBV उन लोगों में एक ‘ट्रिगर’ की तरह काम कर सकता है जो आनुवंशिक रूप से इसके प्रति संवेदनशील हैं.”

वहीं, एम्स दिल्ली की न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. मंजरी त्रिपाठी का मानना है कि भारत में बच्चों और किशोरों में यह वायरस बहुत आम है, लेकिन हर किसी को इससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि संक्रमण होने के बावजूद बीमारी होने का वास्तविक खतरा अभी भी बहुत कम है.

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि रूटीन मॉनिटरिंग की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है. यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण 24 घंटे से अधिक समय तक महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

-आँखों में दर्द या धुंधला दिखाई देना.
-हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना.
-बिना किसी कारण के बहुत ज्यादा थकान रहना.
-रीढ़ की हड्डी में बिजली जैसा झटका महसूस होना.
-अचानक आई कमजोरी या शरीर का संतुलन बिगड़ना.

बचाव ही सबसे बड़ा समाधान-
इस दिशा में वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और यह चर्चा कर रहे हैं कि क्या एपस्टीन-बार वायरस (EBV) के खिलाफ कोई वैक्सीन तैयार की जा सकती है या नहीं. फिलहाल, स्वच्छता बनाए रखना, किसी का झूठा खाना पानी न पीना और अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना ही इससे बचने के सबसे आसान तरीके हैं.  रिसर्च के नतीजे निश्चित रूप से चिंताजनक हैं, लेकिन घबराने के बजाय अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. याद रखें, जानकारी ही बचाव का पहला कदम है!

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Bangladesh vs Australia, 3rd ODI Live Updates

June 14, 2026/
10:58 am

आखरी अपडेट:14 जून, 2026, 10:58 IST वरिष्ठ टीएमसी नेता और छह बार के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की शनिवार को दिल्ली...

एमपी में गर्मी बढ़ी, पारा 42 पार, नर्मदापुरम सबसे गर्म:अगले 5 दिन तापमान में 3-4 डिग्री बढ़ोतरी होगी, नर्मदा घाटों पर लग रही भीड़

April 14, 2026/
7:58 pm

मध्यप्रदेश में गर्मी ने अब तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सीजन में पहली बार तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के...

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

May 5, 2026/
7:46 pm

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम सीटों पर सबसे अलग ट्रेंड बंगाल में दिखा। यहां 142 मुस्लिम सीटों में...

बंगाल के लिए उच्च दांव की लड़ाई के बीच राहुल गांधी बनाम ममता बनर्जी तेज हो गई है कौन है बीजेपी की बी टीम?

April 27, 2026/
9:11 pm

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक लड़ाई गर्म होती जा रही है क्योंकि प्रमुख दल बड़े दांव वाले चुनावी मुकाबले के लिए...

CAG रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले:मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश

March 31, 2026/
10:09 am

CAG यानी सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करने वाली संस्था की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई।...

‘पापा, शो देखने आओगे? गालियां हैं’:समय रैना ने पिता को रात के 4 बजे किया मैसेज, जवाब सुनकर दर्शक हंस पड़े

April 11, 2026/
3:32 pm

कॉमेडियन समय रैना ने हाल ही में बताया कि उनके शो ‘स्टिल अलाइव’ में गालियां होने के कारण वह पिता...

पश्चिम बंगाल में रोबोटिक भूचाल! हुमायूं कबीर का कथित स्टिंग वीडियो, टीएमसी बोली- '1000 करोड़ की बीजेपी से हुई डील'

April 9, 2026/
2:47 pm

पश्चिम बंगाल की सूची में हलचल मच गई है। युवा कांग्रेस (टीएमसी) ने हुमायूँ कबीर से एक कथित स्टिंग ऑपरेशन...

राजनीति

एक ‘किस’ और 3 गुना बढ़ता दिमागी बीमारी का खतरा! आखिर क्या है ये एपस्टीन-बार वायरस, जिससे सतर्क कर रहे डॉक्टर?

authorimg

क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा ‘किस’ (Kiss) आपको उम्र भर के लिए दिमागी बीमारी दे सकता है? सुनने में यह बेकार सी बात लगे, लेकिन हाल ही में आई एक मेडिकल रिसर्च ने ऐसा ही पाया है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ‘किसिंग डिजीज’ (Kissing Disease) के नाम से मशहूर एक मामूली सा दिखने वाला वायरस, दरअसल, भविष्य में आपकी नसों और दिमाग को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. आखिर क्या है ये पूरा मामला और आपको किन लक्षणों से सावधान रहने की जरूरत है, जानते हैं.

क्या है ये ‘किसिंग डिजीज’ और कैसे फैलती है?
टीओटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल भाषा में इसे ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस’ (Infectious Mononucleosis) कहा जाता है. यह बीमारी ‘एपस्टीन-बार वायरस’ (EBV) की वजह से होती है, जो दुनिया के सबसे आम संक्रमणों में से एक है.

दिलचस्प बात यह है कि इसे ‘किसिंग डिजीज’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य रूप से लार (Saliva) के जरिए फैलती है. हालांकि, यह सिर्फ किस करने से ही नहीं, बल्कि झूठा खाने, एक ही गिलास से पानी पीने या रोजमर्रा के करीबी संपर्क से भी फैल सकती है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

MS से जुड़ा है गहरा नाता
अमेरिका में लगभग 19,000 लोगों पर की गई एक स्टडी (Mayo Clinic-led study) में यह पाया गया कि जिन लोगों को कभी ‘मोनो’ यानी किसिंग डिजीज हुई थी, उनमें भविष्य में मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) होने का खतरा उन लोगों के मुकाबले तीन गुना अधिक था जिन्हें यह संक्रमण कभी नहीं हुआ. रिसर्च यह भी बताती है कि संक्रमित लोगों में यह दिमागी बीमारी सामान्य से काफी पहले भी दिखाई देने लगती है.

आखिर क्या है ये मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS)?
MS एक ऐसी क्रोनिक स्थिति है जिसमें हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम ही अपनी नसों की सुरक्षात्मक परत (Myelin Sheath) पर हमला कर देता है. इससे दिमाग और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संकेतों का तालमेल बिगड़ जाता है. इसकी शुरुआत थकान, नजर धुंधली होने, सुन्नपन और शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षणों से होती है, जो वक्त के साथ बढ़ते चले जाते हैं.

एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
अपोलो हॉस्पिटल (हैदराबाद) के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार
का कहना है कि EBV वायरस और MS के बीच लिंक तो मजबूत है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह वायरस ही इकलौता कारण है. उनके अनुसार, “EBV उन लोगों में एक ‘ट्रिगर’ की तरह काम कर सकता है जो आनुवंशिक रूप से इसके प्रति संवेदनशील हैं.”

वहीं, एम्स दिल्ली की न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. मंजरी त्रिपाठी का मानना है कि भारत में बच्चों और किशोरों में यह वायरस बहुत आम है, लेकिन हर किसी को इससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि संक्रमण होने के बावजूद बीमारी होने का वास्तविक खतरा अभी भी बहुत कम है.

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि रूटीन मॉनिटरिंग की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है. यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण 24 घंटे से अधिक समय तक महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

-आँखों में दर्द या धुंधला दिखाई देना.
-हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना.
-बिना किसी कारण के बहुत ज्यादा थकान रहना.
-रीढ़ की हड्डी में बिजली जैसा झटका महसूस होना.
-अचानक आई कमजोरी या शरीर का संतुलन बिगड़ना.

बचाव ही सबसे बड़ा समाधान-
इस दिशा में वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और यह चर्चा कर रहे हैं कि क्या एपस्टीन-बार वायरस (EBV) के खिलाफ कोई वैक्सीन तैयार की जा सकती है या नहीं. फिलहाल, स्वच्छता बनाए रखना, किसी का झूठा खाना पानी न पीना और अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना ही इससे बचने के सबसे आसान तरीके हैं.  रिसर्च के नतीजे निश्चित रूप से चिंताजनक हैं, लेकिन घबराने के बजाय अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. याद रखें, जानकारी ही बचाव का पहला कदम है!

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.