RSACPCON 2026 (रिसर्च सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजी क्लिनिकल फार्माकोलॉजी) की 34वीं नेशनल और 5वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुआ। पहले दिन देश-विदेश के 500 से अधिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और पीजी विद्यार्थियों ने चार अलग-अलग हॉल में आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में भाग लिया। कॉन्फ्रेंस में ऑपरेटिंग थिएटर (OT) में गलतियों की रोकथाम, सुरक्षित प्रसव, आपदा व युद्धकालीन चिकित्सा प्रबंधन और मेडिकल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। “ऑडिटिंग व्हाट मैटर्स: क्लिनिकल गलतियां और बिना दोष की रिपोर्टिंग” सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि ओटी में होने वाली अधिकांश गलतियां किसी एक डॉक्टर की नहीं, बल्कि थकान, संचार की कमी, उपकरणों की खामियों और उच्च दबाव वाले वातावरण जैसे सिस्टम संबंधी कारणों से होती हैं। अस्पतालों में निष्पक्ष रिपोर्टिंग की संस्कृति विकसित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि भविष्य में गलतियों को रोका जा सके। “सेफ बर्थ का वादा” सत्र में प्रसूति से जुड़े जटिल मामलों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने प्लेसेंटा एक्रीटा और ऑब्सटेट्रिक हेमरेज जैसी स्थितियों को मातृ मृत्यु का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि समय रहते पहचान और तैयारी से प्रसव के दौरान होने वाली बड़ी त्रासदियों को टाला जा सकता है। “द लाइफलाइन ब्रिगेड: व्हेन डिजास्टर स्ट्राइक्स” सत्र में सैन्य चिकित्सा अधिकारियों ने युद्ध, प्राकृतिक आपदा और जैविक हमलों के दौरान चिकित्सा प्रबंधन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि तेज ट्राइएज, डैमेज कंट्रोल सर्जरी और सीमित संसाधनों में अधिकतम जीवन बचाने की रणनीति बेहद प्रभावी रहती है। AI पर चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दवाओं की सटीक डोज तय करने और जटिलताओं का पूर्वानुमान लगाने में सहायक है, लेकिन यह अनुभवी डॉक्टर का विकल्प नहीं बन सकता। आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. किशोर अरोरा ने कहा कि कॉन्फ्रेंस के सत्र सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़े रहे और भारतीय एनेस्थीसियोलॉजी वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रही है।















































