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ऑस्कर के बदले नियमों से भारतीय सिनेमा को राहत:फेस्टिवल्स में चमकने वाली फिल्मों को अब देश की आधिकारिक एंट्री बनने की जरूरत नहीं

ऑस्कर के बदले नियमों से भारतीय सिनेमा को राहत:फेस्टिवल्स में चमकने वाली फिल्मों को अब देश की आधिकारिक एंट्री बनने की जरूरत नहीं

ऑस्कर 2027 के लिए एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के नियमों में बदलाव किया है। इसका असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां हर साल ऑस्कर एंट्री को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए नियमों के बाद अब किसी देश की आधिकारिक एंट्री ही ऑस्कर तक पहुंचने का इकलौता रास्ता नहीं रहेगा। एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की नई गाइडलाइंस के अनुसार, अगर कोई फिल्म कान्स, वेनिस, टोरंटो, बर्लिन, सनडांस या बुसान जैसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में टॉप अवॉर्ड जीतती है, तो वह सीधे ऑस्कर की इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी के लिए क्वालिफाई कर सकती है। यानी उस फिल्म को अपने देश की ऑफिशियल एंट्री बनने की जरूरत नहीं होगी। इस बदलाव का उदाहरण भारतीय फिल्ममेकर पायल कपाड़िया की फिल्म ‘ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट’ से समझा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ये नियम पहले लागू होते तो फिल्म भारत की आधिकारिक एंट्री बने बिना भी ऑस्कर की रेस में शामिल हो सकती थी। भारत में ऑस्कर के लिए फिल्म चुनने का जिम्मा फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के पास होता है। लेकिन कई सालों से इसकी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। साल 2013 में इरफान खान की फिल्म ‘द लंच बॉक्स’ को लेकर विवाद हुआ था। कान्स फिल्म फेस्टिवल में सराहना मिलने के बावजूद इसे भारत की ऑफिशियल एंट्री नहीं चुना गया था। इसकी जगह ‘द गुड रोड’ को भेजा गया था। उस समय फिल्ममेकर अनुराग कश्यप समेत कई लोगों ने चयन प्रक्रिया की आलोचना की थी। नई गाइडलाइन के तहत अब इंटरनेशनल फीचर अवॉर्ड का क्रेडिट देश की बजाय फिल्म के डायरेक्टर को दिया जाएगा। साथ ही एक देश से एक से ज्यादा फिल्मों के ऑस्कर रेस में पहुंचने की संभावना बढ़ गई है। फिल्म इंडस्ट्री के जानकार इसे भारतीय सिनेमा के लिए मौका मान रहे हैं, क्योंकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई फिल्मों को घरेलू चयन राजनीति से राहत मिल सकती है।

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ऑस्कर के बदले नियमों से भारतीय सिनेमा को राहत:फेस्टिवल्स में चमकने वाली फिल्मों को अब देश की आधिकारिक एंट्री बनने की जरूरत नहीं

ऑस्कर के बदले नियमों से भारतीय सिनेमा को राहत:फेस्टिवल्स में चमकने वाली फिल्मों को अब देश की आधिकारिक एंट्री बनने की जरूरत नहीं

ऑस्कर 2027 के लिए एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के नियमों में बदलाव किया है। इसका असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां हर साल ऑस्कर एंट्री को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए नियमों के बाद अब किसी देश की आधिकारिक एंट्री ही ऑस्कर तक पहुंचने का इकलौता रास्ता नहीं रहेगा। एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की नई गाइडलाइंस के अनुसार, अगर कोई फिल्म कान्स, वेनिस, टोरंटो, बर्लिन, सनडांस या बुसान जैसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में टॉप अवॉर्ड जीतती है, तो वह सीधे ऑस्कर की इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी के लिए क्वालिफाई कर सकती है। यानी उस फिल्म को अपने देश की ऑफिशियल एंट्री बनने की जरूरत नहीं होगी। इस बदलाव का उदाहरण भारतीय फिल्ममेकर पायल कपाड़िया की फिल्म ‘ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट’ से समझा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ये नियम पहले लागू होते तो फिल्म भारत की आधिकारिक एंट्री बने बिना भी ऑस्कर की रेस में शामिल हो सकती थी। भारत में ऑस्कर के लिए फिल्म चुनने का जिम्मा फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के पास होता है। लेकिन कई सालों से इसकी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। साल 2013 में इरफान खान की फिल्म ‘द लंच बॉक्स’ को लेकर विवाद हुआ था। कान्स फिल्म फेस्टिवल में सराहना मिलने के बावजूद इसे भारत की ऑफिशियल एंट्री नहीं चुना गया था। इसकी जगह ‘द गुड रोड’ को भेजा गया था। उस समय फिल्ममेकर अनुराग कश्यप समेत कई लोगों ने चयन प्रक्रिया की आलोचना की थी। नई गाइडलाइन के तहत अब इंटरनेशनल फीचर अवॉर्ड का क्रेडिट देश की बजाय फिल्म के डायरेक्टर को दिया जाएगा। साथ ही एक देश से एक से ज्यादा फिल्मों के ऑस्कर रेस में पहुंचने की संभावना बढ़ गई है। फिल्म इंडस्ट्री के जानकार इसे भारतीय सिनेमा के लिए मौका मान रहे हैं, क्योंकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई फिल्मों को घरेलू चयन राजनीति से राहत मिल सकती है।

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