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केसर दूध और नारियल पानी पीने से बच्चा सच में गोरा पैदा होता है! सच है या मिथ?

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saffron milk coconut water fair baby myth vs reality: ‘वंदना ने जैसे ही कंसीव किया उसे हर तरफ से सलाहें मिलने लगीं. कभी बड़ी बहन फोन पर कहती कि नारियल पानी पीना शुरू कर दे और आखिरी तक नहीं छोड़ना, बच्च दूध सा सफेद होगा. कभी जेठानी और ननद सलाह देने लगती कि संतरा और सौंफ खाती रहना बच्चे रंग एकदम सफेद होगा. तो कभी बैंगन की सब्जी या काले रंग का कोई फल जैसे जामुन या आलू-बुखारा खाती तो सासू मां ही टोक देतीं कि ये क्यों खाया काला बच्चा पैदा करोगी क्या?

पहले तो वंदना को ये बातें काफी अच्छी लगीं कि चलो सभी बहुत केयर कर रहे हैं, लेकिन फिर उसे अचानक झुंझलाहट होने लगी कि खाने-पीने से कैसे बच्चे का रंग गोरा या काला हो सकता है? हालांकि वह कई बार अपने लाख मन करने के बाद भी कुछ चीजों से परहेज करने लग गई तो कुछ चीजों को जबदस्ती अपनी डाइट में शामिल कर लिया. ये कहानी सिर्फ वंदना की नहीं है, ऐसी लाखों वंदनाएं हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी सलाहों को झेलती हैं या एक बार इससे गुजरने के बाद खुद भी दूसरों को देने लगती हैं.’

लेकिन सवाल उठता है कि क्या वास्तव में नारियल का पानी पीने, संतरा खाने, केसर का दूध पीने, सफेद चीजें खाने से बच्चा गोरा पैदा होता है और काली चीजें खाने से बच्चा काला पैदा होता है? क्या खाने पीने से बच्चे का रंग निर्धारित होता है? ये मिथ है या हकीकत? मेडिकल साइंस क्या कहता है? आइए जानते हैं.

आमतौर पर दादी-नानी और महिलाओं की बातों से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी सलाह भरी पड़ी हैं लेकिन मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक अध्ययनों की मानें तो रंग की बात पूरी तरह मिथक (myth) है. बच्चे का रंग जीन (genetics) से तय होता है, न कि मां के आहार से.

हालांकि कुछ रिसर्च बताती हैं कि अगर मां पोषणयुक्त आहार लेती है या प्रोटीन इंटेक ठीक रहता है तो बच्चे के चेहरे की बनावट पर इसका असर पड़ता है.

नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित एक स्टडी कहती है कि mTOR सिग्नलिंग पाथवे जानवरों और मनुष्यों में चेहरे की संरचना के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, जो प्रोटीन और अमीनो एसिड्स के प्रति संवेदनशील होता है. स्टडी कहती है कि ऐसा चूहों और इंसानों में देखा गया है कि गर्भावस्था में प्रोटीन का इंटेक अच्छा रखने से पेट में पल रहे बच्चे के चेहरे का निर्माण काफी बेहतर होता है और उसमें कमियां नहीं रहतीं.

बच्चे के बालों पर भी पड़ता है खान-पान का असर
अमेरिका में हुई एक अन्य स्टडी दावा करती है कि चूहों पर हुए अध्ययन में देखा गया कि मां द्वारा गर्भ में लिया गया पोषणयुक्त आहार बच्चे के बालों पर भी असर डालता है. इसमें बच्चे के बालों की ग्रोथ से लेकर उसका रंग तक शामिल है. स्टडी कहती है कि जो माएं प्रेग्नेंसी में विटामिन बी12, फॉलिक एसिड, कॉलिन और बीटाइन ठीक मात्रा में लेती हैं तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चों के बालों का रंग ज्यादा गहरा और चमकदार हो सकता है.

बच्चे के रंग को लेकर क्या है
हालांकि अगर बच्चे की त्वचा के रंग की बात करें तो मेलानिन नामक पिगमेंट पर निर्भर करता है, जो माता-पिता दोनों के जीन से आता है. साइंस कहती है कि बच्चे की त्वचा का रंग मां और पिता की त्वचा के रंग का मिला-जुला होता है. गर्भावस्था में कोई भी आहार या पेय बच्चे के जीन को बदल नहीं सकता. अभी तक ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो केसर या नारियल पानी को बच्चे के रंग से जोड़ता हो.

हालांकि केसर (सैफरन) के बारे में कई मान्यताएं कहती हैं कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो मूड बेहतर कर सकते हैं और पाचन सुधार सकते हैं, इसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है और बच्चा स्वस्थ होता है लेकिन त्वचा का रंग जेनेटिक फैक्टर से तय हो ऐसा नहीं है. हेल्थलाइन (2021) की एक रिपोर्ट भी लिखती है कि केसर से बच्चे का रंग गोरा होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. उल्टा, ज्यादा मात्रा में केसर लेने से गर्मी बढ़ने और गर्भपात का खतरा बढ़ा सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से ही सीमित मात्रा (आमतौर पर 2-3 धागे) लेनी चाहिए.

नारियल पानी के हैं ये फायदे
नारियल पानी की बात करें तो यह गर्भावस्था में हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अच्छा है.वहीं संतरा विटामिन सी का अच्छा सोर्स है. एक रिसर्च (PMC, 2024) में पाया गया कि ये दोनों मॉर्निंग सिकनेस कम कर सकते हैं लेकिन बच्चे के रंग पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता. कई डॉक्टरों ने इसे साफ तौर पर मिथक बताया है. किसी भी स्टडी में नारियल पानी को फेयर बेबी से जोड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला है.

फिर नारियल पानी, संतरा, केसर दूध क्यों लें?
वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भावस्था में आहार बच्चे के समग्र विकास, वजन, दिमाग और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है. विटामिन सी, ई, ओमेगा-3, फोलिक एसिड युक्त संतुलित डाइट (फल, सब्जियां, दालें, ड्राई फ्रूट्स) बच्चे की त्वचा को स्वस्थ बनाती हैं, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने स्वास्थ्य के लिए और बच्चे के लिए न्यूट्रीशनल फूड के साथ इन चीजों को लिया जा सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि इससे गोरे होने का कोई प्रमाण नहीं है.

मिथकों के चक्कर में न छोड़ें पोषणयुक्त फूड
इसलिए जरूरी है कि ऐसे मिथकों पर भरोसा करके महिलाएं जरूरी पोषण और न्यूट्रीशनल फूड लेना न छोड़ें, ऐसा करने से नुकसान हो सकता है. आप ये सब भी ले सकती हैं लेकिन अपनी पूरी डाइट लेने के साथ. गर्भवती महिला को डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए.

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पहले तो वंदना को ये बातें काफी अच्छी लगीं कि चलो सभी बहुत केयर कर रहे हैं, लेकिन फिर उसे अचानक झुंझलाहट होने लगी कि खाने-पीने से कैसे बच्चे का रंग गोरा या काला हो सकता है? हालांकि वह कई बार अपने लाख मन करने के बाद भी कुछ चीजों से परहेज करने लग गई तो कुछ चीजों को जबदस्ती अपनी डाइट में शामिल कर लिया. ये कहानी सिर्फ वंदना की नहीं है, ऐसी लाखों वंदनाएं हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी सलाहों को झेलती हैं या एक बार इससे गुजरने के बाद खुद भी दूसरों को देने लगती हैं.’

लेकिन सवाल उठता है कि क्या वास्तव में नारियल का पानी पीने, संतरा खाने, केसर का दूध पीने, सफेद चीजें खाने से बच्चा गोरा पैदा होता है और काली चीजें खाने से बच्चा काला पैदा होता है? क्या खाने पीने से बच्चे का रंग निर्धारित होता है? ये मिथ है या हकीकत? मेडिकल साइंस क्या कहता है? आइए जानते हैं.

आमतौर पर दादी-नानी और महिलाओं की बातों से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी सलाह भरी पड़ी हैं लेकिन मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक अध्ययनों की मानें तो रंग की बात पूरी तरह मिथक (myth) है. बच्चे का रंग जीन (genetics) से तय होता है, न कि मां के आहार से.

हालांकि कुछ रिसर्च बताती हैं कि अगर मां पोषणयुक्त आहार लेती है या प्रोटीन इंटेक ठीक रहता है तो बच्चे के चेहरे की बनावट पर इसका असर पड़ता है.

नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित एक स्टडी कहती है कि mTOR सिग्नलिंग पाथवे जानवरों और मनुष्यों में चेहरे की संरचना के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, जो प्रोटीन और अमीनो एसिड्स के प्रति संवेदनशील होता है. स्टडी कहती है कि ऐसा चूहों और इंसानों में देखा गया है कि गर्भावस्था में प्रोटीन का इंटेक अच्छा रखने से पेट में पल रहे बच्चे के चेहरे का निर्माण काफी बेहतर होता है और उसमें कमियां नहीं रहतीं.

बच्चे के बालों पर भी पड़ता है खान-पान का असर
अमेरिका में हुई एक अन्य स्टडी दावा करती है कि चूहों पर हुए अध्ययन में देखा गया कि मां द्वारा गर्भ में लिया गया पोषणयुक्त आहार बच्चे के बालों पर भी असर डालता है. इसमें बच्चे के बालों की ग्रोथ से लेकर उसका रंग तक शामिल है. स्टडी कहती है कि जो माएं प्रेग्नेंसी में विटामिन बी12, फॉलिक एसिड, कॉलिन और बीटाइन ठीक मात्रा में लेती हैं तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चों के बालों का रंग ज्यादा गहरा और चमकदार हो सकता है.

बच्चे के रंग को लेकर क्या है
हालांकि अगर बच्चे की त्वचा के रंग की बात करें तो मेलानिन नामक पिगमेंट पर निर्भर करता है, जो माता-पिता दोनों के जीन से आता है. साइंस कहती है कि बच्चे की त्वचा का रंग मां और पिता की त्वचा के रंग का मिला-जुला होता है. गर्भावस्था में कोई भी आहार या पेय बच्चे के जीन को बदल नहीं सकता. अभी तक ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो केसर या नारियल पानी को बच्चे के रंग से जोड़ता हो.

हालांकि केसर (सैफरन) के बारे में कई मान्यताएं कहती हैं कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो मूड बेहतर कर सकते हैं और पाचन सुधार सकते हैं, इसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है और बच्चा स्वस्थ होता है लेकिन त्वचा का रंग जेनेटिक फैक्टर से तय हो ऐसा नहीं है. हेल्थलाइन (2021) की एक रिपोर्ट भी लिखती है कि केसर से बच्चे का रंग गोरा होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. उल्टा, ज्यादा मात्रा में केसर लेने से गर्मी बढ़ने और गर्भपात का खतरा बढ़ा सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से ही सीमित मात्रा (आमतौर पर 2-3 धागे) लेनी चाहिए.

नारियल पानी के हैं ये फायदे
नारियल पानी की बात करें तो यह गर्भावस्था में हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अच्छा है.वहीं संतरा विटामिन सी का अच्छा सोर्स है. एक रिसर्च (PMC, 2024) में पाया गया कि ये दोनों मॉर्निंग सिकनेस कम कर सकते हैं लेकिन बच्चे के रंग पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता. कई डॉक्टरों ने इसे साफ तौर पर मिथक बताया है. किसी भी स्टडी में नारियल पानी को फेयर बेबी से जोड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला है.

फिर नारियल पानी, संतरा, केसर दूध क्यों लें?
वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भावस्था में आहार बच्चे के समग्र विकास, वजन, दिमाग और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है. विटामिन सी, ई, ओमेगा-3, फोलिक एसिड युक्त संतुलित डाइट (फल, सब्जियां, दालें, ड्राई फ्रूट्स) बच्चे की त्वचा को स्वस्थ बनाती हैं, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने स्वास्थ्य के लिए और बच्चे के लिए न्यूट्रीशनल फूड के साथ इन चीजों को लिया जा सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि इससे गोरे होने का कोई प्रमाण नहीं है.

मिथकों के चक्कर में न छोड़ें पोषणयुक्त फूड
इसलिए जरूरी है कि ऐसे मिथकों पर भरोसा करके महिलाएं जरूरी पोषण और न्यूट्रीशनल फूड लेना न छोड़ें, ऐसा करने से नुकसान हो सकता है. आप ये सब भी ले सकती हैं लेकिन अपनी पूरी डाइट लेने के साथ. गर्भवती महिला को डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए.

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