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खाने में इस्तेमाल से लेकर जोड़ों के दर्द तक में राहत देता ये जादुई तेल, एक्सपर्ट ने गिनाए फायदे

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Rewa News: डोरी का तेल सब्जी, पूरी-कचौड़ी समेत अन्य पकवान बनाने में काम आता है. पहले के समय में ग्रामीणों को साल में कम से कम 6 महीने तक खाद्य तेल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती थी.

रीवा. मध्य प्रदेश का रीवा प्रकृति के गोद में बसा हुआ क्षेत्र है, जो प्राकृतिक उपहार अपने आंचल में संजोए हुए है, इस बात का अहसास होता है. ऐसे ही उपहारों में एक डोरी का फल भी है. औषधीय और बहुगुणी खूबियों से भरपूर डोरी ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होता है. इससे न सिर्फ ग्रामीणों को खाद्य तेल प्रचुर मात्रा में मिल जाता है बल्कि अच्छी आमदनी भी होती है. डोरी के तेल के फायदे बताते हुए रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन (MD) डॉक्टर दीपक कुलश्रेष्ठ ने कहा कि डोरी के फल से अर्थ महुआ के फल से है. इस फल को चुनने के बाद ग्रामीण उसके बीज को निकालते हैं और धूप में सुखाते हैं. सूखे हुए बीज को उबालने के बाद उसका चूर्ण बना लेते हैं. उसके बाद इससे तेल निकालते हैं. डोरी का तेल खाने के साथ-साथ शरीर पर लगाने के भी काम में आता है. इस तेल से शरीर में होने वाले दर्द से राहत मिलती है. जोड़ों के दर्द में भी यह असरदार माना जाता है.

आज भी रीवा के अधिकांश गांवों के लोग डोरी का तेल निकालते हैं. खासकर गरीब वर्ग के लोग तो बड़ी संख्या में डोरी का तेल निकालते हैं और खाद्य तेल के खर्च से बच जाते हैं. इसका तेल सब्जी बनाने के अलावा पूरी-कचौड़ी समेत अन्य पकवान बनाने में काम आता है. पहले के समय में ग्रामीणों को साल में कम से कम 6 महीने तक खाद्य तेल बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती थी. आज भी घर में ही डोरी का तेल निकालकर ग्रामीण उसका भरपूर उपयोग करते हैं. इस तेल का उपयोग खाने के साथ-साथ शरीर पर लगाने के लिए भी किया जाता है. अगर शरीर में दर्द हो, तो उसके इलाज में डोरी का तेल काफी फायदेमंद होता है.

व्यवसायियों को बेच देते थे ग्रामीण
पहले लोग डोरी को चुनकर उसे व्यवसायियों के पास बेच देते थे, जिससे उन्हें कुछ पैसे मिल जाते थे लेकिन अब अधिकांश ग्रामीण डोरी के बीज से अपने घर में उपयोग के अनुसार तेल निकालते हैं. उपयोग से अधिक मात्रा में होने के बाद ही ग्रामीण उसे व्यवसायियों को बेचते हैं. डोरी का व्यवसाय ग्रामीणों के लिए वरदान बन सकता है. अगर सरकार इसके लिए उचित बाजार उपलब्ध कराए, तो ग्रामीण स्वरोजगार से जुड़कर इससे अच्छी आमदनी भी कर सकते हैं.

पोषक तत्वों से भरपूर महुआ
पोषक तत्वों से भरा महुआ के फल और फूल में काफी औषधीय गुण हैं. फाइबर, फैट, विटामिन सी, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस और कार्बोहाइड्रेट जैसे तत्व इसमें पाए जाते हैं. इसके लगातार इस्तेमाल और सेवन से शरीर को महत्वपूर्ण पोषण मिलता है. महुआ तेल विटामिन ई का एक अच्छा स्रोत है, जो एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है और शरीर को कई तरह के दूसरे खराब तत्वों से भी बचाता है. शरीर में जकड़न, दर्द और जोड़ों के दर्द में इसका तेल काफी उपयोगी है. इसके लगाने से सिरदर्द से राहत के साथ-साथ अनिद्रा से छुटकारा मिलता है. शरीर और चेहरे पर दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं. महुआ तेल बालों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Rewa News: डोरी का तेल सब्जी, पूरी-कचौड़ी समेत अन्य पकवान बनाने में काम आता है. पहले के समय में ग्रामीणों को साल में कम से कम 6 महीने तक खाद्य तेल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती थी.

रीवा. मध्य प्रदेश का रीवा प्रकृति के गोद में बसा हुआ क्षेत्र है, जो प्राकृतिक उपहार अपने आंचल में संजोए हुए है, इस बात का अहसास होता है. ऐसे ही उपहारों में एक डोरी का फल भी है. औषधीय और बहुगुणी खूबियों से भरपूर डोरी ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होता है. इससे न सिर्फ ग्रामीणों को खाद्य तेल प्रचुर मात्रा में मिल जाता है बल्कि अच्छी आमदनी भी होती है. डोरी के तेल के फायदे बताते हुए रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन (MD) डॉक्टर दीपक कुलश्रेष्ठ ने कहा कि डोरी के फल से अर्थ महुआ के फल से है. इस फल को चुनने के बाद ग्रामीण उसके बीज को निकालते हैं और धूप में सुखाते हैं. सूखे हुए बीज को उबालने के बाद उसका चूर्ण बना लेते हैं. उसके बाद इससे तेल निकालते हैं. डोरी का तेल खाने के साथ-साथ शरीर पर लगाने के भी काम में आता है. इस तेल से शरीर में होने वाले दर्द से राहत मिलती है. जोड़ों के दर्द में भी यह असरदार माना जाता है.

आज भी रीवा के अधिकांश गांवों के लोग डोरी का तेल निकालते हैं. खासकर गरीब वर्ग के लोग तो बड़ी संख्या में डोरी का तेल निकालते हैं और खाद्य तेल के खर्च से बच जाते हैं. इसका तेल सब्जी बनाने के अलावा पूरी-कचौड़ी समेत अन्य पकवान बनाने में काम आता है. पहले के समय में ग्रामीणों को साल में कम से कम 6 महीने तक खाद्य तेल बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती थी. आज भी घर में ही डोरी का तेल निकालकर ग्रामीण उसका भरपूर उपयोग करते हैं. इस तेल का उपयोग खाने के साथ-साथ शरीर पर लगाने के लिए भी किया जाता है. अगर शरीर में दर्द हो, तो उसके इलाज में डोरी का तेल काफी फायदेमंद होता है.

व्यवसायियों को बेच देते थे ग्रामीण
पहले लोग डोरी को चुनकर उसे व्यवसायियों के पास बेच देते थे, जिससे उन्हें कुछ पैसे मिल जाते थे लेकिन अब अधिकांश ग्रामीण डोरी के बीज से अपने घर में उपयोग के अनुसार तेल निकालते हैं. उपयोग से अधिक मात्रा में होने के बाद ही ग्रामीण उसे व्यवसायियों को बेचते हैं. डोरी का व्यवसाय ग्रामीणों के लिए वरदान बन सकता है. अगर सरकार इसके लिए उचित बाजार उपलब्ध कराए, तो ग्रामीण स्वरोजगार से जुड़कर इससे अच्छी आमदनी भी कर सकते हैं.

पोषक तत्वों से भरपूर महुआ
पोषक तत्वों से भरा महुआ के फल और फूल में काफी औषधीय गुण हैं. फाइबर, फैट, विटामिन सी, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस और कार्बोहाइड्रेट जैसे तत्व इसमें पाए जाते हैं. इसके लगातार इस्तेमाल और सेवन से शरीर को महत्वपूर्ण पोषण मिलता है. महुआ तेल विटामिन ई का एक अच्छा स्रोत है, जो एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है और शरीर को कई तरह के दूसरे खराब तत्वों से भी बचाता है. शरीर में जकड़न, दर्द और जोड़ों के दर्द में इसका तेल काफी उपयोगी है. इसके लगाने से सिरदर्द से राहत के साथ-साथ अनिद्रा से छुटकारा मिलता है. शरीर और चेहरे पर दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं. महुआ तेल बालों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है.

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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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