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खिलौने बनकर रह गए रोबोट; इंसानी काम से कोसों दूर:2050 तक दुनिया में 1 अरब ह्यूमनॉइड रोबोट, चीन बना लीडर, पर थमने लगी रफ्तार

खिलौने बनकर रह गए रोबोट; इंसानी काम से कोसों दूर:2050 तक दुनिया में 1 अरब ह्यूमनॉइड रोबोट, चीन बना लीडर, पर थमने लगी रफ्तार

पिछले साल ‘स्प्रिंग फेस्टिवल गाला’ में ह्यूमनॉइड रोबोट्स के डांस से प्रेरित होकर हांगझू के ई-कॉमर्स लाइव स्ट्रिमर आई लिन ने 25 लाख रुपए में पहला एंड्रॉइड खरीदा और रेंटल बिजनेस शुरू किया। 443 डॉलर/दिन के किराए पर इन्हें प्रदर्शनी, इवेंट्स के लिए लिया जाने लगा। लेकिन लिन कहते हैं, ‘ह्यूमनॉइड्स का बाजार अभी गति नहीं पकड़ पाया है क्योंकि आज के रोबोट खुद से काम नहीं कर सकते। वे सिर्फ बड़े आकार के खिलौने हैं। यह तकनीक इंसानी लेबर को रिप्लेस करने से सालों दूर है। इसके बावजूद, चीनी सरकार आर्थिक सुस्ती और सिकुड़ते वर्कफोर्स के लिए इस पर अरबों डॉलर लगा रही है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया में 1 अरब ह्यूमनॉइड रोबोट होंगे, जो 5 ट्रिलियन डॉलर से बड़ा बाजार बनाएंगे। दुनिया के लगभग 90% ह्यूमनॉइड रोबोट चीन से आ रहे हैं। साल 2024 में चीन के पास 20 लाख औद्योगिक रोबोट्स का स्टॉक था, जो जापान, अमेरिका, द. कोरिया और जर्मनी के कुल योग से अधिक है। बीजिंग, शंघाई और शेन्जेन में रोबोट ट्रैफिक कंट्रोल, कॉफी और बीयर परोस रहे हैं। ट्रेंड फोर्स के अनुसार चीन में 140 से अधिक ह्यूमनॉइड निर्माता हैं। लेकिन कम मांग से यह ‘इंडस्ट्री बबल’ बन रहा है। ओमिडिया के मुख्य विश्लेषक लियन जे सू कहते हैं, ‘चीन उभरती तकनीक में कितना मजबूत है, यह दिखाने के लिए इस उद्योग को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।’ चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, देश में 1,53,000 से अधिक रोबोट रेंटल बिजनेस सक्रिय हैं। अग्रणी निर्माता अगिबॉट ने शेयरबॉट नाम से रेंटल सब्सिडियरी शुरू की है, जिसके अनुसार यह मार्केट 2026 के अंत तक 1.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ग्राहक 517 डॉलर प्रतिदिन पर ह्यूमनॉइड रोबोट, शिपिंग और मानव ऑपरेटर पा सकते हैं। 8 रोबोट्स में निवेश करने वाली 52 वर्षीय झाओ शियाओहोंग कहती हैं, “जब तकनीक रुक जाती है और बाजार में एक जैसे रोबोट आ जाते हैं, तो शुरुआती उत्साह थकान में बदल जाता है और किराए गिरते हैं।’ डेटा और हार्डवेयर बनी सबसे बड़ी चुनौतियां, सटीकता सिर्फ 80% तक ही यिजुआंग के टेक हब में रोबोट लायन डांस करते हैं या बास्केटबॉल थ्रो करते हैं, लेकिन पास के केंद्र में 120 ह्यूमनॉइड्स को मानव ट्रेनर हाथ में रिमोट लेकर डायपर बदलना या पैकेज सॉर्ट करना सिखा रहे हैं। इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए इंसानी डेटा की भारी कमी है। चीनी निर्माता ‘फिजिकल इंटरेक्शन डेटा’ के लिए एक्स-ह्य एक्स-ह्यूमनॉइड जैसी कंपनियों को 14,180 रुपए प्रति घंटा तक चुका रहे हैं। छोटे रोबोटिक हाथों में कई फंक्शंस डालने से ‘हीट डिसिपेशन’(गर्मी निकलना) बड़ी समस्या है। इनका जीवनकाल छोटा और उत्पादन लागत अधिक है।

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