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खो रहा कागज पर लिखने का हुनर:एक्सपर्ट का मत- तेज रफ्तार जिंदगी में ठहराव-अपनापन लाता है हाथों से लिखना

खो रहा कागज पर लिखने का हुनर:एक्सपर्ट का मत- तेज रफ्तार जिंदगी में ठहराव-अपनापन लाता है हाथों से लिखना

आज की डिजिटल दुनिया में, जहां हमारे इनबॉक्स ई-मेल से भरे पड़े हैं और एआई तेजी से संदेश लिख रहा है, वहां पेन उठाकर कागज पर कुछ लिखना ‘खोया हुआ हुनर’ बन रहा है। इस तकनीकी क्रांति के बीच, हम सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उन शब्दों के साथ मिलने वाले गहरे भावनात्मक और शारीरिक फायदों को भी खो रहे हैं। सेंटर फॉर जर्नल थेरेपी की डायरेक्टर कैथलीन एडम्स कहती हैं,‘जब आप हाथ से पत्र लिखते हैं, तो सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि अपना समय और भावनाएं भी भेजते हैं। यह ‘आत्मीय और सचेत विकल्प’ है। जब आप किसी खास व्यक्ति को स्नेह या प्रशंसा जैसे सकारात्मक विचारों के बारे में लिखते हैं, तो यह हमारे मस्तिष्क को ‘फील-गुड’ न्यूरोट्रांसमीटर से भर देता है और हमारे जुड़ाव, सहानुभूति और कृतज्ञता की भावना को सक्रिय करता है।’ मनोवैज्ञानिक रेबेका स्वेंसन कहती हैं,‘आप खुद का एक हिस्सा किसी और को दे रहे होते हैं। अपने विचारों या भावनाओं को कलमबद्ध करना हमारे लिए और पाने वाले व्यक्ति के लिए बहुत सुकून देने वाला होता है।’ रेबेका के मुताबिक भावनाओं को लिखकर व्यक्त करना शरीर पर भी असर डालता है। इससे इंफ्लेमेशन कम होती है, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट घटता है। साथ ही डिप्रेशन और एंग्जायटी का स्तर भी घटता है। इससे व्यक्ति को मानसिक रूप से बेहतर महसूस होता है। शब्दों के अपनेपन को फिर से महसूस करें लेखिका लिंडसे रोथ कहती हैं,‘खास कागज, स्याही या पेन का इस्तेमाल करना भी एक यादगार अनुभव बन सकता है। जब हम किसी को सुंदर स्टेशनरी पर चिट्ठी लिखते हैं, तो वह उसे लंबे समय तक संभालकर रखता है। यह एक तरह की रस्म बन जाती है, जो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ठहराव और अपनापन लाता है। लिंडसे कहती हैं, ई-मेल में मेहनत नहीं लगती, हाथ से लिखे शब्द बताते हैं कि आप वास्तव में परवाह करते हैं।’ तो आइए… इस डिजिटल शोर में, पेन उठाएं और शब्दों के अपनेपन को फिर महसूस करें।’ कैफे दे रहा खुद को चिट्ठी लिखने का मौका लिखना शुरू करने वालों के लिए कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं। जैसे लुई वितों की ‘क्लेमेंस नोटबुक’ या एस्पिनल ऑफ लंदन की ‘रिफिलेबल लग्जरी जर्नल’ जैसी डायरी में विचार लिखना खास अनुभव बनता है। लंदन के स्टेशनरी स्टोर ‘चूजिंग कीपिंग’ में 120 से ज्यादा फाउंटेन पेन हैं। इनमें ‘एमराल्ड वाजिमा’ व ‘स्काई एंड क्लाउड्स’ डिजाइन वाले पेन लिखने के लिए प्रेरित करते हैं। पेरिस के ‘कैफे प्ली’ में चिट्ठी लिख सकते हैं, जो आप ही को 1, 5 या 20 साल बाद भेजी जाती है। इसमें स्टेशनरी, वैक्स स्टैम्प, पोस्टेज शामिल रहता है।

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खो रहा कागज पर लिखने का हुनर:एक्सपर्ट का मत- तेज रफ्तार जिंदगी में ठहराव-अपनापन लाता है हाथों से लिखना

खो रहा कागज पर लिखने का हुनर:एक्सपर्ट का मत- तेज रफ्तार जिंदगी में ठहराव-अपनापन लाता है हाथों से लिखना

आज की डिजिटल दुनिया में, जहां हमारे इनबॉक्स ई-मेल से भरे पड़े हैं और एआई तेजी से संदेश लिख रहा है, वहां पेन उठाकर कागज पर कुछ लिखना ‘खोया हुआ हुनर’ बन रहा है। इस तकनीकी क्रांति के बीच, हम सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उन शब्दों के साथ मिलने वाले गहरे भावनात्मक और शारीरिक फायदों को भी खो रहे हैं। सेंटर फॉर जर्नल थेरेपी की डायरेक्टर कैथलीन एडम्स कहती हैं,‘जब आप हाथ से पत्र लिखते हैं, तो सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि अपना समय और भावनाएं भी भेजते हैं। यह ‘आत्मीय और सचेत विकल्प’ है। जब आप किसी खास व्यक्ति को स्नेह या प्रशंसा जैसे सकारात्मक विचारों के बारे में लिखते हैं, तो यह हमारे मस्तिष्क को ‘फील-गुड’ न्यूरोट्रांसमीटर से भर देता है और हमारे जुड़ाव, सहानुभूति और कृतज्ञता की भावना को सक्रिय करता है।’ मनोवैज्ञानिक रेबेका स्वेंसन कहती हैं,‘आप खुद का एक हिस्सा किसी और को दे रहे होते हैं। अपने विचारों या भावनाओं को कलमबद्ध करना हमारे लिए और पाने वाले व्यक्ति के लिए बहुत सुकून देने वाला होता है।’ रेबेका के मुताबिक भावनाओं को लिखकर व्यक्त करना शरीर पर भी असर डालता है। इससे इंफ्लेमेशन कम होती है, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट घटता है। साथ ही डिप्रेशन और एंग्जायटी का स्तर भी घटता है। इससे व्यक्ति को मानसिक रूप से बेहतर महसूस होता है। शब्दों के अपनेपन को फिर से महसूस करें लेखिका लिंडसे रोथ कहती हैं,‘खास कागज, स्याही या पेन का इस्तेमाल करना भी एक यादगार अनुभव बन सकता है। जब हम किसी को सुंदर स्टेशनरी पर चिट्ठी लिखते हैं, तो वह उसे लंबे समय तक संभालकर रखता है। यह एक तरह की रस्म बन जाती है, जो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ठहराव और अपनापन लाता है। लिंडसे कहती हैं, ई-मेल में मेहनत नहीं लगती, हाथ से लिखे शब्द बताते हैं कि आप वास्तव में परवाह करते हैं।’ तो आइए… इस डिजिटल शोर में, पेन उठाएं और शब्दों के अपनेपन को फिर महसूस करें।’ कैफे दे रहा खुद को चिट्ठी लिखने का मौका लिखना शुरू करने वालों के लिए कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं। जैसे लुई वितों की ‘क्लेमेंस नोटबुक’ या एस्पिनल ऑफ लंदन की ‘रिफिलेबल लग्जरी जर्नल’ जैसी डायरी में विचार लिखना खास अनुभव बनता है। लंदन के स्टेशनरी स्टोर ‘चूजिंग कीपिंग’ में 120 से ज्यादा फाउंटेन पेन हैं। इनमें ‘एमराल्ड वाजिमा’ व ‘स्काई एंड क्लाउड्स’ डिजाइन वाले पेन लिखने के लिए प्रेरित करते हैं। पेरिस के ‘कैफे प्ली’ में चिट्ठी लिख सकते हैं, जो आप ही को 1, 5 या 20 साल बाद भेजी जाती है। इसमें स्टेशनरी, वैक्स स्टैम्प, पोस्टेज शामिल रहता है।

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