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जज पर एडिशनल सेशन जज के घर चोरी के आरोप:पटियाला में सिविल जज के खिलाफ 7 महीने बाद FIR, कोर्ट ने बेल रिजेक्ट की

जज पर एडिशनल सेशन जज के घर चोरी के आरोप:पटियाला में सिविल जज के खिलाफ 7 महीने बाद FIR, कोर्ट ने बेल रिजेक्ट की

पंजाब के पटियाला में सिविल जज पर एडिशनल सेशन जज के घर में चोरी करने के आरोप लगे हैं। सिविल जज के खिलाफ घटना के सात महीने बाद 21 मार्च को FIR दर्ज की गई। गिरफ्तारी से बचने के लिए सिविल जज द्वारा लगाई गई बेल भी कोर्ट ने रद्द कर दी। एडिशनल सेशन जज हरिंदर सिद्धू ने आरोपों को गंभीर मानते हुए सिविल जज की बेल को रिजेक्ट कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक मृतक सहकर्मी के आवास से संदिग्ध परिस्थितियों में भारी मात्रा में सोना और अभूषण निकालना गंभीर आरोप है। पटियाला के एडिशनल सेशन जज कंवलजीत सिंह की एक अगस्त 2025 को अस्पताल में मौत हो गई थी। सिविल जज विक्रमदीप और अन्य लोगों पर आरोप है कि उसी दिन रात को उन्होंने एडिशनल सेशन जज के घर से सोना व आभूषण चोरी किए। सीसीटीवी फुटेज और वाट्सएप चैट के टाइम में अंतर सुनवाई के दौरान अदालत ने नोट किया कि विक्रमदीप और मृतक के बेटे अंगदपाल सिंह के बीच वाट्सऐप चैट और कॉल रात 10:15 बजे के बाद की है, जबकि CCTV फुटेज रात 9:50 बजे तक के हैं। इससे प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि सामान मृतक के बेटे से संपर्क करने से पहले ही हटा लिया गया था। एडिशनल सेशन जज के दोस्त की शिकायत पर हुई FIR सिविल जज व उसके सहयोगियों के खिलाफ मृतक एडिशनल सेशन जज के दोस्त व पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ भूपिंदर सिंह विर्क की शिकायत पर 21 मार्च को FIR दर्ज हुई। उनके बेटे ने इस केस को प्रोसीड करने के लिए डॉ भूपिंदर सिंह विर्क को पावर ऑफ अटॉर्नी दी है। शिकायत में लगाए गए ये आरोप FIR के अनुसार, 1 अगस्त 2025 को जब कंवलजीत सिंह का अमर अस्पताल पटियाला में निधन हो गया, उसी रात लगभग 8:46 बजे बिक्रमदीप सिंह ने मृतक के घर नंबर 74C, विकास कॉलोनी, पटियाला में साजिश रचकर घुसपैठ की। उनके साथ घरेलू नौकरानी अमरजोत कौर उर्फ पिंकी, गौरव गोयल (पूर्व सहयोगी) और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल थे। CCTV फुटेज में तीनों को घर में घुसते, सामान की तलाशी लेते और बॉक्स-बैग में पैतृक सोना, आभूषण तथा नकदी लेकर निकलते दिखाया गया है। शिकायतकर्ता डॉ. भूपिंदर सिंह विर्क ने आरोप लगाया कि यह चोरी बिना किसी कानूनी अधिकार के और बेईमानी के इरादे से की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) और 305 के तहत दर्ज है। आरोपों पर आरोपी के वकीलों ने दे यह सफाई बिक्रमदीप सिंह की ओर से वकीलों अनीश जैन और अमित जैन ने अदालत में कहा FIR पूरी तरह झूठी और बदनाम करने के मकसद से 7 महीने बाद दर्ज कराई गई। मृतक कंवलजीत सिंह से पारिवारिक संबंध थे। लुधियाना में एक साथ पोस्टिंग के दौरान मृतक उन्हें परिवार का सदस्य मानते थे।
उनकेनिधन की खबर मिलते ही अस्पताल पहुंचे। वहां मृतक के पुत्र अंगदपाल सिंह ने फोन पर अनुरोध किया कि घर जाकर कीमती सामान सुरक्षित रख लें। भरोसेमंद नौकरानी पिंकी भी मदद करेगी। घर पहुंचकर अंगदपाल सिंह को वीडियो कॉल की और पूरे समय संपर्क में रहे। बाद में सामान अंगदपाल सिंह को सौंप दिया।
अदालत को बताया कि अगर बेईमानी का इरादा होता तो खुद न जाते, गनमैन के साथ न जाते, कॉल पर न रहते और CCTV DVR भी ले जाते। वे न्यायिक अधिकारी हैं, पिता-दादा भी जज रह चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों (दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन केस) का हवाला देते हुए विशेष संरक्षण की मांग की। जांच में शामिल होने को तैयार हैं। कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत, जानिए…
अदालत ने जांच रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, व्हाट्सएप चैट और दोनों पुत्रों के बयान देखने के बाद याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं। एक न्यायिक अधिकारी पर सहकर्मी जज के घर से चोरी का आरोप है, जो न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करता है।
CCTV फुटेज में याचिकाकर्ता की उपस्थिति और सामान निकालने का तरीका प्रथम दृष्टया गुप्त और संदिग्ध दिखता है। मृतक के बेटे से व्हाट्सएप चैट और कॉल का समय रात 10:15 बजे के बाद का है, जबकि CCTV फुटेज में सामान 9:50 बजे तक निकाल लिया गया था यानी संपर्क बाद में हुआ।
सिविल जज की तरफ से पेश की गई चैट में किसी भी प्रकार की अनुमति या सौंपने का जिक्र नहीं है। पुत्रों के बयान भी याचिकाकर्ता के दावे का खंडन करते हैं। चोरी गई संपत्ति की रिकवरी अभी बाकी है। हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि पूरी साजिश का खुलासा हो।
न्यायिक अधिकारियों को गिरफ्तारी से पूर्ण छूट नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित होगी।अदालत ने साफ कहा कि यह फैसला केवल जमानत याचिका पर है और मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं। बिक्रमदीप सिंह अब नियमित जमानत या अन्य राहत के लिए उच्च न्यायालय जा सकते हैं।

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जज पर एडिशनल सेशन जज के घर चोरी के आरोप:पटियाला में सिविल जज के खिलाफ 7 महीने बाद FIR, कोर्ट ने बेल रिजेक्ट की

पंजाब के पटियाला में सिविल जज पर एडिशनल सेशन जज के घर में चोरी करने के आरोप लगे हैं। सिविल जज के खिलाफ घटना के सात महीने बाद 21 मार्च को FIR दर्ज की गई। गिरफ्तारी से बचने के लिए सिविल जज द्वारा लगाई गई बेल भी कोर्ट ने रद्द कर दी। एडिशनल सेशन जज हरिंदर सिद्धू ने आरोपों को गंभीर मानते हुए सिविल जज की बेल को रिजेक्ट कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक मृतक सहकर्मी के आवास से संदिग्ध परिस्थितियों में भारी मात्रा में सोना और अभूषण निकालना गंभीर आरोप है। पटियाला के एडिशनल सेशन जज कंवलजीत सिंह की एक अगस्त 2025 को अस्पताल में मौत हो गई थी। सिविल जज विक्रमदीप और अन्य लोगों पर आरोप है कि उसी दिन रात को उन्होंने एडिशनल सेशन जज के घर से सोना व आभूषण चोरी किए। सीसीटीवी फुटेज और वाट्सएप चैट के टाइम में अंतर सुनवाई के दौरान अदालत ने नोट किया कि विक्रमदीप और मृतक के बेटे अंगदपाल सिंह के बीच वाट्सऐप चैट और कॉल रात 10:15 बजे के बाद की है, जबकि CCTV फुटेज रात 9:50 बजे तक के हैं। इससे प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि सामान मृतक के बेटे से संपर्क करने से पहले ही हटा लिया गया था। एडिशनल सेशन जज के दोस्त की शिकायत पर हुई FIR सिविल जज व उसके सहयोगियों के खिलाफ मृतक एडिशनल सेशन जज के दोस्त व पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ भूपिंदर सिंह विर्क की शिकायत पर 21 मार्च को FIR दर्ज हुई। उनके बेटे ने इस केस को प्रोसीड करने के लिए डॉ भूपिंदर सिंह विर्क को पावर ऑफ अटॉर्नी दी है। शिकायत में लगाए गए ये आरोप FIR के अनुसार, 1 अगस्त 2025 को जब कंवलजीत सिंह का अमर अस्पताल पटियाला में निधन हो गया, उसी रात लगभग 8:46 बजे बिक्रमदीप सिंह ने मृतक के घर नंबर 74C, विकास कॉलोनी, पटियाला में साजिश रचकर घुसपैठ की। उनके साथ घरेलू नौकरानी अमरजोत कौर उर्फ पिंकी, गौरव गोयल (पूर्व सहयोगी) और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल थे। CCTV फुटेज में तीनों को घर में घुसते, सामान की तलाशी लेते और बॉक्स-बैग में पैतृक सोना, आभूषण तथा नकदी लेकर निकलते दिखाया गया है। शिकायतकर्ता डॉ. भूपिंदर सिंह विर्क ने आरोप लगाया कि यह चोरी बिना किसी कानूनी अधिकार के और बेईमानी के इरादे से की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) और 305 के तहत दर्ज है। आरोपों पर आरोपी के वकीलों ने दे यह सफाई बिक्रमदीप सिंह की ओर से वकीलों अनीश जैन और अमित जैन ने अदालत में कहा FIR पूरी तरह झूठी और बदनाम करने के मकसद से 7 महीने बाद दर्ज कराई गई। मृतक कंवलजीत सिंह से पारिवारिक संबंध थे। लुधियाना में एक साथ पोस्टिंग के दौरान मृतक उन्हें परिवार का सदस्य मानते थे।
उनकेनिधन की खबर मिलते ही अस्पताल पहुंचे। वहां मृतक के पुत्र अंगदपाल सिंह ने फोन पर अनुरोध किया कि घर जाकर कीमती सामान सुरक्षित रख लें। भरोसेमंद नौकरानी पिंकी भी मदद करेगी। घर पहुंचकर अंगदपाल सिंह को वीडियो कॉल की और पूरे समय संपर्क में रहे। बाद में सामान अंगदपाल सिंह को सौंप दिया।
अदालत को बताया कि अगर बेईमानी का इरादा होता तो खुद न जाते, गनमैन के साथ न जाते, कॉल पर न रहते और CCTV DVR भी ले जाते। वे न्यायिक अधिकारी हैं, पिता-दादा भी जज रह चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों (दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन केस) का हवाला देते हुए विशेष संरक्षण की मांग की। जांच में शामिल होने को तैयार हैं। कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत, जानिए…
अदालत ने जांच रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, व्हाट्सएप चैट और दोनों पुत्रों के बयान देखने के बाद याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं। एक न्यायिक अधिकारी पर सहकर्मी जज के घर से चोरी का आरोप है, जो न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करता है।
CCTV फुटेज में याचिकाकर्ता की उपस्थिति और सामान निकालने का तरीका प्रथम दृष्टया गुप्त और संदिग्ध दिखता है। मृतक के बेटे से व्हाट्सएप चैट और कॉल का समय रात 10:15 बजे के बाद का है, जबकि CCTV फुटेज में सामान 9:50 बजे तक निकाल लिया गया था यानी संपर्क बाद में हुआ।
सिविल जज की तरफ से पेश की गई चैट में किसी भी प्रकार की अनुमति या सौंपने का जिक्र नहीं है। पुत्रों के बयान भी याचिकाकर्ता के दावे का खंडन करते हैं। चोरी गई संपत्ति की रिकवरी अभी बाकी है। हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि पूरी साजिश का खुलासा हो।
न्यायिक अधिकारियों को गिरफ्तारी से पूर्ण छूट नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित होगी।अदालत ने साफ कहा कि यह फैसला केवल जमानत याचिका पर है और मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं। बिक्रमदीप सिंह अब नियमित जमानत या अन्य राहत के लिए उच्च न्यायालय जा सकते हैं।

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