Monday, 25 May 2026 | 09:41 AM

Trending :

EXCLUSIVE

जेपी अस्पताल विवाद पर डिप्टी सीएम सख्त:सीएमएचओ से रिपोर्ट तलब; तीन साल से बंद प्रसव सुविधा, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

जेपी अस्पताल विवाद पर डिप्टी सीएम सख्त:सीएमएचओ से रिपोर्ट तलब; तीन साल से बंद प्रसव सुविधा, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

भोपाल के जेपी अस्पताल में तीन साल से बंद प्रसव सुविधा का मामला अब सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सीएमएचओ से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी है। कर्मचारियों और संगठनों द्वारा लगातार लिखे गए पत्रों और हाल ही में सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन द्वारा लोक स्वस्थय एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्र के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जिला अस्पताल में प्रसव (डिलीवरी) बंद होने से मरीजों और मेडिकल शिक्षा दोनों पर असर पड़ रहा है, जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। मामला सामने आने के बाद डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने सीएमएचओ से पूरी जानकारी तलब की है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर पूरे प्रकरण की समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी, जिससे अब इस लंबे समय से लंबित विवाद पर फैसला होने की उम्मीद बढ़ गई है। तीन साल पहले बंद हुई प्रसव सुविधा जेपी अस्पताल, जिसे प्रदेश का मॉडल जिला अस्पताल माना जाता है, वहां वर्ष 2022 में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग और शिशु रोग विभाग को यहां से हटाकर काटजू सिविल अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से जेपी अस्पताल में प्रसव सुविधा पूरी तरह बंद हो गई। यही निर्णय विवाद की जड़ बना। खास बात यह है कि जिला अस्पताल होने के बावजूद यहां प्रसव सुविधा का बंद होना आईपीएचएस गाइडलाइन के भी विपरीत माना जा रहा है। कर्मचारियों और संगठनों के पत्र, फिर भी नहीं हुई सुनवाई इस फैसले के बाद जेपी अस्पताल के कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने कई बार पत्र लिखकर इस निर्णय को निरस्त करने की मांग की। इन पत्रों में अस्पताल की उपयोगिता, मरीजों की परेशानी और नियमों का हवाला दिया गया, लेकिन विभाग स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लगातार पत्राचार के बावजूद कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में असंतोष भी बढ़ा है। सिविल सर्जन का पत्र: एमएलसी और मरीजों पर असर हाल ही में सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने आयुक्त स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता बताई है। उन्होंने उल्लेख किया कि 39 में से 37 थानों के एमएलसी केस जेपी अस्पताल में ही आते हैं, लेकिन यहां केवल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। डॉक्टर के अवकाश पर रहने की स्थिति में एमएलसी तक नहीं हो पाती। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और रेप पीड़िताओं को समय पर इलाज और सोनोग्राफी नहीं मिल पा रही है, जिससे कई मामलों में जोखिम बढ़ रहा है। रोज 50 से ज्यादा मरीज, फिर भी सुविधा नहीं जेपी अस्पताल में आज भी रोजाना 50 से अधिक महिलाएं जांच के लिए पहुंचती हैं। लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में उन्हें काटजू अस्पताल रेफर करना पड़ता है। इस दौरान देरी होने से कई मामलों में मरीजों की हालत बिगड़ने का खतरा रहता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। पहले 30 डिलीवरी रोज, अब संसाधन बेकार पहले जेपी अस्पताल में रोजाना करीब 30 डिलीवरी होती थीं और 150 बिस्तरों का स्त्री एवं प्रसूति विभाग संचालित था। शिशु रोग विभाग में भी 60 बेड की सुविधा थी। वर्तमान में ये संसाधन मौजूद होने के बावजूद उपयोग नहीं हो पा रहे हैं, जिससे अस्पताल की क्षमता प्रभावित हो रही है। काटजू अस्पताल पर बढ़ा दबाव, सीमित क्षमता दूसरी ओर काटजू अस्पताल में मेटरनल एंड चाइल्ड केयर यूनिट विकसित की गई है, लेकिन वहां प्रतिदिन केवल 20 डिलीवरी ही हो पा रही हैं। 300 बेड की योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं की कमी भी सामने आई है। ऐसे में पूरा दबाव वहां शिफ्ट होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है। डीएनबी सीटों और मेडिकल शिक्षा पर असर जेपी अस्पताल में डीएनबी के कोर्स भी प्रभावित हो रहे हैं। गायनेकोलॉजी विभाग के मास्टर ट्रेनर के ट्रांसफर के बाद छात्रों की ट्रेनिंग बाधित है। एनएचएम ने छात्रों को काटजू अस्पताल भेजने का सुझाव दिया, लेकिन सिविल सर्जन ने इससे इंकार कर दिया। इससे मेडिकल स्टूडेंट्स का भविष्य प्रभावित हो रहा है और उनकी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग अधूरी रह रही है। गाइडलाइन का उल्लंघन और योजनाओं पर असर आईपीएचएस गाइडलाइन के अनुसार जिला अस्पताल में कम से कम 30 बेड का गायनी विभाग होना जरूरी है, लेकिन जेपी अस्पताल में यह सुविधा बंद है। इससे लक्ष्य योजना की प्रोत्साहन राशि भी बंद हो गई है और शिशु रोग विभाग के शिफ्ट होने से मुस्कान कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ है। सीएमएचओ बोले- जल्द होगा फैसला सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने भी माना कि जिला अस्पताल में गायनी विंग होना जरूरी है और इसे दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। डिप्टी सीएम के हस्तक्षेप के बाद अब इस मुद्दे पर जल्द ठोस निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे मरीजों और मेडिकल स्टूडेंट्स दोनों को राहत मिल सकती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर डामर पिघला:जिले में तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस पहुंचा; अस्पतालों में बनी हीट स्ट्रोक यूनिट

April 28, 2026/
12:29 pm

सीहोर जिले में भीषण गर्मी और राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं के कारण अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस तक...

नासिक की IT-कंपनी में लड़कियों के यौन शोषण-धर्मांतरण का मामला:6 मुस्लिम टीम लीडर, HR मैनेजर अरेस्ट; हिंदू संगठन का कंपनी कैंपस में हंगामा

April 10, 2026/
3:45 pm

नासिक की मल्टीनेशनल IT कंपनी में हिंदू महिला कर्मचारियों का यौन शोषण और ऑफिस में जबरन नमाज पढ़ने, हिंदू देवी-देवताओं...

‘वाराणसी’ के लिए राजामौली ने रची विशाल सिनेमाई दुनिया:रत्नेश्वर मंदिर से घाटों तक 6 एकड़ में बना 'काशी', बारीक डिटेलिंग के साथ बनवाए सेट

March 27, 2026/
5:40 pm

डायरेक्टर एसएस राजामौली एक बार फिर अपने भव्य विजन के साथ बड़े परदे पर नया इतिहास रचने की तैयारी में...

Gold Silver Prices Surge | India

March 30, 2026/
12:27 pm

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 30 मार्च को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड...

पालकी में बैठ बाल स्वरूप में निकले भगवान परशुराम:सागर में वाराणसी के कलाकारों ने दी शिव तांडव की प्रस्तुति, आतिशबाजी से स्वागत

April 20, 2026/
9:40 pm

सागर के रामबाग मंदिर से तीनबत्ती तक जय श्रीराम-जय परशुराम के जयकारों के बीच, डीजे की गूंज पर झूमते भक्तों...

मोनालिसा के को-एक्टर बोले- डायरेक्टर सनोज मिश्रा को फंसाया गया:कहा- एक्ट्रेस छेड़छाड़ के आरोप झूठे, सेट पर मस्ती करने वाली मोनालिसा पीड़ित कैसे

March 31, 2026/
6:38 pm

एक्ट्रेस मोनालिसा भोंसले और फरमान खान की शादी का मामला अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आपसी बयानों में उलझ गया...

राजनीति

जेपी अस्पताल विवाद पर डिप्टी सीएम सख्त:सीएमएचओ से रिपोर्ट तलब; तीन साल से बंद प्रसव सुविधा, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

जेपी अस्पताल विवाद पर डिप्टी सीएम सख्त:सीएमएचओ से रिपोर्ट तलब; तीन साल से बंद प्रसव सुविधा, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

भोपाल के जेपी अस्पताल में तीन साल से बंद प्रसव सुविधा का मामला अब सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सीएमएचओ से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह में मांगी है। कर्मचारियों और संगठनों द्वारा लगातार लिखे गए पत्रों और हाल ही में सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन द्वारा लोक स्वस्थय एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्र के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जिला अस्पताल में प्रसव (डिलीवरी) बंद होने से मरीजों और मेडिकल शिक्षा दोनों पर असर पड़ रहा है, जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। मामला सामने आने के बाद डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने सीएमएचओ से पूरी जानकारी तलब की है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर पूरे प्रकरण की समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी, जिससे अब इस लंबे समय से लंबित विवाद पर फैसला होने की उम्मीद बढ़ गई है। तीन साल पहले बंद हुई प्रसव सुविधा जेपी अस्पताल, जिसे प्रदेश का मॉडल जिला अस्पताल माना जाता है, वहां वर्ष 2022 में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग और शिशु रोग विभाग को यहां से हटाकर काटजू सिविल अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से जेपी अस्पताल में प्रसव सुविधा पूरी तरह बंद हो गई। यही निर्णय विवाद की जड़ बना। खास बात यह है कि जिला अस्पताल होने के बावजूद यहां प्रसव सुविधा का बंद होना आईपीएचएस गाइडलाइन के भी विपरीत माना जा रहा है। कर्मचारियों और संगठनों के पत्र, फिर भी नहीं हुई सुनवाई इस फैसले के बाद जेपी अस्पताल के कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने कई बार पत्र लिखकर इस निर्णय को निरस्त करने की मांग की। इन पत्रों में अस्पताल की उपयोगिता, मरीजों की परेशानी और नियमों का हवाला दिया गया, लेकिन विभाग स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लगातार पत्राचार के बावजूद कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में असंतोष भी बढ़ा है। सिविल सर्जन का पत्र: एमएलसी और मरीजों पर असर हाल ही में सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने आयुक्त स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता बताई है। उन्होंने उल्लेख किया कि 39 में से 37 थानों के एमएलसी केस जेपी अस्पताल में ही आते हैं, लेकिन यहां केवल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। डॉक्टर के अवकाश पर रहने की स्थिति में एमएलसी तक नहीं हो पाती। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और रेप पीड़िताओं को समय पर इलाज और सोनोग्राफी नहीं मिल पा रही है, जिससे कई मामलों में जोखिम बढ़ रहा है। रोज 50 से ज्यादा मरीज, फिर भी सुविधा नहीं जेपी अस्पताल में आज भी रोजाना 50 से अधिक महिलाएं जांच के लिए पहुंचती हैं। लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में उन्हें काटजू अस्पताल रेफर करना पड़ता है। इस दौरान देरी होने से कई मामलों में मरीजों की हालत बिगड़ने का खतरा रहता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। पहले 30 डिलीवरी रोज, अब संसाधन बेकार पहले जेपी अस्पताल में रोजाना करीब 30 डिलीवरी होती थीं और 150 बिस्तरों का स्त्री एवं प्रसूति विभाग संचालित था। शिशु रोग विभाग में भी 60 बेड की सुविधा थी। वर्तमान में ये संसाधन मौजूद होने के बावजूद उपयोग नहीं हो पा रहे हैं, जिससे अस्पताल की क्षमता प्रभावित हो रही है। काटजू अस्पताल पर बढ़ा दबाव, सीमित क्षमता दूसरी ओर काटजू अस्पताल में मेटरनल एंड चाइल्ड केयर यूनिट विकसित की गई है, लेकिन वहां प्रतिदिन केवल 20 डिलीवरी ही हो पा रही हैं। 300 बेड की योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं की कमी भी सामने आई है। ऐसे में पूरा दबाव वहां शिफ्ट होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है। डीएनबी सीटों और मेडिकल शिक्षा पर असर जेपी अस्पताल में डीएनबी के कोर्स भी प्रभावित हो रहे हैं। गायनेकोलॉजी विभाग के मास्टर ट्रेनर के ट्रांसफर के बाद छात्रों की ट्रेनिंग बाधित है। एनएचएम ने छात्रों को काटजू अस्पताल भेजने का सुझाव दिया, लेकिन सिविल सर्जन ने इससे इंकार कर दिया। इससे मेडिकल स्टूडेंट्स का भविष्य प्रभावित हो रहा है और उनकी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग अधूरी रह रही है। गाइडलाइन का उल्लंघन और योजनाओं पर असर आईपीएचएस गाइडलाइन के अनुसार जिला अस्पताल में कम से कम 30 बेड का गायनी विभाग होना जरूरी है, लेकिन जेपी अस्पताल में यह सुविधा बंद है। इससे लक्ष्य योजना की प्रोत्साहन राशि भी बंद हो गई है और शिशु रोग विभाग के शिफ्ट होने से मुस्कान कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ है। सीएमएचओ बोले- जल्द होगा फैसला सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने भी माना कि जिला अस्पताल में गायनी विंग होना जरूरी है और इसे दोबारा शुरू किया जाना चाहिए। डिप्टी सीएम के हस्तक्षेप के बाद अब इस मुद्दे पर जल्द ठोस निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे मरीजों और मेडिकल स्टूडेंट्स दोनों को राहत मिल सकती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.