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Jharkhand Student Protest Success | BPSC Teacher Recruitment Update टॉक्सिक एक्ट्रेस रुक्मिणी के पिता को मिला था अशोक चक्र:कर्नल वसंत वेणुगोपाल उरी में आठ आतंकियों से लड़े थे, परिवार ने सेवा परंपरा जारी रखी टॉक्सिक एक्ट्रेस रुक्मिणी के पिता को मिला था अशोक चक्र:कर्नल वसंत वेणुगोपाल उरी में आठ आतंकियों से लड़े थे, परिवार ने सेवा परंपरा जारी रखी राखी पर रामदेव ने कंगना के लिए भेजी मिठाइयां-रुपए:बोले- विवाद खत्म करें; कंगना ने कहा था- बाबा मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका पाकिस्तान में गुरुद्वारा गिराया, मॉल बनाने की तैयारी:बलूचिस्तान में 200 साल पहले बना था, BJP बोली- सिखों की विरासत खत्म करने की कोशिश Amaal Mallik Announces Break From Music Industry
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टॉक्सिक एक्ट्रेस रुक्मिणी के पिता को मिला था अशोक चक्र:कर्नल वसंत वेणुगोपाल उरी में आठ आतंकियों से लड़े थे, परिवार ने सेवा परंपरा जारी रखी

टॉक्सिक एक्ट्रेस रुक्मिणी के पिता को मिला था अशोक चक्र:कर्नल वसंत वेणुगोपाल उरी में आठ आतंकियों से लड़े थे, परिवार ने सेवा परंपरा जारी रखी

एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत इन दिनों यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म से अलग रुक्मिणी की जिंदगी की कहानी भी प्रेरणादायक है। जब वह सिर्फ 10 साल की थीं, तब उनके पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल जम्मू-कश्मीर के उरी में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। बताया जाता है कि ऑपरेशन में करीब 8 आतंकवादी शामिल थे। कर्नल वसंत ने आतंकियों का बहादुरी से मुकाबला किया और बाद में उन्हें देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी और बेटियों ने भी सैनिक परिवारों की मदद का काम आगे बढ़ाया। कौन थे कर्नल वसंत वेणुगोपाल? रुक्मिणी वसंत के पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल भारतीय सेना में अधिकारी थे। वह 9वीं बटालियन, मराठा लाइट इन्फैंट्री के कमांडिंग ऑफिसर थे। 31 जुलाई 2007 को वह जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। आतंकियों का एक समूह लाइन ऑफ कंट्रोल के रास्ते भारत में घुसने की कोशिश कर रहा था। रुक्मिणी ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि इस ऑपरेशन में करीब 8 आतंकवादी शामिल थे। सेना ने सभी आतंकियों को मार गिराया, लेकिन मुठभेड़ में कर्नल वसंत और उनके रेडियो ऑपरेटर की शहादत हो गई। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। रुक्मिणी के मुताबिक, कर्नल वसंत कर्नाटक से अशोक चक्र पाने वाले पहले सेना अधिकारी थे। बेटी के लिए पिता थे बेहद खास रुक्मिणी ने अपने पिता को याद करते हुए कई मौकों पर उनके बारे में बात की है। उन्होंने बताया कि पिता बेहद प्यार करने वाले इंसान थे, लेकिन एक सैनिक के तौर पर भी पूरी तरह समर्पित थे। कर्नल वसंत का मानना था कि एक अधिकारी को अपने जवानों का नेतृत्व सबसे आगे रहकर करना चाहिए। इसी सोच के साथ वह ऑपरेशन में भी अपनी टीम का नेतृत्व करते थे। रुक्मिणी उस समय महज 10 साल की थीं। इतनी कम उम्र में पिता को खोने का उनके जीवन पर गहरा असर पड़ा। उन्होंने बताया है कि बचपन में हुई इस घटना की हर बात उन्हें याद नहीं है, लेकिन पिता की यादें आज भी उनके साथ हैं। पति की शहादत के बाद अकेले बेटियों को पाला कर्नल वसंत की शहादत के बाद उनकी पत्नी सुभाषिनी वसंत के सामने दो बेटियों की जिम्मेदारी आ गई। सुभाषिनी भरतनाट्यम डांसर हैं। पति की शहादत के करीब छह महीने बाद उन्होंने ‘वसंतरत्न फाउंडेशन फॉर आर्ट’ की शुरुआत की। इसका उद्देश्य शहीद सैनिकों के परिवारों और उनकी विधवाओं की मदद करना है। रुक्मिणी ने बताया था कि उनके पिता शहीद सैनिकों के परिवारों से लगातार मिलते थे। वह उनके घर जाते, परिवार के साथ समय बिताते और उनकी परेशानियों को समझने की कोशिश करते थे। कई बार सुभाषिनी भी उनके साथ जाती थीं। पिता की मौत के बाद सुभाषिनी ने इसी काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। अशोक चक्र के बाद मुआवजे के लिए भी करना पड़ा संघर्ष कर्नल वसंत की शहादत के बाद परिवार को एक और संघर्ष से गुजरना पड़ा। अशोक चक्र विजेता के परिवार को मुआवजे के तौर पर जमीन देने का प्रावधान था, लेकिन इसे हासिल करने के लिए सुभाषिनी को कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। 1971 के कर्नाटक सरकार के आदेश के तहत अशोक चक्र प्राप्त करने वाले व्यक्ति के परिवार को 1.25 लाख रुपए या दो एकड़ सिंचित जमीन देने का प्रावधान था। कई साल बाद सुभाषिनी ने इस नियम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में यह राशि बेहद कम थी और नियम में बदलाव की जरूरत थी। 2016 में ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि अपने अधिकार के लिए सरकारी अधिकारियों के पास बार-बार जाना उनके लिए बेहद मुश्किल अनुभव था। पिता की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं रुक्मिणी कर्नल वसंत की शहादत के बाद उनके परिवार ने सैनिकों और उनके परिवारों की मदद का काम जारी रखा। वहीं रुक्मिणी ने एक्टिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज वह कन्नड़ सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं और यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में नजर आ रही हैं। रुक्मिणी की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री के संघर्ष और सफलता की नहीं है। इसके पीछे एक शहीद पिता की विरासत, मां की जिम्मेदारी और सैनिक परिवारों की मदद करने की सोच भी है, जिसे उनका परिवार आज तक आगे बढ़ा रहा है।_ ________________________________ यह खबर भी पढ़ें.. बॉक्स ऑफिस कलेक्शन- टॉक्सिक की कमाई में 64% गिरावट:नेगेटिव रिव्यू का असर, पहले दिन से तीन गुना कम कमाई हुई, वर्ल्डवाइड कलेक्शन 137 करोड़ रुपए कन्नड़ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक पर नेगेटिव रिव्यू और रेटिंग का बुरा असर पड़ा है। पहले दिन दर्शक बड़ी संख्या में ये फिल्म देखने पहुंचे और भारत में फिल्म ने करीब 101 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया। हालांकि खराब रिव्यू के चलते दूसरे दिन ही फिल्म की कमाई में 64% गिरावट आ गई। फिल्म ने पहले दिन के मुकाबले तीन गुना कम कमाई की है।पूरी खबर पढ़ें..

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टॉक्सिक एक्ट्रेस रुक्मिणी के पिता को मिला था अशोक चक्र:कर्नल वसंत वेणुगोपाल उरी में आठ आतंकियों से लड़े थे, परिवार ने सेवा परंपरा जारी रखी

टॉक्सिक एक्ट्रेस रुक्मिणी के पिता को मिला था अशोक चक्र:कर्नल वसंत वेणुगोपाल उरी में आठ आतंकियों से लड़े थे, परिवार ने सेवा परंपरा जारी रखी

एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत इन दिनों यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म से अलग रुक्मिणी की जिंदगी की कहानी भी प्रेरणादायक है। जब वह सिर्फ 10 साल की थीं, तब उनके पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल जम्मू-कश्मीर के उरी में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। बताया जाता है कि ऑपरेशन में करीब 8 आतंकवादी शामिल थे। कर्नल वसंत ने आतंकियों का बहादुरी से मुकाबला किया और बाद में उन्हें देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी और बेटियों ने भी सैनिक परिवारों की मदद का काम आगे बढ़ाया। कौन थे कर्नल वसंत वेणुगोपाल? रुक्मिणी वसंत के पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल भारतीय सेना में अधिकारी थे। वह 9वीं बटालियन, मराठा लाइट इन्फैंट्री के कमांडिंग ऑफिसर थे। 31 जुलाई 2007 को वह जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। आतंकियों का एक समूह लाइन ऑफ कंट्रोल के रास्ते भारत में घुसने की कोशिश कर रहा था। रुक्मिणी ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि इस ऑपरेशन में करीब 8 आतंकवादी शामिल थे। सेना ने सभी आतंकियों को मार गिराया, लेकिन मुठभेड़ में कर्नल वसंत और उनके रेडियो ऑपरेटर की शहादत हो गई। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। रुक्मिणी के मुताबिक, कर्नल वसंत कर्नाटक से अशोक चक्र पाने वाले पहले सेना अधिकारी थे। बेटी के लिए पिता थे बेहद खास रुक्मिणी ने अपने पिता को याद करते हुए कई मौकों पर उनके बारे में बात की है। उन्होंने बताया कि पिता बेहद प्यार करने वाले इंसान थे, लेकिन एक सैनिक के तौर पर भी पूरी तरह समर्पित थे। कर्नल वसंत का मानना था कि एक अधिकारी को अपने जवानों का नेतृत्व सबसे आगे रहकर करना चाहिए। इसी सोच के साथ वह ऑपरेशन में भी अपनी टीम का नेतृत्व करते थे। रुक्मिणी उस समय महज 10 साल की थीं। इतनी कम उम्र में पिता को खोने का उनके जीवन पर गहरा असर पड़ा। उन्होंने बताया है कि बचपन में हुई इस घटना की हर बात उन्हें याद नहीं है, लेकिन पिता की यादें आज भी उनके साथ हैं। पति की शहादत के बाद अकेले बेटियों को पाला कर्नल वसंत की शहादत के बाद उनकी पत्नी सुभाषिनी वसंत के सामने दो बेटियों की जिम्मेदारी आ गई। सुभाषिनी भरतनाट्यम डांसर हैं। पति की शहादत के करीब छह महीने बाद उन्होंने ‘वसंतरत्न फाउंडेशन फॉर आर्ट’ की शुरुआत की। इसका उद्देश्य शहीद सैनिकों के परिवारों और उनकी विधवाओं की मदद करना है। रुक्मिणी ने बताया था कि उनके पिता शहीद सैनिकों के परिवारों से लगातार मिलते थे। वह उनके घर जाते, परिवार के साथ समय बिताते और उनकी परेशानियों को समझने की कोशिश करते थे। कई बार सुभाषिनी भी उनके साथ जाती थीं। पिता की मौत के बाद सुभाषिनी ने इसी काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। अशोक चक्र के बाद मुआवजे के लिए भी करना पड़ा संघर्ष कर्नल वसंत की शहादत के बाद परिवार को एक और संघर्ष से गुजरना पड़ा। अशोक चक्र विजेता के परिवार को मुआवजे के तौर पर जमीन देने का प्रावधान था, लेकिन इसे हासिल करने के लिए सुभाषिनी को कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। 1971 के कर्नाटक सरकार के आदेश के तहत अशोक चक्र प्राप्त करने वाले व्यक्ति के परिवार को 1.25 लाख रुपए या दो एकड़ सिंचित जमीन देने का प्रावधान था। कई साल बाद सुभाषिनी ने इस नियम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में यह राशि बेहद कम थी और नियम में बदलाव की जरूरत थी। 2016 में ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि अपने अधिकार के लिए सरकारी अधिकारियों के पास बार-बार जाना उनके लिए बेहद मुश्किल अनुभव था। पिता की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं रुक्मिणी कर्नल वसंत की शहादत के बाद उनके परिवार ने सैनिकों और उनके परिवारों की मदद का काम जारी रखा। वहीं रुक्मिणी ने एक्टिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज वह कन्नड़ सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं और यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में नजर आ रही हैं। रुक्मिणी की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री के संघर्ष और सफलता की नहीं है। इसके पीछे एक शहीद पिता की विरासत, मां की जिम्मेदारी और सैनिक परिवारों की मदद करने की सोच भी है, जिसे उनका परिवार आज तक आगे बढ़ा रहा है।_ ________________________________ यह खबर भी पढ़ें.. बॉक्स ऑफिस कलेक्शन- टॉक्सिक की कमाई में 64% गिरावट:नेगेटिव रिव्यू का असर, पहले दिन से तीन गुना कम कमाई हुई, वर्ल्डवाइड कलेक्शन 137 करोड़ रुपए कन्नड़ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक पर नेगेटिव रिव्यू और रेटिंग का बुरा असर पड़ा है। पहले दिन दर्शक बड़ी संख्या में ये फिल्म देखने पहुंचे और भारत में फिल्म ने करीब 101 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया। हालांकि खराब रिव्यू के चलते दूसरे दिन ही फिल्म की कमाई में 64% गिरावट आ गई। फिल्म ने पहले दिन के मुकाबले तीन गुना कम कमाई की है।पूरी खबर पढ़ें..

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