Sunday, 14 Jun 2026 | 01:00 AM

Trending :

कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षा: आपकी आँखों में कांटेक्ट लेंस क्या हैं? जान लें कि इसे काफी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है क्रिकेटर ऋषभ पंत ने किए आदि कैलाश के दर्शन:आईटीबीपी जवानों के साथ मिलकर बढ़ाया हौसला, स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं ‘जड़ी-मजबूत की रानी’ पद्मश्री यानुंग जामोह मूंग दाल टिक्की रेसिपी: समोसा-पकौड़ा से भर गया मन, तो कम तेल में बनी टोकरी और कुरकुरी मूंग दाल टिक्की; विधि नोट करें
EXCLUSIVE

मैक्स साकेत में डॉक्टरों ने ईराकी मरीज की आंख से कैंसर हटाया

authorimg

Last Updated:

मैक्स साकेत के डॉक्टरों ने भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर की स्वदेशी तकनीक का उपयोग कर ईराक के मरीज की आंख का इलाज क‍िया है. डॉक्‍टरों ने न केवल उसकी आंख से मटर जैसा ट्यूमर हटाया बल्‍क‍ि उसकी आंखों की रोशनी भी बचा ली. आइए व‍िस्‍तार से जानते हैं पूरी खबर..

Zoom

मैक्‍स साकेत के डॉक्‍टरों ने ईराकी मरीज की आंख से कैंसर न‍िकाला है और उसकी रोशनी भी बचा ली है. सांकेत‍िक तस्‍वीर.

Eye cancer Treatment news: भारतीय डॉक्टर और भारत में तैयार स्वदेशी चीजें सबसे बेहतर हैं, ये मैक्स साकेत के डॉक्टरों ने साबित कर दिया है. यहां के डॉक्टरों ने ईराक से आए एक मरीज की आंख से न केवल दुर्लभ ट्यूमर को बाहर निकाला है, बल्कि उसकी दोनों आंखों की रोशनी भी जैसी की तैसी बची हुई है. यह कुशल भारतीय हेल्थकेयर का एक नायाब उदाहरण है कि आंख में से कैंसर को हटाने के बावजूद भी आंखों की रोशनी को नुकसान नहीं पहुंचा.

बता दें कि ईराक के रहने वाले एक 41 साल के मरीज को पिछले छह महीने से दायीं आंख से दिखने में कुछ परेशानी होने लगी थी. पहले इसे उन्होंने आंख की सामान्य समस्या समझा लेकिन धीरे-धीरे परेशानी बढ़ने लगी तो वे एक्सपर्ट मेडिकल केयर के लिए भारत आ गए. यहां मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत में विस्तार से की गई जांच में पता चला कि उनकी आंख में 9.5 गुणा 13.5 मिमी बड़ा ट्यूमर था. यह लगभग एक छोटे मटर के दाने जितना बड़ा था. यह दरअसल कोरोइडल मेलानोमा था, जो आंखों के कैंसर का एक दुर्लभ और जानलेवा प्रकार है. सबसे बड़ी बात है कि अगर समय पर इलाज नहीं मिलता तो यह पूरी आंख में फैल सकता था.

अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज के इलाज के लिए प्लेक ब्रैकीथेरेपी का प्रयोग करने का फैसला किया और ऑफ्थेल्मोलॉजी की एचओडी और प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. अनीता सेठी के नेतृत्व में ऑफ्थेल्मोलॉजी टीम ने सर्जरी को अंजाम दिया. इसमें रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ. डोडुल मंडल ने भी सहयोग दिया. यह आंखों के इलाज के क्षेत्र में एडवांस्ड रेडिएशन ट्रीटमेंट है, जिसमें रेडियोएक्टिव प्लेक को सीधे ट्यूमर तक पहुंचाया जाता है. इससे डॉक्टरों को आसपास की कोशिकाओं को न्यूनतम नुकसान पहुंचाते हुए कैंसर सेल्स को निशाना बनाने में आसानी हुई जबकि कुछ अन्य थेरेपी में पूरी प्रभावित आंख को निकालने की नौबत आ जाती है.

सबसे खास बात इस इलाज की ये रही कि डॉक्टरों ने इसके लिए देश में विकसित रुथेनियम-106 प्लेक का इस्तेमाल किया, जिसे भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर ने तैयार किया है. इससे आयातित विकल्पों की तुलना में किफायती समाधान मिल गया. फिर रेडिएशन की जरूरी डोज मिलने तक मरीज को अस्पताल में रखा गया और प्लेक को हटा दिया गया. इस थेरेपी की मदद से मरीज का ट्यूमर तो हटा ही उसकी दोनों आंखों की रोशनी भी बनाए रखने में मदद मिली.

इस केस को लेकर डॉ. अनीता सेठी ने कहा, ‘बहुत से मरीजों में डर होता है कि आंख में कैंसर का पता चलने का अर्थ है कि आंखों की रोशनी चली जाएगी. इस मामले में हमारा लक्ष्य था कि मरीज की आंखों की रोशनी बचाए रखते हुए प्रभावी तरीके से ट्यूमर हटाया जाए. सही समय पर जांच हो जाने से हमें उपयुक्त इलाज चुनने और मरीज को गुणवत्तापूर्ण जीवन देने में मदद मिली. यह केस दिखाता है कि कैसे सही समय पर मल्टीडिसिप्लिनरी प्लानिंग से आंख के कैंसर के जटिल मामलों में भी आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है.’

वहीं डॉ. डोडुल मंडल ने कहा, ‘रेडियोथेरेपी आज के समय में सभी के लिए सटीक और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट देने का माध्यम बन गई है. प्लेक ब्रैकीथेरेपी में रेडिएशन सोर्स को सीधे ट्यूमर के पास लगा दिया जाता है, जिससे आंख के स्वस्थ हिस्सों तक बहुत कम रेडिएशन पहुंचता है और अनावश्यक नुकसान का खतरा कम होता है.’

इस केस ने दिखाया है कि कैसे सटीक और मल्टीडिसिप्लिनरी केयर से आंख के कैंसर के जटिल मामलों में भी शानदार नतीजे मिल सकते हैं. बता दें कि भारत में कुछ चुनिंदा अस्पताल ही यह इलाज देते हैं. एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तक पहुंच आसान होने से इस तरह के एप्रोच की मदद से भारत में आंखों के कैंसर के इलाज भी हो जाता है और रोशनी भी बनी रहती है.

About the Author

authorimg

प्रिया गौतमSenior Correspondent

प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
ग्वालियर में न्यूनतम पारा 4 डिग्री लुढ़का:अगले दो हफ्तों तक तेज गर्मी की संभावना कम, दिन का तापमान भी 1.7 डिग्री नीचे आया

May 1, 2026/
10:29 am

ग्वालियर में गुरुवार शाम अचानक मौसम बदलने से शहरवासियों को गर्मी से राहत मिली है। तेज आंधी, बारिश और कुछ...

KPIT Co-Founder Ravi Pandit Passes Away

May 8, 2026/
1:14 pm

पुणे27 मिनट पहले कॉपी लिंक टेक कंपनी केपीआईटी (KPIT) ग्रुप के चेयरमैन और को-फाउंडर रवि पंडित का 72 साल की...

तस्वीर का विवरण

May 1, 2026/
6:47 pm

आवश्यक सामग्री: 250 ग्राम परवल, ½ कप चना दाल, 1 प्याज, 1 टमाटर, 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, 1-2 हरी...

'हमें गठबंधन की जरूरत नहीं...', विपक्षी ने खारिज किया कांग्रेस-सी का प्रस्ताव, 4 मई को आएंगे बंगाल के नतीजे

April 30, 2026/
11:14 pm

पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती खत्म हो गई है. 4 मई को नतीजे आएंगे। इस बार बंगाल में कई...

वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 30% तक कटौती, नई गाड़ी खरीदने पर भी रोक

March 15, 2026/
11:28 am

पाकिस्तान में बढ़ते फ्यूल संकट के बीच सरकार ने खर्च कम करने के लिए कई बड़े फैसले किए हैं। प्रधानमंत्री...

राजनीति

मैक्स साकेत में डॉक्टरों ने ईराकी मरीज की आंख से कैंसर हटाया

authorimg

Last Updated:

मैक्स साकेत के डॉक्टरों ने भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर की स्वदेशी तकनीक का उपयोग कर ईराक के मरीज की आंख का इलाज क‍िया है. डॉक्‍टरों ने न केवल उसकी आंख से मटर जैसा ट्यूमर हटाया बल्‍क‍ि उसकी आंखों की रोशनी भी बचा ली. आइए व‍िस्‍तार से जानते हैं पूरी खबर..

Zoom

मैक्‍स साकेत के डॉक्‍टरों ने ईराकी मरीज की आंख से कैंसर न‍िकाला है और उसकी रोशनी भी बचा ली है. सांकेत‍िक तस्‍वीर.

Eye cancer Treatment news: भारतीय डॉक्टर और भारत में तैयार स्वदेशी चीजें सबसे बेहतर हैं, ये मैक्स साकेत के डॉक्टरों ने साबित कर दिया है. यहां के डॉक्टरों ने ईराक से आए एक मरीज की आंख से न केवल दुर्लभ ट्यूमर को बाहर निकाला है, बल्कि उसकी दोनों आंखों की रोशनी भी जैसी की तैसी बची हुई है. यह कुशल भारतीय हेल्थकेयर का एक नायाब उदाहरण है कि आंख में से कैंसर को हटाने के बावजूद भी आंखों की रोशनी को नुकसान नहीं पहुंचा.

बता दें कि ईराक के रहने वाले एक 41 साल के मरीज को पिछले छह महीने से दायीं आंख से दिखने में कुछ परेशानी होने लगी थी. पहले इसे उन्होंने आंख की सामान्य समस्या समझा लेकिन धीरे-धीरे परेशानी बढ़ने लगी तो वे एक्सपर्ट मेडिकल केयर के लिए भारत आ गए. यहां मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत में विस्तार से की गई जांच में पता चला कि उनकी आंख में 9.5 गुणा 13.5 मिमी बड़ा ट्यूमर था. यह लगभग एक छोटे मटर के दाने जितना बड़ा था. यह दरअसल कोरोइडल मेलानोमा था, जो आंखों के कैंसर का एक दुर्लभ और जानलेवा प्रकार है. सबसे बड़ी बात है कि अगर समय पर इलाज नहीं मिलता तो यह पूरी आंख में फैल सकता था.

अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज के इलाज के लिए प्लेक ब्रैकीथेरेपी का प्रयोग करने का फैसला किया और ऑफ्थेल्मोलॉजी की एचओडी और प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. अनीता सेठी के नेतृत्व में ऑफ्थेल्मोलॉजी टीम ने सर्जरी को अंजाम दिया. इसमें रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ. डोडुल मंडल ने भी सहयोग दिया. यह आंखों के इलाज के क्षेत्र में एडवांस्ड रेडिएशन ट्रीटमेंट है, जिसमें रेडियोएक्टिव प्लेक को सीधे ट्यूमर तक पहुंचाया जाता है. इससे डॉक्टरों को आसपास की कोशिकाओं को न्यूनतम नुकसान पहुंचाते हुए कैंसर सेल्स को निशाना बनाने में आसानी हुई जबकि कुछ अन्य थेरेपी में पूरी प्रभावित आंख को निकालने की नौबत आ जाती है.

सबसे खास बात इस इलाज की ये रही कि डॉक्टरों ने इसके लिए देश में विकसित रुथेनियम-106 प्लेक का इस्तेमाल किया, जिसे भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर ने तैयार किया है. इससे आयातित विकल्पों की तुलना में किफायती समाधान मिल गया. फिर रेडिएशन की जरूरी डोज मिलने तक मरीज को अस्पताल में रखा गया और प्लेक को हटा दिया गया. इस थेरेपी की मदद से मरीज का ट्यूमर तो हटा ही उसकी दोनों आंखों की रोशनी भी बनाए रखने में मदद मिली.

इस केस को लेकर डॉ. अनीता सेठी ने कहा, ‘बहुत से मरीजों में डर होता है कि आंख में कैंसर का पता चलने का अर्थ है कि आंखों की रोशनी चली जाएगी. इस मामले में हमारा लक्ष्य था कि मरीज की आंखों की रोशनी बचाए रखते हुए प्रभावी तरीके से ट्यूमर हटाया जाए. सही समय पर जांच हो जाने से हमें उपयुक्त इलाज चुनने और मरीज को गुणवत्तापूर्ण जीवन देने में मदद मिली. यह केस दिखाता है कि कैसे सही समय पर मल्टीडिसिप्लिनरी प्लानिंग से आंख के कैंसर के जटिल मामलों में भी आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है.’

वहीं डॉ. डोडुल मंडल ने कहा, ‘रेडियोथेरेपी आज के समय में सभी के लिए सटीक और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट देने का माध्यम बन गई है. प्लेक ब्रैकीथेरेपी में रेडिएशन सोर्स को सीधे ट्यूमर के पास लगा दिया जाता है, जिससे आंख के स्वस्थ हिस्सों तक बहुत कम रेडिएशन पहुंचता है और अनावश्यक नुकसान का खतरा कम होता है.’

इस केस ने दिखाया है कि कैसे सटीक और मल्टीडिसिप्लिनरी केयर से आंख के कैंसर के जटिल मामलों में भी शानदार नतीजे मिल सकते हैं. बता दें कि भारत में कुछ चुनिंदा अस्पताल ही यह इलाज देते हैं. एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तक पहुंच आसान होने से इस तरह के एप्रोच की मदद से भारत में आंखों के कैंसर के इलाज भी हो जाता है और रोशनी भी बनी रहती है.

About the Author

authorimg

प्रिया गौतमSenior Correspondent

प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.