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गर्मियों में फ्रिज का ठंडा पानी पीने से सेहत पर असर पड़ सकता है, ऐसे में मिट्टी के घड़े का पानी एक बेहतर और प्राकृतिक विकल्प है. बहराइच के विक्रम, पारंपरिक तरीके से घड़े बनाकर लोगों को ठंडा और हेल्दी पानी उपलब्ध करा रहे हैं जिसकी कीमत भी काफी कम होती है.
बहराइच: गर्मियों का मौसम आते ही लोगों को थोड़ी-थोड़ी देर पर प्यास लगने लगती है. लोग धूप से आने के बाद अक्सर फ्रिज का ठंडा पानी पीकर बीमार हो जाते हैं और काफी हद तक फ्रिज का पानी नुकसान भी करता है. इसके जगह आप मिट्टी के घड़े में पानी पी सकते हैं जिनको बहराइच जिले के रहने वाले विक्रम पिछले कई सालों से बना रहे हैं. आइए जानिए कैसे होता है तैयार और क्या होती है इसकी खासियत..
घण्टों तक रहता है पानी नेचुरल ठंडा
मिट्टी के घड़े की बात करें तो यह घड़ा बेहद खास पीली मिट्टी और बालुई मिट्टी को मिलाकर बनाया जाता है, जिसको बनाने में लगभग 4 से 5 दिन का समय लगता है जिसमें पानी रखने के बाद पानी की तासीर ठंडी हो जाती है और पानी पीने पर भी ठंडा लगता है और सबसे खास बात ये होती है कि इसमें रखे हुए पानी को पीने से प्यास भी बुझती है.
हर साल गर्मी आने से पहले कर लेते हैं तैयार!
बहराइच जिले के नानपारा क्षेत्र के रजवापुर गांव में रहने वाले विक्रम कुमार जो अपने परिवार के साथ मिलकर मिट्टी के घड़े के साथ मिट्टी की विभिन्न सामग्री बनाने का काम करते हैं. उन्होंने लोकल 18 की टीम से खास बातचीत में बताया है कि गर्मियों में मिट्टी के घड़े की बेहद खास मांग रहती है और बड़े-बड़े घर के लोग जब इस रास्ते से गुजरते हैं, तो लोग यहां से मिट्टी का घड़ा खरीद कर लें जाते हैं.
क्या होती है घड़े की कीमत
विक्रम का घर रजवापुर में हाईवे के किनारे ही बना हुआ, इनका पूरा परिवार खुद इस मिट्टी के घड़े में ही गर्मियों में पानी पीता है, जिनकी कीमत की बात करें तो ₹150 से लगाकर कर ₹500 तक होता है, जो आकार और बनावट पर निर्भर करता है. आजकल मार्केट में मिट्टी के नाम पर लोग विशेष प्रकार का पोलिस क्यों हुआ मटका भी पैसे कमाने के चक्कर में भेज देते हैं जिसमें पानी पीने से काफी नुकसान होता है. जब भी मिट्टी का घड़ा खरीदे तो खासकर इनको बनाने वाले कुम्हार से ही खरीदें.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें









































