Wednesday, 22 Jul 2026 | 05:32 AM

Trending :

EXCLUSIVE

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

डेविड धवन की फिल्मों को देखने जाते वक्त दर्शक लॉजिक नहीं, हंसी ढूंढते हैं। गलतफहमियां, रिश्तों का गड़बड़झाला, भागदौड़ और ढेर सारी अफरा तफरी उनकी फिल्मों की पहचान रही है। है जवानी तो इश्क होना है भी उसी स्कूल की फिल्म है। यहां कहानी से ज्यादा जोर उन हालातों पर है जो धीरे धीरे इतने बेतुके हो जाते हैं कि दर्शक या तो हंसता है या फिर सिर पकड़कर बैठ जाता है। फिल्म में मनोरंजन के कुछ अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन उन्हें पाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। फिल्म की कहानी जस एक खुशमिजाज लेकिन बेहद जोशीला इंसान है। उसकी पत्नी बानी उससे प्यार तो करती है, लेकिन उसकी जरूरतों और सोच के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती। जस पिता बनना चाहता है, जबकि बानी उसकी इस जल्दबाजी और लगातार बढ़ते दबाव से परेशान हो चुकी है। बात इतनी बिगड़ जाती है कि वह जस से तलाक लेने का फैसला कर लेती है। टूटे हुए रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश में जस की जिंदगी में प्रीत की एंट्री होती है। दोनों करीब आते हैं और जस को लगता है कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है, लेकिन डेविड धवन की फिल्म में चीजें इतनी आसान कहां होती हैं। असली गड़बड़ तब शुरू होती है जब बानी और प्रीत दोनों गर्भवती हो जाती हैं और दोनों बच्चों का पिता जस निकलता है। इसके बाद फिल्म पूरी तरह से गलतफहमियों, झूठ, छिपाने और कई मजेदार हालात के साथ आगे बढ़ती है। कहानी दिलचस्प होने के बजाय ज्यादा कन्फ्यूजिंग है और यही इसका सबसे बड़ा मनोरंजन और सबसे बड़ी कमजोरी दोनों है। फिल्म में एक्टिंग वरुण धवन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्हें देखकर कई बार उनके पुराने कॉमिक अवतार की याद आती है। भागते, छिपते, झूठ बोलते और फिर उसी झूठ में बुरी तरह फंसते किरदार को उन्होंने पूरी एनर्जी के साथ निभाया है। जब भी फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ती है, वरुण अपनी मौजूदगी से उसे संभालने की कोशिश करते हैं। मृणाल ठाकुर के हिस्से ज्यादा कुछ नहीं आता, लेकिन वह अपने रोल को गरिमा के साथ निभाती हैं। बानी के रूप में वह कई बार कहानी की सबसे समझदार इंसान लगती हैं। पूजा हेगड़े का किरदार कहानी में बड़ा मोड़ लेकर आता है। वह स्क्रीन पर शानदार लगती हैं और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री भी ठीक बैठती है। हालांकि स्क्रीनप्ले उन्हें सिर्फ कहानी की उलझन बढ़ाने तक सीमित कर देती है। मनीष पॉल जहां भी नजर आते हैं, मुस्कुराने की वजह दे जाते हैं। अफसोस बस इतना है कि उन्हें ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला। जिमी शेरगिल अपने सीरियस अंदाज में प्रभाव छोड़ते हैं और मौनी रॉय का छोटा सा रोल कुछ अच्छे कॉमिक पल पैदा करता है। फिल्म का डायरेक्शन और टेक्निकल पहलू डेविड धवन अपने पुराने रंग में नजर आते हैं। उन्हें पता है कि दर्शक यहां गंभीर सिनेमा देखने नहीं आए हैं। इसलिए वह शुरुआत से ही फिल्म को पूरी तरह मनोरंजन के मोड में रखते हैं। समस्या यह है कि फिल्म का पहला हिस्सा बेहद धीमा है। कई मजाक असर नहीं छोड़ते और कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे उन्हें सिर्फ समय बढ़ाने के लिए रखा गया हो। इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी रफ्तार पकड़ती है और कुछ स्थितियां सचमुच हंसाने में सफल रहती हैं। फरहाद सामजी के संवादों में कुछ वन लाइनर अच्छे हैं और कई जगह थिएटर में हंसी भी निकलती है। लेकिन टॉयलेट ह्यूमर, शरीर का मजाक उड़ाने वाले चुटकुले और कुछ पुराने जमाने के हास्य दृश्य आज के दौर में बासी महसूस होते हैं। तकनीकी तौर पर फिल्म रंगीन और भव्य दिखती है। लंदन की लोकेशन, चमकदार फ्रेम और बड़े सेट स्क्रीन पर अच्छे लगते हैं। लेकिन संपादन काफी ढीला है। ढाई घंटे से ज्यादा लंबी यह फिल्म कई जगह अपनी ही रफ्तार की दुश्मन बन जाती है। फिल्म में म्यूजिक म्यूजिक फिल्म की कमजोर कड़ियों में से एक है। कोई नया गाना ऐसा नहीं जो लंबे समय तक याद रहे। चुनरी चुनरी सबसे ज्यादा असर छोड़ता है, लेकिन उसकी वजह नया म्यूजिक नहीं बल्कि पुरानी यादें हैं। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की एनर्जी बनाए रखने की कोशिश करता है, लेकिन चमत्कार नहीं कर पाता। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट है जवानी तो इश्क होना है एक ऐसी फिल्म है जो आपसे ज्यादा सोचने की उम्मीद नहीं करती। यह पूरी तरह अफरा तफरी, गलतफहमियों और वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग पर टिकी हुई है। पहला हिस्सा कमजोर है, फिल्म जरूरत से ज्यादा लंबी है और कई मजाक पुराने लगते हैं। लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ अच्छे कॉमिक पल और वरुण की एनर्जी फिल्म को पूरी तरह बिखरने नहीं देती। अगर आप डेविड धवन स्टाइल की हल्की फुल्की कॉमेडी के फैन हैं तो फिल्म आपको कुछ जगह हंसा सकती है, लेकिन अगर आप मजबूत कहानी या नई सोच की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो शायद निराश लौटें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
RCB vs MI IPL 2026

April 12, 2026/
4:43 am

स्पोर्ट्स डेस्क27 मिनट पहले कॉपी लिंक इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन में आज डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु...

Kiara Advani Denies Toxic Bold Scenes Rumors

May 5, 2026/
7:41 pm

2 घंटे पहले कॉपी लिंक यश की आने वाली फिल्म ‘टॉक्सिक’ की लीड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी ने सोशल मीडिया पर...

TCS Nashik Sexual Harassment, POSH Non-Compliance

May 11, 2026/
8:48 pm

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपी।...

ट्रेन से टुकड़ों में कटा किसान…मौत से पहले का VIDEO:बोला- पूर्व विधायक भार्गव हत्या कराना चाहते थे, शिवराज मामा को गोली मारने रिवॉल्वर दी

April 28, 2026/
12:34 am

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में सोमवार शाम 4 बजे किसान ने ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। रेलवे...

authorimg

May 22, 2026/
5:19 pm

सिजोफ्रेनिया शब्द इन दिनों आपने टीवी, इंटरनेट और अखबार में खूब देखा, सूना होगा. ये एक गंभीर मानसिक बीमारी है....

AP Intermediate 1st, 2nd Year Results 2026 Live: Manabadi AP Inter Supplementary/Improvement Results Link, Mark Memos Download (Getty Images)

June 18, 2026/
11:54 am

आखरी अपडेट:18 जून, 2026, 11:54 IST संवैधानिक संशोधनों के लिए आवश्यक संख्या तक पहुंचने के लिए धीमे और रणनीतिक दृष्टिकोण...

सीनियर एक्ट्रेस प्रवीना देशपांडे का निधन:परिवार ने इंस्टाग्राम पर दी जानकारी, सलमान खान की फिल्म रेडी में नजर आई थीं

February 18, 2026/
10:30 am

सीनियर एक्ट्रेस प्रवीना देशपांडे का मंगलवार को निधन हो गया। इस बात की जानकारी एक्ट्रेस के परिवार ने उनके आधिकारिक...

नरसिंहपुर जिला अधिवक्ता संघ की कार्यकारिणी भंग:कार्यकाल खत्म होने के 4 माह बाद निर्णय; 11 सदस्यीय टीम कराएगी चुनाव

April 9, 2026/
11:44 pm

नरसिंहपुर जिला अधिवक्ता संघ की सामान्य सभा की बैठक में गुरुवार शाम को वर्तमान कार्यकारिणी को भंग करने का बड़ा...

Satwik-Chirag Lose Thailand Open Final to Indonesia Pair

May 17, 2026/
1:57 pm

बैंकॉक9 मिनट पहले कॉपी लिंक सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की भारतीय जोड़ी को थाईलैंड ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट...

राजनीति

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

मूवी रिव्यू – ‘है जवानी तो इश्क होना है’:वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग संभालती फिल्म, कमजोर कहानी और लंबाई बनी बड़ी चुनौती

डेविड धवन की फिल्मों को देखने जाते वक्त दर्शक लॉजिक नहीं, हंसी ढूंढते हैं। गलतफहमियां, रिश्तों का गड़बड़झाला, भागदौड़ और ढेर सारी अफरा तफरी उनकी फिल्मों की पहचान रही है। है जवानी तो इश्क होना है भी उसी स्कूल की फिल्म है। यहां कहानी से ज्यादा जोर उन हालातों पर है जो धीरे धीरे इतने बेतुके हो जाते हैं कि दर्शक या तो हंसता है या फिर सिर पकड़कर बैठ जाता है। फिल्म में मनोरंजन के कुछ अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन उन्हें पाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। फिल्म की कहानी जस एक खुशमिजाज लेकिन बेहद जोशीला इंसान है। उसकी पत्नी बानी उससे प्यार तो करती है, लेकिन उसकी जरूरतों और सोच के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती। जस पिता बनना चाहता है, जबकि बानी उसकी इस जल्दबाजी और लगातार बढ़ते दबाव से परेशान हो चुकी है। बात इतनी बिगड़ जाती है कि वह जस से तलाक लेने का फैसला कर लेती है। टूटे हुए रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश में जस की जिंदगी में प्रीत की एंट्री होती है। दोनों करीब आते हैं और जस को लगता है कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है, लेकिन डेविड धवन की फिल्म में चीजें इतनी आसान कहां होती हैं। असली गड़बड़ तब शुरू होती है जब बानी और प्रीत दोनों गर्भवती हो जाती हैं और दोनों बच्चों का पिता जस निकलता है। इसके बाद फिल्म पूरी तरह से गलतफहमियों, झूठ, छिपाने और कई मजेदार हालात के साथ आगे बढ़ती है। कहानी दिलचस्प होने के बजाय ज्यादा कन्फ्यूजिंग है और यही इसका सबसे बड़ा मनोरंजन और सबसे बड़ी कमजोरी दोनों है। फिल्म में एक्टिंग वरुण धवन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्हें देखकर कई बार उनके पुराने कॉमिक अवतार की याद आती है। भागते, छिपते, झूठ बोलते और फिर उसी झूठ में बुरी तरह फंसते किरदार को उन्होंने पूरी एनर्जी के साथ निभाया है। जब भी फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ती है, वरुण अपनी मौजूदगी से उसे संभालने की कोशिश करते हैं। मृणाल ठाकुर के हिस्से ज्यादा कुछ नहीं आता, लेकिन वह अपने रोल को गरिमा के साथ निभाती हैं। बानी के रूप में वह कई बार कहानी की सबसे समझदार इंसान लगती हैं। पूजा हेगड़े का किरदार कहानी में बड़ा मोड़ लेकर आता है। वह स्क्रीन पर शानदार लगती हैं और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री भी ठीक बैठती है। हालांकि स्क्रीनप्ले उन्हें सिर्फ कहानी की उलझन बढ़ाने तक सीमित कर देती है। मनीष पॉल जहां भी नजर आते हैं, मुस्कुराने की वजह दे जाते हैं। अफसोस बस इतना है कि उन्हें ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला। जिमी शेरगिल अपने सीरियस अंदाज में प्रभाव छोड़ते हैं और मौनी रॉय का छोटा सा रोल कुछ अच्छे कॉमिक पल पैदा करता है। फिल्म का डायरेक्शन और टेक्निकल पहलू डेविड धवन अपने पुराने रंग में नजर आते हैं। उन्हें पता है कि दर्शक यहां गंभीर सिनेमा देखने नहीं आए हैं। इसलिए वह शुरुआत से ही फिल्म को पूरी तरह मनोरंजन के मोड में रखते हैं। समस्या यह है कि फिल्म का पहला हिस्सा बेहद धीमा है। कई मजाक असर नहीं छोड़ते और कई दृश्य ऐसे लगते हैं जैसे उन्हें सिर्फ समय बढ़ाने के लिए रखा गया हो। इंटरवल के बाद कहानी थोड़ी रफ्तार पकड़ती है और कुछ स्थितियां सचमुच हंसाने में सफल रहती हैं। फरहाद सामजी के संवादों में कुछ वन लाइनर अच्छे हैं और कई जगह थिएटर में हंसी भी निकलती है। लेकिन टॉयलेट ह्यूमर, शरीर का मजाक उड़ाने वाले चुटकुले और कुछ पुराने जमाने के हास्य दृश्य आज के दौर में बासी महसूस होते हैं। तकनीकी तौर पर फिल्म रंगीन और भव्य दिखती है। लंदन की लोकेशन, चमकदार फ्रेम और बड़े सेट स्क्रीन पर अच्छे लगते हैं। लेकिन संपादन काफी ढीला है। ढाई घंटे से ज्यादा लंबी यह फिल्म कई जगह अपनी ही रफ्तार की दुश्मन बन जाती है। फिल्म में म्यूजिक म्यूजिक फिल्म की कमजोर कड़ियों में से एक है। कोई नया गाना ऐसा नहीं जो लंबे समय तक याद रहे। चुनरी चुनरी सबसे ज्यादा असर छोड़ता है, लेकिन उसकी वजह नया म्यूजिक नहीं बल्कि पुरानी यादें हैं। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की एनर्जी बनाए रखने की कोशिश करता है, लेकिन चमत्कार नहीं कर पाता। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट है जवानी तो इश्क होना है एक ऐसी फिल्म है जो आपसे ज्यादा सोचने की उम्मीद नहीं करती। यह पूरी तरह अफरा तफरी, गलतफहमियों और वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग पर टिकी हुई है। पहला हिस्सा कमजोर है, फिल्म जरूरत से ज्यादा लंबी है और कई मजाक पुराने लगते हैं। लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ अच्छे कॉमिक पल और वरुण की एनर्जी फिल्म को पूरी तरह बिखरने नहीं देती। अगर आप डेविड धवन स्टाइल की हल्की फुल्की कॉमेडी के फैन हैं तो फिल्म आपको कुछ जगह हंसा सकती है, लेकिन अगर आप मजबूत कहानी या नई सोच की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो शायद निराश लौटें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.