Tuesday, 07 Apr 2026 | 09:59 PM

Trending :

EXCLUSIVE

मोबाइल-लैपटॉप की ब्लू लाइट बिगाड़ रही आंखों की सेहत, रात में ज्यादा इस्तेमाल कर रहें, तो जान लें खतरा

authorimg

Last Updated:

Ghaziabad News: आज के युवा मोबाइल और लेपटॉप के दीवाने हो गए हैं. इसके साथ ही अब ज्यादातर काम डिजिटल हो चुका है. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है.

गाजियाबाद: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही पूरी हो रही है. लेकिन यही सुविधा अब धीरे-धीरे हमारी सेहत खासकर आंखों के लिए खतरा बनती जा रही है. रात के समय लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत लोगों में तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आंखों और नींद दोनों पर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है.

डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों पर दबाव डालती है, जिससे जलन, सूखापन और धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. इस स्थिति को डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है. खासकर रात में जब रोशनी कम होती है, तब स्क्रीन का असर और ज्यादा बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई लोग देर रात तक फोन इस्तेमाल करने के बाद भी ठीक से सो नहीं पाते और सुबह उठने पर आंखों में भारीपन महसूस करते हैं.

आंखों की मांसपेशियों पर प्रभाव
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज ने बताया कि लगातार मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल आंखों की मांसपेशियों को जल्दी थका देता है. कई लोग रात में स्क्रीन देखने के तुरंत बाद सोने की कोशिश करते हैं, लेकिन ब्लू लाइट के प्रभाव के कारण नींद आने में परेशानी होती है. इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर पर भी इसका असर पड़ता है.

ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखें
उन्होंने बताया कि ब्लू लाइट के कारण आंखों में ड्राइनेस, जलन और इरिटेशन की समस्या आम हो गई है. अगर रात में स्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी हो, तो ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखें. इसके अलावा ब्लू कट लेंस वाले चश्मे का इस्तेमाल भी आंखों को काफी हद तक सुरक्षित रख सकता है. हर 20 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लेना ब्राइटनेस को कम रखना और आंखों को आराम देना बेहद जरूरी है. कोशिश करें कि रात 8 बजे के बाद स्क्रीन टाइम कम कर दें और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दें.

सावधानी बरतना जरूरी
डॉक्टर का यह भी कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम कम उम्र में ही चश्मा लगने की वजह बन सकता है. जो समस्या आमतौर पर 40 साल की उम्र में होती थी, वह अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है. इसलिए समय रहते सावधानी जरूरी है. साथ ही आंखों की सेहत के लिए सही खानपान भी बेहद जरूरी है. गाजर का जूस, अंडे, ताजे फल और हरी सब्जियां आंखों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं. अगर आंखों में लगातार जलन, पानी आना या धुंधलापन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और लापरवाही से बचना चाहिए.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
असली बनाम नकली मावा असली नकली मावा खोया खरीद के टिप्स जानिए मावा खरीदने के टिप्स

February 25, 2026/
11:54 am

असली या नकली मावा | छवि: सोशल मीडिया मावा ख़रीदने के टिप्स: त्योहारों का सीजन हो या शादी-ब्याह का मौका,...

सलमान के गाने पर थिरकीं ऐश्वर्या राय:नीता अंबानी और अभिषेक बच्चन भी साथ नजर आए; सलाम-ए-इश्क' गाने पर डांस

March 9, 2026/
11:10 am

ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन हाल ही में एक शादी समारोह में शामिल हुए। मुदित अडाणी और अनन्या की इस...

LPG Gas Cylinder

March 10, 2026/
12:37 pm

आखरी अपडेट:मार्च 10, 2026, 12:37 IST भाजपा ने नियमित दौरे के शिवकुमार के दावों को खारिज कर दिया है और...

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

मोबाइल-लैपटॉप की ब्लू लाइट बिगाड़ रही आंखों की सेहत, रात में ज्यादा इस्तेमाल कर रहें, तो जान लें खतरा

authorimg

Last Updated:

Ghaziabad News: आज के युवा मोबाइल और लेपटॉप के दीवाने हो गए हैं. इसके साथ ही अब ज्यादातर काम डिजिटल हो चुका है. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है.

गाजियाबाद: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही पूरी हो रही है. लेकिन यही सुविधा अब धीरे-धीरे हमारी सेहत खासकर आंखों के लिए खतरा बनती जा रही है. रात के समय लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत लोगों में तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आंखों और नींद दोनों पर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है.

डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों पर दबाव डालती है, जिससे जलन, सूखापन और धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. इस स्थिति को डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है. खासकर रात में जब रोशनी कम होती है, तब स्क्रीन का असर और ज्यादा बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई लोग देर रात तक फोन इस्तेमाल करने के बाद भी ठीक से सो नहीं पाते और सुबह उठने पर आंखों में भारीपन महसूस करते हैं.

आंखों की मांसपेशियों पर प्रभाव
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज ने बताया कि लगातार मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल आंखों की मांसपेशियों को जल्दी थका देता है. कई लोग रात में स्क्रीन देखने के तुरंत बाद सोने की कोशिश करते हैं, लेकिन ब्लू लाइट के प्रभाव के कारण नींद आने में परेशानी होती है. इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर पर भी इसका असर पड़ता है.

ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखें
उन्होंने बताया कि ब्लू लाइट के कारण आंखों में ड्राइनेस, जलन और इरिटेशन की समस्या आम हो गई है. अगर रात में स्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी हो, तो ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखें. इसके अलावा ब्लू कट लेंस वाले चश्मे का इस्तेमाल भी आंखों को काफी हद तक सुरक्षित रख सकता है. हर 20 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लेना ब्राइटनेस को कम रखना और आंखों को आराम देना बेहद जरूरी है. कोशिश करें कि रात 8 बजे के बाद स्क्रीन टाइम कम कर दें और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दें.

सावधानी बरतना जरूरी
डॉक्टर का यह भी कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम कम उम्र में ही चश्मा लगने की वजह बन सकता है. जो समस्या आमतौर पर 40 साल की उम्र में होती थी, वह अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है. इसलिए समय रहते सावधानी जरूरी है. साथ ही आंखों की सेहत के लिए सही खानपान भी बेहद जरूरी है. गाजर का जूस, अंडे, ताजे फल और हरी सब्जियां आंखों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं. अगर आंखों में लगातार जलन, पानी आना या धुंधलापन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और लापरवाही से बचना चाहिए.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.